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उत्तर भारत में कपास रकबा 23% घटा

उत्तर भारत में कपास का रकबा 23% घटा, पंजाब सबसे ज्यादा प्रभावितउत्तर भारत के तीन प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों—पंजाब, हरियाणा और राजस्थान—में इस साल कपास की खेती का रकबा करीब 23% घट गया है। पिछले साल तीनों राज्यों में लगभग 11.83 लाख हेक्टेयर में कपास बोई गई थी, जो इस साल घटकर करीब 9.09 लाख हेक्टेयर रह गई है। यानी 2.74 लाख हेक्टेयर या 23.2% की कमी आई है।पंजाब में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। राज्य में कपास का रकबा पिछले साल के करीब 1.28 लाख हेक्टेयर से घटकर इस साल लगभग 80,000 हेक्टेयर रह गया है। यह करीब 48,000 हेक्टेयर या 37.5% की कमी है। बठिंडा, मानसा, मुक्तसर साहिब, फाजिल्का, फरीदकोट और फिरोजपुर जैसे पारंपरिक कपास क्षेत्र अब धीरे-धीरे धान और अन्य फसलों की ओर बढ़ रहे हैं।हरियाणा में कपास का रकबा करीब 3.80 लाख से घटकर 2.95 लाख हेक्टेयर रह गया है। राजस्थान में भी यह 6.55 लाख से घटकर लगभग 5.34 लाख हेक्टेयर हो गया है। हालांकि, तीनों राज्यों में राजस्थान अब भी सबसे बड़ा कपास क्षेत्र है।किसानों के अनुसार, सफेद मक्खी और पिंक बॉलवर्म के हमले, घटती पैदावार, बढ़ती लागत और बाजार की अनिश्चितता ने कपास की खेती को जोखिम भरा बना दिया है। इसके मुकाबले धान में MSP पर खरीद, मंडियों का नेटवर्क और सिंचाई की सुविधा किसानों को अधिक भरोसा देती है।कपास का रकबा बढ़ाने के लिए किसानों को बेहतर बीज, प्रभावी कीट नियंत्रण, अधिक पैदावार, लाभकारी कीमत और भरोसेमंद बाजार उपलब्ध कराना जरूरी होगा।और पढ़ें :- अमरेली में एक माह से बारिश नहीं

अमरेली में एक माह से बारिश नहीं

अमरेली में एक महीने से बारिश नहीं, मूंगफली और कपास की फसलें प्रभावितगुजरात के अमरेली जिले में पिछले करीब एक महीने से बारिश नहीं होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। मानसून की शुरुआत में अच्छी बारिश होने से किसानों को कपास और मूंगफली की अच्छी पैदावार की उम्मीद थी। कई किसानों ने समय पर बुवाई भी कर दी थी।शुरुआत में जिले के कुछ इलाकों में भारी बारिश हुई, जबकि कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश दर्ज की गई। इससे खेतों में पर्याप्त नमी बनी रही और किसानों ने फसल अच्छी होने की उम्मीद जताई। हालांकि, पिछले एक महीने से बारिश नहीं होने के कारण अब फसलों पर पानी की कमी का असर दिखाई देने लगा है।जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है, वे किसी तरह अपनी फसलों को बचा रहे हैं। वहीं, सिंचाई की सुविधा से वंचित किसानों की कपास और मूंगफली की फसलें सूखने लगी हैं। कुछ इलाकों में मूंगफली के पौधे पीले पड़ने लगे हैं।अनियमित बारिश के कारण कुछ किसानों को पहले भी दोबारा बुवाई करनी पड़ी थी। बीज, खाद और मजदूरी पर काफी खर्च करने के बाद अब उन्हें फसल खराब होने का डर सता रहा है। किसानों का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में बारिश नहीं हुई, तो उनकी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो सकती हैं।बारिश की कमी से परेशान किसान सरकार से राहत और आर्थिक सहायता की मांग कर रहे हैं। किसानों को उम्मीद है कि जल्द बारिश होगी और उनकी फसलें बच सकेंगी।और पढ़ें :- अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 95.72 पर स्थिर खुला

