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तेलंगाना में बारिश की कमी, खरगोन में फिर बारिश का खतरा

तेलंगाना में बारिश की कमी, खरगोन में फिर बारिश की आशंकातेलंगाना में बारिश की कमी से किसानों की फसलें प्रभावित हो रही हैं, जबकि मध्य प्रदेश के खरगोन में हाल की बारिश के बाद फिर बारिश की संभावना ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। दोनों क्षेत्रों में मौसम की स्थिति खेती के लिए चुनौती बनी हुई है।तेलंगाना के 66 वर्षीय किसान पी. नरसी रेड्डी के पास पांच एकड़ में धान की फसल कटाई के लिए तैयार थी। बारिश नहीं होने और सिंचाई का पक्का स्रोत उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्होंने फसल को जानवरों के चरने के लिए छोड़ दिया। सब्जियों की खेती के लिए तैयार चार एकड़ जमीन भी खाली छोड़नी पड़ी। नरसी रेड्डी के मुताबिक, इस बार एक एकड़ कपास से करीब एक क्विंटल पैदावार की उम्मीद है, जबकि सामान्य तौर पर 10 से 11 क्विंटल तक उत्पादन होता है।नरसी रेड्डी ने बताया कि कृषि विभाग ने बिना पक्के जल स्रोत के धान की खेती नहीं करने की सलाह दी थी। उनके मुताबिक, मौसम विभाग के पूर्वानुमान के कारण किसानों को बारिश की उम्मीद थी। उन्होंने बताया कि उनका बैंक कर्ज करीब 8 लाख रुपये हो चुका है। किसान के अनुसार, ऋण माफी योजनाओं के तहत पिछली बीआरएस सरकार के समय 1 लाख रुपये और कांग्रेस सरकार के समय 2 लाख रुपये तक की सीमा के कारण उन्हें कर्ज से पूरी राहत नहीं मिली।खम्मम जिले के मद्दीपल्ली गांव के किसान दुग्गी कृष्णा ने तीन एकड़ में कपास बोई है। बारिश की कमी से फसल सूखने लगी है और फिलहाल फसल फली बनने की अवस्था में है। हाल की हल्की बारिश से कुछ राहत मिली है। कृष्णा के मुताबिक, बीज और अन्य कृषि सामग्री उन्होंने निजी डीलरों से खरीदी थी। बाजार भाव अधिक होने के बावजूद उन्हें अपनी उपज उन्हीं डीलरों को बेचनी होगी।वहीं, वज्जा रामा राव ने बताया कि किसानों को बारिश पर निर्भर फसलों की खेती की सलाह दी गई, लेकिन जरूरी बीज उपलब्ध नहीं कराए गए।दूसरी ओर, खरगोन में फिलहाल बारिश थम गई है। बुधवार सुबह तेज धूप निकलने से खेतों के निचले हिस्सों में जमा पानी उतरने लगा। जिले में अब तक 29.1 इंच बारिश हुई है, जबकि सालाना औसत 32.6 इंच है। खरगोन और गोगावां में औसत बारिश का कोटा पूरा हो चुका है।मौसम विभाग के अनुसार, 17 सितंबर से पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की संभावना है। किसानों को आशंका है कि दोबारा तेज बारिश होने पर कपास और सोयाबीन को नुकसान बढ़ सकता है। लगातार नमी के कारण कुछ क्षेत्रों में कपास में कीटों की समस्या भी सामने आ रही है।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 7 पैसे की मजबूती के साथ 95.89 पर खुला।

