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FTAs से भारतीय कपास की मांग बढ़ने की उम्मीद

FTA से भारतीय टेक्सटाइल और कपास की मांग बढ़ने की उम्मीद, CAI ने बताई प्राथमिकताएंनई दिल्ली: कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) को उम्मीद है कि भारत के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से भारतीय टेक्सटाइल और कपास उत्पादों के लिए नए बाजार खुल सकते हैं। इससे घरेलू कपास और टेक्सटाइल उद्योग के लिए अतिरिक्त मांग के अवसर पैदा हो सकते हैं।CAI की 104वीं वार्षिक आम बैठक को संबोधित करते हुए अध्यक्ष विनय एन. कोटक ने कहा कि मौजूदा कपास सीजन किसानों, जिनर्स, व्यापारियों और स्पिनर्स सहित वैल्यू चेन से जुड़े विभिन्न हितधारकों के लिए काफी हद तक सकारात्मक रहा है। उन्होंने कहा कि नए व्यापार समझौते भारतीय कपास और टेक्सटाइल उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहुंच बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।भारत वैश्विक कपास अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और दुनिया के प्रमुख कपास उत्पादक व उपभोक्ता देशों में शामिल है। कोटक के अनुसार, भारतीय कपास की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए उत्पादकता, गुणवत्ता, कंटैमिनेशन नियंत्रण, ट्रेसेबिलिटी और सस्टेनेबिलिटी में सुधार जरूरी है। इसके साथ ही प्राइस डिस्कवरी और रिस्क मैनेजमेंट को भी मजबूत करने की जरूरत है।CAI ने सरकार और अन्य हितधारकों के साथ नीतिगत मुद्दों पर काम करने के लिए ‘CAI रोडमैप’ तैयार किया है। इसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), किसानों से कपास खरीद पर रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (RCM) और कपास वैल्यू चेन से जुड़े अन्य मुद्दे शामिल हैं। संगठन ने MSP के विकल्प या पूरक के रूप में ‘भावांतर’ जैसे तंत्र पर विचार करने की भी वकालत की है।CAI ब्राजील की ABRAPA के साथ उत्पादकता, सस्टेनेबिलिटी, ट्रेसेबिलिटी और अंतरराष्ट्रीय कपास व्यापार के क्षेत्र में सहयोग तथा जानकारी साझा करने के लिए MOU पर काम कर रहा है। वहीं, प्रस्तावित ‘इंडिया कॉटन इंडेक्स’ को भारतीय कपास के लिए भरोसेमंद और प्रतिनिधि बेंचमार्क बनाने पर भी काम जारी है।CAI की प्राथमिकताओं में कपास की उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाना, गुणवत्ता सुधारना, कंटैमिनेशन कम करना तथा वैज्ञानिक और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना शामिल है। संगठन मार्केट इंटेलिजेंस और रिस्क मैनेजमेंट को भी मजबूत करना चाहता है।2026-27 के लिए विनय एन. कोटक को अध्यक्ष और भूपेंद्र सिंह राजपाल को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 13 पैसे की कमजोरी के साथ 95.95 पर खुला।

US डॉलर के मुकाबले रुपया 13 पैसे मजबूत हुआ, ₹95.82 पर बंद हुआ

बुधवार को US डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 13 पैसे मजबूत हुआ और ₹95.82 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।घरेलू करेंसी US डॉलर के मुकाबले ₹95.95 पर खुली और पूरे ट्रेडिंग सेशन के दौरान इसमें उतार-चढ़ाव बना रहा। दिन भर उतार-चढ़ाव के बावजूद, रुपया आखिर में ₹95.82 पर बंद हुआ, जो पिछले खुला  भाव के मुकाबले 13 पैसे की बढ़त दिखाता है।बंद होने के समय, सेंसेक्स 48.78 अंक या 0.07 प्रतिशत गिरकर 72,480.29 पर था, और निफ्टी 95.75 अंक या 0.42 प्रतिशत गिरकर 22,620.45 पर था। लगभग 2051 शेयरों में बढ़त हुई, 2135 शेयरों में गिरावट आई, और 187 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।और पढ़ें :- कस्तूरी कपास की गुणवत्ता पर जोर

