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अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 36 पैसे गिरकर 94.82 पर बंद हुआ।

गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 36 पैसे कमजोर होकर 94.82 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ।घरेलू मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.46 रुपये पर खुली और पूरे ट्रेडिंग सेशन के दौरान इसमें उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अंत में यह 94.82 रुपये पर बंद हुई, जो शुरुआती स्तर से 36 पैसे कम है।मार्केट बंद होने पर, सेंसेक्स 460.30 अंक या 0.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,249.39 पर, और निफ्टी 123.70 अंक या 0.54 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,687.65 पर बंद हुआ। लगभग 1323 शेयरों में तेजी आई, 2670 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, और 155 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।और पढ़ें :- आदिलाबाद में सूखे से कपास उत्पादन पर खतरा

आदिलाबाद में सूखे से कपास उत्पादन पर खतरा

तेलंगाना के आदिलाबाद में सूखे से कपास की फसल पर संकट, पैदावार घटने से किसानों को नुकसान की आशंकाआदिलाबाद, तेलंगाना: तेलंगाना के आदिलाबाद जिले में बारिश की कमी और उच्च तापमान के कारण कपास की फसल प्रभावित हो रही है। खेतों में नमी की कमी से कई स्थानों पर कपास के पौधे सूखने लगे हैं। किसानों को आशंका है कि पर्याप्त बारिश नहीं होने से इस सीजन में उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।जिले में लगभग 4.30 लाख एकड़ क्षेत्र में कपास की खेती की गई है। लंबे समय तक पर्याप्त बारिश नहीं होने से कई गांवों में फसल की स्थिति खराब हुई है। हालांकि, मिट्टी की प्रकृति, बारिश की मात्रा और सिंचाई सुविधाओं के आधार पर नुकसान का स्तर अलग-अलग है।कपास की पैदावार में गिरावट की आशंकाआदिलाबाद ग्रामीण मंडल के तंथोली गांव के किसान करेनीवाल गोपाल ने बताया कि उन्होंने छह एकड़ में कपास की खेती की है। सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें उत्पादन कम रहने की आशंका है। गोपाल के अनुसार, सिंचाई सुविधा से वंचित किसानों की पैदावार घटकर लगभग दो क्विंटल प्रति एकड़ रह सकती है।किसानों का कहना है कि काली मिट्टी में नमी अधिक समय तक बनी रहती है, जिससे लाल मिट्टी की तुलना में कपास की फसल बेहतर स्थिति में है।कपास की कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीदकिसानों को उम्मीद है कि कपास की कीमतें मूल रिपोर्ट में बताए गए 8,667 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से बढ़कर 10,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच सकती हैं। हालांकि, कीमतों में इतनी बढ़ोतरी होगी या नहीं, यह बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।इस बीच, कृषि विभाग ने सूखे की स्थिति पर प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंप दी है।मूल रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र की सिंचाई परियोजनाओं में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ रही है। जल भंडार को पेयजल जरूरतों के लिए सुरक्षित रखने पर जोर दिया जा रहा है।और पढ़ें :- तेलंगाना के 66% सर्वेक्षित किसान HTBt कपास बीज इस्तेमाल करते हैं

तेलंगाना के 66% सर्वेक्षित किसान HTBt कपास बीज इस्तेमाल करते हैं

तेलंगाना में 66% सर्वेक्षित किसान कर रहे HTBt कपास के बीजों का इस्तेमाल, अध्ययन में खुलासाहैदराबाद, तेलंगाना: तेलंगाना में हर्बिसाइड-टॉलरेंट बीटी (HTBt) कपास के बीजों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हो रहा है। एक अध्ययन के अनुसार, राज्य में सर्वेक्षण में शामिल लगभग 66 प्रतिशत किसान इन बीजों का उपयोग कर रहे हैं। हालांकि, भारत में HTBt कपास की व्यावसायिक खेती को अभी तक आधिकारिक मंजूरी नहीं मिली है।साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (SABC) ने फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (FSII) और नेशनल सीड एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NSAI) के सहयोग से यह अध्ययन किया है। इसमें HTBt कपास की अनधिकृत खेती, इसके विस्तार और संभावित प्रभावों का विश्लेषण किया गया है।देश में HTBt कपास का बढ़ता रकबाअध्ययन के अनुसार, देश में कपास की खेती के कुल क्षेत्रफल के लगभग 24 से 30 प्रतिशत हिस्से में HTBt कपास की खेती होने का अनुमान है। इसके अनधिकृत बीज बाजार का मूल्य लगभग 820 से 880 करोड़ रुपये आंका गया है।अध्ययन में जांचे गए 98.2 प्रतिशत नमूनों में कम से कम एक आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) गुण पाया गया। वहीं, 72.7 प्रतिशत नमूनों में ग्लाइफोसेट सहनशीलता से संबंधित CP4EPSPS प्रोटीन और 53.7 प्रतिशत नमूनों में कीट प्रतिरोध से संबंधित Vip3A प्रोटीन की मौजूदगी दर्ज की गई।खरपतवार नियंत्रण पर खर्च में बचतमजदूरों की कमी और खरपतवार नियंत्रण की बढ़ती लागत के कारण किसान HTBt कपास की ओर आकर्षित हो रहे हैं। सर्वेक्षण में शामिल कई किसानों ने खरपतवार नियंत्रण के खर्च में 60 से 80 प्रतिशत तक बचत होने की जानकारी दी।हालांकि, कृषि वैज्ञानिक जी.वी. रामंजनेयुलु के अनुसार, हर्बिसाइड सहनशीलता सीधे तौर पर पैदावार बढ़ाने वाला गुण नहीं है।विशेषज्ञों ने ग्लाइफोसेट के संभावित स्वास्थ्य और पर्यावरणीय जोखिमों पर चिंता जताई है। उन्होंने HTBt कपास को मंजूरी देने से पहले स्वतंत्र वैज्ञानिक मूल्यांकन, बीज आपूर्ति की निगरानी और किसानों के लिए सुरक्षित विकल्प सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई है।

