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6 साल बाद शिपकी ला व्यापार शुरू

6 साल बाद शिपकी ला के जरिए भारत-चीन सीमा व्यापार फिर शुरू, 16 व्यापारियों का पहला दल रवाना भारत और चीन के बीच हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित शिपकी ला दर्रे के माध्यम से सीमा-पार व्यापार छह वर्षों के अंतराल के बाद फिर शुरू हो गया है। भारत को तिब्बत से जोड़ने वाला यह ऐतिहासिक सिल्क रूट लंबे समय से सीमावर्ती व्यापार का महत्वपूर्ण मार्ग रहा है। व्यापार की बहाली से सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और स्थानीय व्यापारियों को नए अवसर मिलने की उम्मीद है।हिमाचल प्रदेश के राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने सोमवार को 16 भारतीय व्यापारियों के पहले दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने बताया कि भारत और चीन के बीच व्यापार फिलहाल बार्टर सिस्टम (वस्तु-विनिमय प्रणाली) के तहत होगा, जिसमें मुद्रा के बजाय वस्तुओं का आदान-प्रदान किया जाएगा। निर्धारित व्यवस्था के अनुसार व्यापारियों को 72 घंटे के भीतर भारत वापस लौटना होगा।इस अवसर पर मंत्री ने शिपकी ला क्षेत्र में सीमा-पार व्यापार को सुगम बनाने के लिए स्थापित आधुनिक 'छुप्पन ट्रेड मार्ट' का भी उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि यह सुविधा व्यापारियों को आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराएगी और सीमा व्यापार को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद करेगी।मंत्री ने व्यापारियों से केंद्र सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा निर्धारित आयात-निर्यात नियमों का पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सीमा व्यापार की सफलता के लिए नियमों का अनुपालन और सुरक्षा मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक है।मौजूदा व्यवस्था के तहत भारत की ओर से 72 वस्तुओं तथा चीन की ओर से 30 वस्तुओं का वस्तु-विनिमय किया जा सकेगा। हालांकि, व्यापारियों ने व्यापार योग्य वस्तुओं की सूची का विस्तार करने की मांग भी उठाई है। इस पर जगत सिंह नेगी ने कहा कि राज्य सरकार इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के समक्ष रखेगी। इसके बाद प्रस्ताव को विदेश मंत्रालय के माध्यम से चीन सरकार तक भेजा जाएगा।करीब छह वर्ष बाद शिपकी ला के जरिए सीमा व्यापार की बहाली को भारत-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे किन्नौर सहित आसपास के क्षेत्रों के व्यापारियों को लाभ मिलने के साथ पारंपरिक व्यापारिक संबंधों को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।और पढ़ें :-  CCI फाउंडेशन डे पर कपास क्रांति