बारिश से बड़वानी में कपास जलमग्न

बड़वानी: बारिश से 100 एकड़ कपास जलमग्न, किसानों ने मांगा मुआवजाबड़वानी। लंबे इंतजार के बाद हुई बारिश ने जहां किसानों को राहत दी, वहीं अंजड़ क्षेत्र के किसानों के लिए यह बारिश परेशानी का कारण बन गई। रातभर हुई बारिश के बाद क्षेत्र के कई खेतों में करीब दो फीट तक पानी भर गया। खेतों में खड़ी कपास की फसल पानी में डूब गई है। किसानों को 100 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फसल खराब होने की आशंका है।जलभराव से बढ़ी किसानों की चिंताकिसान कमल सिंह सोलंकी ने बताया कि यदि दो-तीन दिन तक खेतों से पानी नहीं निकला और इसके बाद तेज धूप निकल गई, तो कपास की फसल खराब होने की आशंका बढ़ जाएगी। किसानों के अनुसार, जलभराव के कारण बड़ी मात्रा में कपास की फसल प्रभावित हुई है। हालांकि, वास्तविक नुकसान का आकलन प्रशासनिक सर्वे के बाद ही हो सकेगा।चार महीने की मेहनत पर संकटकिसान अनशुल पाटीदार ने बताया कि सड़क के आसपास उनकी करीब 40 एकड़ जमीन है। चार महीने की मेहनत के बाद कपास की फसल तैयार हुई थी, लेकिन बारिश का पानी खेतों में भरने से फसल खराब होने का खतरा पैदा हो गया है। किसानों का कहना है कि पहले से आर्थिक परेशानियों के बीच यदि फसल खराब हुई तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने से खेतों में भरा पानीकिसानों के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाला बारिश का पानी इन्हीं खेतों से होकर गुजरता है। पानी की पर्याप्त निकासी नहीं होने के कारण यह खेतों में जमा हो रहा है। किसानों का आरोप है कि पारंपरिक जल निकासी के रास्ते को पाले बनाकर रोक दिया गया है, जिससे जलभराव की स्थिति पैदा हो रही है।सर्वे और मुआवजे की मांगकिसानों ने प्रशासन से फसल नुकसान का तत्काल सर्वे कराने, उचित मुआवजा देने और स्थायी जल निकासी की व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि पारंपरिक जल निकासी मार्ग को खुला रखा जाए, ताकि भविष्य में खेतों में पानी जमा न हो।फिलहाल किसानों की नजर प्रशासन के सर्वे पर है। पानी कब तक निकलता है और कपास की फसल को कितना नुकसान हुआ है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 21 पैसे की कमजोरी के साथ 95.76 पर खुला।

कम बारिश से तेलंगाना के नलगोंडा में कपास और धान किसानों की चिंता बढ़ी

कम बारिश से तेलंगाना के नलगोंडा में कपास-धान किसानों की बढ़ी चिंतानलगोंडा, तेलंगाना: जिले में लंबे समय से पर्याप्त बारिश नहीं होने और तापमान बढ़ने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। बारिश की कमी और पानी की उपलब्धता पर बढ़ते दबाव का असर कपास और धान जैसी खरीफ फसलों पर पड़ रहा है।मौसम की परिस्थितियों और El Niño के संभावित प्रभाव को देखते हुए किसानों को पानी की उपलब्धता के अनुसार फसल का चयन करने की सलाह दी गई थी। अधिकारियों ने धान और कपास जैसी अधिक पानी की जरूरत वाली फसलों के बजाय अरहर, उड़द और मूंग जैसी कम पानी वाली फसलों की खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया था।पानी की कमी को देखते हुए किसानों से धान का रकबा सीमित करने की अपील भी की गई है। 8 अगस्त 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, जिले में करीब 33,000 एकड़ क्षेत्र में किसानों ने धान के बजाय वैकल्पिक फसलों की खेती शुरू कर दी थी। इस क्षेत्र को बढ़ाकर 1.5 लाख एकड़ करने का लक्ष्य रखा गया था।बारिश पर निर्भर क्षेत्रों में कपास किसानों की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। लंबे समय तक बारिश नहीं होने से मिट्टी में नमी की कमी हो सकती है, जिससे कपास की बढ़वार और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। जिन किसानों के पास सिंचाई की पर्याप्त सुविधा नहीं है, उनके लिए स्थिति और कठिन हो सकती है।धान की खेती के लिए भी पर्याप्त पानी जरूरी है। जलाशयों और अन्य सिंचाई स्रोतों में पानी की उपलब्धता कम रहने पर किसानों को फसल बचाने के लिए अतिरिक्त सिंचाई पर निर्भर रहना पड़ सकता है। इससे खेती की लागत बढ़ सकती है।मौजूदा परिस्थितियों में नलगोंडा के किसानों के लिए आने वाली बारिश बेहद महत्वपूर्ण है। यदि बारिश में सुधार नहीं होता है, तो कपास और धान समेत खरीफ फसलों की उत्पादकता पर दबाव बढ़ने की आशंका है।और पढ़ें :- कपास सीजन शुरू, मुहूर्त भाव ₹8,575