कस्तूरी कपास की गुणवत्ता पर जोर

कस्तूरी कॉटन की गुणवत्ता पर जोर, हर गांठ पर ₹500 प्रोत्साहनबड़वानी: भारतीय कपास को बेहतर गुणवत्ता और ब्रांड पहचान दिलाने के लिए जिले में कस्तूरी कॉटन भारत को लेकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है। मंगलवार, 29 सितंबर को अंजड़ कृषि उपज मंडी परिसर में कस्तूरी कॉटन भारत के तहत एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें किसानों को कपास की गुणवत्ता, साफ-सफाई, भंडारण और परिवहन से जुड़ी जानकारी दी गई।कस्तूरी कॉटन भारत कोई नई कपास किस्म या नया बीज नहीं है। यह भारतीय कपास की ब्रांडिंग, प्रमाणन और ट्रेसबिलिटी से जुड़ी पहल है। कार्यशाला में बताया गया कि गुणवत्तायुक्त कपास की प्रत्येक गांठ (बेल) पर ₹500 प्रोत्साहन दिए जाने का प्रावधान है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार कस्तूरी कॉटन भारत का उद्देश्य भारतीय कपास की गुणवत्ता और वैश्विक बाजार में उसकी पहचान मजबूत करना है।CITI-CDRA के प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर नितिन तोमर ने किसानों को सलाह दी कि वे अपने क्षेत्र के लिए उपयुक्त प्रमाणित बीज अधिकृत विक्रेता से ही खरीदें। केवल कम कीमत या पैकेट की तस्वीर देखकर बीज का चयन नहीं करना चाहिए। मिट्टी की जांच, उचित पोषण, जैविक खाद और प्राकृतिक फसल सुरक्षा पर भी ध्यान देने की सलाह दी गई। HDPS तकनीक अपनाने पर भी जोर दिया गया।कपास की चुनाई के दौरान मिट्टी, पत्तियां, प्लास्टिक, कचरा और अन्य बाहरी सामग्री कपास में नहीं मिलनी चाहिए। पैकिंग, भंडारण और परिवहन के दौरान भी सफाई बनाए रखना जरूरी है। इससे कपास की गुणवत्ता को खेत से जिनिंग तक बनाए रखने में मदद मिलती है।अंजड़ की कार्यशाला में रेशे की लंबाई, ट्रैश, नमी, मजबूती, यूनिफॉर्मिटी इंडेक्स और माइक्रोनेयर जैसे गुणवत्ता मानकों की जानकारी दी गई। इन जानकारियों को कार्यशाला में बताए गए गुणवत्ता मानकों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।वहीं, आधिकारिक कस्तूरी कॉटन प्रमाणन व्यवस्था में 28 मिमी या अधिक लंबाई वाली लॉन्ग-स्टेपल कपास और 35 मिमी या अधिक लंबाई वाली ELS कपास शामिल है। प्रत्येक प्रमाणित गांठ की पहचान के लिए QR आधारित प्रमाणन और ब्लॉकचेन तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे कपास की एंड-टू-एंड ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित होती है।और पढ़ें  :- पांच राज्यों में सूखे की स्थिति, रबी में कम पानी वाली फसलें

पांच राज्यों में सूखे की स्थिति, रबी में कम पानी वाली फसलें

5 राज्यों में सूखे की स्थिति, 6.11 लाख हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित; रबी में कम पानी वाली फसलों पर जोरनई दिल्ली: मानसून में कमी और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण देश के कई राज्यों में कृषि क्षेत्र प्रभावित हुआ है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों, तेलंगाना और राजस्थान में सूखे की स्थिति घोषित की गई है। वहीं, प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में भारी बारिश, बाढ़ या सूखे से करीब 6.11 लाख हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ है। नुकसान का विस्तृत वैज्ञानिक आकलन अभी जारी है।मानसून सीजन के अंत तक देश में बारिश सामान्य से करीब 12.3% कम रही। इसके चलते खरीफ फसलों का कुल बुवाई क्षेत्र लगभग 1% घटा। धान का रकबा 16.32 लाख हेक्टेयर कम हुआ, जबकि मक्का, सोयाबीन और कपास के रकबे में भी कमी दर्ज की गई। दूसरी ओर, उड़द, तूर, बाजरा, ज्वार, तिल और सूरजमुखी जैसी फसलों के क्षेत्र में बढ़ोतरी हुई।रबी सीजन में कम पानी वाले क्षेत्रों के लिए कम अवधि में तैयार होने वाली और स्थानीय मिट्टी व मौसम के अनुकूल फसलों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। केंद्र सरकार राज्यों को उपयुक्त बीज और फसल किस्मों की पहचान में सहायता करेगी। कर्नाटक में सूखे की स्थिति का आकलन करने के लिए केंद्रीय टीम 3 अक्टूबर को जाएगी, जबकि महाराष्ट्र ने भी केंद्रीय आकलन टीम की मांग की है।सरकार ने 2026-27 के लिए कुल खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य 373.93 मिलियन टन रखा है। 2025-26 में उत्पादन 376.56 मिलियन टन रहा था। आगामी रबी सीजन के लिए खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य 177.72 मिलियन टन तय किया गया है।रबी सीजन में करीब 380 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की जरूरत का अनुमान है। देश में फिलहाल 163 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक स्टॉक उपलब्ध है। संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाने की घोषणा की है। एक पायलट परियोजना में संतुलित उर्वरक उपयोग से खपत 27% कम और 1,400 करोड़ रुपये से अधिक की बचत बताई गई है।और पढ़ें  :- ग्लोबल भाव गिरने से कपास बाजार दबाव में

