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गुणवत्ता से ऑस्ट्रेलियाई कपास को बढ़त

छोटा लेकिन ताकतवर: ऑस्ट्रेलियाई कॉटन कैसे हासिल कर रहा है नए ‘गोल’ऑस्ट्रेलिया भले ही दुनिया के कुल कॉटन उत्पादन का एक छोटा हिस्सा पैदा करता हो, लेकिन गुणवत्ता के मामले में उसकी वैश्विक प्रतिष्ठा बेहद मजबूत है।ऐसे मौसम में, जहां खेती के लिए इनोवेशन और रणनीतिक सोच जरूरी है, ऑस्ट्रेलिया दुनिया के बेहतरीन कॉटन का उत्पादन करता है। बेहतर किस्मों, अनुकूल प्राकृतिक परिस्थितियों, किसानों की विशेषज्ञता और ऑस्ट्रेलियाई कॉटन की मजबूत मांग ने इसकी सफलता में अहम भूमिका निभाई है।न्यूट्रियन के ग्राहक और गुनेडा के कॉटन किसान जेम्स बार्लो पिछले 10 वर्षों से कॉटन उगा रहे हैं। उनके अनुसार, कॉटन उनकी सिंचाई व्यवस्था में अच्छी तरह फिट बैठता है। इसका रिटर्न मार्जिन अच्छा है और फसल से मिलने वाला खरपतवार नियंत्रण भी उपयोगी है। डबल क्रॉपिंग के कारण वे एक ही साल में कॉटन के साथ सर्दियों की फसल भी उगा सकते हैं।2026 में गर्म और शुष्क शरद ऋतु ने कॉटन की पिकिंग के लिए लगभग आदर्श परिस्थितियां तैयार कीं। ऑस्ट्रेलियन कॉटन शिपर्स एसोसिएशन के अनुसार, औसत पैदावार लगभग 12-14 गांठ प्रति हेक्टेयर रही और सभी क्षेत्रों में गुणवत्ता मजबूत बनी हुई है। फाइबर की लंबाई और मजबूती भी अच्छी रही।ऑस्ट्रेलियाई कॉटन की पहचान केवल गुणवत्ता तक सीमित नहीं है। उद्योग लंबे समय से सस्टेनेबिलिटी और पानी के बेहतर इस्तेमाल पर काम कर रहा है। 1991 में यह ऑस्ट्रेलियाई कृषि का पहला ऐसा सेक्टर बना, जिसने अपने पर्यावरणीय प्रभाव का स्वतंत्र आकलन कराया।आज हर कॉटन गांठ के साथ एक यूनिक बारकोड होता है, जिससे उसकी उत्पत्ति और उत्पादन क्षेत्र की ट्रेसेबिलिटी संभव है।वैश्विक सप्लाई में संभावित कमी, सिंथेटिक फाइबर की बढ़ती कीमतों और टिकाऊ उत्पादों की बढ़ती मांग से ऑस्ट्रेलियाई कॉटन के लिए नए अवसर बन रहे हैं।और पढ़ें :- महाराष्ट्र में बारिश से 2.75 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित

महाराष्ट्र में बारिश से 2.75 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित

महाराष्ट्र में भारी बारिश से 2.75 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावितपुणे: महाराष्ट्र में लगातार हो रही भारी बारिश से किसानों को बड़ा नुकसान हुआ है। राज्य कृषि विभाग की शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, अब तक करीब 2.75 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर फसलें प्रभावित हुई हैं। इनमें पिछले कुछ दिनों में प्रभावित हुई करीब 75,000 हेक्टेयर जमीन भी शामिल है। बारिश जारी रहने के कारण नुकसान का आंकड़ा और बढ़ सकता है।कृषि विभाग के अनुसार, विदर्भ और उत्तरी महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। कपास, सोयाबीन, मक्का, मूंग, उड़द, अरहर, बाजरा, ज्वार, सब्जियां, गन्ना, केला, पपीता और नींबू जैसी फसलें प्रभावित हुई हैं।जिलों में अमरावती सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां 71,909 हेक्टेयर से अधिक फसल नुकसान की सूचना है। जलगांव में 50,000 हेक्टेयर से ज्यादा और यवतमाल में 25,803 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र प्रभावित हुआ है।राज्य के कृषि आयुक्त सूरज मंधारे ने कहा कि कई गांवों से अभी नुकसान की रिपोर्ट मिल रही है। इसलिए प्रभावित क्षेत्र का दायरा बढ़ सकता है। कृषि विभाग प्रभावित गांवों में फसल नुकसान का आकलन कर रहा है।कोंकण क्षेत्र में भी भारी बारिश का असर पड़ा है। रायगढ़ में 2,000 हेक्टेयर से ज्यादा धान की नर्सरियों को नुकसान हुआ है। इससे किसानों को दोबारा नर्सरी तैयार करनी पड़ सकती है और धान की रोपाई में देरी हो सकती है।किसानों का कहना है कि बारिश रुकने के बाद भी नुकसान का असर दिखाई दे सकता है। खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से पौधों की जड़ें खराब हो सकती हैं और फसलों में बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने और फसलों में बीमारी के लक्षणों पर नजर रखने की सलाह दी है। विस्तृत सर्वे पूरा होने के बाद ही बारिश से हुए वास्तविक नुकसान का पता चल सकेगा।और पढ़ें :- टेक्सटाइल उद्योग में नीति सुधार की जरूरत

टेक्सटाइल उद्योग में नीति सुधार की जरूरत

टेक्सटाइल इंडस्ट्री की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए पॉलिसी सुधार जरूरी: संसदीय समितिअमेरिकी बाजार में टैरिफ को लेकर अनिश्चितता और घटती मांग के बीच भारत की एक संसदीय समिति ने टेक्सटाइल और कपड़ा उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए मजबूत नीतिगत और वित्तीय सहायता की सिफारिश की है। समिति ने उद्योग को तकनीकी टेक्सटाइल, मैन-मेड फाइबर (MMF), सस्टेनेबल टेक्सटाइल, होम फर्निशिंग और हाई-वैल्यू गारमेंट्स जैसे क्षेत्रों में तेजी से विविधीकरण करने पर जोर दिया है।राज्यसभा सांसद डोला सेन की अध्यक्षता वाली वाणिज्य मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने संसद के दोनों सदनों में ‘भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के मूल्यांकन’ पर अपनी 200वीं रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में अमेरिकी टैरिफ उपायों से भारतीय निर्यातकों के सामने आने वाली चुनौतियों का आकलन किया गया है और निर्यात प्रतिस्पर्धा मजबूत करने के लिए कई उपाय सुझाए गए हैं।समिति ने टेक्सटाइल सेक्टर के आधुनिकीकरण और उत्पादकता बढ़ाने के लिए PM MITRA पार्कों, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम और समर्थ योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने की सिफारिश की है। साथ ही, नए PM MITRA पार्कों में विशेष MMF मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर स्थापित करने का सुझाव दिया गया है, जिससे MSMEs को सिंथेटिक कच्चे माल की स्थानीय स्तर पर आसान उपलब्धता मिल सके और उत्पादन को वैश्विक मांग के अनुरूप ढाला जा सके।रिपोर्ट में RoDTEP, RoSCTL, ब्याज समकारी योजना और अन्य निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं के तहत सहायता बढ़ाने की मांग की गई है। टेक्सटाइल MSMEs के लिए रियायती वर्किंग कैपिटल, निर्यात क्रेडिट, क्रेडिट गारंटी और अन्य वित्तीय सहायता का तेजी से वितरण सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।समिति ने अमेरिकी खरीदारों द्वारा कीमतों में कटौती की मांग से प्रभावित निर्यातकों के लिए RoSCTL के तहत एक आपातकालीन राहत कार्यक्रम पर विचार करने का सुझाव दिया है। इसके अलावा, प्रमुख अमेरिकी शिपिंग एंट्री पॉइंट्स पर सरकारी सब्सिडी वाले टेक्सटाइल वेयरहाउसिंग हब और भारतीय बंदरगाहों पर ग्रीन-चैनल तथा तेज कस्टम्स कॉरिडोर विकसित करने की सिफारिश की गई है।कालीन और हथकरघा क्षेत्र के लिए समिति ने ट्रेड फेयर, ब्रांडिंग, GI प्रमोशन, बायर-सेलर मीट, डिजिटल मार्केटिंग और डिजाइन इनोवेशन के जरिए निर्यात सहायता बढ़ाने पर जोर दिया है।समिति ने टेक्सटाइल निर्यातकों के लिए टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन ग्रांट और एक विशेष मार्केट-लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम की भी सिफारिश की है, ताकि उद्योग अमेरिकी ग्राहकों की बदलती पसंद के अनुरूप उत्पादों में विविधता ला सके और वैश्विक बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत कर सके।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 4 पैसे मजबूत होकर 95.17 पर खुला।

