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जुलाई में CCI कपास भाव संभले

बिक्री में सुस्ती के बावजूद जुलाई में CCI की कॉटन बेल की कीमतों में सुधारकॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (CCI) ने पिछले तीन महीनों में अपनी कॉटन बेल की बिक्री में मिला-जुला ट्रेंड देखा है। जुलाई में औसत बिक्री कीमतों में सुधार हुआ, जबकि कुल बिक्री की मात्रा में गिरावट जारी रही। कीमतों का यह विश्लेषण अकोला BB SPL मोड (29 MM) बेंचमार्क पर आधारित है, जिसे इस रिपोर्ट के लिए आधार मूल्य माना गया है।CCI के आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में औसत बिक्री कीमत ₹67,170 प्रति कैंडी थी, जब कॉर्पोरेशन ने 10.22 लाख बेल बेचीं और महीने के दौरान कीमतों में छह बार बदलाव किया गया। जून में, औसत बिक्री कीमत 5.95% घटकर ₹63,175 प्रति कैंडी हो गई, जबकि बिक्री गिरकर 9.42 लाख बेल रह गई। कीमतों में पांच बार बदलाव किया गया, जो बाजार के कमजोर सेंटीमेंट और टेक्सटाइल मिलों द्वारा सावधानीपूर्वक खरीदारी को दर्शाता है।जुलाई में बाजार ने फिर से रफ्तार पकड़ी और औसत बिक्री कीमत 2.38% बढ़कर ₹64,675 प्रति कैंडी हो गई। हालांकि CCI ने महीने के दौरान कीमतों में आठ बार बदलाव किया—जो तीन महीने की अवधि में सबसे अधिक था—लेकिन कुल बिक्री और गिरकर 9.09 लाख बेल रह गई, जो बेहतर कीमतों के बावजूद धीमी मांग को दर्शाता है।जुलाई में कीमतों में सुधार से पता चलता है कि स्पिनिंग मिलों की ओर से खरीदारी में फिर से दिलचस्पी और मजबूत मांग देखी गई। हालांकि, बिक्री की मात्रा में लगातार गिरावट बाजार की बदलती स्थितियों और आयातित कपास की बढ़ती उपलब्धता के बीच खरीदारों द्वारा सावधानीपूर्वक खरीद की ओर इशारा करती है।बाजार के जानकारों का मानना है कि जुलाई में CCI द्वारा कीमतों में बार-बार बदलाव करना बाजार के मौजूदा ट्रेंड के अनुसार बिक्री को समायोजित करने के उसके प्रयासों को दर्शाता है। आगे चलकर, CCI की बिक्री और कीमतें घरेलू कपास की आवक, मिलों की मांग, आयात के ट्रेंड और टेक्सटाइल सेक्टर के समग्र सेंटीमेंट पर निर्भर करेंगी।और पढ़ें :- अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 07 पैसे मजबूत हुआ, 95.21 पर बंद हुआ

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 07 पैसे मजबूत हुआ, 95.21 पर बंद हुआ

शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 07 पैसे मजबूत हुआ और 95.21 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।घरेलू करेंसी 95.28 प्रति डॉलर पर खुली और ज़्यादातर समय दबाव में रही, साथ ही एक सीमित दायरे में कारोबार करती रही। हालांकि, इसमें थोड़ी रिकवरी हुई और दिन का कारोबार 95.21 पर खत्म हुआ, जिससे डॉलर के मुकाबले इसमें मामूली बढ़त दर्ज की गई।शेयर बाज़ार के लाइव अपडेट: सेंसेक्स लगभग 456 अंक (0.58%) गिरकर 78,499 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में सिर्फ़ 65 अंक (0.27%) की गिरावट आई और यह 24,571 पर बंद हुआ। ब्रॉडर मार्केट में मिला-जुला रुख रहा; निफ्टी स्मॉलकैप 100 गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 में 0.2% की बढ़त हुई।और पढ़ें :- नागौर में कपास बुवाई 7 साल के निचले स्तर पर

