Filter

Recent News

कपास खरीद पर 14 क्विंटल सीमा खत्म

14 क्विंटल की बाध्यता खत्म... अब किसानों के उत्पादन के अनुसार सीसीआई खरीदेगी कपासकपास उत्पादक किसानों के लिए राहत कि खबर है। भारतीय कपास निगम लिमिटेड (सीसीआई) ने जिले में कपास खरीदी नीति में बदलाव किया है। अब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 14.01 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के मान से कपास खरीदी जा रही थी। इससे अधिक उत्पादन वाले किसानों को शेष कपास खुले बाजार में औने-पौने दाम में बेचना पड़ रहा था।भास्कर ने 26 अक्टूबर के अंक में प्रमुखता से खबर प्रकाशित कर जिम्मेदारों की लापरवाही को उजागर किया था। इसके बाद शासन स्तर से सीसीआई को किसानों के वास्तविक उत्पादन के अनुसार कपास खरीदी के आदेश दिए है। कृषि विभाग के डीडीए एसएस राजपूत ने बताया उत्पादन का प्रमाण पत्र संबंधित क्षेत्र के कृषि अधिकारी द्वारा जारी किया जाएगा। मंगलवार को खरगोन केंद्र में दिनेश पटेल, बड़वाह केंद्र में रेखा शाह और कविता शाह को प्रमाण पत्र जारी कर इनके कपास की खरीदी की। संबंधित क्षेत्र के कृषि अधिकारी द्वारा कपास खरीदी केन्द्र पर ही प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे। अब यह बदलाव किसानों के हित में लागू हो गया है, उन्हें उत्पादन के अनुसार सही मूल्य पर कपास बेचने की सुविधा मिलेगी।सोमवार से शुक्रवार तक होंगे स्लॉट बुक इन दिनों शादियों का सीजन होने व किसानों के बोवनी से निपटने के चलते पूरे सप्ताह के स्लॉट कुछ ही मिनटों में बुक हो रहे। इससे शेष किसानों को परेशान होना पड़ रहा। ऐसे में अब सोमवार से शुक्रवार तक सुबह 10.30 बजे से स्लॉट बुक होंगे। जिस दिन किसान स्लॉट बुक करेंगे, उसके अगले सप्ताह उसी दिन स्लॉट उपलब्ध होगा। मंडी समिति ने किसानों से आह्वान किया है कि यदि किसी कारणवश वे बुक किए गए दिन कपास लेकर नहीं आ पाए, तो स्लॉट कैंसल कर दे, ताकि अन्य को अवसर मिले।और पढ़ें :- “2025–26 खरीफ फसलों का पहला अग्रिम अनुमान जारी”

“2025–26 खरीफ फसलों का पहला अग्रिम अनुमान जारी”

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने जारी किए 2025–26 के खरीफ फसलों के पहले अग्रिम उत्पादन अनुमानमुख्य फसलों में रिकॉर्ड वृद्धि; कुल खरीफ खाद्यान्न उत्पादन 173.33 मिलियन टन रहने का अनुमानकृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज वर्ष 2025–26 के खरीफ फसलों के पहले अग्रिम उत्पादन अनुमान जारी किए, जिनमें देशभर में कुल फसल उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि का अनुमान व्यक्त किया गया है।अनुमानों के अनुसार, कुल खरीफ खाद्यान्न उत्पादन 3.87 मिलियन टन बढ़कर 173.33 मिलियन टन तक पहुँचने की संभावना है। यह वृद्धि अनुकूल मानसून और बेहतर फसल प्रबंधन के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है।🔹 कपास उत्पादन — मजबूत प्रदर्शन जारीवर्ष 2025–26 में कपास उत्पादन 29.22 मिलियन गांठ (प्रत्येक गांठ 170 किलोग्राम) रहने का अनुमान है, जो क्षेत्रीय मौसमीय विविधताओं के बावजूद स्थिर और सशक्त प्रदर्शन को दर्शाता है। यह निरंतर उत्पादन देश के टेक्सटाइल और निर्यात क्षेत्रों को सशक्त करने में सहायक होगा।🔹 तेलबीज और सोयाबीन उत्पादन — मजबूत वृद्धि की संभावनावर्ष 2025–26 के लिए कुल खरीफ तेलबीज उत्पादन 27.56 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो इस क्षेत्र के ठोस प्रदर्शन को दर्शाता है।मूंगफली (ग्राउंडनट): 11.09 मिलियन टन रहने का अनुमान, जो पिछले वर्ष से 0.68 मिलियन टन अधिक है।सोयाबीन: 14.27 मिलियन टन रहने का अनुमान, जिससे यह देश की प्रमुख खरीफ तेलबीज फसल के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत करता है।ये अनुमान तेलबीज क्षेत्र में मजबूत सुधार और विस्तार को दर्शाते हैं, जो भारत के खाद्य तेल आत्मनिर्भरता लक्ष्यों को समर्थन प्रदान करते हैं।🔹 समग्र फसल प्रदर्शनश्री चौहान ने कहा कि यद्यपि कुछ क्षेत्रों को अत्यधिक वर्षा से चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन अधिकांश इलाकों में संतुलित मानसूनी वितरण से प्रमुख उत्पादक राज्यों में फसल वृद्धि को बल मिला है।खरीफ धान — 124.50 मिलियन टन रहने का अनुमान, जो पिछले वर्ष से 1.73 मिलियन टन अधिक है।खरीफ मक्का— 28.30 मिलियन टन रहने का अनुमान, जो पिछले सत्र से 3.50 मिलियन टन अधिक है।मोटे अनाज — 41.41 मिलियन टन रहने का अनुमान।दलहन — 7.41 मिलियन टन रहने का अनुमान, जिसमेंतुर (अरहर) — 3.60 मिलियन टन,उड़द — 1.20 मिलियन टन,मूंग — 1.72 मिलियन टन शामिल हैं।ये अनुमान पिछले वर्षों की उत्पादकता प्रवृत्तियों, क्षेत्रीय अवलोकनों, फील्ड रिपोर्टों तथा राज्य सरकारों से प्राप्त आंकड़ों पर आधारित हैं। अंतिम संशोधन फसल कटाई प्रयोग (CCE) के आंकड़े उपलब्ध होने के बाद किए जाएंगे।और पढ़ें :- रुपया 02 पैसे गिरकर 89.27 प्रति डॉलर पर बंद हुआ