ग्लोबल भाव गिरने से कपास बाजार दबाव में

ग्लोबल कीमतों में गिरावट से भारतीय कपास बाजार पर दबाव, आवक बढ़ने की उम्मीदकपास बाजार: वैश्विक कपास कीमतों में गिरावट, घरेलू बाजार में नई फसल की बढ़ती आवक और कमजोर मांग का असर भारतीय कपास बाजार पर दिखाई देने लगा है। कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) की नीलामी में 2025-26 सीजन की कपास की कीमतें पिछले दो दिनों में करीब ₹1,200 प्रति कैंडी घट गई हैं।व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, घरेलू कपास की कीमतें हाल के करीब ₹70,000 प्रति कैंडी के उच्च स्तर से घटकर ₹64,500-65,500 प्रति कैंडी के आसपास आ गई हैं। इस बाजार संदर्भ में एक कैंडी 356 किलोग्राम मानी गई है। कपास बीज की कीमतों में भी गिरावट आई है, जिसका असर कच्चे कपास की कीमतों पर पड़ रहा है।वैश्विक बाजार में भी कमजोरी देखी गई। न्यूयॉर्क के इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज (ICE) पर दिसंबर डिलीवरी वाले कॉटन फ्यूचर्स का भाव करीब 80.13 सेंट प्रति पाउंड था, जबकि अगस्त के अंत में यह करीब 93 सेंट प्रति पाउंड के उच्च स्तर पर पहुंच गया था।खरीदारी धीमी, नई फसल की आवक बढ़ने की उम्मीदरायचूर के सोर्सिंग एजेंट रामानुज दास बूब के अनुसार, कपास बीज की कीमतें ₹300-400 प्रति क्विंटल घटकर करीब ₹4,600-4,700 प्रति क्विंटल रह गई हैं। उन्होंने बताया कि खरीदार फिलहाल धीमी गति से खरीदारी कर रहे हैं। स्पिनिंग मिलों की ओर से गांठों की मांग भी सीमित है और कई मिलों के पास करीब 1 से 1.5 महीने का स्टॉक उपलब्ध है।नई फसल की दैनिक आवक फिलहाल करीब 45,000-50,000 गांठ बताई जा रही है। CotYarn ट्रेड लिंक के आनंद पोपट के अनुसार, अक्टूबर में नई फसल की आवक और बढ़ने की उम्मीद है। इससे घरेलू कपास की कीमतों पर कुछ समय के लिए दबाव बना रह सकता है। हालांकि, स्पिनिंग मिलों के पास पुरानी फसल की सीमित उपलब्धता बाजार को कुछ सहारा दे सकती है।आनंद पोपट के अनुसार, भारतीय कपास बाजार अब आपूर्ति-आधारित दौर में प्रवेश कर रहा है। आगे कीमतों की दिशा नई फसल की आवक, मिलों की खरीद और ड्यूटी-फ्री कपास आयात पर सरकारी नीति जैसे कारकों पर निर्भर कर सकती है।वहीं, राधालक्ष्मी ग्रुप के CMD अतुल एस. गनात्रा ने कपास उत्पादक राज्यों में किसानों से बातचीत और खड़ी फसल के सर्वे के आधार पर अनुमान जताया है कि 2026-27 में कपास उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में करीब 10 प्रतिशत कम रह सकता है। गनात्रा के अनुसार, इस साल जून से सितंबर के दौरान कम बारिश हुई। इससे आगे की तुड़ाई के लिए किसानों के पास पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है और उत्पादन पर असर पड़ सकता है।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 3 पैसे की मजबूती के साथ 95.95 पर खुला।