नागौर में कपास बुवाई 7 साल के निचले स्तर पर

गुलाबी सुंडी और बढ़ती लागत ने छीनी ‘सफेद सोना’ की चमक, नागौर में सात वर्षों के निचले स्तर पर पहुंची कपास की बुवाईनागौर: राजस्थान के नागौर जिले में कभी किसानों की पहली पसंद मानी जाने वाली नकदी फसल कपास अब धीरे-धीरे अपनी चमक खोती जा रही है। ‘सफेद सोना’ कहलाने वाली यह फसल अब किसानों के लिए कम लाभदायक साबित हो रही है। लगातार घटती पैदावार, खेती की बढ़ती लागत, गुलाबी सुंडी का बढ़ता प्रकोप और बाजार में अपेक्षित मूल्य नहीं मिलने के कारण किसानों का रुझान तेजी से वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ रहा है। इसका असर खरीफ 2026 की बुवाई में भी साफ दिखाई दिया है।कृषि विभाग ने खरीफ 2026 के लिए जिले में 62,000 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन सीजन के अंत तक केवल 32,150 हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुवाई हो सकी। यह निर्धारित लक्ष्य का लगभग 52 प्रतिशत है और पिछले सात वर्षों में जिले में कपास के सबसे कम रकबे को दर्शाता है।कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नागौर की बलुई दोमट मिट्टी में लंबे समय तक लगातार कपास की खेती किए जाने से मिट्टी की उर्वरता और उत्पादकता प्रभावित हुई है। उनका कहना है कि कपास मुख्य रूप से काली मिट्टी की फसल है। ऐसे में बलुई दोमट क्षेत्रों में लगातार इसकी खेती करने से उत्पादन में लगातार गिरावट आई है। इसी कारण इस वर्ष किसानों ने ग्वार जैसी वैकल्पिक फसलों को प्राथमिकता दी। खरीफ 2026 में जिले में 1,24,250 हेक्टेयर क्षेत्र में ग्वार की बुवाई दर्ज की गई।किसानों के अनुसार वर्तमान में कपास का औसत उत्पादन केवल 1.5 से 2 क्विंटल प्रति बीघा रह गया है। लगभग 10 बीघा में कपास की खेती से कुल आय करीब 1.20 लाख रुपये तक पहुंचती है, लेकिन बीज, उर्वरक, कीटनाशक, सिंचाई, मजदूरी और अन्य कृषि लागत घटाने के बाद शुद्ध लाभ बहुत कम बचता है। ऐसे में कपास की खेती किसानों के लिए पहले जितनी लाभदायक नहीं रह गई है।पिछले सात वर्षों के आंकड़े भी कपास के घटते रकबे की पुष्टि करते हैं। वर्ष 2020 में जिले में 56,143 हेक्टेयर, 2021 में 58,457 हेक्टेयर, 2022 में 74,557 हेक्टेयर, 2023 में 48,500 हेक्टेयर, 2024 में 59,302 हेक्टेयर, 2025 में 37,250 हेक्टेयर तथा 2026 में घटकर केवल 32,150 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई दर्ज की गई, जो सात वर्षों का सबसे निचला स्तर है।शुरुआती वर्षों में बीटी कपास (Bt Cotton) ने गुलाबी सुंडी के प्रकोप को काफी हद तक नियंत्रित किया था, लेकिन अब यह कीट बीटी किस्मों को भी प्रभावित करने लगा है। इसके कारण किसानों का कीटनाशकों पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। हालांकि सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए मध्यम रेशा (Medium Staple) कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य 7,710 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, लेकिन कम पैदावार और बढ़ती उत्पादन लागत के कारण किसानों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। यही वजह है कि नागौर के प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्र डेगाना और मेड़ता में भी किसान तेजी से ग्वार तथा अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गुलाबी सुंडी पर प्रभावी नियंत्रण, लागत में कमी और बेहतर बाजार मूल्य सुनिश्चित नहीं किए गए, तो आने वाले वर्षों में जिले में कपास का रकबा और घट सकता है।और पढ़ें :- तेलंगाना में खरीफ बुवाई तेज