CCI फाउंडेशन डे पर कपास क्रांति

CCI के 56वें स्थापना दिवस पर गिरिराज सिंह ने दोहराई 'कपास क्रांति' की प्रतिबद्धता, किसानों की आय बढ़ाने पर जोरछत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र): केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने शनिवार को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) के 56वें स्थापना दिवस समारोह में भारत के कपास क्षेत्र को अधिक उत्पादक, प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ बनाने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कपास की गुणवत्ता सुधारने, उत्पादकता में वृद्धि करने और आधुनिक तकनीक आधारित खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रही है। कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार के मंत्री संजय शिरसाट, संजय सावकारे और अतुल सावे, कपड़ा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, उद्योग प्रतिनिधि, किसान उत्पादक संगठन (FPO) तथा बड़ी संख्या में कपास किसानों ने भाग लिया।अपने संबोधन में गिरिराज सिंह ने कहा कि कपास भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि समृद्धि और आत्मनिर्भर भारत की महत्वपूर्ण आधारशिला है। उन्होंने बताया कि 2025-26 कपास सीजन के दौरान CCI ने अपने इतिहास के सबसे बड़े न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) खरीद अभियानों में से एक को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस अवधि में लगभग 24 लाख किसान लेन-देन के माध्यम से 522 लाख क्विंटल से अधिक सीड कॉटन (कपास) की खरीद की गई तथा ₹41,530 करोड़ की राशि सीधे किसानों के आधार-लिंक्ड बैंक खातों में हस्तांतरित की गई। उन्होंने बताया कि 2026-27 कपास सीजन के लिए सीड कॉटन के MSP में लगभग 7 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य और आय सुरक्षा सुनिश्चित होगी।मंत्री ने हाल ही में स्वीकृत 'कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन – कपास क्रांति' का उल्लेख करते हुए कहा कि ₹5,659 करोड़ के बजट वाला यह पांच वर्षीय मिशन कपास की उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने, जिनिंग एवं प्रसंस्करण अवसंरचना के आधुनिकीकरण, 'कस्तूरी कॉटन भारत' के माध्यम से ब्रांडिंग और ट्रेसबिलिटी को मजबूत करने तथा जलवायु-अनुकूल एवं टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि यह पहल भारतीय कपास को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप "फार्म टू फैशन" पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।इस अवसर पर मंत्री ने 'कपास दर्शन' बुलेटिन का शुभारंभ किया, जो किसानों को मौसम, बाजार के रुझान, वैज्ञानिक खेती, गुणवत्ता प्रबंधन और सरकारी योजनाओं की नियमित जानकारी उपलब्ध कराएगा। किसानों और किसान उत्पादक संगठनों को कॉटन प्लकर मशीन, कॉटन स्टॉक श्रेडर मशीन तथा कंटैमिनेशन कंट्रोल किट भी वितरित की गईं। कार्यक्रम के दौरान भारत के कपास इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के उद्देश्य से चार महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें CCI, ICAR-CIRCOT, GIZ, CITI, ICAC, MERAGO/GEOCLARA, TEXPROCIL और मंजीत कॉटन प्राइवेट लिमिटेड के बीच गुणवत्ता सुधार, ट्रेसबिलिटी, सस्टेनेबल खेती और प्रीमियम भारतीय कपास को बढ़ावा देने संबंधी साझेदारियां शामिल हैं।CCI के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ललित कुमार गुप्ता ने कहा कि कॉर्पोरेशन पिछले 56 वर्षों से पारदर्शी, तकनीक-आधारित और किसान-केंद्रित पहलों के माध्यम से किसानों के हितों की रक्षा कर रहा है। उन्होंने कहा कि CCI किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने, उच्च गुणवत्ता वाले कपास उत्पादन को बढ़ावा देने और 'विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करता रहेगा।और पढ़ें :- मंजीत कॉटन-TEXPROCIL का समझौता

मंजीत कॉटन-TEXPROCIL का समझौता

मंजीत कॉटन और TEXPROCIL ने कस्तूरी कॉटन की 30,000 गांठों के उत्पादन के लिए हाथ मिलायाकॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (CCI) ने अपने स्थापना दिवस समारोह के दौरान, मंजीत कॉटन प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री बी.एस. राजपाल और TEXPROCIL के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. सिद्धार्थ राजगोपाल के बीच कस्तूरी कॉटन की 30,000 गांठों के उत्पादन के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होते देखे। इस समझौते में 20,000 गांठ लॉन्ग स्टेपल कॉटन और 10,000 गांठ एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल कॉटन का उत्पादन शामिल है, जिससे प्रीमियम-क्वालिटी वाले भारतीय कॉटन को बढ़ावा देने की कोशिशों को मजबूती मिलेगी।(SIS)इस MoU पर माननीय केंद्रीय कपड़ा मंत्री श्री गिरिराज सिंह और महाराष्ट्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों की गरिमामयी उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए, जो कस्तूरी कॉटन के प्रचार और उत्पादन के लिए सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है।(SIS)और पढ़ें :- भारत को ब्राज़ील का कपास निर्यात बढ़ा