कपास सीजन शुरू, मुहूर्त भाव ₹8,575

कपास मंडी में सीजन का आगाज, मुहूर्त खरीदी में ₹8,575 तक भावकपास बाजार से आज की बड़ी खबर सामने आई है। नई फसल की आवक के साथ कपास सीजन का आगाज हो गया है। धारंगांव की जिनिंग मिलों में मुहूर्त खरीदी शुरू होते ही बाजार में अच्छी हलचल देखने को मिली।श्रीजी जिनिंग, धारंगांव में नए कपास का मुहूर्तश्रीजी जिनिंग, धारंगांव में आज नए कपास का शुभ मुहूर्त हुआ। करीब 1,000 क्विंटल नए कपास की आवक हुई और कपास का भाव ₹8,553 प्रति क्विंटल पर खुला।वहीं कॉटन सीड में भी कारोबार हुआ। गुजरात के लिए 2 गाड़ियों की कॉटन सीड बिक्री ₹5,101 प्रति क्विंटल के भाव पर हुई।यह जानकारी दलाल सोहनलाल जी, बुरहानपुर ने फोन पर दी।धारंगांव में प्रमुख मुहूर्त भावमहावीर फाइबर्स: 15 बेल्स — ₹8,575जोगेश्वरी जिनिंग: 150 बेल्स — ₹8,571महावीर कॉटन: 100 बेल्स — ₹8,571श्रीजी जिनिंग: ₹8,553अमरावती में नई आवकसगराज कॉटन, अमरावती में करीब 500 क्विंटल नई आवक दर्ज हुई। कपास का भाव ₹8,100 प्रति क्विंटल रहा।अबोहर में नरमा का भावबालचंद कॉटस्पिन, अबोहर में नरमा का भाव ₹8,861 प्रति क्विंटल दर्ज किया गया।आज के प्रमुख भावधारंगांव महावीर फाइबर्स — ₹8,575धारंगांव जोगेश्वरी जिनिंग — ₹8,571धारंगांव महावीर कॉटन — ₹8,571धारंगांव श्रीजी जिनिंग — ₹8,553अमरावती सगराज कॉटन — ₹8,100अबोहर बालचंद कॉटस्पिन नरमा — ₹8,861कॉटन सीड, गुजरात — ₹5,101नई फसल की आवक और मुहूर्त खरीदी के साथ कपास सीजन की शुरुआत हो गई है। आने वाले दिनों में आवक बढ़ने के साथ बाजार किस दिशा में जाता है, इस पर किसानों और व्यापारियों की नजर बनी रहेगी।और पढ़ें :- खंडवा में 16 सितंबर से कपास कारोबार शुरू