यार्न महंगा, बुनकरों ने ड्यूटी राहत मांगी

धागे की बढ़ती कीमतों से बुनकर परेशान, छह महीने की ड्यूटी राहत की मांगनई दिल्ली: भारत के बुनाई और टेक्सटाइल उद्योग ने बढ़ती कच्चे माल की लागत और कमजोर मांग के बीच सरकार से पॉलिएस्टर उद्योग में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कच्चे माल पर छह महीने के लिए बेसिक कस्टम्स ड्यूटी (BCD) हटाने की मांग की है। उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार, बढ़ती लागत से डाउनस्ट्रीम निर्माताओं पर दबाव बढ़ रहा है और इससे टेक्सटाइल वैल्यू चेन की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो रही है।सदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के पूर्व अध्यक्ष आशीष गुजराती ने वित्त मंत्रालय को X पर किए गए एक पोस्ट में मोनोएथिलीन ग्लाइकोल (MEG), प्यूरीफाइड टेरेफ्थैलिक एसिड (PTA), पार्शियली ओरिएंटेड यार्न (POY), फुली ड्रॉन यार्न (FDY) और ड्रॉन टेक्सचर्ड यार्न (DTY) पर छह महीने के लिए BCD हटाने का आग्रह किया।इस मांग पर उद्योग जगत से जुड़े अल्पेश कपोपारा ने कहा कि इन सामग्रियों पर अस्थायी ड्यूटी राहत से उत्पादन लागत कम करने और टेक्सटाइल वैल्यू चेन की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। राकेश एम. बरवालिया ने भी धागे की ऊंची कीमतों को लेकर चिंता जताई। वहीं, दर्शन ने लगातार लागत दबाव से रोजगार पर असर पड़ने की आशंका व्यक्त की।इस बीच, घरेलू पॉलिएस्टर बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 26 सितंबर को PTA की कीमत ₹1.10 बढ़कर ₹106.50 प्रति किलोग्राम हो गई। पॉलिएस्टर मेल्ट की कीमत ₹0.95 बढ़कर ₹120.05 प्रति किलोग्राम पहुंच गई। MEG की कीमत ₹83.70 प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही। इसी तारीख को पॉलिएस्टर स्टेपल फाइबर की कीमत में ₹2 प्रति किलोग्राम की वृद्धि हुई। सितंबर की शुरुआत में भी इसमें ₹3 प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई थी।पॉलिएस्टर टेक्सटाइल अपैरल इंडस्ट्री एसोसिएशन (PTAIA) के महासचिव आर.के. विज के अनुसार, PTA और MEG की बढ़ती लागत के कारण डाउनस्ट्रीम निर्माता खरीदारी को लेकर सतर्क हैं। कुछ उत्पादक केवल तत्काल जरूरत के मुताबिक ही माल खरीद रहे हैं।विज ने अगस्त के अंत और सितंबर की शुरुआत में PTA की अस्थायी कमी के लिए जुलाई के मध्य में कस्टम्स ड्यूटी में दी गई छूट हटने के बाद आयात में आई गिरावट को भी जिम्मेदार बताया। उन्होंने प्रतिस्पर्धी कीमतों पर पैराज़ाइलीन की उपलब्धता में दिक्कत और बढ़ते माल ढुलाई खर्च का भी उल्लेख किया, जो उत्पादन और डाउनस्ट्रीम निर्यात पर दबाव डाल रहे हैं।और पढ़ें :- US डॉलर के मुकाबले रुपया 07 पैसे मजबूत होकर ₹95.98 पर बंद हुआ

