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₹600 करोड़ का ‘कपास क्रांति मिशन’, उत्पादन बढ़ाने पर केंद्र का फोकस

2025-10-18 19:30:47
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केंद्र का ‘कपास क्रांति मिशन’: ₹600 करोड़ से बढ़ेगी उत्पादन और गुणवत्ता


केंद्र सरकार ने उच्च उपज और लंबे रेशे वाली कपास को बढ़ावा देने के लिए ₹600 करोड़ का ‘कपास क्रांति मिशन’ शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और बेहतर विस्तार सेवाओं के जरिए कपास उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार लाना है।


महाराष्ट्र, खासकर अकोला क्षेत्र में किसानों द्वारा अपनाई गई हाई डेंसिटी प्लांटिंग (HDP) तकनीक से अच्छी पैदावार के परिणाम मिले हैं। अब सरकार इसी मॉडल को तेलंगाना के उपयुक्त क्षेत्रों में लागू करने की योजना बना रही है। इसके तहत किसानों को महाराष्ट्र ले जाकर प्रशिक्षण दिया जाएगा, उन्हें बेहतर बीज उपलब्ध कराए जाएंगे और आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।


केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने बताया कि किसानों के लिए अकोला में फसल कटाई के बाद अध्ययन दौरे भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि वे सफल खेती के तरीकों को करीब से समझ सकें।


तेलंगाना में फिलहाल करीब 24 लाख किसान कपास की खेती से जुड़े हैं। खरीद प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए दिवाली के बाद लगभग 122 खरीद केंद्र शुरू किए जाएंगे। साथ ही, पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हर केंद्र पर जिला कलेक्टर की निगरानी में समितियां बनाई जा रही हैं, जिनमें अधिकारी, पुलिस, राजस्व विभाग और किसान प्रतिनिधि शामिल होंगे।

किसानों की सुविधा के लिए ‘कपास किसान ऐप’ भी लॉन्च किया जा रहा है, जो दिवाली के बाद शुरू होगा। इसके जरिए किसान अपनी उपज बेचने के लिए स्लॉट बुक कर सकेंगे, समय तय कर सकेंगे और बिचौलियों से बचते हुए सीधे MSP पर बिक्री कर पाएंगे।

जागरूकता बढ़ाने के लिए सरकार नौ भाषाओं में प्रचार अभियान चला रही है, जिसमें सोशल मीडिया, व्हाट्सएप, वीडियो और प्रिंट माध्यम शामिल हैं। कृषि अधिकारी गांव-गांव जाकर किसानों को ऐप के उपयोग और पंजीकरण में मदद कर रहे हैं, जबकि तकनीक-प्रेमी युवा भी इस प्रक्रिया में सहयोग दे रहे हैं।


तेलंगाना में 345 जिनिंग केंद्रों को अधिसूचित किया गया है और CCI के साथ समन्वय किया जा रहा है। वहीं, केंद्र सरकार ने पिछले वर्षों में कपास खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि की है—2004-14 के बीच 173 लाख गांठ के मुकाबले 2014-24 में 473 लाख गांठ की खरीद की गई, जिस पर ₹1.37 लाख करोड़ खर्च हुए।


पिछले एक दशक में MSP भी लगभग दोगुना किया गया है। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में ही केंद्र ने करीब ₹65,000 करोड़ की कपास खरीद की है।


सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नकली बीज, गड़बड़ी करने वाली जिनिंग मिलों और बिचौलियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। दोषियों पर कानूनी कार्रवाई के साथ लाइसेंस रद्द किए जा रहे हैं, ताकि किसानों को पारदर्शी और निष्पक्ष बाजार मिल सके।


और पढ़ें :- ई-नीलामी से CCI ने बेची 89% कपास





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