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CCI ने कपास की कीमत ₹1,400 प्रति कैंडी घटाई, साप्ताहिक नीलामी में 10,700 गांठ बिकीं

CCI ने कपास की कीमतें ₹1,400 प्रति कैंडी घटाईं; साप्ताहिक नीलामी में 10,700 गांठें बिकींकॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (CCI) ने 25 सितंबर 2026 को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान कपास की बिक्री कीमत में ₹1,400 प्रति कैंडी की कटौती की। इस सप्ताह के दौरान, CCI ने अपनी नीलामी के ज़रिए 2025–26 की फसल से लगभग 10,700 गांठ कपास बेची।*साप्ताहिक बिक्री रिपोर्ट* 21 सितंबर 2026 (सोमवार)CCI ने सप्ताह की शुरुआत 2,200 गांठों की बिक्री के साथ की, जिसमें मिलों ने 1,100 गांठें और व्यापारियों ने 1,100 गांठें खरीदीं।22 सितंबर 2026 (मंगलवार)कुल 1,200 गांठें बेची गईं। मिलों ने 600 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने बाकी 600 गांठें खरीदीं।23 सितंबर 2026 (बुधवार)CCI ने 1,500 गांठें बेचीं, जिसमें मिलों द्वारा खरीदी गई 1,000 गांठें और व्यापारियों द्वारा खरीदी गई 500 गांठें शामिल थीं।24 सितंबर 2026 (गुरुवार)नीलामी की गतिविधि में तेज़ी आई और CCI ने 5,100 गांठें बेचीं। मिलों ने 600 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 4,500 गांठें खरीदीं।25 सितंबर 2026 (शुक्रवार)सप्ताह का समापन 700 गांठों की बिक्री के साथ हुआ, जिसमें मिलों द्वारा खरीदी गई 300 गांठें और व्यापारियों द्वारा खरीदी गई 400 गांठें शामिल थीं।*कुल बिक्री*ताज़ा नीलामी गतिविधि के साथ, 2025–26 सीज़न के लिए CCI की कुल कपास बिक्री लगभग 94.40 लाख गांठों तक पहुँच गई।

बारिश की आशंका के बीच खरगोन में कपास की तुड़ाई तेज, मंडी आवक 50% घटी

खरगोन में बारिश के डर से कपास चुनाई तेज, 28 सितंबर तक मौसम पर नजर; मंडी में आवक 50% तक घटीखरगोन जिले में मानसून के अंतिम दौर में बारिश की संभावना ने कपास किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में तैयार कपास को बारिश से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए किसान तेजी से चुनाई कर रहे हैं। भगवानपुरा और खरगोन क्षेत्र में हाल की बारिश के बाद किसान तैयार फसल को जल्द खेत से निकालकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।बारिश के डर से मंडी में कपास की आवक घटीबारिश की आशंका का असर खरगोन मंडी में कपास की आवक पर भी दिखाई दे रहा है। स्थानीय जानकारी के अनुसार मंडी में कपास की आवक करीब 50 प्रतिशत तक घट गई है। मंडी में 33 बैलगाड़ियों और 108 वाहनों से कपास पहुंचने की जानकारी दी गई है। कपास के भाव ₹7,300 से ₹8,700 प्रति क्विंटल के बीच बताए गए हैं।उपलब्ध मंडी रिकॉर्ड में भी सितंबर के दौरान खरगोन क्षेत्र में कपास के भाव में अलग-अलग दिनों और मंडियों के अनुसार अंतर दिखाई देता है। इसलिए भाव को किसी एक निश्चित बाजार भाव के बजाय संबंधित दिन की आवक और गुणवत्ता के अनुसार देखना उचित है।मजदूरों की कमी से बढ़ी चुनाई की लागतकपास चुनाई के लिए मजदूरों की कमी किसानों की परेशानी बढ़ा रही है। बारिश से पहले जल्दी चुनाई कराने के लिए किसानों को करीब ₹7 से ₹8 प्रति किलो तक मजदूरी देनी पड़ रही है। किसान सुरेश पटेल के अनुसार मजदूर आसानी से उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। बारिश की संभावना के कारण जल्दी चुनाई कराने की जरूरत है, जिससे लागत बढ़ रही है।25 से 28 सितंबर के दौरान मौसम पर नजरआईएमडी के कृषि मौसम प्लेटफॉर्म पर 25 और 26 सितंबर के लिए बारिश की संभावना दर्ज है, जबकि 27 और 28 सितंबर को कई उपलब्ध पूर्वानुमान क्षेत्रों में बारिश कम या नगण्य दिखाई गई है। इसलिए पूरे पश्चिमी मध्य प्रदेश में 25 से 28 सितंबर तक लगातार तेज बारिश होने की बात को निश्चित तथ्य के रूप में नहीं लिखा गया है।खरगोन में किसानों की चिंता मुख्य रूप से तैयार कपास को बारिश से बचाने और समय पर चुनाई पूरी करने को लेकर है। ऐसे में मौसम के अगले अपडेट पर किसानों और मंडी कारोबारियों की नजर बनी हुई है।और पढ़ें :- राजस्थान के पट्रोदा में नरमा कपास की चुगाई शुरू, कम उत्पादन से किसान चिंतित