तेलंगाना में खरीफ बुवाई तेज

देर से हुई बारिश से तेलंगाना में खरीफ बुआई बढ़ी, लेकिन कम जल भंडारण ने बढ़ाई चिंताहैदराबाद: तेलंगाना में मानसून की सक्रियता बढ़ने के बाद खरीफ (वानकालम) सीजन की बुआई में उल्लेखनीय तेजी आई है। 5 अगस्त तक राज्य में 96.74 लाख एकड़ क्षेत्र में बुआई हो चुकी है, जो सामान्य खरीफ रकबे 132.38 लाख एकड़ का लगभग 73 प्रतिशत है। हालांकि, प्रमुख जलाशयों में पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम जल भंडारण सिंचाई की उपलब्धता और फसलों की उत्पादकता को लेकर चिंता का कारण बना हुआ है।22 जुलाई तक राज्य में केवल 68.43 लाख एकड़ (51.69 प्रतिशत) क्षेत्र में बुआई हुई थी। जुलाई के दूसरे पखवाड़े में मानसून के सक्रिय होने तथा महाराष्ट्र, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ में हुई भारी बारिश से कृष्णा और गोदावरी नदी बेसिन में जल प्रवाह बढ़ा, जिससे किसानों को बुआई तेज करने का अवसर मिला।सिंचाई को लेकर अनिश्चितता के कारण जिन किसानों ने बुआई टाल दी थी, उन्होंने हालिया बारिश के बाद तेजी से खेतों में काम शुरू किया। वर्षा आधारित फसलों, जिनमें कपास, मक्का, ज्वार, बाजरा, रागी, दालें, मूंगफली और सोयाबीन शामिल हैं, की बुआई में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, सिंचित क्षेत्रों में धान की नर्सरी तैयार की जा रही है।इसके बावजूद जल उपलब्धता चिंता का विषय बनी हुई है। 5 अगस्त तक राज्य के प्रमुख जलाशयों में 438.90 टीएमसी फीट पानी दर्ज किया गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 725.36 टीएमसी फीट था। हालांकि, दो सप्ताह पहले के 321.24 टीएमसी फीट की तुलना में जल भंडारण में सुधार हुआ है, लेकिन पिछले वर्ष के मुकाबले बड़ी कमी भविष्य में सिंचाई की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ा रही है।फसलवार आंकड़े भी मिश्रित तस्वीर पेश करते हैं। धान की बुआई 26.16 लाख एकड़ तक पहुंची है, जबकि इसका सामान्य रकबा 65.96 लाख एकड़ है। पिछले वर्ष इसी अवधि में धान की बुआई 28.74 लाख एकड़ में हुई थी। इसके विपरीत, कपास की बुआई 46.80 लाख एकड़ तक पहुंच गई, जो सामान्य रकबे 47.41 लाख एकड़ के लगभग बराबर है और पिछले वर्ष के 43.56 लाख एकड़ से अधिक है। वहीं, दालों की बुआई भी पिछले वर्ष की तुलना में बढ़कर 5.48 लाख एकड़ हो गई है।प्रोफेसर के. जयशंकर तेलंगाना राज्य कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, इस वर्ष कई किसानों ने धान की बजाय वैकल्पिक फसलों को प्राथमिकता दी है। हालांकि, यदि आने वाले सप्ताहों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई और जलाशयों का जल स्तर अपेक्षित रूप से नहीं बढ़ा, तो खरीफ फसलों की उत्पादकता और पैदावार प्रभावित हो सकती है।और पढ़ें :- जुलाई में कपास बाजार में सुधार