सोयाबीन और कपास पर कीटों का हमला, बादल छाए रहने से किसानों की चिंता बढ़ी

सोयाबीन-कपास पर कीटों का हमला, बादलों की मार से बढ़ी किसानों की चिंताजिले में सोयाबीन और कपास की फसलों पर कीटों का प्रकोप बढ़ने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। लगातार बादल छाए रहने और बारिश की कमी से फसलों की बढ़वार भी प्रभावित हो रही है। विकास की अवस्था में पहुंच चुकी दोनों प्रमुख खरीफ फसलों में विभिन्न कीटों का प्रकोप देखा जा रहा है।इस खरीफ सीजन में जिले में 4.18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों की बुवाई की गई है। इनमें 1,19,626 हेक्टेयर में सोयाबीन और 2,31,961 हेक्टेयर में कपास की बुवाई हुई है। जून से अब तक जिले में 446.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है। शुरुआत में बारिश में देरी के कारण बुवाई प्रभावित हुई, जबकि बाद में बारिश होने पर किसानों ने बुवाई पूरी की।वर्तमान में अधिकांश क्षेत्रों में सोयाबीन की फसल 1 से 1.5 फीट तक पहुंच गई है और फूल आने की अवस्था में है। इस पर लीफहॉपर, तना छेदक और तंबाकू की इल्ली का हल्का प्रकोप देखा जा रहा है।वहीं, कपास की फसल 1.5 से 2 फीट तक बढ़ चुकी है। कुछ क्षेत्रों में पत्तियों और फूलों का विकास शुरू हो गया है। कपास में एफिड्स, लीफहॉपर और सफेद मक्खी का हल्का प्रकोप सामने आया है।जिला कृषि अधीक्षक अधिकारी अरविंद उपरिकर ने किसानों को फसलों की नियमित निगरानी करने और कीटों का प्रकोप दिखाई देने पर कृषि विभाग के विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेकर उचित प्रबंधन करने की सलाह दी है।और पढ़ें :-कपास की कीमतें फसल कटाई के दौरान ₹75-80 प्रति किलो रहने की संभावना: TNAU

कपास की कीमतें फसल कटाई के दौरान ₹75-80 प्रति किलो रहने की संभावना: TNAU

कटाई के समय ₹75-80 प्रति किलो रह सकती है कपास की कीमत: TNAUतमिलनाडु एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (TNAU) के डोमेस्टिक एंड एक्सपोर्ट मार्केट इंटेलिजेंस सेल (DEMIC) के अनुसार, आगामी कटाई सीजन में अच्छी गुणवत्ता वाली कपास की कीमत ₹75-80 प्रति किलोग्राम के आसपास रह सकती है।TNAU ने यह अनुमान मूलानूर रेगुलेटेड मार्केट में पिछले 20 वर्षों के कपास कीमतों के विश्लेषण के आधार पर लगाया है। विश्वविद्यालय ने किसानों को सलाह दी है कि वे कपास की बुवाई का निर्णय लेते समय अनुमानित बाजार कीमत को भी ध्यान में रखें।भारत कपास की खेती के क्षेत्रफल के मामले में दुनिया में पहले स्थान पर है, जबकि उत्पादन और खपत में दूसरे स्थान पर है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के 2025-26 के दूसरे अग्रिम अनुमानों के अनुसार, देश में 114.82 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती हुई है। उत्पादन 49.455 लाख टन और उत्पादकता 431 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रहने का अनुमान है।महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, कर्नाटक, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश प्रमुख कपास उत्पादक राज्य हैं।तमिलनाडु में 2024-25 के दौरान 1.02 लाख हेक्टेयर में कपास की खेती हुई। इस दौरान उत्पादन 3.80 लाख टन और उत्पादकता 350 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रही। तिरुवरुर, विरुधुनगर, मयिलादुथुराई, रामनाथपुरम, तिरुचिरापल्ली और सलेम प्रमुख कपास उत्पादक जिले हैं।व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून और प्रमुख उत्पादक राज्यों से होने वाली आवक कपास की कीमतों को प्रभावित कर सकती है। अल-नीनो जैसी जलवायु परिस्थितियों का असर भी मानसून और उत्पादन पर पड़ सकता है। इसलिए वास्तविक बाजार भाव TNAU के अनुमान से अलग हो सकते हैं।