जेपी मॉर्गन: FY27 तक तेल कीमतें $30 तक गिर सकती हैं

जेपी मॉर्गन ने FY27 तक तेल की कीमतों में भारी गिरावट और $30s तक गिरने की चेतावनी दी: रिपोर्टअगर ऐसा होता है, तो ऐसा करेक्शन भारत के लिए काफी राहत देगा, जहाँ तेल इंपोर्ट मैक्रो स्टेबिलिटी पर बहुत ज़्यादा असर डालता हैजेपी मॉर्गन ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर एक शानदार अनुमान जारी किया है, द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इन्वेस्टमेंट बैंक को लगता है कि ब्रेंट क्रूड FY27 के आखिर तक $30 की रेंज में आ सकता है।यह अनुमान इस उम्मीद पर आधारित है कि सप्लाई में ज़्यादा बढ़ोतरी होगी जो अगले तीन सालों तक डिमांड ग्रोथ से ज़्यादा रहेगी।अगर ऐसा होता है, तो ऐसा करेक्शन भारत के लिए काफी राहत देगा, जहाँ तेल इंपोर्ट मैक्रो स्टेबिलिटी पर बहुत ज़्यादा असर डालता है।द इकोनॉमिक टाइम्स का कहना है कि 2025 में ग्लोबल तेल की डिमांड 0.9 mbd बढ़ने वाली है, जिससे कुल खपत 105.5 mbd हो जाएगी। 2026 में डिमांड ग्रोथ स्थिर रहने और 2027 में 1.2 mbd तक बढ़ने की संभावना है। हालांकि, जेपी मॉर्गन के अनुमान बताते हैं कि 2025 और 2026 दोनों में सप्लाई डिमांड से लगभग तीन गुना तेज़ी से बढ़ेगी। भले ही 2027 में सप्लाई ग्रोथ कम हो जाए, फिर भी उम्मीद है कि यह उससे ज़्यादा होगी जिसे मार्केट आराम से झेल सकता है।इस अंतर के पीछे एक मुख्य वजह नॉन-OPEC+ आउटपुट की नई मज़बूती है। जैसा कि द इकोनॉमिक टाइम्स ने बताया है, जेपी मॉर्गन का मानना है कि 2027 तक आधी बढ़ी हुई सप्लाई प्रोड्यूसर अलायंस के बाहर से आएगी, जिसे मज़बूत ऑफशोर प्रोजेक्ट्स और ग्लोबल शेल में लगातार तेज़ी का सपोर्ट मिलेगा। ऑफशोर, जिसे कभी महंगा और साइक्लिकल बिज़नेस माना जाता था, अब एक भरोसेमंद, कम लागत वाली ग्रोथ स्ट्रीम बन गया है। अनुमान है कि यह 2025 में 0.5 mbd, 2026 में 0.9 mbd और 2027 में 0.4 mbd का योगदान देगा। 2029 तक लगभग सभी FPSOs पहले से ही मौजूद हैं, इसलिए बैंक को आने वाले ऑफशोर एडिशन पर बहुत ज़्यादा विज़िबिलिटी दिख रही है।शेल ऑयल सिस्टम का सबसे ज़्यादा रिस्पॉन्सिव सप्लाई लीवर बना हुआ है। हालांकि US शेल ग्रोथ धीमी हो गई है, लेकिन प्रोडक्टिविटी में बढ़ोतरी और बेहतर कैपिटल एफिशिएंसी से आउटपुट बढ़ रहा है। US के अलावा, अर्जेंटीना का वाका मुएर्ता एक्सपोर्ट कैपेसिटी बढ़ाने के सहारे एक कॉस्ट-कॉम्पिटिटिव, स्केलेबल बेसिन बन गया है। द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में ग्लोबल शेल आउटपुट 0.8 mbd बढ़ा है, और अगर क्रूड ऑयल $50 के बीच में रहता है, तो शेल सप्लाई 2026 में 0.4 mbd और 2027 में 0.5 mbd बढ़ सकती है।इन बढ़ोतरी से इन्वेंट्री में काफी बढ़ोतरी हुई है। द इकोनॉमिक टाइम्स ने जेपी मॉर्गन के इस अंदाज़े का ज़िक्र किया है कि इस साल अब तक ग्लोबल स्टॉक में 1.5 mbd की बढ़ोतरी हुई है, जिसमें से लगभग 1 mbd ऑयल-ऑन-वॉटर और चीनी इन्वेंट्री में है। बैंक को उम्मीद है कि यह जमा हुआ सरप्लस 2026 तक फैल जाएगा, जिससे बिना किसी सुधार के 2026 में 2.8 mbd और 2027 में 2.7 mbd तक ज़्यादा स्टॉक हो सकता है।द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरह के उतार-चढ़ाव का मतलब है कि ब्रेंट अगले साल $60 से नीचे जा सकता है, 2026 के आखिर तक $50 के निचले स्तर पर आ सकता है, और उस साल के आखिर में कीमतें $4 के लेवल पर आ सकती हैं। 2027 के लिए, जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि यह एवरेज लगभग $42 रहेगा, और फिस्कल ईयर के आखिर तक कीमतें $30 तक गिरने की संभावना है। हालांकि बैंक मानता है कि पूरी गिरावट शायद न हो, लेकिन उसे उम्मीद है कि मार्केट बैलेंस मुख्य रूप से अपनी मर्ज़ी से और ज़बरदस्ती प्रोडक्शन में कटौती करके होगा। 2026 में ब्रेंट के लिए जेपी मॉर्गन का वर्किंग अनुमान $58 है, जबकि अभी ब्रेंट की कीमतें $60 प्रति बैरल से थोड़ी ऊपर हैं।और पढ़ें :- हाई कोर्ट ने सीसीआई से विदर्भ में कपास केंद्रों की कमी पर जवाब मांगा

हाई कोर्ट ने सीसीआई से विदर्भ में कपास केंद्रों की कमी पर जवाब मांगा

CCI को हाई कोर्ट का नोटिस: विदर्भ में कॉटन प्रोक्योरमेंट सेंटर की कमी; हाई कोर्ट ने कॉटन कॉर्पोरेशन से कहाCCI को हाई कोर्ट का नोटिस: देश में सबसे ज़्यादा कॉटन प्रोडक्शन वाले विदर्भ में प्रोक्योरमेंट सेंटर की बहुत कमी है। हाई कोर्ट ने कॉटन कॉर्पोरेशन को सिर्फ़ 89 सेंटर खोलने पर फटकार लगाई है, जबकि सैकड़ों किसान प्रोक्योरमेंट सेंटर का इंतज़ार कर रहे हैं, और किसानों के हित में तुरंत फ़ैसले लेने का इशारा दिया है। (CCI को हाई कोर्ट का नोटिस)CCI को हाई कोर्ट का नोटिस: विदर्भ में कॉटन किसानों के साथ एक बार फिर नाइंसाफ़ी हुई है। 16,86,485 हेक्टेयर कॉटन की खेती वाले विदर्भ में कम से कम 557 प्रोक्योरमेंट सेंटर की ज़रूरत होने के बावजूद, कॉटन कॉर्पोरेशन ने सिर्फ़ 89 सेंटर चालू किए हैं। (CCI को हाई कोर्ट का नोटिस)बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने मंगलवार को कॉटन कॉर्पोरेशन को इस गंभीर लापरवाही के लिए कड़ी फटकार लगाई और तीन हफ़्ते के अंदर डिटेल में जवाब देने का आदेश दिया। (CCI को हाई कोर्ट का नोटिस)पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन और कोर्ट में सुनवाईमहाराष्ट्र के कंज्यूमर पंचायत के डिस्ट्रिक्ट सेक्रेटरी श्रीराम सतपुते की फाइल की गई पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन पर जस्टिस अनिल किलोर और रजनीश व्यास की बेंच के सामने सुनवाई हुई।इस मौके पर, कोर्ट फ्रेंड एडवोकेट पुरुषोत्तम पाटिल के जमा किए गए एफिडेविट में कॉटन कॉर्पोरेशन की बेपरवाह पॉलिसी की तीखी आलोचना की गई और किसानों की असली हालत बताई गई।557 सेंटर की ज़रूरत – सिर्फ 89 सेंटर शुरू हुए: कोर्ट का सवालपिटीशन में दिए गए डेटा के मुताबिक,नागपुर डिविजन: 10.39 लाख हेक्टेयर में कॉटन की खेती लेकिन 213 सेंटर की ज़रूरतअमरावती डिविजन: 10.39 लाख हेक्टेयर में कॉटन की खेती लेकिन 344 सेंटर की ज़रूरतलेकिन असल में शुरू हुए सेंटर सिर्फ 35 और 54 सेंटर हैं!इस बड़ी गड़बड़ी पर गुस्सा दिखाते हुए बेंच ने सवाल उठाया कि कॉर्पोरेशन ने किस बेसिस पर किसानों को बताया कि सेंटर काफी हैं? किसानों को दोहरा झटका; प्राइवेट व्यापारियों को फ़ायदाकॉर्पोरेशन ने पिछले कुछ सालों की तरह इस साल भी नवंबर के दूसरे हफ़्ते से ख़रीद शुरू कर दी।इस वजह से, लाखों किसानों के पास प्राइवेट व्यापारियों को कपास बेचने के अलावा कोई चारा नहीं बचा।मिनिमम सपोर्ट प्राइस से 8000-1000 रुपये कम रेटबड़ा फ़ाइनेंशियल नुकसानएडवोकेट पाटिल ने साफ़ कहा कि यह स्थिति कॉर्पोरेशन की देरी वाली पॉलिसी का सीधा नतीजा है।ख़रीद की लिमिट और नमी के परसेंटेज पर कोर्ट में बहसअभी, 'कॉटन किसान' ऐप के ज़रिए रजिस्ट्रेशन ज़रूरी हैऔर ख़रीद की लिमिट 5 क्विंटल प्रति एकड़ है।हालांकि, विदर्भ में एवरेज प्रोडक्शन 6 से 10 क्विंटल/एकड़ है।इसलिए, कोर्ट में लिमिट बढ़ाकर 10 क्विंटल करने की मांग की गई।साथ ही, यह भी सुझाव दिया गया है कि नमी की लिमिट भी 12% से बढ़ाकर 15% कर दी जाए।1 - कॉर्पोरेशन को हर साल 31 सितंबर को या उससे पहले कपास की खरीद शुरू करनी चाहिए।2 - रजिस्ट्रेशन और स्लॉट बुकिंग को ज़रूरी नहीं बनाया जाना चाहिए। किसानों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों सुविधाएं दी जानी चाहिए।3 - कॉर्पोरेशन को उन किसानों को मुआवज़ा देना चाहिए जिन्हें मिनिमम सपोर्ट प्राइस से कम कीमत पर कपास बेचना पड़ता है।4 - कॉटन खरीद सेंटर हर साल अप्रैल के आखिर तक चालू रखे जाने चाहिए।और पढ़ें :- रुपया 03 पैसे गिरकर 89.25 पर खुला