भारत को ब्राज़ील का कपास निर्यात बढ़ा

दो वर्षों में भारत को ब्राजील के कपास निर्यात में 40 गुना से अधिक वृद्धिब्राजील से भारत को कपास निर्यात में पिछले दो वर्षों के दौरान अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। 2025/26 विपणन वर्ष में ब्राजील ने भारत को *3.50 लाख टन से अधिक* कपास का निर्यात किया, जो दो वर्ष पहले की तुलना में *40 गुना से अधिक* है। इस तेज वृद्धि के साथ भारत, ब्राजील के प्रमुख कपास आयातक देशों में शामिल हो गया है।निर्यात में तेजी जुलाई 2026 में भी जारी रही। जुलाई के पहले चार सप्ताहों के दौरान ब्राजील ने *1.276 लाख टन* कपास का निर्यात किया। इस अवधि में औसत दैनिक निर्यात जुलाई 2025 की समान अवधि की तुलना में *28.2% अधिक* रहा, जो वैश्विक बाजार में ब्राजील की मजबूत आपूर्ति क्षमता को दर्शाता है।उधर, देश में कपास की कटाई भी तेजी से आगे बढ़ रही है। *30 जुलाई 2026* तक राष्ट्रीय स्तर पर कपास की कटाई *29.23%* पूरी हो चुकी थी। प्रमुख उत्पादक राज्यों में पराना में कटाई 100%, साओ पाउलो में 87%, माटो ग्रोसो दो सुल में 65%, पियाउई में 62.84%, मारान्हाओ में 55%, गोयास में 43.06%, मिनास गेरैस में 35%, बाहिया में 29.55% तथा माटो ग्रोसो में 26% तक पहुंच गई है।कपास की जिनिंग भी तेजी से आगे बढ़ रही है। 30 जुलाई तक देशभर में जिनिंग कार्य *14.94%* पूरा हो चुका था। राज्यवार जिनिंग की प्रगति साओ पाउलो में 85%, पराना में 80%, माटो ग्रोसो दो सुल में 20%, मिनास गेरैस में 15%, गोयास में 14.21%, बाहिया में 14%, मारान्हाओ में 12%, पियाउई में 11.2% तथा माटो ग्रोसो में 3% दर्ज की गई। कटाई और जिनिंग में हो रही प्रगति से आने वाले महीनों में ब्राजील के कपास निर्यात को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।और पढ़ें :- अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 25 पैसे मजबूत हुआ और 95.14 पर खुला।

महाराष्ट्र को टेक्सटाइल PLI योजना के तहत 24 कंपनियों से ₹167.51 करोड़ का निवेश मिला

महाराष्ट्र में टेक्सटाइल PLI स्कीम के तहत 24 कंपनियों से ₹167.51 करोड़ का निवेश आयाटेक्सटाइल मिनिस्ट्री के अनुसार, MMF कपड़ों, MMF फैब्रिक और टेक्निकल टेक्सटाइल के प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के मकसद से शुरू की गई टेक्सटाइल के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के तहत, 31 मार्च तक महाराष्ट्र में 24 मंज़ूरशुदा कंपनियों से 167.51 करोड़ रुपये (17.49 मिलियन) का निवेश आया है।पूरे देश में इस स्कीम के तहत 170 कंपनियों को मंज़ूरी दी गई है, जिनमें से 24 कंपनियां महाराष्ट्र की हैं।मिनिस्ट्री ने कहा कि वह स्कीम को लागू करने में आने वाली चुनौतियों को दूर करने और स्टेकहोल्डर्स की भागीदारी बढ़ाने के लिए समय-समय पर समीक्षा, साप्ताहिक ओपन-हाउस सेशन, मासिक वर्कशॉप और आउटरीच प्रोग्राम के ज़रिए स्कीम के कार्यान्वयन पर लगातार नज़र रखती है।मिनिस्ट्री ने यह भी बताया कि अक्टूबर 2025 में स्कीम में किए गए बदलावों से निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। इन बदलावों में MMF कपड़ों और फैब्रिक के तहत 17 नए HSN कोड को शामिल करना, न्यूनतम निवेश की सीमा में 50% की कमी, फ़ायदा उठाने के लिए नई कंपनी बनाने की शर्त में ढील देना और इंसेंटिव के लिए इंक्रीमेंटल टर्नओवर की ज़रूरत को 25% से घटाकर 10% करना शामिल है।और पढ़ें :- आंध्र प्रदेश में कपास की बुवाई 13% बढ़ी, सामान्य से तेज रही प्रगति; कुरनूल सबसे आगे

आंध्र प्रदेश में कपास की बुवाई 13% बढ़ी, सामान्य से तेज रही प्रगति; कुरनूल सबसे आगे