भारत बने वैश्विक कपास बाजार का प्रभावी खिलाड़ी

भारतीय कपास को ग्लोबल मार्केट में कीमत तय करने वाला बनना चाहिए: CCI प्रमुखCCI (कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर ललित कुमार गुप्ता ने शुक्रवार को कोयंबटूर में कहा कि भारत को प्रोडक्टिविटी, क्वालिटी, पारदर्शिता और कीमत तय करने की प्रक्रिया में सुधार करके ग्लोबल कॉटन मार्केट में कीमत तय करने वाला (प्राइस इन्फ्लुएंसर) बनने का लक्ष्य रखना चाहिए।इंडियन कॉटन फेडरेशन और इंडियन कॉटन एसोसिएशन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित कॉटन पर एक कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करते हुए गुप्ता ने कहा कि भारत में ग्लोबल स्तर पर कॉम्पिटिटिव कॉटन प्रोड्यूसर बनने की क्षमता है, लेकिन अभी इसका प्रोडक्शन घरेलू खपत की ज़रूरतों को पूरा नहीं करता है।'मिशन ऑन कॉटन' के तहत, पहले साल में प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए लगभग पांच लाख हेक्टेयर ज़मीन का लक्ष्य रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि 25,000 हेक्टेयर में हाई-डेंसिटी प्लांटिंग के ट्रायल में प्रति एकड़ 15 क्विंटल सीड कॉटन (बिनौले वाली कपास) की पैदावार दर्ज की गई है।गुप्ता ने ज़ोर दिया कि भारतीय कपास को लगातार अच्छी क्वालिटी और मिलावट-मुक्त फाइबर के लिए ग्लोबल ज़रूरतों को पूरा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री को मिलावट कम करने के लिए मिलकर काम करना होगा।उन्होंने बेहतर कीमत तय करने के लिए ज़्यादा पारदर्शिता और भरोसेमंद डेटा की भी मांग की। उन्होंने कहा, "हमें असल डेटा की ज़रूरत है, और इस जानकारी को पूरे सिस्टम के साथ जोड़ा जाना चाहिए।"CCI ने मौजूदा कॉटन सीज़न के दौरान 105 लाख गांठें (बेल्स) खरीदीं और 94 लाख गांठें बेचीं। अभी इसके पास लगभग 17 लाख गांठें हैं।इंटरनेशनल टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरर्स फेडरेशन के पूर्व प्रेसिडेंट के.वी. श्रीनिवासन ने कहा कि ब्राज़ील, अमेरिका और चीन से मुकाबला करने के लिए भारत को कॉटन की पैदावार में टेक्नोलॉजी-आधारित बढ़ोतरी की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कुल कॉटन उगाने वाले इलाके का लगभग 38% हिस्सा भारत में है, इसलिए ज़्यादा पैदावार से देश को दुनिया का सबसे बड़ा कॉटन प्रोड्यूसर बनने में मदद मिल सकती है।और पढ़ें :- अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 11 पैसे गिरकर ₹95.75 पर बंद हुआ

