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खरगोन में बारिश से कपास चुनाई प्रभावित

कसरावद-गोगांवा में बारिश, कपास की चुनाई प्रभावितखरगोन। जिले में सोमवार रात रुक-रुककर बारिश का दौर जारी रहा। कसरावद और गोगांवा में करीब डेढ़-डेढ़ इंच बारिश दर्ज की गई। कसरावद में 36 मिमी और गोगांवा में 37 मिमी पानी गिरा। इसके अलावा महेश्वर में 19 मिमी, खरगोन में 12 मिमी और भगवानपुरा में 10 मिमी बारिश दर्ज हुई। बारिश से खेतों में तैयार फसलों पर असर पड़ने की आशंका है।कपास की चुनाई प्रभावित होने का डरकिसान महेश यादव और बद्रीलाल यादव ने बताया कि खेतों में कपास की चुनाई की तैयारी चल रही है। बारिश होने से कपास में नमी आ जाएगी। इससे चुनाई का काम प्रभावित होने के साथ कपास की गुणवत्ता खराब होने की आशंका है। किसानों को बारिश थमने और खेतों के सूखने का इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं, सोयाबीन की फसल को भी नुकसान की आशंका बनी हुई है।जिले में 26.1 इंच बारिशभू-अभिलेख कार्यालय के अनुसार, जिले में अब तक कुल 26.1 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। यह औसत से करीब 5 प्रतिशत अधिक है। पिछले साल इसी अवधि में 25.7 इंच बारिश हुई थी। हालांकि, जिले की सालाना औसत बारिश 32.6 इंच है। इस लिहाज से सालाना औसत की तुलना में अभी करीब 6.5 इंच बारिश कम है।तापमान 30 डिग्री से नीचेपिछले एक सप्ताह से बादल और बारिश के कारण दिन के तापमान में करीब 1.5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है। अधिकतम तापमान 30 डिग्री से नीचे बना हुआ है। इससे लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली है।अगले चार दिन बारिश के आसारमौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अगले चार दिनों तक पश्चिमी मध्यप्रदेश सहित खरगोन में बादल छाए रहने और बारिश होने की संभावना है। ऐसे में खेतों में तैयार फसलों पर मौसम का असर आगे भी जारी रहने की आशंका है। कपास की चुनाई को लेकर किसानों की चिंता बढ़ सकती है।और पढ़ें :- रुपया US डॉलर के मुकाबले 31 पैसे गिरकर ₹94.82 पर बंद हुआ