आंध्र प्रदेश में कपास बुवाई 13% बढ़ी, सामान्य से तेज़ प्रगति; कुरनूल सबसे आगेआंध्र प्रदेश में खरीफ 2026 के दौरान कपास की बुवाई ने पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की है। राज्य कृषि विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार 29 जुलाई 2026 तक राज्य में 3,36,354 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 2,97,848 हेक्टेयर था। इस प्रकार इस वर्ष 38,506 हेक्टेयर (लगभग 13%) अधिक क्षेत्र में कपास की बुवाई दर्ज की गई है।राज्य में अब तक सामान्य सीजनल क्षेत्र का 65% हिस्सा बोया जा चुका है, जबकि पिछले वर्ष यह 56% था। वहीं, सामान्य तिथि के अनुसार बुवाई की प्रगति 125% रही, जो पिछले वर्ष के 101% से काफी बेहतर है। इससे स्पष्ट है कि इस वर्ष अधिकांश क्षेत्रों में बुवाई सामान्य से तेज गति से हुई है।जिलावार आंकड़ों में कुरनूल सबसे आगे रहा, जहां 2,19,767 हेक्टेयर में कपास की बुवाई दर्ज की गई। इसके बाद पलनाडु (34,489 हेक्टेयर), NTR (21,671 हेक्टेयर), अनंतपुरम (20,915 हेक्टेयर) और YSR कडप्पा (6,105 हेक्टेयर) प्रमुख रहे। वहीं प्रकाशम, बापटला, काकीनाडा, गुंटूर और श्री सत्यसाई जैसे जिलों में बुवाई सामान्य गति से पीछे रही।कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बुवाई क्षेत्र में हुई यह वृद्धि आगामी सीजन में बेहतर कपास उत्पादन का आधार बन सकती है। हालांकि अंतिम उत्पादन अगस्त–सितंबर के मौसम, वर्षा के वितरण तथा फसल की स्थिति पर निर्भर करेगा।बाजार पर संभावित प्रभाव:बढ़ी हुई बुवाई किसानों के लिए सकारात्मक संकेत है। यदि मौसम अनुकूल बना रहता है, तो आगामी सीजन में कपास की उपलब्धता बेहतर रह सकती है। इससे जिनर्स, व्यापारियों और स्पिनिंग मिलों को नई फसल की बेहतर आपूर्ति मिलने की संभावना बढ़ेगी। फिलहाल बाजार की नजर मौसम और फसल की बढ़वार पर बनी रहेगी।और पढ़ें :- मानसून से तेलंगाना और महाराष्ट्र में खरीफ बुवाई तेज, कपास की बुवाई लगभग पूरी

मानसून से तेलंगाना और महाराष्ट्र में खरीफ बुवाई तेज, कपास की बुवाई लगभग पूरी

तेलंगाना और महाराष्ट्र में मॉनसून से खरीफ बुआई को रफ्तार, कपास की बुआई में तेज प्रगतिनई दिल्ली: हालिया मॉनसून बारिश ने तेलंगाना और महाराष्ट्र में खरीफ सीजन की बुआई को नई गति दी है। लंबे शुष्क दौर के बाद हुई लगातार बारिश से खेतों में नमी बढ़ी है, जलाशय और खेतों के तालाब भर गए हैं, जिससे किसानों ने बुआई और धान की रोपाई का काम तेज कर दिया है। दोनों राज्यों में खरीफ फसलों की प्रगति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है, जबकि कपास की बुआई अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है।तेलंगाना में 48 घंटे से अधिक समय तक हुई लगातार बूंदाबांदी के बाद अब तक 82.65 लाख एकड़ क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई और धान की रोपाई हो चुकी है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के 82.15 लाख एकड़ से अधिक है। कृषि अधिकारियों के अनुसार, हालिया वर्षा से मिट्टी में पर्याप्त नमी आई है और सिंचाई जल की उपलब्धता बेहतर होने से धान की रोपाई में तेजी आई है। एक सप्ताह पहले जहां राज्य में वर्षा की कमी 30 प्रतिशत थी, वहीं अब यह घटकर 19 प्रतिशत रह गई है।फसलवार प्रगति के अनुसार, धान की रोपाई 25.46 लाख एकड़ क्षेत्र में की जा चुकी है, जो 65.97 लाख एकड़ के लक्ष्य का लगभग 31 प्रतिशत है। कपास की बुआई 47.41 लाख एकड़ के लक्ष्य के मुकाबले 46.33 लाख एकड़ क्षेत्र तक पहुंच चुकी है, यानी लगभग 98 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जा चुका है। इसके अलावा मक्का की बुआई 4.69 लाख एकड़, अरहर 4.42 लाख एकड़ और सोयाबीन 3.66 लाख एकड़ क्षेत्र में हो चुकी है।महाराष्ट्र में भी पिछले दो सप्ताह के दौरान हुई अच्छी मॉनसून बारिश से खरीफ बुआई में तेजी आई है। राज्य के कृषि विभाग के अनुसार, 30 जुलाई तक गन्ने को छोड़कर राज्य के औसत खरीफ रकबे 1.44 करोड़ हेक्टेयर में से लगभग 1.23 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई हो चुकी है, जो कुल लक्ष्य का 86 प्रतिशत है। 16 से 30 जुलाई के बीच करीब 23 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में बुआई दर्ज की गई।फसलवार आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में सोयाबीन की बुआई 47.21 लाख हेक्टेयर तथा कपास की बुआई 37.27 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हो चुकी है, जो अनुमानित लक्ष्य का लगभग 88 प्रतिशत है। वहीं धान की रोपाई 7.82 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की जा चुकी है। राज्य में 1 जून से 27 जुलाई के बीच 466.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य वर्षा का 94.15 प्रतिशत है।कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि हालिया वर्षा ने दोनों राज्यों में खरीफ फसलों की स्थिति में सुधार किया है। यदि आगामी सप्ताहों में मॉनसून सामान्य बना रहता है, तो कपास, धान, सोयाबीन और अन्य खरीफ फसलों की बढ़वार बेहतर होगी तथा इस वर्ष उत्पादन की संभावनाएं और मजबूत होंगी।और पढ़ें :-वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का वस्त्र एवं परिधान निर्यात ₹3.25 लाख करोड़ के पार, सरकार ने बढ़ाया निर्यात प्रोत्साहन