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 32 पैसे मजबूत होकर 94.46 पर बंद हुआ।

बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 32 पैसे मजबूत हुआ और ₹94.46 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।घरेलू मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ₹94.78 पर खुली और पूरे ट्रेडिंग सेशन के दौरान इसमें उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अंत में यह ₹94.46 पर बंद हुई, जो शुरुआती स्तर से 32 पैसे ऊपर है।मार्केट बंद होने पर, सेंसेक्स 143.21 अंक या 0.19 प्रतिशत गिरकर 73,709.69 पर आ गया, और निफ्टी 77.60 अंक या 0.34 प्रतिशत गिरकर 22,811.35 पर बंद हुआ। लगभग 884 शेयरों में तेजी आई, 3361 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, और 157 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 14 पैसे की मजबूती के साथ 94.78 पर खुला।

दशहरे पर कड़ी में कपास की नीलामी शुरू

गुजरात: दशहरे पर कड़ी कॉटन मार्केट यार्ड में कपास की नीलामी शुरू, पहले दिन 800 मन से अधिक आवककड़ी (गुजरात): दशहरे के अवसर पर गुजरात के कड़ी स्थित सरदार पटेल कॉटन मार्केट यार्ड में नए कपास सीजन की खरीद-बिक्री और नीलामी का शुभारंभ हुआ। सीजन के पहले दिन मार्केट यार्ड में 800 मन से अधिक कपास की आवक दर्ज की गई। नीलामी के दौरान कपास की गुणवत्ता के अनुसार भाव ₹700 से ₹1,933 प्रति मन के बीच रहे।आसपास के क्षेत्रों से कपास लेकर पहुंचे किसाननए सीजन की शुरुआत के साथ कड़ी, विरमगाम, डेट्रोज, पाटड़ी, साणंद, सुरेंद्रनगर, पाटन और बेचाराजी सहित आसपास के क्षेत्रों से किसान अपनी कपास की उपज लेकर मार्केट यार्ड पहुंचे। कपास की नीलामी शुरू होने से किसानों और व्यापारियों में उत्साह देखने को मिला।नीलामी में कपास की गुणवत्ता के आधार पर अलग-अलग कीमतें मिलीं। बेहतर गुणवत्ता वाली कपास को अपेक्षाकृत ऊंचे भाव मिलने से बाजार में सकारात्मक माहौल रहा।नीलामी के शुभारंभ पर एपीएमसी पदाधिकारी रहे मौजूदउद्घाटन कार्यक्रम में एपीएमसी के चेयरमैन गोविंद पटेल, वाइस चेयरमैन हिमांशु खमार और सचिव कमलेश त्रिवेदी सहित कई निदेशक उपस्थित रहे। इसके अलावा स्थानीय जिनिंग मिल संचालकों और कपास व्यापारियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।दिवाली तक कपास की आवक बढ़ने की उम्मीदकड़ी मार्केट यार्ड में कपास की खरीद-बिक्री शुरू होने से स्थानीय जिनिंग और तेल मिल उद्योगों में कारोबारी गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। आने वाले दिनों में कपास की आवक में तेजी आने और दिवाली तक स्थानीय मिलों में कामकाज बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।कड़ी गुजरात के प्रमुख कपास व्यापार केंद्रों में से एक है। यहां गुजरात के अलावा महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश से भी कपास की आवक होती है। मुख्य सीजन के दौरान प्रतिदिन 400 से अधिक वाहन यार्ड पहुंचने की जानकारी दी गई है।नए सीजन की शुरुआत से किसानों, व्यापारियों और जिनिंग उद्योग से जुड़े लोगों में उत्साह है। हालांकि, आगामी दिनों में कपास की कीमतें बाजार की मांग, गुणवत्ता और आवक की स्थिति पर निर्भर करेंगी।और पढ़ें :- महाराष्ट्र में बारिश की कमी से कपास की फसल प्रभावित, उपज घटने की आशंका