खरगोन में कपास नीलामी ₹8,411 पर शुरू

खरगोन कॉटन ऑक्शन शुरू; पहली बोली ₹8,411 प्रति क्विंटल तक पहुंचीमध्य प्रदेश के सबसे बड़े कॉटन प्रोड्यूसिंग जिले खरगोन में एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट (मंडी) में सोमवार को कॉटन का नया सीजन शुरू हुआ। पूर्व एग्रीकल्चर स्टेट मिनिस्टर और खरगोन MLA बालकृष्ण पाटीदार ने आनंद नगर में मौजूद मार्केट में पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ ऑक्शन की शुरुआत की। नए सीजन के लिए शुरुआती बोली ₹8,411 प्रति क्विंटल दर्ज की गई। SISसीजन के पहले ही दिन किसान बड़ी संख्या में अपने कॉटन प्रोड्यूस के साथ मार्केट पहुंचे। लगभग 10,000 क्विंटल कॉटन आया, जिसे 500 से ज़्यादा गाड़ियों और 100 बैलगाड़ियों में लाया गया। ऑक्शन के दौरान किसान, व्यापारी और पब्लिक रिप्रेजेंटेटिव मौजूद थे। पूजा-अर्चना के बाद, "जय बलराम" के नारों के बीच बोली लगाने का प्रोसेस शुरू हुआ। SISनीलाम होने वाला पहला लॉट किसान अश्विन डांगी का था। केके कॉटन के कल्याण अग्रवाल ने इसके लिए सबसे ज़्यादा ₹8,411 प्रति क्विंटल की बोली लगाई। वहीं, ज़्यादा नमी वाला कॉटन भी ₹7,000 से ₹8,000 प्रति क्विंटल के भाव पर बिका। पहले ही दिन मिले अच्छे दामों से किसान उत्साहित दिखे। SISखरगोन MLA बालकृष्ण पाटीदार ने कहा कि इस साल अच्छी बारिश की वजह से कॉटन की फ़सल बहुत अच्छी हालत में है। सितंबर में अब तक बारिश न होने से कॉटन की क्वालिटी बनाए रखने में मदद मिली है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जैसे-जैसे कॉटन में नमी कम होगी, किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे, जो शायद ₹10,000 प्रति क्विंटल तक पहुँच सकते हैं। SISकॉटन ट्रेडर कल्याण अग्रवाल ने बताया कि इस साल इंटरनेशनल मार्केट में कॉटन का प्रोडक्शन कम होने की उम्मीद है, इस ट्रेंड का असर घरेलू मार्केट पर भी पड़ सकता है। उन्होंने आगे कहा कि कॉटन में नमी कम होने से किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना है। SISकिसान कुणाल डांगी ने बताया कि पहली नीलामी में उनके कपास को अच्छी कीमत मिली। फसल की अच्छी हालत को देखते हुए, उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में कपास की कीमतें अच्छी रहेंगी। नए सीज़न की शुरुआत के मौके पर मार्केट सेक्रेटरी शर्मिला निनामा समेत बड़ी संख्या में किसान, व्यापारी और सरकारी प्रतिनिधि मौजूद थे। और पढ़ें :- मनावर मंडी में 11 सितंबर से कपास नीलामी

मनावर मंडी में 11 सितंबर से कपास नीलामी

मनावर मंडी में 11 सितंबर से कपास बोलीमनावर। किसानों की मांग को देखते हुए मनावर कृषि उपज मंडी में 11 सितंबर से कपास की नीलामी शुरू की जाएगी। नगर के सेमल्दा मार्ग स्थित मिर्ची मंडी परिसर में कपास की बोली लगाई जाएगी। मंडी सचिव भगत सिंह डावर ने बताया कि नीलामी प्रक्रिया के दौरान व्यापारियों द्वारा किसानों की कपास उपज की बोली लगाई जाएगी। इससे किसानों को अपनी उपज का उचित बाजार मूल्य प्राप्त करने में सुविधा होगी।मंडी प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे कपास लेकर मंडी पहुंचने से पहले नीलामी के समय और आवश्यक जानकारी प्राप्त कर लें। किसानों से उपज की गुणवत्ता बनाए रखने तथा मंडी में बिक्री के लिए जरूरी दस्तावेज साथ लाने को कहा गया है। क्षेत्र में कपास की आवक शुरू होने के बाद अब स्थानीय स्तर पर नीलामी शुरू होने से किसानों को उपज बेचने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।150 से अधिक गांवों में कपास की बोवनीमनावर विकासखंड के 150 से अधिक गांवों में इस वर्ष किसानों ने करीब 20 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में कपास की बोवनी की है। फसल की आवक शुरू होने के साथ किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार की जरूरत है। स्थानीय मंडी में नीलामी शुरू होने से क्षेत्र के कपास उत्पादकों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।‘कपास किसान’ ऐप से पंजीयनभारतीय कपास निगम लिमिटेड (CCI) ने मध्य प्रदेश के कपास उत्पादक किसानों के लिए ‘कपास किसान’ मोबाइल ऐप शुरू किया है। इसके माध्यम से किसान कपास बेचने के लिए घर बैठे पंजीयन कर सकेंगे। साथ ही संबंधित कृषि उपज मंडी केंद्र पर कपास बिक्री के लिए स्लॉट बुक करने की सुविधा भी उपलब्ध होगी।कपास सीजन 2026-27 के लिए पंजीयन 1 सितंबर से 31 अक्टूबर तक किया जा सकेगा। मंडी सचिव भगत सिंह डावर के अनुसार, पंजीयन में सहायता के लिए किसान व्हाट्सऐप हेल्पलाइन 8269023626 पर संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने क्षेत्र के सभी कपास किसानों से समय पर पंजीयन कराने की अपील की है।और पढ़ें :- गुजरात-तेलंगाना में बारिश की कमी से किसान संकट में