खंडवा में 16 सितंबर से कपास कारोबार शुरू

खंडवा कृषि उपज मंडी में कपास के व्यापार के लिए 16 सितंबर की शुभ तिथि तयखंडवा। खंडवा कृषि उपज मंडी समिति (APMC) में कपास के व्यापार (खरीद-बिक्री) की शुरुआत के लिए बुधवार, 16 सितंबर 2026 को सुबह 11:00 बजे का शुभ समय तय किया गया है। इस संबंध में गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को APMC कार्यालय भवन में व्यापारियों के साथ एक बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता मंडी सचिव रामवीर किरार ने की।बैठक के दौरान, मंडी परिसर में अधिसूचित कृषि उपज—कपास—के व्यापार को शुरू करने के शुभ समय के बारे में व्यापारियों से चर्चा की गई। इन विचार-विमर्श के बाद, कपास व्यापार शुरू करने के लिए बुधवार, 16 सितंबर 2026 को सुबह 11:00 बजे का शुभ समय निर्धारित किया गया।मंडी सचिव रामवीर किरार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कपास व्यापार और आगामी सीजन से जुड़ी आवश्यक व्यवस्थाओं पर भी चर्चा की गई। मंडी में कपास की आवक शुरू होने के साथ ही किसान अपनी उपज बिक्री के लिए मंडी ला सकेंगे, जबकि व्यापारियों के लिए कपास व्यापार का नया सीजन शुरू होगा।बैठक में मंडी समिति के अधिकारी और कर्मचारी, जिनमें अशोक शर्मा, दयाराम चौहान, प्रेमनारायण डुगाया और श्याम डांगी शामिल थे, उपस्थित रहे। बैठक में भाग लेने वाले व्यापारियों में अमित जैन, वीरेंद्र अग्रवाल, कैलाश बंसल, संजू अग्रवाल, अंकुर जैन, सुनील गुप्ता, संदीप अग्रवाल और जितेंद्र सिंह उबेजा शामिल थे।बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, खंडवा कृषि उपज मंडी परिसर में कपास की खरीद-बिक्री अब 16 सितंबर को सुबह 11:00 बजे शुरू होगी। मंडी समिति व्यापार कार्यों को शुरू करने के लिए आवश्यक तैयारियां कर रही है।और पढ़ें :- 2025-26 सीजन में CCI की कपास बिक्री 94.27 लाख गांठों तक

2025-26 सीजन में CCI की कपास बिक्री 94.27 लाख गांठों तक

 💥राज्य-वार CCI कपास बिक्री विवरण – 2025-26 सीज़न💥 कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (CCI) ने 2025-26 सीज़न के लिए इस सप्ताह अपनी कॉटन कैंडी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया। अब तक CCI द्वारा सीजन 2025-26 की लगभग कुल 94,27,700 कपास गांठें (बेल्स) बेची जा चुकी हैं। बिक्री कुछ प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में केंद्रित है, जिसमें महाराष्ट्र, तेलंगाना और गुजरात सबसे आगे हैं।महाराष्ट्र में 28,35,700 गाँठतेलंगाना में  24,28,400 गाँठगुजरात में  17,75,000 गाँठकर्नाटका में  7,10,800 गाँठमध्य प्रदेश में  5,66,400 गाँठराजस्थान में  3,28,700 गाँठआंध्र प्रदेश में  2,82,200  गाँठओडिशा में  2,69,500 गाँठहरियाणा में  1,85,500 गाँठपंजाब में  45,200 गाँठएवं वेस्ट बंगाल में 300 गाँठो की बिक्री है।

CCI कपास भाव इस हफ्ते स्थिर

इस हफ़्ते CCI के कॉटन की कीमतें जस की तस रहींकॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (CCI) ने 11 सितंबर, 2026 को खत्म हुए हफ़्ते के दौरान अपने कॉटन कैंडी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया। इस हफ़्ते, CCI ने 2025–26 की फ़सल से लगभग 2,200 बेल कॉटन बेचा, जिसे ट्रेडर्स और मिलों, दोनों ने खरीदा।📊 CCI की रोज़ाना नीलामी का प्रदर्शन07 सितंबर, 2026कुल 300 बेल बेचे गए, जिनकी पूरी खरीद ट्रेडर्स ने की।08 सितंबर, 2026इस दिन की नीलामी में 400 बेल की बिक्री हुई, और पूरी मात्रा मिलों ने खरीदी।09 सितंबर, 2026नीलामी के दौरान कुल 500 बेल बेचे गए, जिन्हें मिलों ने खरीदा।10 सितंबर, 2026इस दिन 900 बेल की बिक्री हुई, और पूरी मात्रा मिलों ने खरीदी।11 सितंबर, 2026हफ़्ते का समापन 100 बेल की बिक्री के साथ हुआ, जिन्हें ट्रेडर्स ने खरीदा।नीलामी की हालिया गतिविधियों के बाद, 2025–26 सीज़न के लिए CCI की कुल कॉटन बिक्री लगभग 94.27 लाख बेल तक पहुँच गई।और पढ़ें :-गुजरात में बारिश की कमी से ही सूखा घोषित नहीं होगा

