तेलंगाना में अक्टूबर से शुरू होने वाले कपास कटाई सीजन को लेकर किसानों में मिश्रित स्थिति है। इस वर्ष उत्पादन में 5 से 10 प्रतिशत तक वृद्धि का अनुमान लगाया गया है, जिससे कुल उत्पादन 53–55 लाख गांठ तक पहुँच सकता है। इससे तेलंगाना देश का तीसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादक राज्य बना रह सकता है।
हालांकि अच्छी पैदावार की उम्मीद के बावजूद किसान बारिश से हुए नुकसान और घटती कीमतों को लेकर चिंतित हैं। अगस्त के अंत में हुई भारी बारिश के कारण फसल में बॉल रॉट (कवक जनित रोग) फैल गया, जिससे कई क्षेत्रों में 20–30 प्रतिशत तक उत्पादन घटने की आशंका है।
बाजार में भी कपास की कीमतें किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। वारंगल जैसे मंडियों में कपास MSP ₹8,110 प्रति क्विंटल से ₹900–₹1,000 कम पर बिक रहा है। कुछ जगहों पर कीमतें ₹7,440 प्रति क्विंटल तक दर्ज की गई हैं।
कुमारमभीम–आसिफाबाद जैसे जिलों में आवक अभी शुरू भी नहीं हुई है, जबकि वारंगल के एनुमामुला मार्केट यार्ड में सीमित आवक के बीच व्यापार चल रहा है। भारतीय कपास निगम (CCI) की खरीद अभी पूरी तरह शुरू नहीं होने से किसान खुले बाजार में कम कीमत पर बिक्री करने को मजबूर हैं।
कृषि विभाग के अनुसार, इस बार शुरुआती मानसून अच्छी बारिश के कारण लगभग 99% क्षेत्र में बुवाई पूरी हो गई थी, लेकिन बाद की बारिश ने फसल को नुकसान पहुँचाया। आदिलाबाद और वारंगल जैसे क्षेत्रों में प्रति एकड़ औसत उपज घटकर 6–9 क्विंटल रह गई है, जबकि सामान्य स्थिति में यह 10–12 क्विंटल होती है।
राज्य सरकार ने CCI से MSP पर खरीद सुनिश्चित करने और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। डिजिटल पंजीकरण, “कपास किसान” ऐप, टोल-फ्री हेल्पलाइन और निगरानी समितियों जैसी व्यवस्थाएँ भी लागू की जा रही हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर भी कपास उत्पादन 2025-26 में बढ़कर 325–340 लाख गांठ तक पहुँचने का अनुमान है, हालांकि रकबे में थोड़ी कमी दर्ज की गई है।
कुल मिलाकर, तेलंगाना में उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन मौसम और बाजार दोनों ही किसानों के लिए चुनौती बने हुए हैं।
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