जुलाई में कपास बाजार में सुधार

जून में गिरावट के बाद जुलाई में भारत के कॉटन मार्केट में सुधार हुआपिछले तीन महीनों में भारत में 29 MM कॉटन कैंडी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया। मई 2026 में कीमतें ₹65,700 प्रति कैंडी थीं, जो जून में 5.1% घटकर ₹62,350 हो गईं। ऐसा बेहतर सप्लाई की उम्मीद, स्पिनिंग मिलों की सतर्क खरीदारी और बाजार के कमजोर सेंटीमेंट के कारण हुआ।जुलाई में बाजार ने फिर से रफ्तार पकड़ी और मिलों की नई मांग और खरीदारी में दिलचस्पी बढ़ने से कीमतें 3.7% बढ़कर ₹64,650 प्रति कैंडी हो गईं। इस सुधार के बावजूद, कीमतें मई के स्तर से ₹1,050 प्रति कैंडी कम रहीं, जिससे पता चलता है कि बाजार जून की गिरावट से पूरी तरह उबर नहीं पाया है।आगे की बात करें तो, इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि निकट भविष्य में कॉटन की कीमतें काफी हद तक स्थिर रहेंगी। हालांकि, मार्केटिंग सीजन आगे बढ़ने के साथ घरेलू कॉटन की आवक धीरे-धीरे कम हो रही है, जबकि सप्लाई की कमी को पूरा करने और टेक्सटाइल इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा करने के लिए कॉटन का आयात बढ़ रहा है। भविष्य में, बाजार की दिशा घरेलू आवक की गति, मॉनसून पर निर्भर फसल की संभावनाओं, टेक्सटाइल सेक्टर की मांग, निर्यात ऑर्डर, कॉटन आयात की मात्रा और वैश्विक कॉटन कीमतों के ट्रेंड पर निर्भर करेगी। कुल मिलाकर, जुलाई में आई तेजी से पता चलता है कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद बुनियादी मांग बनी हुई है, हालांकि अधिक आयात कीमतों में किसी भी तेज उछाल को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।

राजस्थान में कपास बुवाई 15% घटी

राजस्थान में कपास की बुआई 15% घटी, तिलहन का रकबा बढ़ा4 अगस्त 2026 तक राजस्थान के खरीफ बुआई के ताजा आंकड़ों से कपास और तिलहन फसलों के लिए अलग-अलग रुझान सामने आए हैं। जहां पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में तिलहन का कुल रकबा बढ़ा है, वहीं कपास के रकबे में भारी गिरावट देखी गई है। ये आंकड़े राज्य सरकार की खरीफ बुआई की प्रगति रिपोर्ट पर आधारित हैं।कपास की बुआई 534.18 हजार हेक्टेयर में की गई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 628.50 हजार हेक्टेयर थी। यह 94.32 हजार हेक्टेयर या 15.01% की गिरावट को दर्शाता है; बुआई राज्य के 720 हजार हेक्टेयर के लक्ष्य का लगभग 74% है।तिलहन फसलों में, सोयाबीन का रकबा 925.95 हजार हेक्टेयर है, जो एक साल पहले 977.26 हजार हेक्टेयर था। इस फसल के रकबे में 51.30 हजार हेक्टेयर (5.25%) की गिरावट दर्ज की गई है।हालांकि, मूंगफली में अच्छी बढ़ोतरी देखी गई है; इसकी बुआई 1,085.71 हजार हेक्टेयर तक पहुंच गई है, जबकि पिछले साल यह 967.49 हजार हेक्टेयर थी। 118.22 हजार हेक्टेयर की यह बढ़ोतरी साल-दर-साल 12.22% की वृद्धि को दर्शाती है।इसी तरह, अरंडी (कैस्टर) का रकबा 62.79 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 71.67 हजार हेक्टेयर हो गया है, जो 8.88 हजार हेक्टेयर (14.15%) की वृद्धि है।सोयाबीन का रकबा कम होने के बावजूद, मूंगफली और अरंडी में विस्तार के कारण राज्य में तिलहन की कुल बुआई 2,248.67 हजार हेक्टेयर हो गई है, जो पिछले साल इसी अवधि में 2,151.07 हजार हेक्टेयर थी। कुल तिलहन रकबे में 97.60 हजार हेक्टेयर की वृद्धि हुई है, जो साल-दर-साल 4.54% की बढ़ोतरी है।बुआई के ताजा पैटर्न से पता चलता है कि राजस्थान के किसानों ने मूंगफली और अरंडी की ओर रुख किया है, जबकि कपास और सोयाबीन का रकबा पिछले साल के स्तर से नीचे बना हुआ है। खरीफ़ की फ़सल का कुल रकबा, मौसम के बचे हुए हफ़्तों में बारिश की स्थिति और बुआई की प्रगति पर निर्भर करेगा।और पढ़ें :- TN बजट से टेक्सटाइल को बढ़ावा

