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बेहतर मानसून से जुलाई में तेज हुई कपास की बुवाई, फिर भी पिछले साल से पीछे

जुलाई में तेज हुई कपास की बुआई, फिर भी पिछले साल से पीछे; बेहतर मॉनसून से बढ़ी रफ्तारनई दिल्ली: दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दोबारा सक्रिय होने से देशभर में जुलाई के दौरान कपास (कॉटन) की बुआई में तेजी आई है। हालांकि, बुआई का कुल रकबा अभी भी पिछले वर्ष की तुलना में कम बना हुआ है। कृषि आयुक्त पी.के. सिंह ने बताया कि बेहतर बारिश के कारण प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में बुआई की गति बढ़ी है और आने वाले दिनों में यह अंतर और कम होने की उम्मीद है।कृषि आयुक्त के अनुसार, 5 जुलाई तक देश में 63.18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुआई हो चुकी थी, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 82 लाख हेक्टेयर था। यानी इस बार शुरुआत धीमी रही, लेकिन जुलाई में अच्छी बारिश के बाद किसानों ने तेजी से बुआई शुरू कर दी है।उन्होंने बताया कि भारत में कपास की बुआई अलग-अलग राज्यों में अलग समय पर होती है। इसकी शुरुआत पंजाब और हरियाणा से होती है और बाद में गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु तक फैलती है। सामान्य परिस्थितियों में कपास की बुआई 15 जुलाई तक पूरी हो जाती है, लेकिन इस वर्ष मॉनसून में देरी के कारण इसकी अंतिम तिथि बढ़ाकर 30 जुलाई कर दी गई है।अहमदाबाद के एक कृषि व्यापारी के अनुसार, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और कर्नाटक में हाल के दिनों में अच्छी बारिश होने से कपास की बुआई में उल्लेखनीय तेजी आई है। उन्होंने बताया कि बेहतर दाम मिलने की उम्मीद में कुछ किसान धान की जगह कपास और दलहनी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। वहीं महाराष्ट्र में कई किसानों ने सोयाबीन की कमजोर अंकुरण की शिकायत के बाद दोबारा कपास की बुआई शुरू की है।भारत के प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्रों में गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश का केंद्रीय क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण है। इसके अलावा पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु भी प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।कृषि मंत्रालय के नवीनतम अनुमान के अनुसार, वर्ष 2025-26 में देश का कपास उत्पादन 290.91 लाख गांठ (प्रति गांठ 170 किलोग्राम) रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 297.24 लाख गांठ से कम है।पी.के. सिंह ने बताया कि खरीफ सीजन में बुआई की सबसे अधिक रफ्तार जुलाई में रहती है। जून में जहां औसतन हर सप्ताह लगभग 50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई होती है, वहीं जुलाई में यह बढ़कर 200 से 250 लाख हेक्टेयर प्रति सप्ताह तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि उत्पादन और उत्पादकता का सटीक आकलन बुआई पूरी होने के बाद ही किया जा सकेगा। सरकार बुआई के आंकड़ों की पुष्टि प्रारंभिक अनुमान, रिमोट सेंसिंग और ब्लॉक स्तर के डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से करती है।और पढ़ें :- महाराष्ट्र के केज तालुका में खरीफ बुवाई लगभग पूरी, 64 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती

महाराष्ट्र के केज तालुका में खरीफ बुवाई लगभग पूरी, 64 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती

महाराष्ट्र के केज तालुका में खरीफ बुआई ने पकड़ी रफ्तार, 70 हजार हेक्टेयर में खेती; 64 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन की बुआईकेज (बीड): महाराष्ट्र के बीड जिले के केज तालुका में इस वर्ष अनुकूल मॉनसूनी बारिश के चलते खरीफ सीजन की बुआई लगभग पूरी हो चुकी है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अब तक 69,813 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई की जा चुकी है। इनमें सबसे अधिक 64,215 हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुआई हुई है, जबकि कपास की खेती केवल 1,943 हेक्टेयर में की गई है। इससे स्पष्ट है कि इस बार भी किसानों का सबसे अधिक भरोसा सोयाबीन पर बना हुआ है।किसानों ने मई के अंतिम सप्ताह से ही खेतों की जुताई, बीज और उर्वरकों की व्यवस्था सहित खरीफ सीजन की तैयारियां शुरू कर दी थीं। 6 जून से लगातार तीन दिन हुई अच्छी बारिश के बाद किसानों ने बड़े पैमाने पर सोयाबीन और अन्य खरीफ फसलों की बुआई शुरू कर दी। शुरुआती बारिश से अच्छी प्रगति हुई, लेकिन इसके बाद लगभग 15 दिनों तक बारिश नहीं होने से बुआई की रफ्तार धीमी पड़ गई। कई किसानों ने अगली बारिश का इंतजार करते हुए खेतों में बुआई रोक दी थी।20 जून के बाद दोबारा अच्छी बारिश होने पर किसानों ने तेजी से खेतों में काम शुरू किया और बुआई का दायरा तेजी से बढ़ा। इसके परिणामस्वरूप तालुका में कुल 69,813 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई पूरी हो गई। सोयाबीन के अलावा मूंग, उड़द, अरहर और मक्का की भी बुआई की गई है, हालांकि इनका रकबा सोयाबीन की तुलना में काफी कम है। कपास की खेती भी सीमित क्षेत्र तक ही सिमटी रही।जून के पहले सप्ताह में बोई गई सोयाबीन और अन्य फसलें अच्छी तरह अंकुरित हो चुकी हैं। हालांकि, बीच में बारिश रुकने से फसलों की बढ़वार प्रभावित होने की आशंका बनी थी। कई किसानों ने उपलब्ध जल स्रोतों से सिंचाई कर फसलों को बचाने का प्रयास किया। जून के अंतिम सप्ताह में बोई गई सोयाबीन की फसल भी अब निकल चुकी है और खेतों में हरियाली दिखाई देने लगी है।फिलहाल किसान अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए हुए हैं। पिछले एक सप्ताह से क्षेत्र में बादल तो छाए हुए हैं, लेकिन पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है। किसानों का कहना है कि यदि जुलाई के दूसरे पखवाड़े में अच्छी बारिश होती है तो सोयाबीन सहित सभी खरीफ फसलों की बढ़वार बेहतर होगी और उत्पादन में भी बढ़ोतरी की संभावना रहेगी। कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि समय पर वर्षा जारी रहने पर इस वर्ष केज तालुका में खरीफ उत्पादन संतोषजनक रहने की उम्मीद है।और पढ़ें :- मजबूत मानसून से महाराष्ट्र में खरीफ बुवाई तेज, एक सप्ताह में 20% से 45% पहुंचा रकबा

मजबूत मानसून से महाराष्ट्र में खरीफ बुवाई तेज, एक सप्ताह में 20% से 45% पहुंचा रकबा