महाराष्ट्र में बारिश की कमी से कपास की फसल प्रभावित, उपज घटने की आशंका

महाराष्ट्र में बारिश की कमी से कपास की फसल प्रभावित, उत्पादन में भारी गिरावट की आशंकामहाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ के कई कपास उत्पादक क्षेत्रों में बारिश की कमी और अधिक तापमान के कारण फसल प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं होने से कपास के पौधों की बढ़वार प्रभावित हुई है। कई स्थानों पर कपास के टिंडे समय से पहले फटने की जानकारी भी मिली है। इससे किसानों को उत्पादन में गिरावट और आर्थिक नुकसान की आशंका सता रही है।बारिश की कमी से फसल की बढ़वार प्रभावितप्राप्त जानकारी के अनुसार, अगस्त और सितंबर के दौरान कुछ कपास उत्पादक क्षेत्रों में लंबे समय तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई। इसके कारण मिट्टी में नमी की कमी हो गई और कपास के टिंडों का विकास प्रभावित हुआ। अक्टूबर में अधिक तापमान के बीच कुछ क्षेत्रों में सामान्य समय से पहले ही कपास की तुड़ाई शुरू होने की खबरें हैं।किसानों के अनुसार, पर्याप्त पानी नहीं मिलने से कई खेतों में कपास के पौधे सूखने लगे हैं। इससे आगामी तुड़ाई में भी उत्पादन कम रहने की आशंका जताई जा रही है।प्रति एकड़ उत्पादन में भारी गिरावट की आशंकामराठवाड़ा के जालना जिले के मंथा तालुका स्थित अंभोरा जहागीर गांव के किसान नारायण अटोले के अनुसार, उनके खेत में सामान्य वर्षों में प्रति एकड़ आठ से नौ क्विंटल कपास का उत्पादन होता था। हालांकि, इस वर्ष बारिश की कमी के कारण केवल दो से तीन क्विंटल उत्पादन होने का अनुमान है।वहीं, कुछ अन्य प्रभावित क्षेत्रों के किसानों ने पहली तुड़ाई में प्रति एकड़ एक से डेढ़ क्विंटल कपास मिलने की बात कही है। हालांकि, पहली तुड़ाई में प्राप्त कपास की मात्रा पूरे सीजन के अंतिम उत्पादन को नहीं दर्शाती है।खेती की लागत निकालना मुश्किलकपास उत्पादन घटने की आशंका से किसानों की आर्थिक चिंता बढ़ गई है। बीज, खाद, कीटनाशक, छिड़काव और मजदूरी पर खर्च करने के बावजूद अपेक्षित पैदावार नहीं मिलने से खेती की लागत निकालना मुश्किल हो सकता है।प्रभावित किसानों ने राज्य सरकार से खेतों का सर्वेक्षण कराने, फसल नुकसान का उचित आकलन करने और पात्र किसानों को जल्द आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।और पढ़ें :- अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 06 पैसे गिरकर 94.92 पर बंद हुआ।

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 06 पैसे गिरकर 94.92 पर बंद हुआ।

सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 06 पैसे कमजोर हुआ और ₹94.92 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।घरेलू मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ₹94.86 पर खुली और पूरे ट्रेडिंग सेशन के दौरान इसमें उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अंत में यह ₹94.92 पर बंद हुई, जो शुरुआती स्तर से 06 पैसे कम है।मार्केट बंद होने पर, सेंसेक्स 876.37 अंक या 1.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,852.90 पर, और निफ्टी 257.20 अंक या 1.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,888.95 पर बंद हुआ। लगभग 1163 शेयरों में तेजी आई, 2925 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, और 181 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।और पढ़ें :- कपड़ा उद्योग के कौशल विकास के लिए ₹25,000 करोड़ की योजना प्रस्तावित