गुजरात में बारिश की कमी से ही सूखा घोषित नहीं होगा

गुजरात सरकार ने विधानसभा को बताया: सिर्फ़ कम बारिश से सूखा घोषित नहीं किया जा सकतागांधीनगर: गुजरात सरकार ने शुक्रवार को कहा कि किसी ज़िले में सूखा घोषित करने के लिए सिर्फ़ कम बारिश का होना काफ़ी नहीं है। सरकार ने ज़ोर देकर कहा कि ऐसा फ़ैसला लेने से पहले फ़सल की स्थिति, मिट्टी में नमी, भूजल स्तर और दूसरे वैज्ञानिक पैमानों की जाँच की जानी चाहिए।गुजरात विधानसभा के नियमों के नियम 116 के तहत एक नोटिस का जवाब देते हुए, संसदीय मामलों के मंत्री ऋषिकेश पटेल ने कहा कि राज्य में 3 सितंबर तक मौसमी औसत बारिश का 75.43 प्रतिशत हिस्सा हुआ है।जहाँ दक्षिण गुजरात में औसत बारिश का 103.91 प्रतिशत हिस्सा हुआ, वहीं सौराष्ट्र, कच्छ और उत्तर गुजरात के कई ज़िलों में बारिश की भारी कमी देखी गई। देवभूमि द्वारका में औसत बारिश का सिर्फ़ 6.41 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया गया, इसके बाद पोरबंदर में 18.12 प्रतिशत, जामनगर में 28.88 प्रतिशत और कच्छ में 29.29 प्रतिशत बारिश हुई।हालाँकि, सरकार ने कहा कि खेती की स्थिति ऐसी नहीं है कि तुरंत सूखा घोषित किया जाए। 31 अगस्त तक, 80.39 लाख हेक्टेयर ज़मीन पर बुआई हो चुकी थी, जो राज्य के सामान्य बुआई क्षेत्र 85.30 लाख हेक्टेयर का 94.24 प्रतिशत है।मूंगफली, दालों, सोयाबीन और धान की बुआई सामान्य स्तर से ज़्यादा रही, जबकि कपास की बुआई सामान्य स्तर का 90.07 प्रतिशत रही।सरकार ने कहा कि पानी की उपलब्धता पर भी कड़ी नज़र रखी जा रही है। सरदार सरोवर बांध 88.60 प्रतिशत भरा हुआ था, जबकि राज्य के अन्य 206 जलाशयों में 66.07 प्रतिशत पानी जमा था। नर्मदा कमांड क्षेत्र में खरीफ़ फ़सलों की सिंचाई के साथ-साथ सौनी और सुजलाम सुफलाम योजनाओं के ज़रिए पीने और सिंचाई के पानी की व्यवस्था भी की गई थी।21 ज़िलों के 132 तालुका समूहों में खेती के लिए बिजली की आपूर्ति आठ घंटे से बढ़ाकर 10 घंटे कर दी गई थी। चारे की तैयारी भी चल रही थी; 402.54 लाख किलोग्राम चारा उपलब्ध था और 31 लाख किलोग्राम चारा सब्सिडी वाली दरों पर पहले ही बांटा जा चुका था। केंद्र के सूखा प्रबंधन मैनुअल का हवाला देते हुए सरकार ने कहा कि बारिश, फसल की बुवाई, NDVI, मिट्टी में नमी और भूजल स्तर का आकलन किया जाना चाहिए, और उसके बाद फसल को हुए नुकसान की भौतिक जांच होनी चाहिए।कांग्रेस और AAP ने मांग की है कि जिन इलाकों में बारिश कम हुई है, उन्हें सूखाग्रस्त घोषित किया जाए ताकि किसानों और ग्रामीण समुदायों को समय पर राहत मिल सके।और पढ़ें :- देरी से आए मानसून के कारण महाराष्ट्र में कपास का रकबा 10% घटा

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