अमेरिका के टैरिफ बिल से भारत पर खतरा

क्या जल्द ही भारत पर 100% टैरिफ़ लगेगा? अमेरिकी सीनेट ने रूसी तेल को लेकर प्रतिबंधों वाला बिल मंज़ूर किया।अमेरिकी सीनेट ने रूस से तेल, गैस और अन्य उत्पाद खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की अनुमति देने वाले एक बिल को 86-11 वोटों से मंजूरी दे दी है। बिल के समर्थकों ने भारत को उन पांच देशों में शामिल किया है, जिन पर यह प्रावधान लागू हो सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर तुरंत 100% टैरिफ लग जाएगा।प्रस्तावित कानून का नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026’ है। इसके तहत चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान जैसे देशों पर कार्रवाई की संभावना है। बिल में टैरिफ की अधिकतम सीमा 100% रखी गई है, लेकिन वास्तविक दर तय करने की जिम्मेदारी अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) को दी जाएगी।राष्ट्रपति को राष्ट्रीय हित के आधार पर किसी देश को छूट देने का अधिकार भी होगा। साथ ही, नीति की हर 180 दिनों में समीक्षा की जाएगी।भारत का कहना है कि रूस से तेल खरीदना उसकी ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू जरूरतों का हिस्सा है। नई दिल्ली ने रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर अमेरिकी दबाव को अनुचित बताया है।अमेरिका पहले भी रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगा चुका है। हालांकि, बाद में व्यापार वार्ता के दौरान इसे हटा दिया गया था। अब सीनेट की मंजूरी के बाद भारत पर एक बार फिर दबाव बढ़ने की संभावना है।फिलहाल यह बिल कानून नहीं बना है। सीनेट से मंजूरी के बाद इसे हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में जाना होगा। वहां से पारित होने और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ही यह कानून बन सकेगा।इसलिए अभी भारत पर 100% टैरिफ लगना तय नहीं है। अगर बिल कानून बनता भी है, तो टैरिफ की दर अलग से तय की जाएगी। यानी फिलहाल भारत पर 100% टैरिफ का खतरा है, लेकिन यह अभी निश्चित नहीं है।और पढ़ें :- तेलंगाना कपास खरीद पर ₹69,860 करोड़