TN बजट से टेक्सटाइल को बढ़ावा

TN बजट 2026-27: टेक्सटाइल सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन इंस्टीट्यूट और टेक्नोलॉजी सेंटर की घोषणातिरुप्पुर/इरोड: DMK के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में टेक्सटाइल विभाग के लिए 1,678 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। टेक्सटाइल उद्योग को आधुनिक बनाने और उसकी वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने कई अहम घोषणाएं की हैं। इनमें 60 करोड़ रुपये की लागत से 'तमिलनाडु इंस्टीट्यूट ऑफ़ डिज़ाइन' और 10 करोड़ रुपये की लागत से 'तिरुप्पुर टेक्सटाइल्स टेक्नोलॉजी सेंटर' की स्थापना शामिल है।बजट में 'टेक्निकल टेक्सटाइल्स ट्रांसफॉर्मेशन स्कीम' शुरू करने की भी घोषणा की गई है। यह योजना अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों के सहयोग तथा तमिलनाडु टेक्निकल टेक्सटाइल्स मिशन की वित्तीय सहायता से लागू की जाएगी। इसके माध्यम से उद्यमियों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) और टेक्सटाइल निर्माताओं को तकनीकी प्रशिक्षण, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता, बाजार संबंधी जानकारी, नवाचार सहायता और बिज़नेस मेंटरशिप उपलब्ध कराई जाएगी।बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC) के चेयरमैन ए. शक्तिवेल ने कहा कि यह बजट पारदर्शी शासन, विकास योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन और समावेशी आर्थिक विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि नई औद्योगिक नीति, TN सिंगल विंडो 3.0, 3,500 करोड़ रुपये की लागत से SIPCOT औद्योगिक पार्कों का विस्तार तथा टेक्सटाइल क्षेत्र के लिए किया गया आवंटन कारोबार करने में आसानी बढ़ाएगा, निवेश आकर्षित करेगा, विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती देगा और निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ाएगा। उनके अनुसार, ये पहलें वर्ष 2035-36 तक तमिलनाडु को 1.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को भी गति देंगी।तिरुप्पुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (TEA) के अध्यक्ष के. एम. सुब्रमण्यन ने कहा कि प्रस्तावित तिरुप्पुर टेक्सटाइल्स टेक्नोलॉजी सेंटर देश के प्रमुख निटवियर निर्यात केंद्र के रूप में तिरुप्पुर की स्थिति को और मजबूत करेगा। उन्होंने सरकार से निटवियर बोर्ड और ट्रेड सेंटर की स्थापना सहित उद्योग की अन्य लंबित मांगों पर भी शीघ्र निर्णय लेने की अपेक्षा जताई। वहीं, TEA के संयुक्त सचिव कुमार दुरईस्वामी ने प्रवासी श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष बजटीय प्रावधान की मांग दोहराते हुए उम्मीद जताई कि सरकार इस दिशा में भी जल्द सकारात्मक कदम उठाएगी।और पढ़ें :- बेलगावी ने 95% खरीफ बुवाई पूरी की