कपास कीमत संकट: एमएसपी से 800 रुपये नीचे, किसान नुकसान में

Cotton Price Crisis: एमएसपी से भी 800 रुपये नीचे आया कपास का दाम, इंडस्ट्री को फायदा...नुकसान में किसान।देश में कपास के दाम लगातार गिर रहे हैं और किसानों को MSP से 700–800 रुपये कम कीमत मिल रही है. जीरो इंपोर्ट ड्यूटी से जहां कपड़ा उद्योग को बड़ा फायदा हो रहा है, वहीं बढ़ते आयात और कमजोर मांग की वजह से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा, जिससे वे कपास छोड़कर दूसरी फसलों की ओर जा रहे हैं.सोयाबीन और मक्के के बाद अब कपास का नंबर है. देश में कपास की कीमतें लगातार गिर रही हैं. सरकारी डेटा बताता है कि किसानों को एमएसपी से 700-800 रुपये तक कम रेट मिल रहे हैं. मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) की बात करें तो केंद्र सरकार ने मध्यम रेशे वाले कपास के लिए 7710 रुपये प्रति क्विंटल और लंबे रेशे वाले कपास के लिए 8110 रुपये रेट तय किया है. मंडियों में अभी अधिक आवक मध्यम रेशे वाले कपास की है, जिसका रेट 6988 रुपये चल रहा है, जबकि एमएसपी 7710 रुपये है. रेट की यह जानकारी सरकारी एजेंसी एगमार्कनेट ने दी है. कीमतों में यह गिरावट ऐसे समय में देखी जा रही है जब केंद्र सरकार ने कपास की इंपोर्ट ड्यूटी जीरो कर रखी है. रेट की गिरावट से साफ है कि सरकार के इस फैसले का फायदा व्यापारियों और मिल मालिकों को मिल रहा है जबकि किसान एमएसपी के लिए भी जूझ रहे हैं. मतलब साफ है क‍ि इंपोर्ट ड्यूटी जीरो करने के बाद क‍िसानों पर बड़ी आर्थ‍िक चोट पड़ी है. अगर यही हाल रहा तो क‍िसान कपास की खेती को और कम कर देंगे. आवक कम, दाम भी कम सरकार का एक आंकड़ा बताता है कि जिस तेजी से कपास की एमएसपी में वृद्धि हुई है, उसके ठीक उलट किसानों को मिलने वाले मॉडल प्राइस में गिरावट आई है. चौंकाने वाली बात ये है कि मंडियों में कपास की आवक समय के साथ गिरी है. ट्रेड का एक सामान्य नियम है कि जब आवक गिरती है, सप्लाई घटती है तो प्रोडक्ट का दाम बढ़ता है. लेकिन कपास के मामले में ऐसा नहीं हुआ. इसके दाम बढ़ने के बजाय गिर गए और इसकी सबसे बड़ी वजह है जीरो इंपोर्ट ड्यूटी.म‍िल माल‍िकों को फायदा, क‍िसानों को नुकसान भारत में कपास पर जीरो इंपोर्ट ड्यूटी है. इसका मतलब हुआ कि देश का कोई भी व्यापारी या मिलर जीरो आयात शुल्क के साथ कपास का आयात कर सकता है. सरकार ने इसे 31 दिसंबर तक के लिए जारी रखा है. सरकार का तर्क है कि जीरो इंपोर्ट ड्यूटी होने से देश के कपड़ा उद्योग की लागत स्थिर होगी जिससे कपड़ा कंपनियों को मदद मिलेगी और किसानों के कपास की खरीद बढ़ेगी.सरकार का यह तर्क नियम के अनुरूप है, मगर धरातल पर इसका कोई फायदा नहीं दिख रहा है. धरातल पर हालात यह हैं क‍ि क‍िसानों को नुकसान हो रहा है. अगर फायदा होता तो किसानों को कपास की अच्छी कीमतें मिलतीं. हालत तो ये है कि किसान कपास की एमएसपी भी नहीं ले पा रहे हैं. दूसरी ओर कपड़ा कंपनियां और मिल मालिक फायदा उठा रहे हैं.तहस-नहस को जाएगी खेती इस ट्रेंड के बारे में कपास के एक्सपर्ट विजय जावंघिया कहते हैं, इंपोर्ट ड्यूटी जीरो होने से कपड़े का दाम 2से 2.5 रुपये तक कम होगा जिसका सीधा फायदा मिलों और व्यापारियों को मिलेगा. एक अनुमान के मुताबिक, इपोर्ट ड्यूटी के इस फैसले से कपड़ा इंडस्ट्री को 15,000 करोड़ रुपये का फायदा होगा जबकि किसानों की पूरी खेती तहस-नहस हो जाएगी. इसका प्रभाव भी दिखने लगा है क्योंकि किसान अब कपास के ध्यान हटाकर दलहन और तिलहन पर टिका रहे हैं. इसका सीधा-सीधा कारण कपास की गिरती कीमतें और जीरो इंपोर्ट ड्यूटी है.आयात से नुकसान खेती और ट्रेड का एक सीधा फंडा है कि जब कोई माल बाहर से आना शुरू होता है तो लोकल स्तर पर उसका प्रोडक्शन घटने लगता है. यह नियम सरकार को भी पता है, उसके बावजूद दिसंबर तक कपास पर इंपोर्ट ड्यूटी जीरो करना सोच से परे है क्योंकि कपास का सीजन अक्तूबर से शुरू होता है और कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) खरीद शुरू करता है. कपास का आयात देखें तो इसमें लगातार वृद्धि जारी है. क‍ितना बढ़ा आयात सरकार का आंकड़ा बताता है कि 2023-24 में जहां 1550312 बेल्स (एक बेल में 170 किलो) का आयात हुआ, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 4139941 बेल्स हो गया. जिस दौरान कपास का आयात बढ़ता गया, उस दौरान देश में कपास की खेती स‍िकुड़ती गई. इसके बावजूद किसानों को अच्छे दाम नहीं मिले. वजह है, विदेश से कपास की खरीद. जब मिलों और व्यापारियों को विदेशी माल आसानी से और कम रेट पर मिल जाएगा तो वे देश के किसानों से कपास क्यों खरीदेंगे? इससे किसानों में हताशा है और वे कपास की जगह किसी और फसल की ओर रुख कर रहे हैं. क‍ितनी है कीमत रेट की इस हालत के पीछे ग्लोबल ट्रेंड को भी जिम्मेदार बताया जा रहा है. यानी पूरी दुनिया में कपास की खरीद सुस्त है, इसलिए भारत के कपास की मांग गिर गई है. एक्सपर्ट बताते हैं कि कमजोर डिमांड के बीच ग्लोबल प्राइस ट्रेंड की वजह से कीमतें MSP से नीचे बनी हुई हैं, इसलिए उम्मीद की जा रही है कि सीसीआई यानी कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंड‍िया MSP पर खरीद करके किसानों को राहत देगा. लेकिन यह राहत तब काम आएगी जब किसानों को एमएसपी वाला दाम मिलेगा.सीसीआई की खरीद से ही पता चलता है कि प्राइवेट ट्रेड में कच्चे कॉटन (कपास) की कीमतें 6,500 रुपये और 7,500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रही हैं, जो 8,100 रुपये के MSP से कम है.जाहिर सी बात है कि जब सरकारी एजेंसी भी किसानों को एमएसपी रेट नहीं दे रही है तो किसान व्यापारियों से क्या उम्मीद कर सकते हैं. कुल मिलाकर, किसानों के लिए एमएसपी दूर की कौड़ी बन गई है जिसके बारे में वे सुनते जरूर हैं, मगर वह रेट उनके हाथ नहीं आता. अब किसानों की पूरी उम्मीद सरकार पर टिकी है कि वह बाजार में किसी तरह से दखल दे और कपास की एमएसपी दिलवाए.और पढ़ें :- महाराष्ट्र: कॉटन खरीद में किसानों का CCI की ओर बढ़ता रुझान