तेलंगाना कपास खरीद पर ₹69,860 करोड़

तेलंगाना में कपास खरीद पर केंद्र ने खर्च किए ₹69,860 करोड़: किशन रेड्डीहैदराबाद: केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने नेशनल हैंडलूम डे के अवसर पर कहा कि केंद्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) व्यवस्था के तहत तेलंगाना के किसानों से कपास की खरीद पर ₹69,860 करोड़ से अधिक खर्च किए हैं।किशन रेड्डी ने कहा कि वारंगल में विकसित किया जा रहा PM MITRA मेगा टेक्सटाइल पार्क पारंपरिक टेक्सटाइल तकनीकों को आधुनिक मशीनरी और तकनीक से जोड़ेगा। इससे राज्य में टेक्सटाइल और हैंडलूम क्षेत्र को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।उन्होंने कहा कि मोदी सरकार 'मेक इन इंडिया' के साथ टेक्सटाइल क्षेत्र में 5F विजन को आगे बढ़ा रही है। इसके तहत Farm to Fibre, Fibre to Factory, Factory to Fashion और Fashion to Foreign पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य खेत से लेकर वैश्विक बाजार तक टेक्सटाइल वैल्यू चेन को मजबूत करना है। किशन रेड्डी ने कहा कि इस क्षेत्र के विकास के लिए 2030 तक करीब ₹9 लाख करोड़ के इंसेंटिव दिए जा रहे हैं।मंत्री के अनुसार, बुनकरों को सहायता देने के लिए PLI स्कीम, PM MITRA पार्क, नेशनल हैंडलूम डेवलपमेंट प्रोग्राम, रॉ मटीरियल सप्लाई स्कीम और मुद्रा योजना जैसी पहलें चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं के जरिए आधुनिक करघे, कच्चा माल, वर्कशेड, डिजाइन डेवलपमेंट, मार्केटिंग, क्रेडिट और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।उन्होंने कहा कि हैंडलूम और टेक्सटाइल क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और एडवांस्ड एनालिटिक्स जैसी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। इससे उत्पादकता, गुणवत्ता और बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। किशन रेड्डी ने कहा कि यह क्षेत्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब पांच करोड़ लोगों को रोजगार देता है।रामचंद्र राव ने बुनकरों को दी बधाईतेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने नेशनल हैंडलूम डे पर बुनकरों, कारीगरों और उनके परिवारों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि नारायणपेट, कोठाकोटा, गडवाल, पोचमपल्ली और सिरसिल्ला जैसे क्षेत्र अपनी विशिष्ट हथकरघा परंपरा के लिए देश-विदेश में पहचान रखते हैं। उन्होंने लोगों से हथकरघा उत्पाद खरीदने और पहनने की अपील की।संगठनात्मक बैठकनई दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में तेलंगाना बीजेपी की संगठनात्मक बैठक भी हुई। इसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, किशन रेड्डी, एन. रामचंद्र राव, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार, के. लक्ष्मण समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। तेलंगाना प्रभारी अभय पाटिल और राज्य महासचिव (संगठन) चंद्रशेखर तिवारी भी बैठक में मौजूद रहे।और पढ़ें :- नंदुरबार में खरीफ बुवाई रुकी

नंदुरबार में खरीफ बुवाई रुकी

महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले को बारिश का इंतजार; खरीफ की बुआई सिर्फ 90 प्रतिशत पूरीराज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश हुई है, जबकि कुछ इलाकों में अभी भी बारिश का इंतजार है। जोरदार बारिश के कारण शहर के कई इलाके जलमग्न हो गए हैं। कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है, जबकि राज्य के कुछ हिस्सों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश होने की उम्मीद है।नंदुरबार जिला जोरदार बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। पानी का संकट गहराता जा रहा है और कई जगहों पर बुआई का काम रुक गया है। बुआई रुकने से किसान परेशान हैं, क्योंकि बारिश नहीं होने से खरीफ सीजन पर संकट मंडरा रहा है। अभी तक खरीफ की सिर्फ 90 प्रतिशत बुआई ही पूरी हो पाई है।बारिश नहीं होने से कपास, मक्का और सोयाबीन की खेती पर असर पड़ा है, किसानों की चिंताएं बढ़ रही हैं और वे बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं।और पढ़ें :- CCI ने कपास भाव ₹700 बढ़ाए