CCI ने कपास के भाव ₹600 बढ़ाए

CCI ने कपास की कीमतें ₹600 प्रति कैंडी बढ़ाईं; साप्ताहिक नीलामी में बिक्री 1.03 लाख गांठों के पारकॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (CCI) ने 21 अगस्त, 2026 को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान कपास की बिक्री कीमतों में ₹600 प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की। यह बढ़ोतरी टेक्सटाइल मिलों और कपास व्यापारियों की ओर से लगातार मजबूत मांग को दर्शाती है।इस सप्ताह के दौरान, CCI ने 2025–26 की फसल से लगभग 1,03,600 गांठ कपास बेची, जिसमें नीलामी की सबसे अधिक मात्रा बुधवार को दर्ज की गई।साप्ताहिक बिक्री रिपोर्ट 17 अगस्त, 2026 (सोमवार)CCI ने सप्ताह की शुरुआत 2,400 गांठों की बिक्री के साथ की। टेक्सटाइल मिलों ने 700 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 1,700 गांठें उठाईं।18 अगस्त, 2026 (मंगलवार)मंगलवार की नीलामी के दौरान 3,700 गांठें बेची गईं। मिलों ने 2,800 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 900 गांठें खरीदीं।19 अगस्त, 2026 (बुधवार)CCI ने बुधवार को 13,900 गांठें बेचीं। खरीद में मिलों का दबदबा रहा, जिन्होंने 7,200 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 6,700 गांठें खरीदीं।20 अगस्त, 2026 (गुरुवार)नीलामी की गतिविधि तेज हुई और कुल बिक्री बढ़कर 41,600 गांठें हो गई। मिलों ने 23,800 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 17,800 गांठें खरीदीं।21 अगस्त, 2026 (शुक्रवार)सप्ताह की नीलामी 42,000 गांठों की सर्वाधिक बिक्री के साथ संपन्न हुई। मिलों ने 27,200 गांठें खरीदीं और व्यापारियों ने 14,800 गांठें खरीदीं।हालिया नीलामियों के बाद, 2025–26 सीज़न के लिए CCI की कुल कपास बिक्री लगभग 93,25,000 गांठों तक पहुंच गई, जो घरेलू टेक्सटाइल मिलों और कपास व्यापारियों दोनों की ओर से लगातार मजबूत मांग को उजागर करती है।

कपास और तिलहन बुवाई पिछले साल से पीछे

कपास-तिलहन की बुआई पिछड़ी, अब बारिश पर टिकी किसानों की उम्मीदखरीफ सीजन में कपास और तिलहन की बुआई 21 अगस्त तक पिछले साल की समान अवधि से थोड़ी पीछे रही है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, कपास की बुआई 108.45 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि सामान्य क्षेत्र 125.51 लाख हेक्टेयर है। पिछले साल यह आंकड़ा 108.73 लाख हेक्टेयर था, यानी इस साल रकबा 0.28 लाख हेक्टेयर कम है।तिलहन की कुल बुआई 188.38 लाख हेक्टेयर रही, जो 200.08 लाख हेक्टेयर के सामान्य क्षेत्र का 94.15% है। पिछले साल 188.69 लाख हेक्टेयर की तुलना में इसमें 0.31 लाख हेक्टेयर की मामूली कमी आई है।तिलहन में सबसे अहम सोयाबीन का रकबा 121.35 लाख हेक्टेयर है, जो पिछले साल के 122.76 लाख हेक्टेयर से 1.41 लाख हेक्टेयर कम है। हालांकि मूंगफली, तिल और सूरजमुखी में बढ़ोतरी हुई है। मूंगफली 48.79, तिल 10.81 और सूरजमुखी 1.10 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा है। वहीं अरंडी का रकबा घटकर 5.88 लाख हेक्टेयर रह गया।IMD के अनुसार मध्य भारत में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में व्यापक बारिश और पूर्वी मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ में अगले कुछ दिनों तक बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं। बारिश से खेतों में नमी को फायदा मिलेगा, लेकिन भारी बारिश वाले इलाकों में जलभराव और जलनिकासी किसानों के लिए चुनौती बन सकती है।आने वाले दिनों में बारिश, फसल की बढ़वार और अंतिम बुआई आंकड़े तय करेंगे कि शुरुआती रकबा कमी का उत्पादन पर कितना असर पड़ता है।और पढ़ें :- US डॉलर के मुकाबले रुपया 04 पैसे गिरकर ₹95.70 पर बंद हुआ

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उत्तर भारत में कपास रकबा 23% घटा 25-08-2026 13:37:15 view
अमरेली में एक माह से बारिश नहीं 25-08-2026 13:07:58 view
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 95.72 पर स्थिर खुला 25-08-2026 09:33:06 view
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