महाराष्ट्र: कॉटन खरीद में किसानों का CCI की ओर बढ़ता रुझान

महाराष्ट्र : कॉटन प्रोक्योरमेंट के लिए किसानों का ‘CCI’ की तरफ झुकाव बढ़ा हैबीड : सरकारी कॉटन प्रोक्योरमेंट सेंटर को प्राइवेट प्रोक्योरमेंट सेंटर के मुकाबले बेहतर रेट मिलने से कॉटन उगाने वालों का झुकाव CCI की तरफ काफी बढ़ा है। हालांकि, रजिस्ट्रेशन, अप्रूवल और दूसरी मुश्किल शर्तों की वजह से किसानों को बार-बार मार्केट कमेटी ऑफिस और जिनिंग के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे उनकी दिक्कतें बढ़ गई हैं।इस साल खरीफ सीजन में तीस हजार कॉटन लगाया गया था। बोने में देरी के बाद, लगातार बारिश ने फिर से कॉटन को भारी नुकसान पहुंचाया। इसके बावजूद किसानों ने महंगी खाद और पेस्टीसाइड का स्प्रे करके कॉटन की खेती की। लेकिन भारी बारिश की वजह से कॉटन खराब हो गया। पेड़ों पर लगा कॉटन सिर्फ दो कटाई में ही खत्म हो गया।अभी, रबी की बुआई चल रही है, इसलिए किसान कॉटन बेचने को प्राथमिकता दे रहे हैं। सरकार ने शुरू में सरकारी कॉटन प्रोक्योरमेंट सेंटर शुरू किए थे, लेकिन उन पर लगाई गई मुश्किल शर्तों ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। पिछले साल CCI ने प्रति हेक्टेयर तीस क्विंटल कॉटन खरीदा था; लेकिन, इस साल खरीद की लिमिट सिर्फ तेरह क्विंटल प्रति हेक्टेयर तय की गई है और किसान इसे रद्द करने की मांग कर रहे हैं। वहीं, कपास बेचने के लिए ‘कॉटन किसान’ ऐप पर CCI के साथ रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है। रजिस्ट्रेशन के बाद मार्केट कमेटी ऑफिस से मंज़ूरी, फिर स्लॉट बुकिंग वगैरह ने किसानों को उलझन में डाल दिया है।आंकड़े खुद ही सब कुछ बयां कर रहे हैं...प्राइवेट खरीद केंद्र: छहकपास खरीदा गया: छब्बीस हज़ार क्विंटलखरीद शुरू होने की तारीख: 27 अक्टूबरमिले रेट: छह हज़ार पाँच सौ से सात हज़ार एक सौ रुपये प्रति क्विंटलCCI खरीद केंद्र: छहकपास खरीदा गया: पच्चीस हज़ार क्विंटलखरीद शुरू होने की तारीख: 10 नवंबरमिले रेट: सात हज़ार सात सौ से आठ हज़ार रुपये प्रति क्विंटलकुल कपास खरीदा गया: 51 हज़ार क्विंटलअगर आपको कपास बेचने या रजिस्ट्रेशन से जुड़ी कोई दिक्कत है, तो कृपया मार्केट कमेटी ऑफिस में संपर्क करें।और पढ़ें :- रुपया 16 पैसे गिरकर 89.22 प्रति डॉलर पर बंद हुआ