मजबूत मॉनसून से महाराष्ट्र में खरीफ बुआई को रफ्तार, एक हफ्ते में कवरेज 20% से बढ़कर 45%नासिक: महाराष्ट्र में सक्रिय मॉनसून और लगातार हो रही अच्छी बारिश ने खरीफ फसलों की बुआई को तेज़ गति दे दी है। राज्य कृषि विभाग के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, 1 जुलाई को जहां खरीफ बुआई कुल रकबे के 20% तक सीमित थी, वहीं 7 जुलाई तक यह बढ़कर 45% हो गई। अधिकारियों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में बारिश का मौजूदा क्रम बना रहा तो बुआई का कार्य और तेज़ी से आगे बढ़ेगा।राज्य के औसत 1.44 करोड़ हेक्टेयर खरीफ क्षेत्र (गन्ने को छोड़कर) में अब तक करीब 65 लाख हेक्टेयर में बुआई पूरी हो चुकी है। डिवीजनवार आंकड़ों में अमरावती सबसे आगे है, जहां 58% क्षेत्र में बुआई हो चुकी है। इसके बाद छत्रपति संभाजीनगर में 53% और नासिक डिवीजन में 50% बुआई दर्ज की गई है।नासिक डिवीजन, जिसमें नासिक, धुले, जलगांव और नंदुरबार जिले शामिल हैं, में हालिया बारिश के बाद बुआई में उल्लेखनीय तेजी देखी गई। यहां 20.33 लाख हेक्टेयर के औसत खरीफ क्षेत्र में से लगभग 10.24 लाख हेक्टेयर में बुआई पूरी हो चुकी है। दूसरी ओर, कोंकण क्षेत्र में बुआई की गति अभी धीमी बनी हुई है और 3.92 लाख हेक्टेयर के औसत क्षेत्र में केवल 4% बुआई हुई है। पुणे डिवीजन में 28% और कोल्हापुर डिवीजन में 22% क्षेत्र में बुआई पूरी हुई है।महाराष्ट्र में सोयाबीन, कपास, मक्का, धान, ज्वार, बाजरा, मूंग और उड़द प्रमुख खरीफ फसलें हैं। इनमें सोयाबीन और कपास का दबदबा बना हुआ है, जो मिलकर राज्य के कुल खरीफ रकबे का 62% से अधिक हिस्सा घेरते हैं। सोयाबीन की बुआई 47.21 लाख हेक्टेयर के अनुमानित क्षेत्र में से 23.58 लाख हेक्टेयर यानी लगभग 50% में पूरी हो चुकी है। वहीं, कपास की बुआई 42.47 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 25.38 लाख हेक्टेयर यानी करीब 60% क्षेत्र में पूरी हो चुकी है।मक्का की बुआई भी अच्छी प्रगति पर है और अब तक 9.33 लाख हेक्टेयर के अनुमानित क्षेत्र में से 5.71 लाख हेक्टेयर (61%) में बुआई हो चुकी है। हालांकि, धान की रोपाई अभी शुरुआती चरण में है और 15.02 लाख हेक्टेयर के अनुमानित क्षेत्र में से केवल 1.40 लाख हेक्टेयर (9%) में ही रोपाई पूरी हुई है।1 जून से 7 जुलाई के बीच महाराष्ट्र में 290.7 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य 282.3 मिमी का 103% है। कृषि विभाग का मानना है कि सामान्य से बेहतर बारिश का यही सिलसिला जारी रहा तो खरीफ सीजन में बुआई समय पर पूरी होने के साथ उत्पादन की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।और पढ़ें :- कपास बुवाई तेज, 30 जुलाई लक्ष्य संभव

कपास बुवाई तेज, 30 जुलाई लक्ष्य संभव

कपास बुवाई ने पकड़ी रफ्तार, 30 जुलाई तक बुवाई लक्ष्य पूरा होने की संभावना– अतुल भाई गणात्राश्री अतुल भाई गणात्रा जी, CMD, Radha Laxmi Group एवं Former CAI President, ने दिनांक 09 जुलाई 2026 को CNBC आवाज़ को दिए गए अपने इंटरव्यू में "Impact of Monsoon on Cotton Sowing & Farmers' Mood for Crop Switch" विषय पर महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए।उन्होंने बताया कि अब तक खरीफ फसलों की बुवाई में लगभग 20–30% की कमी की चर्चा की जा रही थी, किंतु हाल के दिनों में देश के विभिन्न क्षेत्रों में हुई अच्छी एवं व्यापक वर्षा के परिणामस्वरूप स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है।09 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, गत वर्ष इसी अवधि तक लगभग 72 लाख हेक्टेयर में कपास की बुवाई हुई थी, जबकि चालू सीज़न में यह आंकड़ा लगभग 66 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुका है। अर्थात् अब बुवाई का क्षेत्रफल पिछले वर्ष की तुलना में केवल लगभग 9% ही पीछे रह गया है।उन्होंने आगे बताया कि पिछले कुछ दिनों में Central एवं South Zones में अच्छी वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार आगामी 8–10 दिनों तक वर्षा में विराम (Pause Period) रहने की संभावना है, जिससे किसानों को बुवाई कार्य तेज़ी से पूरा करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा। ऐसे में कपास की बुवाई का आंकड़ा अनुमान से कहीं अधिक बढ़ सकता है।उन्होंने विशेष रूप से कहा कि इस वर्ष कपास के बीजों की रिकॉर्ड बिक्री हुई है, जिससे यह स्पष्ट है कि किसानों के पास पर्याप्त मात्रा में कॉटन सीड उपलब्ध है। किसान केवल वर्षा रुकने और खेतों में अनुकूल परिस्थितियां बनने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, ताकि बुवाई का कार्य तेज़ी से पूरा किया जा सके। उनका अनुमान है कि 30 जुलाई तक देश में कपास बुवाई का निर्धारित लक्ष्य पूरा हो सकता है।भारत सरकार ने चालू वर्ष के लिए कपास बुवाई का लक्ष्य 125–130 लाख हेक्टेयर निर्धारित किया है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए उम्मीद है कि 20–25 जुलाई तक देश में लगभग 100 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई पूर्ण हो जाएगी।श्री गणात्रा ने कहा कि यह सर्वविदित है कि जब मानसून में विलंब होता है अथवा वर्षा कम होती है, तब किसान खरीफ की अन्य फसलों की अपेक्षा कपास को प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि सोयाबीन, गन्ना, मक्का एवं मूंगफली जैसी फसलों की तुलना में कपास की फसल अपेक्षाकृत कम पानी में भी सफलतापूर्वक उगाई जा सकती है।उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस वर्ष कपास के MSP में लगभग 7% की वृद्धि की गई है, जबकि मूंगफली जैसी अन्य फसलों के MSP में लगभग 3% की ही वृद्धि हुई है। इसके अतिरिक्त, पिछले सीज़न में किसानों को कपास का बाज़ार भाव ₹10,000 प्रति क्विंटल तक प्राप्त हुआ था। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस वर्ष किसानों द्वारा बुवाई के लिए रिकॉर्ड मात्रा में कॉटन सीड की खरीद की गई है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि इस सीज़न में कपास की ओर फसल परिवर्तन (Crop Diversion) स्वाभाविक रूप से बढ़ा है।उन्होंने यह भी बताया कि दक्षिण भारत (South Zone) में इस वर्ष अब तक कपास की बुवाई पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 20% अधिक हो चुकी है, जो किसानों के सकारात्मक रुझान और अनुकूल परिस्थितियों का संकेत है।उन्होंने विशेष रूप से बताया कि गुजरात में कपास की बुवाई की अवधि 15 अगस्त तक खुली रहती है। इसलिए वर्तमान परिस्थितियों, किसानों की रुचि तथा रिकॉर्ड बीज बिक्री को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा सकता है कि चालू सीज़न में कपास का कुल बुवाई क्षेत्र पिछले वर्ष की तुलना में 10–15% तक अधिक रह सकता है।और पढ़ें:- गिरिराज सिंह ने वस्त्र क्षेत्र की प्रमुख योजनाओं की समीक्षा की, ITADCs की भूमिका पर दिया जोर