राजस्थान के पट्रोदा में नरमा कपास की चुगाई शुरू, कम उत्पादन से किसान चिंतित

पतरोड़ा में शुरू हुई नरमा की चुगाई, कम उत्पादन से किसान परेशानराजस्थान के गांव पतरोड़ा में नरमा (कपास) की चुगाई शुरू हो गई है। इस बार पैदावार कम होने से किसान चिंतित हैं। किसानों के अनुसार, मौसम अनुकूल नहीं रहने, बारिश की कमी और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने से नरमा की फसल कमजोर रह गई।किसान सचिन ने बताया कि इस साल नरमा की फसल के लिए पर्याप्त सिंचाई का पानी नहीं मिला। बारिश भी कम होने के कारण पौधों का विकास प्रभावित हुआ। वहीं, बुवाई, बीज, खाद और कीटनाशकों के छिड़काव सहित खेती की लागत भी बढ़ गई है। इसके बावजूद उत्पादन उम्मीद के मुताबिक नहीं हो रहा है।किसानों के अनुसार, पहली चुगाई में इस बार प्रति बीघा करीब डेढ़ से दो क्विंटल नरमा निकल रहा है, जबकि पिछले साल पहली चुगाई में प्रति बीघा तीन से चार क्विंटल तक उत्पादन हुआ था। यानी इस बार पहली चुगाई में पैदावार पिछले साल की तुलना में करीब आधी रह गई है।क्षेत्र में इस बार नरमा की बुवाई का रकबा भी कम रहा। जिन किसानों ने नरमा की बुवाई की, वे भी कम उत्पादन के कारण परेशान हैं। किसानों का कहना है कि बढ़ती लागत और घटती पैदावार ने उनकी मेहनत और उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।और पढ़ें :-  राजकोट में कपास भाव ₹9,421