घरेलू मांग से चीन का भारत को सोया तेल निर्यात बढ़ा

घरेलू ज़रूरत बढ़ने से भारत को चीन का सोया तेल एक्सपोर्ट बढ़ाचीन का भारत को सोयाबीन तेल का एक्सपोर्ट बढ़ रहा है क्योंकि खाना पकाने की इस चीज़ की घरेलू मांग कमज़ोर है और साथ ही साउथ अमेरिका और हाल ही में US से सोयाबीन का ज़्यादा इम्पोर्ट हो रहा है।कस्टम डेटा के मुताबिक, एशिया की सबसे बड़ी इकॉनमी ने अक्टूबर में रिकॉर्ड 70,877 टन खाना पकाने का तेल भेजा, जिसमें से ज़्यादातर भारत गया। साल के पहले 10 महीनों में एक्सपोर्ट 329,000 टन तक पहुँच गया है, जो पूरे 2024 के मुकाबले लगभग तीन गुना है।बीजिंग लंबे समय से विदेशी सोयाबीन पर अपनी निर्भरता को, जिसे जानवरों के चारे और खाना पकाने के तेल में प्रोसेस किया जाता है, एक ऐसी दुनिया में कमज़ोरी के तौर पर देखता रहा है जहाँ जियोपॉलिटिक्स और वायरस कमोडिटी फ्लो को तेज़ी से रोक सकते हैं। हालाँकि, साउथ अमेरिका से ज़्यादा इम्पोर्ट काफी धीमी लोकल इकॉनमी पर असर डाल रहा है, जिससे चीनी सोया तेल प्रोसेसर नए बाज़ार तलाशने पर मजबूर हो रहे हैं।यह चीन में खपत कम होने का एक और उदाहरण है, जिससे सरप्लस हो गया है, और ज़्यादा ग्लोबल मार्केट में आ रहा है। इस मामले में, यह एक ऐसा डेवलपमेंट है जिसका भारत में स्वागत है, जो दुनिया का सबसे बड़ा सोयाबीन तेल इंपोर्टर है। यह नया बना ट्रेड रूट और भी बिज़ी होने की संभावना है, क्योंकि पिछले महीने के ट्रेड समझौते के बाद चीन US सोयाबीन खरीदना फिर से शुरू कर रहा है, और बीजिंग और नई दिल्ली के बीच रिश्ते बेहतर हो रहे हैं।देश के टॉप वेजिटेबल-ऑयल खरीदारों में से एक, पतंजलि फूड्स लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट आशीष आचार्य ने कहा कि यह ट्रेड भारत के लिए लॉजिस्टिकली सही है। “क्वालिटी साउथ अमेरिकन सप्लाई के बराबर है, कीमतें कॉम्पिटिटिव हैं और चीनी एक्सपोर्टर भरोसेमंद खरीदार ढूंढ रहे हैं।”आचार्य ने कहा कि चीनी सोयाबीन तेल साउथ अमेरिका के मुकाबले US$10 (RM41.36) से US$15 प्रति टन के डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहा है, और यह ब्राज़ील और अर्जेंटीना से 50 से 60 दिन के सफर की तुलना में लगभग 10 से 12 दिनों में भारत के ईस्ट कोस्ट तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि नवंबर में अब तक चीन से इम्पोर्ट लगभग 70,000 टन है और महीने के आखिर तक यह 12,000 टन और बढ़ सकता है।चीन दुनिया का सबसे बड़ा सोयाबीन तेल प्रोड्यूसर है, जो हर साल लगभग 20 मिलियन टन बनाता है। वह पहले लगभग सारा प्रोडक्शन अपने देश में ही इस्तेमाल कर लेता था, और अक्सर लोकल डिमांड को पूरा करने के लिए उसे इम्पोर्ट करना पड़ता था। लेकिन जैसे-जैसे इकॉनमी ठंडी हुई है, लोगों ने बाहर खाना कम कर दिया है, जिससे रेस्टोरेंट में सोया तेल की खपत कम हो गई है।चीन में सोयाबीन तेल की ज़्यादा सप्लाई से इस ट्रेड को बढ़ावा मिल रहा है। कमोडिटी कंसल्टेंसी मायस्टील ने एक नोट में कहा कि नवंबर के बीच में कमर्शियल स्टॉक एक मिलियन टन से ज़्यादा था, जो उस समय के लिए सात साल का सबसे ज़्यादा था। उसने कहा कि चीनी क्रशर से हाई लेवल की एक्टिविटी बनाए रखने की उम्मीद है और लोकल डिमांड को ठीक होने में समय लगेगा। वायर परचीन ने अमेरिकी सोयाबीन खरीदना जारी रखा, हालांकि ट्रेडर्स इस बात को लेकर सतर्क हैं कि क्या एशियाई देश इस साल उम्मीद से ज़्यादा खरीदारी करेगा।नवंबर में चीन को लिक्विफाइड नेचुरल गैस के समुद्री शिपमेंट में सालाना आधार पर लगातार 13वें महीने गिरावट आने वाली है, जिससे घरेलू आउटपुट और पाइप्ड इंपोर्ट के मज़बूत बने रहने के बावजूद खरीदारी में गिरावट और बढ़ेगी।जापान के प्रधानमंत्री साने ताकाइची के संसद में ताइवान पर संभावित हमले पर कमेंट करने के लगभग तीन हफ़्तों के बाद से, चीन ने अपनी नाराज़गी दिखाने के लिए आर्थिक जवाबी हमले, राष्ट्रवादी कटाक्ष और डिप्लोमैटिक हमला किया है।और पढ़ें :- CCI की MSP पर कपास खरीद में तेजी, कीमतें पिछले साल से ऊपर जा सकती हैं

CCI की MSP पर कपास खरीद में तेजी, कीमतें पिछले साल से ऊपर जा सकती हैं

CCI की MSP पर कॉटन की खरीद तेज़ हुई; कम कीमतों की वजह से कीमतें पिछले साल के लेवल से ज़्यादा हो सकती हैं।CAI ने हाल ही में 2025-26 की फसल का अनुमान 30.5 मिलियन बेल (हर बेल का वज़न 170 kg) लगाया है, जो पिछले साल के 31.24 मिलियन बेल से 2% कम है।कॉटन की आवक बढ़ने के साथ, सरकारी कंपनी कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (CCI) ने मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) पर नैचुरल फ़ाइबर फसल की खरीद तेज़ कर दी है, और रोज़ाना की खरीद एक लाख बेल (170 kg) से ज़्यादा हो गई है। ट्रेड के मुताबिक, सोमवार को आवक दो लाख बेल से ज़्यादा हो गई।CCI के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर ललित कुमार गुप्ता ने कहा, "ओडिशा को छोड़कर सभी कॉटन उगाने वाले राज्यों में खरीद शुरू हो गई है। पिछले शुक्रवार को, हमने एक दिन में 1 लाख बेल पार कर ली थी और इस सीज़न में हमने कुल मिलाकर लगभग 8 लाख पार कर ली है।" क्योंकि ग्लोबल प्राइस ट्रेंड और कमज़ोर डिमांड की वजह से कीमतें MSP लेवल से नीचे बनी हुई हैं, इसलिए उम्मीद है कि CCI को MSP पर खरीद करके मार्केट में दखल देकर भारी काम करना होगा। प्राइवेट ट्रेड में कच्चे कॉटन (कपास) की कीमतें ₹6,500 और ₹7,500 प्रति क्विंटल के बीच हैं, जो ₹8,100 के MSP से कम है।गुप्ता ने कहा, "उम्मीद है कि हमारी खरीद पिछले साल के लेवल को पार कर जाएगी क्योंकि कीमतों में बहुत बड़ा अंतर है," साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस साल क्वालिटी की समस्या ज़्यादा है। पिछले साल, CCI ने 170 kg की 1 करोड़ से ज़्यादा गांठें खरीदी थीं।CCI ने लगभग 570 सेंटर खोले हैं, जिनमें से 400 चालू हैं। उन्होंने कहा कि हर दिन 15 सेंटर खुल रहे हैं।इस साल बेमौसम और ज़्यादा बारिश ने कॉटन की फ़सल की क्वालिटी पर असर डाला है, जबकि रकबा कम था क्योंकि किसानों के एक हिस्से ने मक्का और तिलहन जैसी दूसरी फ़सलें उगानी शुरू कर दी थीं।कॉटन एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (CAI) के प्रेसिडेंट विनय एन कोटक ने कहा, “आवक दिन-ब-दिन बढ़ रही है और CCI ने भी बड़ी मात्रा में खरीदना शुरू कर दिया है। कीमतें स्थिर हो जाएंगी क्योंकि CCI ने ज़ोरदार खरीदारी शुरू कर दी है।”कोटक ने कहा कि बेमौसम बारिश की वजह से पिछले साल के मुकाबले अच्छी क्वालिटी का कॉटन कम हो रहा है, क्वालिटी को बहुत नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा, “क्वांटिटी का नुकसान कम है, लेकिन क्वालिटी का नुकसान ज़्यादा है और इस वजह से कम क्वालिटी और क्वालिटी के बीच का अंतर बढ़ता रहेगा।”CAI ने हाल ही में 2025-26 की फ़सल का अनुमान 305 लाख गांठ (हर गांठ 170 kg) लगाया था, जो पिछले साल के 312.40 लाख गांठ से 2 परसेंट कम है। रायचूर के एक सोर्सिंग एजेंट रामानुज दास बूब ने कहा, “इस साल क्वालिटी एक बड़ा मुद्दा है क्योंकि सभी राज्यों में बहुत अंतर है।” उन्होंने कहा, “यार्न की कमज़ोर डिमांड ने मिलों की खरीदारी कम कर दी है। खरीदार सही कीमत पर अच्छी क्वालिटी का कॉटन खरीदने को तैयार हैं, जबकि बड़ी मिलों ने इम्पोर्टेड कॉटन चुनकर अपनी पोजीशन कवर कर ली है।” उन्होंने कहा कि अच्छी क्वालिटी का कॉटन 356 kg की कैंडी के लिए ₹50,500-52,000 की रेंज में है, जबकि कम क्वालिटी वाला प्रोडक्ट ₹47,500-49,000 के लेवल पर है।और पढ़ें :- कपास किसानों की समस्याएं गवर्नर के समक्ष रखीं