बेलगावी ने 95% खरीफ बुवाई पूरी की

कर्नाटक: बारिश में 4% कमी के बावजूद बेलगावी ने बुवाई का 95% लक्ष्य हासिल कियाबेलगावी (कर्नाटक): सामान्य से 4% कम मॉनसून बारिश के बावजूद कर्नाटक के बेलगावी जिले ने खरीफ सीजन में बुवाई का 95% लक्ष्य हासिल कर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में 7.52 लाख हेक्टेयर के निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले 7.16 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई पूरी हो चुकी है, जो राज्य में सबसे अधिक है। अधिकारियों का कहना है कि बीज, उर्वरक और कृषि उपकरणों की पर्याप्त उपलब्धता तथा अनुकूल मौसम के कारण इस सीजन में अच्छी पैदावार की उम्मीद है।जिले में अब तक 341 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जबकि सामान्य औसत 354 मिमी है। यानी बारिश में केवल 4% की कमी रही, जिसका बुवाई पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा। विभाग के अनुसार धान की बुवाई 55,925 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 49,554 हेक्टेयर (88.61%), चवली (लोबिया) की 1,54,032 हेक्टेयर के मुकाबले 1,17,001 हेक्टेयर (75.9%), अरहर की 14,600 हेक्टेयर के मुकाबले 14,084 हेक्टेयर (96.4%), मूंगफली की 13,230 हेक्टेयर के मुकाबले 13,166 हेक्टेयर (99.5%), कपास की 25,000 हेक्टेयर के मुकाबले 17,578 हेक्टेयर (70.3%) तथा अन्य फसलों की 22,773 हेक्टेयर के मुकाबले 10,457 हेक्टेयर (45.9%) में बुवाई हुई है।वहीं सोयाबीन की बुवाई 99,000 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 1,10,726 हेक्टेयर (111.8%), मूंग की 47,752 हेक्टेयर के मुकाबले 55,044 हेक्टेयर (115.2%), उड़द की 15,000 हेक्टेयर के मुकाबले 17,204 हेक्टेयर (114.6%) तथा गन्ने की 30,500 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 31,220 हेक्टेयर (102.04%) में हुई, जो निर्धारित लक्ष्य से अधिक है।तालुका स्तर पर सवदत्ती ने 105% और बेलहोंगल ने 104% लक्ष्य हासिल कर सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। कित्तूर और निप्पानी में 100% बुवाई पूरी हो चुकी है। इसके अलावा चिकोडी में 99%, रायबाग में 95%, हुक्केरी, खानापुर और यारगट्टी में 94%, गोकक, मुदलागी और कागवाड में 92%, अथानी और रामदुर्ग में 91%, जबकि बेलगावी तालुका में 84% बुवाई दर्ज की गई है।जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राहुल शिंदे ने बताया कि खरीफ सीजन के लिए 37,543 क्विंटल बीज की मांग के मुकाबले 37,267 क्विंटल बीज का भंडारण किया गया। अब तक 31,669 क्विंटल बीज किसानों को वितरित किए जा चुके हैं, जबकि 5,598 क्विंटल बीज अभी भी उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि जिले में बीजों की कोई कमी नहीं है और किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक एच.डी. कोलेकर ने बताया कि जिले को खरीफ सीजन के लिए 2,50,736 टन उर्वरक की आवश्यकता थी, जबकि अब तक 2,87,370 टन उर्वरक की आपूर्ति की जा चुकी है। इसके अलावा 8,408 टन यूरिया और 1,265 टन डीएपी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। अधिकारियों का कहना है कि पर्याप्त कृषि संसाधनों और अनुकूल मौसम के चलते इस सीजन में जिले में बेहतर उत्पादन की उम्मीद है।और पढ़ें :- भारी बारिश से कपास फसल संकट में

