यवतमाल : इस सीज़न में कॉटन के मार्केट प्राइस में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, वहीं कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (CCI) ने मार्केट इंटरवेंशन स्कीम के तहत ज़िले में 10 लाख क्विंटल तक कॉटन खरीदा है।
हालांकि पिछले साल के मुकाबले इस साल CCI से आवक कम हुई है, लेकिन ज़िले में किसानों ने अब तक करीब 1.3 लाख क्विंटल कॉटन बेचा है। इसमें से 10,19,784 क्विंटल कॉटन CCI ने खरीदा, जबकि 3,90,686 क्विंटल कॉटन प्राइवेट ट्रेडर्स ने खरीदा।
ओपन मार्केट में अभी कॉटन के प्राइस करीब 8200 रुपये प्रति क्विंटल हैं, जो CCI के रेट से करीब 330 रुपये ज़्यादा हैं। इस वजह से, कई किसान सरकारी खरीद के बजाय प्राइवेट ट्रेडर्स को कॉटन बेचना पसंद कर रहे हैं। इस वजह से, CCI से खरीद की रफ़्तार धीमी हो गई है।
CCI जिले के अलग-अलग खरीद सेंटर पर खरीद कर रहा है और करीब एक लाख 33 हजार किसानों के नाम पर रजिस्ट्रेशन हो चुका है। इनमें से 58 हजार किसानों को कपास बेचने की परमिशन (टोकन) मिल चुकी है और बाकी किसान अभी भी इंतजार कर रहे हैं।
तालुका के हिसाब से खरीद देखें तो यवतमाल में 9 लाख क्विंटल, कलंब में 69 हजार, घाटंजी में 52 हजार, पंढरकवड़ा में 1 लाख, मारेगांव में 1.25 लाख, झारी में 57 हजार, दारवा में 50 हजार, नेर में 29 हजार, आर्नी में 14 हजार, डिग्रस में 3 हजार, पुसद में 29 हजार और महागांव में 38 हजार क्विंटल कपास खरीदा जा चुका है।
जानकारों के मुताबिक, सरकारी खरीद की रफ्तार बढ़ाने और किसानों को समय पर पैसा मिलने से खुले बाजार पर दबाव कम हो सकता है।
नहीं तो किसानों को एक बार फिर कीमतों में उतार-चढ़ाव का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।