कपास किसानों की समस्याएं गवर्नर के समक्ष रखीं

तेलंगाना: किसानों के संगठन ने गवर्नर को कपास किसानों की परेशानियों से अवगत कराया।हैदराबाद : तेलंगाना एग्रीकल्चर एंड फार्मर्स वेलफेयर कमीशन की एक टीम ने सोमवार को राजभवन में गवर्नर जिष्णु देव वर्मा से मुलाकात की और तेलंगाना में कपास किसानों के सामने आ रही मुश्किलों से उनका ध्यान दिलाया।मीटिंग के दौरान, कमीशन के चेयरमैन एम कोडंडा रेड्डी ने भूमि सुनील समेत सदस्यों के साथ बताया कि कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने अपने खरीद केंद्र उम्मीद से देर से खोले, जिससे किसानों को मुश्किलें हो रही हैं, जिन्हें अब अपनी फसल बेचने के लिए नए लॉन्च हुए कपास किसान ऐप पर रजिस्टर करना होगा।इसके अलावा, प्रति एकड़ सिर्फ सात क्विंटल कपास की इजाज़त देने की रोक ने किसानों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है। इस साल, पूरे राज्य में 4.8 मिलियन एकड़ में कपास उगाया गया था, लेकिन भारी बारिश और साइक्लोन मोन्था के कारण किसानों को काफी नुकसान हुआ।कोडंडा रेड्डी ने गवर्नर को CCI के नियमों से पैदा होने वाली दिक्कतों के बारे में बताया, जो पहले से ही साइक्लोन से बुरी तरह प्रभावित किसानों की मुश्किलों को और बढ़ा रहे थे। पूरे राज्य के किसानों की शिकायतें कमीशन के ऑफिस में आ रही थीं, जिसके बाद टीम ने गवर्नर के सामने ये चिंताएं उठाईं।उन्होंने केंद्र सरकार के जारी किए गए सीड एक्ट 2025 के ड्राफ्ट पर भी अपनी आपत्ति जताई, यह देखते हुए कि इस कानून को लेकर राज्य के किसानों और किसान एसोसिएशन के बीच अलग-अलग राय थी।गवर्नर ने कॉटन किसानों के बारे में कमीशन की पेश की गई याचिका पर अच्छा जवाब दिया और CCI का मुद्दा केंद्रीय अधिकारियों के सामने उठाने का वादा किया। उन्होंने सीड एक्ट के ड्राफ्ट के बारे में और डिटेल्स पर चर्चा करने के लिए एक फॉलो-अप मीटिंग भी बुलाने को कहा।और पढ़ें :- रुपया 17 पैसे बढ़कर 89.06 पर खुला

श्रीकरणपुर में नरमा खरीद शुरू, 90 क्विंटल की उठान

*श्रीकरणपुर में नरमे की सरकारी खरीद शुरू: पहले दिन CCI ने 4 किसानों से 90 क्विंटल नरमा खरीदा*श्रीकरणपुर में सफेद सोना कहे जाने वाले नरमे की सरकारी खरीद का शुभारंभ हो गया है। सिंगला इंडस्ट्रीज में भारतीय कपास निगम (CCI) द्वारा नरमे की खरीद की जा रही है। पहले दिन कुल 4 किसानों से लगभग 90 क्विंटल नरमा खरीदा गया।धानमंडी के वरिष्ठ व्यापारी और नगरपालिका के चेयरमैन रमेश बंसल, सिंगला इंडस्ट्रीज के मालिक सुमित सिंगला, धानमंडी के व्यापारी बंटी सिंगला और गौरव ने मिलकर नरमे की समर्थन मूल्य खरीद का उद्घाटन किया। इस दौरान भारतीय कपास निगम के बाबू विजेंद्र यादव और प्रवीण कुमार मौजूद रहे।पहले दिन चक 7FF के किसान महेंद्र सिंह पुत्र तारा सिंह का नरमा 7860 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा गया। इसके अलावा, 43GG के किसान गुरचरण सिंह पुत्र हरपाल सिंह का नरमा 7702 रुपए प्रति क्विंटल और सुखवंत सिंह पुत्र सरदार दिलभाग सिंह का नरमा 7545 रुपए प्रति क्विंटल की दर से CCI ने खरीदा। किसान प्रभजीत सिंह पुत्र कुलवंत सिंह 48F भी नरमा लेकर पहुंचे थे।CCI के बाबू प्रवीण ने बताया कि सिंगला इंडस्ट्रीज को CCI ने अनुबंध पर लिया है। जो किसान नरमे का पंजीकरण करवा चुके हैं, वे ही किसान सिंगला इंडस्ट्रीज में CCI को अपना नरमा बेचने के लिए आ सकते हैं।और पढ़ें:-   टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने नए लेबर कोड का स्वागत किया

टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने नए लेबर कोड का स्वागत किया

इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने नए यूनिफाइड लेबर कोड की तारीफ़ कीइंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने देश के लेबर कानून सुधारों का स्वागत किया है। सदर्न इंडिया मिल्स एसोसिएशन (SIMA) ने कहा कि हाल ही में घोषित लेबर कोड लेबर नियमों को आसान बनाएंगे, मालिकों और कर्मचारियों दोनों के हितों की रक्षा करेंगे, और विकसित भारत की दिशा में देश की प्रगति में मदद करेंगे।SIMA के चेयरमैन दुरई पलानीसामी ने इस बड़ी और नई पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ की। उन्होंने कहा कि इन लेबर कोड को लागू करना सरकार के लिए एक और ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो टैक्स सिस्टम में बदलाव के बाद हुए कई बड़े बदलावों में एक मील का पत्थर है।भारत सरकार ने इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड, 2020; सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020; ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ, और वर्किंग कंडीशंस (OSHWC) कोड, 2020; और वेज कोड, 2019 को नोटिफाई किया है। ये नियम, जो 21 नवंबर, 2025 से लागू होंगे, 29 मौजूदा लेबर कानूनों को बेहतर बनाएंगे।पलानीसामी ने कहा कि नए लेबर कोड भारतीय इंडस्ट्री को यूरोपियन यूनियन और US जैसे बड़े क्षेत्रों द्वारा तय किए गए सोशल अकाउंटेबिलिटी स्टैंडर्ड का पालन करने में मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि नई पॉलिसी पहल से इंडस्ट्री को जल्द ही EU और US के साथ होने वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से फायदा होगा।नए लेबर कोड में काम के घंटों में छूट, फ्लेक्सिबल फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉयमेंट, कम्प्लायंस कॉस्ट में बराबरी का मौका, कानून को आसान बनाना, बिजनेस करने में आसानी, एक ही लाइसेंस और एक ही रजिस्ट्रेशन के ज़रिए पूरे भारत में सर्टिफिकेशन, वर्कर्स के लिए ज़रूरी हेल्थ चेक-अप, अपॉइंटमेंट लेटर जारी करना ज़रूरी, रात की शिफ्ट के दौरान ज़्यादा सुरक्षा के साथ ज़्यादा महिलाओं को काम पर रखने के लिए इंसेंटिव, और एन्युइटी-बेस्ड ग्रेच्युटी बेनिफिट जैसे नियम शामिल हैं।SIMA ने कहा कि हालांकि नए लेबर कोड के तहत वर्कर्स के लिए अतिरिक्त वेलफेयर नियमों के कारण कंपनियों की लागत बढ़ सकती है, लेकिन वर्कर्स के हितों की अच्छी तरह से रक्षा की जाती है।एसोसिएशन ने कहा कि वह लेबर से जुड़े कामों में सबसे आगे रहा है और उसने लगातार सरकार से पुराने लेबर कानूनों को आसान बनाने और एक यूनिफाइड कोड लाने की अपील की है, जिससे भारत को सोशल अकाउंटेबिलिटी में दुनिया भर में आगे रहने में मदद मिलेगी।और पढ़ें :- रुपया 09 पैसे गिरकर 89.23 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

भारत-जॉर्जिया: रेशम-टेक्सटाइल सहयोग बढ़ा

भारत, जॉर्जिया ने सिल्क और टेक्सटाइल में सहयोग बढ़ाने के लिए कदम उठाएभारत ने टेक्सटाइल, सेरीकल्चर और व्यापार में जॉर्जिया के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सेंट्रल सिल्क बोर्ड (CSB) के मेंबर सेक्रेटरी और इंटरनेशनल सेरीकल्चर कमीशन (ISC) के सेक्रेटरी जनरल पी. शिवकुमार के नेतृत्व में टेक्सटाइल मंत्रालय का एक हाई-लेवल डेलीगेशन 17 से 21 नवंबर तक जॉर्जिया का पांच दिन का दौरा पूरा कर चुका है।इस दौरे का मकसद सेरीकल्चर, टेक्सटाइल, कपड़े और कालीन व्यापार में पार्टनरशिप को गहरा करना था।टेक्सटाइल मंत्रालय के मुताबिक, डेलीगेशन ने 11वें BACSA इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस - CULTUSERI 2025 में हिस्सा लिया, जहां शिवकुमार ने शुरुआती भाषण में भारत और ISC को रिप्रेजेंट किया।उन्होंने पारंपरिक सिल्क ज्ञान में भारत की मजबूत नींव और यह कैसे क्रिएटिव और कल्चरल इंडस्ट्री को आकार दे रहा है, इस बारे में बात की। कॉन्फ्रेंस के दौरान, उन्होंने "द क्रॉनिकल्स ऑफ वाइल्ड सिल्क" नाम का एक पेपर भी पेश किया, जिसमें ग्लोबल सेरीकल्चर प्रैक्टिस में भारत के योगदान को बताया गया।भारत के टेक्निकल जुड़ाव को और बढ़ाते हुए, CSB के डायरेक्टर (टेक्निकल) एस. मंथिरा मूर्ति ने भारत और बुल्गारिया के बीच मिलकर की गई रिसर्च को दिखाया। उनका प्रेजेंटेशन भारतीय हालात के हिसाब से एक प्रोडक्टिव बाइवोल्टाइन सिल्कवर्म हाइब्रिड बनाने पर फोकस था, जो सिल्क रिसर्च में चल रहे इंटरनेशनल सहयोग को दिखाता है।इस दौरे की एक बड़ी खासियत भारत के "5-इन-1 सिल्क स्टोल" का प्रेजेंटेशन था, जो एक अनोखा क्रिएशन है जिसमें मलबेरी, ओक तसर, ट्रॉपिकल तसर, मूगा और एरी सिल्क को एक ही प्रोडक्ट में मिलाया गया है। शिवकुमार की पहल पर बनाया गया यह स्टोल भारत की अलग-अलग तरह की सिल्क विरासत को दिखाता है और प्रीमियम हाथ से बने प्रोडक्ट के लिए ग्लोबल मार्केट में मज़बूत पोटेंशियल दिखाता है।भारतीय डेलीगेशन ने जॉर्जियाई सरकार के सीनियर अधिकारियों के साथ-साथ यूनिवर्सिटी, सेरीकल्चर लैब, रिसर्च सेंटर, टेक्सटाइल बनाने वालों, कालीन व्यापारियों और जॉर्जियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (GCCI) के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इन मीटिंग में आपसी व्यापार को मज़बूत करने, मार्केट एक्सेस को बेहतर बनाने और सेरीकल्चर और टेक्सटाइल में मिलकर की गई रिसर्च को बढ़ावा देने पर फोकस किया गया।इस दौरे के नतीजों में टेक्सटाइल रिसर्च और ट्रेड में भारत-जॉर्जिया के बीच नए सिरे से सहयोग, कपड़ों और कालीनों में जॉइंट वेंचर के लिए नए मौकों की पहचान, और इंस्टीट्यूशनल और टेक्निकल पार्टनरशिप के लिए रास्ते बनाना शामिल था। BACSA इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म में भारत की एक्टिव भूमिका ने सिल्क और टेक्सटाइल इनोवेशन में ग्लोबल लीडर के तौर पर इसकी स्थिति को भी मज़बूत किया।और पढ़ें :- "2024-25: राज्यवार CCI कपास बिक्री"

"2024-25: राज्यवार CCI कपास बिक्री"

राज्य के अनुसार CCI कपास बिक्री विवरण – 2024-25 सीज़नभारतीय कपास निगम (CCI) ने इस सप्ताह अपनी कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया जिससे 2024-25 सीज़न में अब तक कुल बिक्री लगभग 90,52,100 गांठों तक पहुँच गई है। यह आंकड़ा अब तक की कुल खरीदी गई कपास का लगभग 90.52% है।राज्यवार बिक्री आंकड़ों से पता चलता है कि महाराष्ट्र, तेलंगाना और गुजरात से बिक्री में प्रमुख भागीदारी रही है, जो अब तक की कुल बिक्री का 85.28% से अधिक हिस्सा रखते हैं।यह आंकड़े कपास बाजार में स्थिरता लाने और प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए CCI के सक्रिय प्रयासों को दर्शाते हैं।और पढ़ें :- रुपया 26 पैसे मजबूत होकर 89.14 प्रति डॉलर पर खुला