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का वस्त्र एवं परिधान निर्यात ₹3.25 लाख करोड़ के पार, सरकार ने बढ़ाया निर्यात प्रोत्साहन

2025-26 में भारत का टेक्सटाइल एवं परिधान (हस्तशिल्प सहित) निर्यात ₹3.25 लाख करोड़ के पारनई दिल्ली। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का टेक्सटाइल एवं परिधान (हस्तशिल्प सहित) निर्यात ₹3,25,339 करोड़ रहा, जो 2024-25 के ₹3,19,573.2 करोड़ की तुलना में 1.8 प्रतिशत अधिक है। इस अवधि में 100 से अधिक देशों को होने वाले निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई। सरकार का कहना है कि यह वृद्धि भारतीय टेक्सटाइल क्षेत्र की बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और निर्यात क्षमता का संकेत है।सरकार ने टेक्सटाइल एवं परिधान क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई योजनाएँ लागू की हैं। इनमें प्रधानमंत्री मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल (PM MITRA) पार्क योजना, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना, नेशनल टेक्निकल टेक्सटाइल्स मिशन, SAMARTH योजना तथा एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के तहत मार्केट एक्सेस सपोर्ट और ब्याज सब्सिडी जैसे उपाय शामिल हैं।हाल के महीनों में सरकार ने कई नई पहलें भी की हैं। इनमें 'निर्यातित उत्पादों पर शुल्क एवं करों की छूट' (RoDTEP) योजना को 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाना, कपास और मैन-मेड फाइबर (MMF) वैल्यू चेन के प्रमुख कच्चे माल पर अस्थायी सीमा शुल्क राहत, MMF क्षेत्र में इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को दूर करने के लिए GST दरों का युक्तिकरण तथा पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक परिस्थितियों से प्रभावित निर्यातकों की सहायता के लिए 'रेसिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन' (RELIEF) पहल शामिल हैं।मार्च 2019 से संचालित RoSCTL योजना की अवधि भी 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दी गई है, जिससे गारमेंट्स और मेड-अप्स के निर्यातकों को राज्य एवं केंद्रीय करों और लेवी की प्रतिपूर्ति का लाभ मिलता रहेगा। इसके साथ ही सरकार ने 40 प्राथमिकता वाले देशों पर केंद्रित निर्यात संवर्धन रणनीति अपनाई है। वर्तमान में भारत के 16 मुक्त व्यापार समझौते (FTA) लागू हैं, जबकि यूरोपीय संघ और न्यूजीलैंड के साथ हुए हालिया व्यापार समझौतों से भी भारतीय टेक्सटाइल उद्योग को नए बाजारों में अवसर मिलने की उम्मीद है।टेक्सटाइल मंत्रालय ने छह टेक्सटाइल एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन सेंटर (TEFC) स्थापित किए हैं और NIFT के माध्यम से 'इंडिया इमर्सिव एक्सपीरियंस प्रोग्राम' शुरू किया है। वर्ष 2025-26 में देश के 500 से अधिक जिलों से टेक्सटाइल और हस्तशिल्प उत्पादों का निर्यात हुआ। सरकार का कहना है कि इन पहलों से निर्यात बाजारों में विविधता, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, ई-कॉमर्स के माध्यम से बाजार तक पहुंच और विशेष रूप से MSMEs की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा मिला है।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 29 पैसे मजबूत होकर 95.39 पर खुला.

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