अमरावती कपास में गुलाबी सुंडी

मॉनसून से पहले बोई कपास में गुलाबी सुंडी का प्रकोप, किसानों की बढ़ी चिंताअमरावती, महाराष्ट्र: अमरावती क्षेत्र में मॉनसून से पहले बोई गई कपास की फसल में पिंक बॉलवर्म यानी गुलाबी सुंडी मिलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। वालनी खुर्द और वालनी बुद्रुक के कुछ खेतों में कपास के बॉल के अंदर गुलाबी सुंडी के लार्वा पाए गए हैं। किसानों को आशंका है कि आने वाले दिनों में इसका असर दूसरे खेतों तक भी पहुंच सकता है।पाथरोट के किसान नरेश सुइगोट ने सिंचाई की सुविधा का उपयोग करते हुए मई के आखिरी सप्ताह में वालनी बुद्रुक में कपास की बुवाई की थी। किसान के अनुसार, उनकी फसल अब तक अच्छी स्थिति में थी और पौधों पर 70 से अधिक बॉल लगे हुए थे। इससे उन्हें अच्छी पैदावार की उम्मीद थी।हालांकि, फसल की जांच के दौरान कुछ कपास के बॉल में छेद दिखाई दिए। बॉल खोलने पर अंदर गुलाबी सुंडी के लार्वा मिले। इसके बाद क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ गई है।क्षेत्र में बारिश की कमी के कारण कपास की फसल पहले से ही पानी की कमी का सामना कर रही है। ऐसे में यदि गुलाबी सुंडी का प्रकोप बढ़ता है, तो इससे कपास की पैदावार प्रभावित हो सकती है।कपास को कैसे नुकसान पहुंचाती है गुलाबी सुंडी?गुलाबी सुंडी कपास के बॉल के अंदर प्रवेश करके बीज और रेशे को नुकसान पहुंचा सकती है। शुरुआती अवस्था में बाहर से इसकी पहचान करना मुश्किल होता है। बाद में संक्रमित बॉल में छेद दिखाई दे सकते हैं।कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, समय से पहले कपास की बुवाई करने से गुलाबी सुंडी का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, इस मामले में प्रकोप का निश्चित कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों की नियमित निगरानी करें। कपास के बॉल में छेद या सुंडी के लक्षण दिखाई देने पर कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञों से समय पर सलाह लें। साथ ही, कपास की बुवाई और बीज खरीद से जुड़े सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।और पढ़ें :- विरुधुनगर कपास किसानों को सब्सिडी

विरुधुनगर कपास किसानों को सब्सिडी

विरुधुनगर में कपास किसानों को मिशन फॉर कॉटन प्रोडक्टिविटी के तहत सब्सिडीविरुधुनगर, तमिलनाडु: कपास किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने और उत्पादन व उत्पादकता बढ़ाने के लिए विरुधुनगर जिले में ‘मिशन फॉर कॉटन प्रोडक्टिविटी’ के तहत विभिन्न गतिविधियों पर सब्सिडी दी जाएगी। योजना में प्रदर्शन प्लॉट, ड्रोन से फसल सुरक्षा रसायनों का छिड़काव और किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण देने का प्रावधान है।जिला कलेक्टर शरण्या एरी ने बताया कि मिशन का उद्देश्य कपास की खेती का रकबा बढ़ाना, फसल की गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार करना तथा किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ना है। वित्त वर्ष 2026-27 में किसानों की आय बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा।योजना के तहत हाई-डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम (HDPS) के प्रदर्शन प्लॉट के लिए किसानों को ₹14,000 की सब्सिडी दी जाएगी। वहीं, पास-पास पौधे लगाने वाले प्रदर्शन प्लॉट के लिए ₹18,500 की सहायता का प्रावधान है। एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल (ELS) कपास की खेती के प्रदर्शन प्लॉट के लिए किसानों को ₹9,500 की सब्सिडी मिलेगी।कपास के उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने के लिए इंटीग्रेटेड क्रॉप मैनेजमेंट (ICM) के प्रदर्शन प्लॉट पर ₹7,500 की सब्सिडी दी जाएगी।इसके अलावा, ड्रोन के माध्यम से फसल सुरक्षा रसायनों का छिड़काव कराने वाले किसानों को इस कार्य की लागत का 50 प्रतिशत हिस्सा सब्सिडी के रूप में दिया जाएगा। किसानों को कपास की खेती में आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से संबंधित प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।योजना के तहत विभिन्न प्रदर्शन प्लॉट के लिए कुल 1,600 हेक्टेयर क्षेत्र और ड्रोन से फसल सुरक्षा रसायनों के छिड़काव के लिए 800 हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित किया गया है।इच्छुक किसान ‘उझावन’ (Uzhavan) ऐप के माध्यम से या नजदीकी सहायक निदेशक (कृषि) कार्यालय में संपर्क कर पंजीकरण करा सकते हैं।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 7 पैसे गिरकर 96.05 पर खुला

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