गुजरात-तेलंगाना में बारिश की कमी से किसान संकट में

बारिश की कमी से गुजरात और तेलंगाना में किसानों पर संकटगुजरात के अमरेली से लेकर तेलंगाना के कई इलाकों तक बारिश की कमी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कमजोर मानसून के कारण खरीफ फसलों पर संकट गहरा गया है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।अमरेली जिले के सावरकुंडला पंथक में करीब डेढ़ महीने से बारिश नहीं हुई है। इससे किसानों की कपास की फसल सूखने लगी है। महंगे बीज, खाद और मेहनत से तैयार की गई फसल में उत्पादन की उम्मीद खत्म होने के बाद कई किसानों ने मजबूरी में अपने मवेशियों को खेतों में चरने के लिए छोड़ दिया है। एक किसान ने बताया कि 15 बीघा में कपास की खेती पर एक लाख रुपये से अधिक खर्च करने के बावजूद बारिश न होने से पूरी फसल खराब हो गई। सौराष्ट्र और कच्छ के अन्य हिस्सों में भी कम बारिश के कारण खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचा है।तेलंगाना में भी स्थिति चिंताजनक है। 1 जून से 1 सितंबर के बीच जोगुलम्बा गडवाल जिले के वड्डेपल्ले मंडल में सामान्य से 73%, जबकि नलगोंडा जिले के केथेपल्ले मंडल में 71% बारिश की कमी दर्ज की गई। कई अन्य मंडलों में भी 60% या उससे अधिक बारिश कम हुई है। केथेपल्ले में सामान्य 431.5 मिमी के मुकाबले केवल 124.9 मिमी बारिश हुई।वड्डेपल्ले में बारिश न होने के कारण बीज सूख गए हैं और किसानों को कपास और मिर्च की दोबारा बुआई करनी पड़ रही है। बार-बार बुआई, बीज और ड्रिप इरिगेशन पर उनका खर्च ₹30,000 से ₹50,000 प्रति एकड़ तक बढ़ गया है। किराए पर खेती करने वाले किसानों पर आर्थिक बोझ और भी अधिक है।अब किसानों की उम्मीद सितंबर की बारिश पर टिकी है। विशेषज्ञों के मुताबिक एल नीनो, स्थानीय मौसम प्रणालियां और बारिश के असमान वितरण ने हालात बिगाड़े हैं। यदि जल्द पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो किसानों की फसल और आय पर संकट और गहरा सकता है।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 2 पैसे की कमजोरी के साथ 94.51 पर खुला।