गिरिराज सिंह ने वस्त्र क्षेत्र की प्रमुख योजनाओं की समीक्षा की, ITADCs की भूमिका पर दिया जोर

गिरिराज सिंह ने टेक्सटाइल क्षेत्र की प्रमुख योजनाओं की समीक्षा की, ITADCs की भूमिका पर दिया जोरनई दिल्ली, 9 जुलाई (PTI): केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने गुरुवार को एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में टेक्नोलॉजी उन्नयन, संस्थागत सुधार और उद्योग को बेहतर सहयोग देने के उद्देश्य से चल रही प्रमुख पहलों की प्रगति का आकलन किया। बैठक का उद्देश्य भारत के टेक्सटाइल इकोसिस्टम को अधिक मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाना था।बैठक में पुराने पावरलूम सर्विस सेंटर्स को इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल एंड अपैरल डेवलपमेंट सेंटर्स (ITADCs) में बदलने की प्रगति की समीक्षा की गई। इन केंद्रों को टेक्सटाइल उद्योग के लिए वन-स्टॉप फैसिलिटेशन सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां उद्यमियों, एमएसएमई और अन्य हितधारकों को कौशल विकास, उत्पाद परीक्षण, डिजाइन सहायता, तकनीकी सहयोग, ऋण सुविधा, निर्यात प्रोत्साहन और बाजार से जुड़ाव जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के दौरान ITADCs ने 1,170 से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया और आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से लगभग 1,770 टेक्सटाइल इकाइयों तक पहुंच बनाई। इसके अलावा संस्थागत ऋण, ई-कॉमर्स लिंकेज, उत्पाद-आधारित उद्यमिता तथा बांस, हेम्प, फ्लैक्स, केला और अनानास जैसे नए फाइबर के व्यावसायीकरण को भी बढ़ावा दिया गया।गिरिराज सिंह ने कहा कि ITADCs अब केवल सेवा केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि नवाचार और उद्यम विकास केंद्रों के रूप में विकसित हो रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि ये केंद्र एमएसएमई को सशक्त बनाने, निर्यात बढ़ाने, टिकाऊ रोजगार सृजित करने और भारत के टेक्सटाइल क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।बैठक में अमेंडेड टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन फंड स्कीम (ATUFS) की भी समीक्षा की गई। मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के तहत 10,061 इकाइयों को 2,776 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई, जिससे 53,121 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित हुआ। योजना के माध्यम से लगभग 6.7 लाख आधुनिक टेक्सटाइल मशीनें स्थापित हुईं और करीब 3.6 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए। अध्ययन में यह भी पाया गया कि सब्सिडी के प्रत्येक एक करोड़ रुपये पर लगभग 19 करोड़ रुपये का निजी निवेश हुआ, जो योजना की प्रभावशीलता को दर्शाता है।और पढ़ें :- मानसून से कपास-सोयाबीन बुवाई तेज