CCI ने कपास भाव ₹700 बढ़ाए

CCI ने कपास की कीमतें ₹700 प्रति कैंडी बढ़ाईं; साप्ताहिक नीलामी में बिक्री 1.52 लाख गांठों के पारकॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (CCI) ने 7 अगस्त, 2026 को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान कपास की बिक्री कीमतों में ₹700 प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की। यह बढ़ोतरी मिलों और कपास व्यापारियों की ओर से मजबूत मांग को दर्शाती है।इस सप्ताह के दौरान, CCI ने 2025–26 की फसल से लगभग 1,52,000 गांठ कपास बेची, जिसमें नीलामी की सबसे अधिक मात्रा बुधवार को दर्ज की गई।साप्ताहिक बिक्री रिपोर्ट 3 अगस्त, 2026 (सोमवार)CCI ने सप्ताह की शुरुआत 17,800 गांठों की बिक्री के साथ की। टेक्सटाइल मिलों ने 8,500 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 9,300 गांठें खरीदीं।4 अगस्त, 2026 (मंगलवार)नीलामी की गतिविधि तेज हुई और कुल बिक्री बढ़कर 41,100 गांठें हो गई। मिलों ने 21,600 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 19,500 गांठें खरीदीं।5 अगस्त, 2026 (बुधवार)बुधवार को सप्ताह की सबसे अधिक नीलामी मात्रा देखी गई, जिसमें 48,100 गांठें बेची गईं। खरीद में व्यापारियों का दबदबा रहा, जिन्होंने 37,100 गांठें खरीदीं, जबकि मिलों ने 11,000 गांठें खरीदीं।6 अगस्त, 2026 (गुरुवार)CCI ने गुरुवार की नीलामी के दौरान 21,500 गांठें बेचीं। मिलों ने 7,700 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 13,800 गांठें खरीदीं।7 अगस्त, 2026 (शुक्रवार)सप्ताह की नीलामी 23,500 गांठों की बिक्री के साथ समाप्त हुई। मिलों ने 7,200 गांठें खरीदीं और व्यापारियों ने 16,300 गांठें खरीदीं।हालिया नीलामी के बाद, 2025–26 सीज़न के लिए CCI की कुल कपास बिक्री लगभग 90,36,800 गांठों तक पहुंच गई, जो घरेलू टेक्सटाइल मिलों और कपास व्यापारियों दोनों की ओर से लगातार मजबूत मांग को दर्शाती है।

नागालैंड में यार्न बैंक योजना शुरू

नागालैंड में 'मुख्यमंत्री यार्न बैंक योजना' का शुभारंभ, बुनकरों को मिलेगा सस्ता और गुणवत्तापूर्ण धागाराष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने 'मुख्यमंत्री यार्न बैंक योजना' का वर्चुअल शुभारंभ किया। इस योजना का उद्देश्य राज्य के हथकरघा क्षेत्र को मजबूत करना और बुनकरों की आजीविका को बेहतर समर्थन प्रदान करना है।कोहिमा में आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री टी.आर. जेलियांग, उद्योग एवं वाणिज्य मामलों की सलाहकार हेकानी जखालू तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। योजना के तहत स्थापित यार्न बैंक दीमापुर के टोलुवी स्थित राज्य औद्योगिक क्षेत्र के जिला उद्योग केंद्र में संचालित किया जाएगा।'मुख्यमंत्री यार्न बैंक योजना' का उद्देश्य बुनकरों के सामने आने वाली लंबे समय से चली आ रही उस समस्या का समाधान करना है, जिसमें उन्हें उचित कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण प्राकृतिक धागा उपलब्ध नहीं हो पाता था। इस कारण उत्पादन लागत बढ़ने के साथ-साथ उनकी आय भी प्रभावित होती थी।योजना के तहत राज्य सरकार बुनकरों को 15 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान करेगी। इसके अलावा सूती धागा, एरी सिल्क, मूगा सिल्क, बांस के रेशों और अन्य प्राकृतिक मिश्रित रेशों से बने धागे मिल-गेट कीमतों पर उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे बुनकरों को कम लागत में बेहतर गुणवत्ता वाली सामग्री मिल सकेगी और उनके उत्पादों की बाजार प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से प्रतिवर्ष लगभग 5,000 से 10,000 बुनकर लाभान्वित होंगे। एक पारदर्शी और भरोसेमंद वितरण प्रणाली के माध्यम से पात्र बुनकर सीधे यार्न बैंक से धागा खरीद सकेंगे। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और कारीगरों को अधिक लाभ मिलेगा।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने कहा कि यह पहल राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके तहत हथकरघा क्षेत्र को बढ़ावा देने और कारीगरों की आजीविका को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हथकरघा केवल वस्त्र निर्माण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह नागालैंड की पहचान, संस्कृति और समृद्ध विरासत की अभिव्यक्ति है।मुख्यमंत्री ने राज्य के बुनकरों, विशेषकर महिलाओं, के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि वे पारंपरिक शिल्प को संरक्षित रखने के साथ-साथ हजारों परिवारों की आजीविका में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने पात्र बुनकरों, सरकारी विभागों, सहकारी समितियों, स्वयं सहायता समूहों, ग्राम संस्थाओं और सामुदायिक नेताओं से मिलकर काम करने का आह्वान किया, ताकि योजना का लाभ प्रत्येक पात्र कारीगर तक पहुंच सके।राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने नागालैंड की समृद्ध हथकरघा विरासत के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 'मुख्यमंत्री यार्न बैंक योजना' आने वाले वर्षों में बुनकरों को नई संभावनाएं प्रदान करेगी और राज्य की पारंपरिक हथकरघा कला को नई पहचान दिलाएगी।