राजकोट में कपास भाव ₹9,421

कपास बाजार में सुधार: राजकोट में भाव ₹9,421 तक, आवक के आंकड़ों पर किसानों की नजरखामगांव (बुलढाणा): अगस्त में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे चले गए कपास के भाव में अब सुधार देखने को मिल रहा है। गुजरात की राजकोट मार्केट कमेटी में कपास की औसत कीमत ₹9,421 प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। यह 2025-26 के ₹7,710 प्रति क्विंटल MSP से ₹1,711 अधिक है।SMART प्रोजेक्ट के मार्केट इन्फॉर्मेशन एवं रिस्क मिटिगेशन सेल के आंकड़ों के अनुसार, राजकोट में कपास के औसत भाव में पिछले सप्ताह की तुलना में 0.54% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे बाजार में कीमतों की आगे की दिशा पर किसानों की नजर बनी हुई है।आंकड़ों के मुताबिक, पिछले सप्ताह की तुलना में देशभर में कपास की कुल आवक 23.66% कम हुई। वहीं, इसी अवधि में महाराष्ट्र में कपास की आवक 362.47% बढ़ी। दोनों आंकड़े राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर आवक के अलग-अलग रुझान को दर्शाते हैं। महाराष्ट्र में बढ़ी आवक का स्थानीय बाजारों में कीमतों पर असर पड़ सकता है।नए सीजन में MSP ₹8,267केंद्र सरकार ने 2026-27 खरीफ सीजन के लिए मीडियम-स्टेपल कपास का MSP ₹8,267 प्रति क्विंटल तय किया है। राजकोट का मौजूदा औसत भाव इस MSP से ₹1,154 अधिक है।वहीं, बुलढाणा बाजार समिति में कपास का भाव ₹8,300 प्रति क्विंटल रहा। राजकोट और बुलढाणा के भाव में ₹1,121 का अंतर है। अलग-अलग मंडियों में भाव का अंतर आवक, मांग और स्थानीय बाजार परिस्थितियों से प्रभावित होता है।अगस्त के पहले पखवाड़े में कपास का भाव करीब ₹7,600 प्रति क्विंटल तक बताया गया था। यह उस समय के ₹7,710 MSP से ₹110 कम था। इसके बाद अगस्त के अंत और सितंबर की शुरुआत में कीमतों में सुधार देखने को मिला।आने वाले दिनों में कपास की कीमतों की दिशा मंडियों में आवक, स्थानीय मांग और नए सीजन के उत्पादन पर निर्भर करेगी। किसानों के लिए दैनिक भाव और आवक के आंकड़ों पर नजर रखना महत्वपूर्ण रहेगा।और पढ़ें :- बलवाड़ी मंडी में नया सीजन शुरू

बलवाड़ी मंडी में नया सीजन शुरू

बलवाड़ी मंडी में नए सीजन की शुरुआत, मक्का-कपास समेत चार फसलों की आवकबलवाड़ी। वरला तहसील स्थित कृषि उपज मंडी बलवाड़ी में गुरुवार को नए सीजन की नीलामी का शुभारंभ हुआ। मंडी परिसर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद किसानों द्वारा लाई गई कृषि उपज की बोली लगाई गई। पहले दिन मक्का, कपास, गेहूं और मूंग की आवक दर्ज हुई।मंडी परिसर में पूजन कार्यक्रम पंडित राजेंद्र भट्ट ने कराया। इसके बाद नीलामी प्रक्रिया शुरू हुई। पहले दिन 15 वाहनों से कुल 260 क्विंटल मक्का मंडी में पहुंचा। मक्का के भाव 1,400 से 1,650 रुपए प्रति क्विंटल रहे। वहीं, मूल जानकारी में मक्का का अधिकतम भाव 2,311 रुपए प्रति क्विंटल बताया गया है।कपास की 3 वाहनों से आवक हुई। इसके भाव 6,501 से 7,200 रुपए प्रति क्विंटल तक रहे। गेहूं की 1 क्विंटल आवक दर्ज की गई और इसका भाव 2,700 रुपए प्रति क्विंटल रहा। वहीं, मूंग की 2 क्विंटल आवक हुई, जिसका भाव 7,200 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज किया गया।नए सीजन की शुरुआत के दौरान प्रभारी मंडी सचिव हेमंतसिंह मोरे, उप निरीक्षक प्रकाश वास्केल, पंकज जामोद और रमेश चौहान सहित मंडी के अधिकारी-कर्मचारी तथा अनुज्ञप्तिधारी व्यापारी मौजूद रहे।प्रभारी मंडी सचिव हेमंतसिंह मोरे ने बताया कि बलवाड़ी कृषि उपज मंडी नियमित रूप से संचालित होगी। उन्होंने क्षेत्र के किसानों से अपनी उपज मंडी प्रांगण में लाकर अनुज्ञप्तिधारी व्यापारियों के माध्यम से ही बेचने की अपील की। उन्होंने किसानों से बिना लाइसेंस वाले व्यापारियों को उपज नहीं बेचने की सलाह दी।उन्होंने कहा कि बिना लाइसेंस उपज खरीदने वाले व्यापारियों के खिलाफ मंडी नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। किसानों को उपज की बिक्री से संबंधित किसी भी समस्या या शिकायत होने पर मंडी कार्यालय में संपर्क करने की अपील की गई है।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 6 पैसे की मजबूती के साथ 95.90 पर खुला।