CCI ने कपास बिक्री भाव ₹300 बढ़ाया

CCI ने कपास की बिक्री कीमत ₹300/कैंडी बढ़ाई | मिलों और व्यापारियों की मांग बनी हुई है मज़बूतकॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (CCI) ने 4 सितंबर, 2026 को खत्म हुए हफ़्ते के दौरान अपनी कपास की बिक्री कीमत में ₹300 प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की। इससे घरेलू टेक्सटाइल मिलों और कपास व्यापारियों की ओर से मज़बूत खरीद की दिलचस्पी का संकेत मिलता है।CCI ने इस हफ़्ते 2025–26 की फसल से लगभग 57,000 गांठ कपास बेची, जिसमें नीलामी की ज़्यादातर गतिविधियां हफ़्ते की शुरुआत में ही हुईं।📊 साप्ताहिक बिक्री रिपोर्ट 31 अगस्त, 2026 (सोमवार)CCI ने हफ़्ते की सबसे ज़्यादा बिक्री दर्ज की, जिसमें 46,700 गांठें बिकीं। मिलों ने 19,000 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 27,700 गांठें खरीदीं।1 सितंबर, 2026 (मंगलवार)CCI ने 7,800 गांठें बेचीं, जिसमें मिलों को 5,900 गांठें और व्यापारियों को 1,900 गांठें बेची गईं।2 सितंबर, 2026 (बुधवार)कुल 2,000 गांठें बेची गईं, जिसमें मिलों ने 1,300 गांठें और व्यापारियों ने 700 गांठें खरीदीं।3 सितंबर, 2026 (गुरुवार)CCI ने 400 गांठें बेचीं, जो मिलों और व्यापारियों के बीच बराबर-बराबर यानी *200-200 गांठों* में बंटीं।4 सितंबर, 2026 (शुक्रवार)हफ़्ते का समापन 100 गांठों की बिक्री के साथ हुआ, जिन्हें पूरी तरह से व्यापारियों ने खरीदा।हालिया नीलामियों के बाद, 2025–26 सीज़न के लिए CCI की कुल कपास बिक्री लगभग 94.25 लाख गांठों तक पहुँच गई।

नई फसल के बीच कपास भाव मजबूत

नई फसल की शुरुआती आवक के बावजूद कच्चे कपास की कीमतें मजबूतग्लोबल बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद, देश के कई हिस्सों में खरीफ सीजन की नई कपास फसल की शुरुआती आवक के साथ कच्चे कपास की कीमतें मजबूत बनी हुई हैं। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और गुजरात के कुछ हिस्सों में नई फसल की आवक शुरू हो गई है।केंद्र सरकार ने 2026-27 मार्केटिंग सीजन के लिए मीडियम स्टेपल कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹8,267 प्रति क्विंटल और लॉन्ग स्टेपल कपास का MSP ₹8,667 प्रति क्विंटल तय किया है।रायचूर के सोर्सिंग एजेंट रामानुज दास बूब के अनुसार, रायचूर, बेल्लारी, अडोनी और येमिगनूर जैसे बाजारों में नमी की मात्रा के आधार पर कच्चे कपास की कीमतें ₹9,200-9,500 प्रति क्विंटल के बीच हैं। ये भाव MSP से ऊपर हैं।बूब ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों के मौजूदा रुझान को देखते हुए कच्चे कपास की कीमतें MSP से ऊपर बनी रह सकती हैं।ICE कॉटन फ्यूचर्स की कीमतें करीब 87 सेंट प्रति पाउंड पर हैं, जबकि मंगलवार को यह लगभग 93 सेंट थीं। ICE में गिरावट के बाद भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) को अपनी खरीद कीमतें करीब ₹2,000 प्रति कैंडी (356 किलोग्राम) घटानी पड़ी हैं। वहीं, भारतीय कपास निगम (CCI) ने अपनी कीमतें बरकरार रखी हैं।बूब के मुताबिक, MNCs की ओर से कम कीमतों की पेशकश के बावजूद खरीदार नहीं मिल रहे हैं। यार्न की कमजोर मांग के कारण मिलें भी खरीदारी को लेकर सतर्क हैं और बाजार की दिशा पर नजर रख रही हैं।राजकोट के आनंद पोपट ने बताया कि गुजरात के कुछ हिस्सों में भी सीमित आवक शुरू हो गई है। यहां कीमतें ₹1,900-2,000 प्रति मन (20 किलोग्राम) के आसपास हैं। बुवाई में देरी के कारण आवक एक महीने से अधिक पिछड़ी है और नवंबर की शुरुआत से इसमें तेजी आने की उम्मीद है।फिलहाल नई फसल की आवक करीब 50,000 गांठ प्रति सप्ताह है, जो अगले दो सप्ताह में बढ़कर लगभग 1 लाख गांठ प्रति सप्ताह हो सकती है।कृषि मंत्रालय के 4 सितंबर के आंकड़ों के अनुसार, देश में 109.17 लाख हेक्टेयर में कपास की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 109.87 लाख हेक्टेयर थी।और पढ़ें :- रुपया 02 पैसे गिरकर ₹94.49 प्रति डॉलर पर बंद हुआ

तेलंगाना में कपास बुवाई सामान्य रकबे से आगे.