“कपास से कपड़े तक: 10 साल का मजबूत मिशन”

खेती से सिलाई तक: कपास के हर धागे को मजबूत करेगा 10 साल का मिशनभारत सरकार ने कपास (Cotton) उत्पादकता बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. पहले यह मिशन 5 साल के लिए चलाने की तैयारी थी, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने सुझाव दिया कि 5 साल कम हैं. इसलिए अब कपास उत्पादकता मिशन को 10 साल की अवधि देने की तैयारी है. इस मिशन का उद्देश्य कपास उत्पादन बढ़ाना, बेहतर किस्में उपलब्ध कराना और किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी करना है.मिशन क्यों ज़रूरी है?    देश में कपास उत्पादन लगातार उतार–चढ़ाव में है.    2023-24 में उत्पादन 32.52 मिलियन गांठ था.    2024-25 में यह घटकर 29.72 मिलियन गांठ रह गया.2025-26 के लिए सटीक आंकड़े सरकार ने अभी जारी नहीं किए, लेकिन व्यापारिक संस्थाएं अनुमान लगा रही हैं कि उत्पादन लगभग 30.5 मिलियन गांठ रह सकता है. इस गिरावट से किसान और टेक्सटाइल उद्योग दोनों प्रभावित होते हैं. इसलिए सरकार का यह मिशन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.क्या मिलेगा किसानों को इस मिशन से?1. बेहतर बीज और तकनीकICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) किसानों को नई, बेहतर और ज्यादा उत्पादन देने वाली कपास की किस्में उपलब्ध कराएगी. परंतु सरकार ने यह भी साफ किया है कि बीज अनुसंधान का काम पहले से ही “हाई-यील्डिंग सीड मिशन” में प्रस्तावित है, इसलिए दोनों योजनाओं में दोहराव नहीं होगा.2. खेती की आधुनिक तकनीकेंइस मिशन के तहत किसानों को आधुनिक खेती तकनीकें, मिट्टी प्रबंधन, कीट नियंत्रण और जल प्रबंधन के बारे में प्रशिक्षण मिलेगा.3. लंबी रेशे वाली कपास का प्रचारसरकार एक्स्ट्रा-लॉन्ग स्टेपल कॉटन (Extra Long Staple Cotton) को बढ़ावा देगी, जिससे कपड़ा उद्योग को बेहतर गुणवत्ता वाला रेशा मिलेगा और किसानों को अधिक कीमत.क्या है 5F विज़न?वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में बताया कि यह मिशन भारत के 5F विज़न पर आधारित है:Farm → Fibre → Factory → Fashion → Foreign. इसका मतलब है कि खेती से लेकर कपड़ा फैक्ट्री, फैशन और विदेशों में निर्यात तक एक मजबूत सप्लाई चेन बनाई जाएगी. इससे कपास किसानों को बेहतर कीमत और निश्चित बाजार मिलेगा.जट और मंत्रालयों में खींचतान    *शुरू में इस मिशन के लिए लगभग ₹5,000 करोड़ खर्च का अनुमान था.    *लेकिन अब जब मिशन की अवधि 10 साल होने की संभावना है, तो खर्च बढ़ सकता है.टेक्सटाइल मंत्रालय चाहता है कि इस धन का कुछ हिस्सा जिनिंग फैक्ट्रियों के आधुनिकीकरण पर लगाया जाए. पर वित्त विभाग और नीति आयोग ने इस प्रस्ताव को मंज़ूरी नहीं दी. उनका कहना है कि बजट में यह बात घोषित नहीं की गई थी, इसलिए इसे हटाना होगा.केंद्र और राज्य सरकारों की भूमिकावित्त विभाग ने सलाह दी है कि यह मिशन सेंट्रली स्पॉन्सर्ड स्कीम होना चाहिए ताकि खर्च केंद्र और राज्य मिलकर करें. चूंकि कृषि राज्य का विषय है, इसलिए राज्यों की भागीदारी जरूरी है. सरकार चाहती है कि ICAR अपना अंतिम प्रस्ताव सीधे PMO को भेज दे ताकि ऊपरी स्तर पर सभी मंत्रालयों की बैठक कर जल्द निर्णय लिया जा सके. मिशन के शुरू होने में थोड़ा समय लग रहा है, लेकिन तैयारियां तेजी से चल रही हैं.कपास किसानों की आमदनी बढ़ाने की पहलकपास उत्पादकता मिशन भारत के लाखों कपास किसानों के लिए एक बड़ा अवसर है. 10 साल तक चलने वाला यह मिशन बेहतर बीज, आधुनिक खेती तकनीक और गुणवत्ता सुधार पर फोकस करेगा. इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और देश का टेक्सटाइल उद्योग भी मजबूत होगा. यह मिशन भारत को वैश्विक कपास बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा.और पढ़ें :- CCI ने 90% कपास बिक्री पूरी की, कीमतें स्थिर

Related News

Youtube Videos

Title
Title
Title

Circular

title Created At Action
कपास खरीद पर 14 क्विंटल सीमा खत्म 27-11-2025 01:44:50 view
“2025–26 खरीफ फसलों का पहला अग्रिम अनुमान जारी” 27-11-2025 01:19:53 view
रुपया 02 पैसे गिरकर 89.27 प्रति डॉलर पर बंद हुआ 26-11-2025 22:48:22 view
जेपी मॉर्गन: FY27 तक तेल कीमतें $30 तक गिर सकती हैं 26-11-2025 19:47:51 view
हाई कोर्ट ने सीसीआई से विदर्भ में कपास केंद्रों की कमी पर जवाब मांगा 26-11-2025 18:34:05 view
रुपया 03 पैसे गिरकर 89.25 पर खुला 26-11-2025 17:26:14 view
कपास कीमत संकट: एमएसपी से 800 रुपये नीचे, किसान नुकसान में 26-11-2025 00:18:24 view
महाराष्ट्र: कॉटन खरीद में किसानों का CCI की ओर बढ़ता रुझान 26-11-2025 00:00:04 view
रुपया 16 पैसे गिरकर 89.22 प्रति डॉलर पर बंद हुआ 25-11-2025 22:43:51 view
घरेलू मांग से चीन का भारत को सोया तेल निर्यात बढ़ा 25-11-2025 19:36:13 view
CCI की MSP पर कपास खरीद में तेजी, कीमतें पिछले साल से ऊपर जा सकती हैं 25-11-2025 18:47:21 view
कपास किसानों की समस्याएं गवर्नर के समक्ष रखीं 25-11-2025 18:01:12 view
रुपया 17 पैसे बढ़कर 89.06 पर खुला 25-11-2025 17:21:27 view
श्रीकरणपुर में नरमा खरीद शुरू, 90 क्विंटल की उठान 25-11-2025 00:44:05 view
टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने नए लेबर कोड का स्वागत किया 24-11-2025 23:58:48 view
रुपया 09 पैसे गिरकर 89.23 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। 24-11-2025 22:54:48 view
भारत-जॉर्जिया: रेशम-टेक्सटाइल सहयोग बढ़ा 24-11-2025 18:51:20 view
"2024-25: राज्यवार CCI कपास बिक्री" 24-11-2025 17:53:38 view
रुपया 26 पैसे मजबूत होकर 89.14 प्रति डॉलर पर खुला 24-11-2025 17:27:02 view
“कपास से कपड़े तक: 10 साल का मजबूत मिशन” 22-11-2025 19:42:38 view
Copyright© 2023 | Smart Info Service
Application Download