कपड़ा उद्योग के कौशल विकास के लिए ₹25,000 करोड़ की योजना प्रस्तावित

टेक्सटाइल निर्यात बढ़ाने के लिए सरकार की बड़ी तैयारी, 25,000 करोड़ रुपये की कौशल विकास पहल का प्रस्तावनई दिल्ली: केंद्र सरकार देश के टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग को मजबूत बनाने के लिए अगले पांच वर्षों में 25,000 करोड़ रुपये की कौशल विकास पहल शुरू करने पर विचार कर रही है। इस प्रस्तावित योजना का उद्देश्य श्रमिकों को आधुनिक तकनीक और उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित करना है, ताकि भारतीय कपड़ा उद्योग की उत्पादन क्षमता और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाई जा सके।सूत्रों के अनुसार, सरकार इस पहल के माध्यम से बड़ी संख्या में कुशल श्रमिक तैयार करना चाहती है। वैश्विक व्यापार में बढ़ती अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह कदम भारतीय टेक्सटाइल उद्योग की विनिर्माण क्षमता और निर्यात को मजबूत बनाने में मददगार साबित हो सकता है।समर्थ 2.0 के तहत कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावावित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में घोषित 'समर्थ 2.0' का उद्देश्य मौजूदा कौशल विकास व्यवस्था को आधुनिक बनाना है। इसके तहत उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की योजना है। साथ ही, श्रमिकों को आधुनिक मशीनों और नई उत्पादन तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षण देने पर जोर रहेगा।पिछली योजना के मुकाबले प्रस्तावित राशि में बड़ी बढ़ोतरीसमर्थ 2.0 के लिए प्रस्तावित 25,000 करोड़ रुपये की राशि पिछली योजना के मुकाबले काफी अधिक है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, समर्थ 1.0 के तहत मार्च 2026 तक के पांच वर्षों में टेक्सटाइल श्रमिकों के कौशल विकास पर लगभग 740 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 300 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।कैबिनेट की मंजूरी का इंतजारसूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय के प्रस्ताव की व्यय वित्त समिति (Expenditure Finance Committee) समीक्षा कर चुकी है। अब इसे अंतिम मंजूरी के लिए जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने पेश किया जा सकता है।यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो इससे टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग में कुशल श्रमिकों की उपलब्धता बढ़ने के साथ उत्पादन क्षमता, रोजगार के अवसरों और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होने की उम्मीद है।और पढ़ें :- ऊंची लागत और बढ़ती मांग से सूती धागा बाजार मजबूत

ऊंची लागत और बढ़ती मांग से सूती धागा बाजार मजबूत

कच्चे कपास की ऊंची लागत और बेहतर मांग से भारतीय सूती धागा बाजार को समर्थनभारतीय सूती धागा बाजार में कच्चे कपास की ऊंची लागत और बुनाई उद्योग की मांग में सुधार के कारण मजबूती के संकेत मिल रहे हैं। उत्तर भारत की मंडियों में कपास की सीमित आवक और कताई मिलों की बढ़ती उत्पादन लागत के कारण सूती धागे की कीमतों को समर्थन मिल रहा है। हालांकि, विभिन्न प्रकार के धागों की मांग में अंतर बना हुआ है।कच्चे कपास की कीमतों का असरकच्चे कपास की कीमतों में मजबूती से कताई मिलों की उत्पादन लागत पर दबाव बना हुआ है। इसके चलते मिलें सूती धागे की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी कर अतिरिक्त लागत की भरपाई करने का प्रयास कर रही हैं। विशेष रूप से बुनाई उद्योग में इस्तेमाल होने वाले कुछ प्रमुख धागों की मांग बेहतर बताई जा रही है। हालांकि, सामान्य और कम मांग वाले धागों के कारोबार में कीमतों को लेकर मोलभाव जारी है।कपास की आवक और बाजार की मांगउत्तर भारत की कपास मंडियों में दैनिक आवक सीमित रहने की खबरों के बीच कताई मिलों के लिए कच्चे माल की उपलब्धता महत्वपूर्ण बनी हुई है। दूसरी ओर, बुनाई इकाइयों की खरीदारी में सुधार से सूती धागा बाजार को समर्थन मिल रहा है।हालांकि, निर्यात मांग अभी भी चुनिंदा बाजारों तक सीमित बताई जा रही है। घरेलू खरीदार भी बड़ी मात्रा में अग्रिम खरीदारी करने के बजाय अपनी तत्काल जरूरत के अनुसार स्टॉक बढ़ाने को प्राथमिकता दे रहे हैं।नई फसल और सरकारी खरीद पर नजरअक्टूबर के दौरान कपास की नई फसल की कटाई और मंडियों में आवक की गति बाजार की आगामी दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। भारतीय कपास निगम (CCI) द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की स्थिति भी घरेलू कपास बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।और पढ़ें :- आदिलाबाद मंडी में 22 अक्टूबर से कपास की खरीद, 11 केंद्र तैयार

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