तेलंगाना में कपास की बुआई सामान्य रकबे से आगे, सोयाबीन और तिलहन भी पिछले साल से अधिकतेलंगाना में खरीफ 2026 सीज़न के दौरान कपास की बुआई सामान्य रकबे से आगे निकल गई है। वहीं, सोयाबीन और कुल तिलहन का रकबा भी पिछले साल की समान अवधि की तुलना में बढ़ा है। तेलंगाना कृषि विभाग के 2 सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में प्रमुख खरीफ फसलों की बुआई की स्थिति में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है।कपास की बुआई सामान्य रकबे से अधिक2 सितंबर तक तेलंगाना में कपास की बुआई 4,822,219 एकड़ (48.22 लाख एकड़) में हो चुकी है। राज्य में कपास का सामान्य रकबा 4,741,541 एकड़ (47.42 लाख एकड़) है। इस तरह कपास की बुआई सामान्य रकबे के 101.70% तक पहुंच गई है।पिछले साल इसी अवधि में कपास की बुआई 4,541,547 एकड़ (45.42 लाख एकड़) में हुई थी। यानी इस साल कपास का रकबा पिछले साल के मुकाबले 280,672 एकड़ (करीब 2.81 लाख एकड़) अधिक है।सोयाबीन का रकबा भी बढ़ासोयाबीन की बुआई 2 सितंबर तक 372,400 एकड़ (3.72 लाख एकड़) में हुई है। हालांकि यह राज्य के सामान्य रकबे 416,656 एकड़ (4.17 लाख एकड़) से कम है, लेकिन सामान्य रकबे का 89.38% हिस्सा कवर हो चुका है।पिछले साल इसी अवधि में सोयाबीन की बुआई 360,385 एकड़ (3.60 लाख एकड़) में हुई थी। इस लिहाज से इस साल सोयाबीन का रकबा 12,015 एकड़ (करीब 0.12 लाख एकड़) बढ़ा है।कुल तिलहन में भी बढ़ोतरीराज्य में कुल तिलहन की बुआई 391,694 एकड़ (3.92 लाख एकड़) तक पहुंच गई है। इसके मुकाबले सामान्य रकबा 447,585 एकड़ (4.48 लाख एकड़) है। यानी अब तक सामान्य रकबे का 87.51% हिस्सा कवर हो चुका है।पिछले साल इसी अवधि में कुल तिलहन की बुआई 368,630 एकड़ (3.69 लाख एकड़) में हुई थी। इस तरह इस साल तिलहन का रकबा 23,064 एकड़ (करीब 0.23 लाख एकड़) अधिक है।मौसम पर रहेगी नजरआने वाले दिनों में मौसम की स्थिति फसलों के विकास के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। मौजूदा पूर्वानुमानों के अनुसार, तेलंगाना में मौसम सामान्यतः गर्म और बारिश अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना है। वहीं, आने वाले सप्ताह में प्रायद्वीपीय भारत में भी बारिश कम रहने का अनुमान है।ऐसे में राज्य में फसल उत्पादन और बाजार की स्थिति को समझने के लिए दो प्रमुख रुझानों पर नजर रहेगी—कपास का रकबा सामान्य स्तर से ऊपर जाना और सोयाबीन व कुल तिलहन का रकबा पिछले साल की समान अवधि से अधिक रहना। मौसम की स्थिति आगे इन फसलों की उत्पादकता और बाजार में उपलब्धता पर असर डाल सकती है।और पढ़ें :- उत्तर भारत में कपास खेती बढ़ाने पर जोर

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