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 13 पैसे गिरकर ₹95.96 पर बंद हुआ।

गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 13 पैसे कमजोर हुआ और ₹95.96 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।घरेलू करेंसी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ₹95.83 पर खुली और पूरे ट्रेडिंग सेशन के दौरान इसमें उतार-चढ़ाव होता रहा। आखिर में यह शुरुआती स्तर से 13 पैसे गिरकर ₹95.96 पर बंद हुई।बंद होने के समय, सेंसेक्स 1,247.71 अंक या 1.67 प्रतिशत गिरकर 73,580.54 पर था, और निफ्टी 383.70 अंक या 1.64 प्रतिशत गिरकर 23,063.10 पर था। लगभग 1400 शेयरों में बढ़त हुई, 2772 शेयरों में गिरावट आई, और 169 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।और पढ़ें :- मानसून विदाई में पूर्व-मध्य भारत में ज्यादा बारिश

मानसून विदाई में पूर्व-मध्य भारत में ज्यादा बारिश

मॉनसून के अंतिम दौर में पूर्वी और मध्य भारत में अधिक बारिश की संभावना, अल नीनो 2027 तक रहने का अनुमाननई दिल्ली: मॉनसून की वापसी के अंतिम चरण में पूर्वी और मध्य भारत में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। डोलाट कैपिटल की एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत से मॉनसून की वापसी के साथ इसके अंतिम हफ्तों में पूर्वी और मध्य भारत में अधिक बारिश हो सकती है। रिपोर्ट में अल नीनो के मजबूत होने और इसके 2027 तक बने रहने का अनुमान भी जताया गया है।रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश की स्थिति में सबसे अधिक सुधार हुआ है। यहां बारिश की कमी पिछले सप्ताह के 29% से घटकर 27% रह गई। दक्षिणी प्रायद्वीप में भी सुधार दर्ज किया गया और बारिश की कमी 28% से घटकर 26% हो गई। मध्य भारत में बारिश की कमी करीब 6% पर स्थिर रही, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में यह 9% से बढ़कर 10% हो गई। अखिल भारतीय स्तर पर बारिश की कमी 15% पर बनी रही।इस बीच, बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र पूर्वी तट की ओर बढ़ रहा है। लैंडफॉल से पहले इसके और मजबूत होने की संभावना है। इससे पूर्वी और मध्य भारत में बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं।कृषि क्षेत्र में 18 सितंबर तक खरीफ फसलों की कुल बुआई 1,103.9 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई। पिछले साल की समान अवधि की तुलना में कुल कमी 15.1 लाख हेक्टेयर रह गई, जो पिछले सप्ताह की 16 लाख हेक्टेयर की कमी से कम है।इस सीजन में पहली बार तिलहन की बुआई का रकबा पिछले साल से थोड़ा अधिक हुआ, जबकि दलहन की बुआई लगभग स्थिर रही। चावल की बुआई अभी भी पीछे है। इसका रकबा 429.3 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल यह 445.9 लाख हेक्टेयर था। इस तरह कमी 17.0 लाख हेक्टेयर से घटकर 16.6 लाख हेक्टेयर रह गई। कपास का रकबा 109.6 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल यह 110.6 लाख हेक्टेयर था। यानी कपास की बुआई में 1 लाख हेक्टेयर की कमी रही।गन्ना, जूट और मेस्टा के रकबे में कोई खास बदलाव नहीं हुआ। मध्य और पश्चिमी भारत में जलाशयों का जलस्तर 10 साल के औसत से ऊपर बना रहा, जबकि दक्षिणी प्रायद्वीप बुआई की प्रगति और जलाशयों के स्तर दोनों में पीछे रहा।डोलाट कैपिटल के अनुसार, अल नीनो काफी मजबूत हो गया है और यह रिकॉर्ड की सबसे मजबूत घटनाओं में से एक बन सकता है। रिपोर्ट में इसके 2027 तक बने रहने का अनुमान जताया गया है।और पढ़ें :- महाराष्ट्र में सूखे जैसे हालात, किसानों को राहत