मानसून से कपास-सोयाबीन बुवाई तेज

Kharif: मानसून के आगमन से कपास-सोयाबीन की बुवाई ने पकड़ी रफ्तार; पिछले साल के स्तर को पार कर सकता है कुल रकबादक्षिण पश्चिम मानसून पूरे देश में पहुंचने के साथ खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आ गई है। कपास और सोयाबीन की खेती ने रफ्तार पकड़ी है। कृषि मंत्रालय और सोपा के अनुसार, अच्छी बारिश से किसानों का रुझान बढ़ा है और उत्पादन संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।दक्षिण पश्चिम मानसून अब पूरे देश में पहुंच गया है। 9 जुलाई को यह राजस्थान, हरियाणा, पंजाब के शेष हिस्सों और उत्तरी अरब सागर में आगे बढ़ गया, जिससे इसका देशव्यापी प्रसार पूरा हो गया।  इसके साथ ही खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।अच्छी बारिश के चलते पिछले साल से 23 फीसदी पीछे चल रही कपास की बुवाई ने रफ्तार पकड़ ली है। पांच जुलाई तक कपास का कुल रकबा 63.18 लाख हेक्टेयर था, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 82 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो गई थी। बीते हफ्ते तक पिछड़ने के बाद अब गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में कपास की बुवाई में तेजी आई है। कुछ इलाकों में किसान धान छोड़कर कपास और दालों की तरफ रुख कर रहे हैं, क्योंकि इनमें बेहतर संभावनाएं दिख रही हैं। कृषि मंत्रालय के अनुसार, साल 2025-26 के लिए कपास का उत्पादन 290.91 लाख गांठ (प्रत्येक गांठ 170 किलोग्राम की) रहा, जो 2024-25 में हुए 297.24 लाख गांठ के उत्पादन से कम है।सोयाबीन का 90 फीसदी क्षेत्र कवरसोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के मुताबिक, मौजूदा खरीफ सीजन में सोयाबीन का रकबा 1.003 करोड़ हेक्टेयर होने का अनुमान है। इसने प्रमुख राज्यों में कुल लक्ष्य क्षेत्र के करीब 80 से 90 फीसदी हिस्से को कवर कर लिया है। सरकारी अनुमानों के अनुसार, अब तक 57 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुवाई पूरी की जा चुकी है।मध्य प्रदेश और राजस्थान में करीब 90 फीसदी हिस्से में सोयाबीन की बुवाई हो चुकी है। महाराष्ट्र में यह लक्षित क्षेत्र के लगभग 80-90 फीसदी तक पहुंच गई है। सोपा का मानना है कि 2026 खरीफ सीजन के दौरान सोयाबीन का कुल रकबा पिछले साल के स्तर को पार करने की संभावना है।और पढ़ें:- तेलंगाना में खरीफ 2026 के दौरान कपास बुवाई 4.85 लाख एकड़ बढ़ी