भारी बारिश से कपास फसल संकट में

महाराष्ट्र-गुजरात में बारिश की मार, कपास फसल संकट मेंजलगांव (महाराष्ट्र)/नसवाड़ी (गुजरात): लगातार हो रही भारी बारिश ने महाराष्ट्र और गुजरात के कपास उत्पादक क्षेत्रों में किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। महाराष्ट्र के जलगांव जिले में जलभराव के कारण कपास की फसल में जड़ सड़न (रूट रॉट) बीमारी तेजी से फैल रही है, जबकि गुजरात के छोटा उदयपुर जिले के नसवाड़ी तालुका में नदी में आई बाढ़ से लगभग 100 एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई है। इससे कपास के साथ-साथ मक्का, अरहर और सब्जियों की फसलें भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। किसानों का कहना है कि बाढ़ और बीमारियों के दोहरे संकट से उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।जलगांव जिले में 30 और 31 जुलाई को हुई भारी बारिश और बाढ़ से लगभग 35 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की फसल प्रभावित हुई। कई खेतों में अब भी पानी भरा होने के कारण पौधों की वृद्धि रुक गई है। जलभराव से जड़ सड़न बीमारी का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है और कई स्थानों पर हरे-भरे दिखने वाले कपास के पौधे अचानक मुरझाकर सूख रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इस बीमारी पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो उत्पादन में उल्लेखनीय गिरावट आ सकती है।महात्मा फुले कृषि विश्वविद्यालय के जलगांव स्थित कॉटन रिसर्च सेंटर के अनुसार, यह बीमारी देसी और अमेरिकन दोनों प्रकार की कपास को प्रभावित करती है। लंबे समय तक मिट्टी में पानी भरा रहने से बीमारी फैलाने वाला फफूंद तेजी से विकसित होता है और बारिश या सिंचाई के पानी के माध्यम से पूरे खेत में फैल जाता है। संक्रमित पौधों की जड़ें सड़ जाती हैं, छाल आसानी से निकल जाती है और पौधे अचानक मुरझाकर गिर जाते हैं। जड़ों का निचला हिस्सा पहले पीला और बाद में काला पड़ जाता है, जो इस बीमारी का प्रमुख लक्षण है।विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों से तुरंत जल निकासी की व्यवस्था करें, संक्रमित पौधों को हटाकर नष्ट करें तथा 100 लीटर पानी में 700 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड घोलकर पौधों के आधार (जड़ क्षेत्र) में उपचार करें। आवश्यकता पड़ने पर पौधों के आसपास मिट्टी चढ़ाने की भी सलाह दी गई है।उधर गुजरात के छोटा उदयपुर जिले के नसवाड़ी तालुका के खोडिया गांव में लगातार बारिश के बाद मेन नदी में आई बाढ़ ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। तेज बहाव के कारण नदी का पानी खेतों में घुस गया और लगभग 100 एकड़ भूमि में लगी कपास, मक्का, अरहर तथा सब्जियों की फसलें पूरी तरह जलमग्न हो गईं। खेतों में करीब दो फीट गाद जमा होने से फसलें दब गईं और किसानों की महीनों की मेहनत एक ही रात में बर्बाद हो गई।स्थानीय किसानों ने प्रशासन से तत्काल सर्वे कराकर उचित मुआवजा और आर्थिक सहायता देने की मांग की है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि महाराष्ट्र और गुजरात में लगातार हो रही भारी बारिश, जलभराव, बाढ़ और जड़ सड़न जैसी बीमारियों का बढ़ता प्रकोप इस सीजन के कपास उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। उनका कहना है कि समय पर जल निकासी, रोग प्रबंधन और सरकारी सहायता से किसानों के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।और पढ़ें :- CITI-ICAC का कार्बन क्रेडिट समझौता

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जुलाई में कपास बाजार में सुधार 07-08-2026 11:02:18 view
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 6 पैसे गिरकर 95.28 पर खुला। 07-08-2026 10:53:58 view
डॉलर के मुकाबले रुपया 09 पैसे कमजोर हुआ, 95.22 पर बंद हुआ 06-08-2026 15:47:46 view
राजस्थान में कपास बुवाई 15% घटी 06-08-2026 14:55:37 view
TN बजट से टेक्सटाइल को बढ़ावा 06-08-2026 14:48:46 view
बेलगावी ने 95% खरीफ बुवाई पूरी की 06-08-2026 14:42:08 view
भारी बारिश से कपास फसल संकट में 06-08-2026 14:36:07 view
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