महाराष्ट्र में सूखे जैसे हालात, किसानों को राहत

सूखे जैसे हालात से महाराष्ट्र में बढ़ी चिंता, किसानों के लिए तुरंत राहत का ऐलानमहाराष्ट्र के कई हिस्सों में कमजोर मानसून और लंबे समय तक बारिश में कमी के कारण सूखे जैसे हालात बन गए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि राज्य सरकार केंद्र से आर्थिक सहायता मिलने का इंतजार किए बिना प्रभावित किसानों को तत्काल राहत देगी। उन्होंने बताया कि सूखा-निवारण से जुड़े उपायों की पहली अधिसूचना शनिवार तक जारी की जाएगी।मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल नुकसान का आकलन करने के लिए 23 सितंबर से पंचनामे शुरू किए जाएंगे। पहले यह प्रक्रिया 5 अक्टूबर से शुरू होने वाली थी, लेकिन नुकसान की गंभीरता को देखते हुए इसे आगे कर दिया गया है। मौजूदा स्थिति में सोयाबीन, मक्का और कपास की फसलों को बड़ा नुकसान हुआ है। इसके अलावा कोंकण क्षेत्र में धान की फसल भी प्रभावित हुई है।राहत के लिए कैबिनेट उपसमिति गठितकिसानों को राहत देने और स्थिति के आधार पर तेजी से फैसले लेने के लिए सरकार ने राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे की अध्यक्षता में कैबिनेट उपसमिति गठित की है। समिति को कैबिनेट के समान अधिकार दिए गए हैं और मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल इसके सचिव होंगे। समिति हर सप्ताह प्रभावित क्षेत्रों से मिलने वाली रिपोर्ट की समीक्षा करेगी। हालांकि, बड़े नीतिगत फैसले राज्य मंत्रिमंडल के स्तर पर ही लिए जाएंगे।प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे मुख्यमंत्री और मंत्रीफडणवीस ने कहा कि वह 23 सितंबर से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे। मंत्री और जनप्रतिनिधि भी प्रभावित इलाकों में जाकर किसानों से बातचीत करेंगे और जमीनी स्थिति का जायजा लेंगे। पंचनामों और फसल नुकसान के सर्वेक्षण के आधार पर आगे की राहत प्रक्रिया तय की जाएगी।राज्य सरकार केंद्र से आर्थिक सहायता लेने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के नियमों के तहत अलग प्रस्ताव तैयार करेगी। इसका मतलब है कि केंद्र से सहायता अभी मंजूर नहीं हुई है। सरकार ने पीने के पानी और पशुओं के चारे को प्राथमिकता देने की बात कही है। स्थानीय निकायों के साथ समन्वय कर अगले 7 से 8 महीनों के लिए पानी और चारे की व्यवस्था की योजना बनाई जाएगी।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 9 पैसे की कमजोरी के साथ 95.83 पर खुला।

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