तेलंगाना में खरीफ 2026 के दौरान कपास बुवाई 4.85 लाख एकड़ बढ़ी

तेलंगाना में कपास की बुवाई में तेजी, पिछले वर्ष से 4.85 लाख एकड़ अधिक रकबाहैदराबाद, 8 जुलाई: तेलंगाना में खरीफ 2026 सीजन के दौरान कपास की बुवाई में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 8 जुलाई 2026 तक राज्य में 39,44,271 एकड़ क्षेत्र में कपास की बुवाई हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 34,58,849 एकड़ था। यानी इस वर्ष अब तक 4,85,422 एकड़ अधिक क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई है।जिलावार आंकड़ों के अनुसार, नलगोंडा में सबसे अधिक 1,97,352 एकड़ की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके बाद नागरकुरनूल (+49,481 एकड़), जंगांव (+44,904 एकड़), सूर्यापेट (+40,726 एकड़), संगारेड्डी (+40,020 एकड़) और खम्मम (+19,079 एकड़) में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।वहीं, कामारेड्डी, करीमनगर, रंगारेड्डी, जोगुलाम्बा गडवाल, महबूबाबाद, नारायणपेट और यादाद्री भुवनगिरि सहित कई अन्य जिलों में भी पिछले वर्ष की तुलना में कपास की बुवाई का रकबा बढ़ा है।दूसरी ओर, कुछ जिलों में कपास की बुवाई में कमी भी दर्ज की गई। इनमें हनमकोंडा (-15,793 एकड़), मंचेरियल (-13,795 एकड़), विकाराबाद (-12,655 एकड़), सिद्दीपेट (-12,382 एकड़), वारंगल (-9,610 एकड़) और भद्राद्री कोठागुडेम (-7,993 एकड़) प्रमुख हैं।राज्य में कपास का सामान्य (नॉर्मल) रकबा 47,41,541 एकड़ है, जबकि 8 जुलाई 2026 तक 39,44,271 एकड़ क्षेत्र में बुवाई पूरी हो चुकी है।और पढ़ें :- बेहतर बारिश से खरीफ बुवाई में आएगी तेजी: शिवराज सिंह चौहान

बेहतर बारिश से खरीफ बुवाई में आएगी तेजी: शिवराज सिंह चौहान

बारिश में सुधार से खरीफ बुवाई को मिलेगी रफ्तार: शिवराज सिंह चौहाननई दिल्ली, 8 जुलाई 2026: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि देश में मॉनसून की स्थिति में सुधार हो रहा है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आने की उम्मीद है। बुधवार को नई दिल्ली में अल-नीनो की स्थिति की समीक्षा के लिए आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद उन्होंने बताया कि जून में वर्षा की कमी 33 प्रतिशत थी, जो जुलाई में घटकर 24 प्रतिशत रह गई है। हाल के दिनों में देश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश होने से कम वर्षा वाले जिलों की संख्या भी 262 से घटकर 178 रह गई है।कृषि मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सरकार पूरी तैयारी, स्पष्ट रणनीति और ज़मीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई के साथ स्थिति का सामना कर रही है। मंत्रालय के अनुसार, चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं, लेकिन उनके प्रभाव को कम करने के लिए पूरा तंत्र पहले से सक्रिय है।मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में वर्षा और खरीफ बुवाई की स्थिति पर लगातार नज़र रखे हुए है। उन्होंने विश्वास जताया कि जुलाई में वर्षा में और सुधार होगा, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिलेगी।शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि अब तक देश में 350.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 91.95 लाख हेक्टेयर कम है। उन्होंने कहा कि मॉनसून के देर से आने का सबसे अधिक असर सोयाबीन और कपास की बुवाई पर पड़ा है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे देर से हुई बारिश की स्थिति को देखते हुए कम अवधि में तैयार होने वाली तथा कम पानी की आवश्यकता वाली फसलें, जैसे मक्का, बाजरा और मूंग की खेती करें, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके।मंत्री ने बताया कि सरकार ने इस चुनौती से निपटने की तैयारी अप्रैल से ही शुरू कर दी थी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के सहयोग से संभावित रूप से प्रभावित जिलों के लिए आपातकालीन कार्ययोजनाएं तैयार कर समय रहते राज्य सरकारों के साथ साझा की गईं। इसके अलावा, जून में चलाए गए 'खेत बचाओ अभियान' के तहत देशभर में 1.24 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनके माध्यम से 80 लाख से अधिक किसानों तक सीधे पहुंच बनाई गई।और पढ़ें :- रुपया डॉलर के मुकाबले 95.26 पर मजबूत खुला.

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बेहतर बारिश से खरीफ बुवाई में आएगी तेजी: शिवराज सिंह चौहान 10-07-2026 11:59:49 view
रुपया डॉलर के मुकाबले 95.26 पर मजबूत खुला. 10-07-2026 09:21:04 view
रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 17 पैसे बढ़कर 95.38 पर बंद हुआ। 09-07-2026 15:44:04 view
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