भावनगर में कपास बुवाई रिकॉर्ड

भावनगर जिले में कपास और मूंगफली की रिकॉर्ड बुवाई, किसानों को अच्छे भाव की उम्मीदभावनगर: जिले के किसानों के लिए इस साल का खरीफ सीजन काफी उत्साहजनक दिखाई दे रहा है। अच्छी बारिश और अनुकूल मौसम के चलते किसानों ने कपास और मूंगफली की बड़े पैमाने पर बुवाई की है। जुलाई के तीसरे सप्ताह के अंत तक जिले में 3,58,100 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई पूरी हो चुकी है। यह जिले के कुल 4,44,000 हेक्टेयर खरीफ क्षेत्र का 80.65 प्रतिशत है।इस साल जिले में कपास की खेती का रकबा सबसे अधिक रहा है। तलाजा और महुवा सहित ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों ने कपास की बुवाई को प्राथमिकता दी है। वहीं, मूंगफली की खेती भी बड़े क्षेत्र में की गई है। किसानों को उम्मीद है कि पर्याप्त बारिश और बेहतर मौसम के कारण दोनों फसलों का उत्पादन अच्छा रहेगा।कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में अब तक 2,16,000 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई है, जो कुल खरीफ बुवाई का करीब 56 प्रतिशत है। इसके अलावा 1,16,000 हेक्टेयर क्षेत्र में मूंगफली की खेती की गई है। दोनों प्रमुख फसलों के बढ़े हुए रकबे से किसानों में बेहतर पैदावार और आय की उम्मीद जगी है।किसानों का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में मानसून सामान्य रहा तो कपास और मूंगफली की फसल बेहतर हो सकती है। खासकर कपास के अच्छे उत्पादन के साथ बाजार में बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद किसानों को है।जिला कृषि अधिकारी ने भी बताया कि इस वर्ष भावनगर जिले में कपास की बुवाई बड़े स्तर पर हुई है। कृषि विभाग लगातार फसलों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।भावनगर जिले में अब तक करीब 51 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है। समय-समय पर हो रही बारिश से फसलों को आवश्यक नमी मिल रही है। जहां कुछ अन्य जिलों में अत्यधिक बारिश से नुकसान की स्थिति बनी है, वहीं भावनगर में अब तक मौसम खेती के अनुकूल रहा है।किसानों को उम्मीद है कि यदि आने वाले दिनों में बारिश का क्रम अच्छा बना रहा तो कपास और मूंगफली का उत्पादन बढ़ सकता है। बेहतर पैदावार और अच्छे बाजार भाव मिलने से इस खरीफ सीजन में किसानों की आय में सुधार की संभावना है।

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