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CCI ने कपास भाव ₹1,800 तक बढ़ाए

CCI ने कपास की कीमतें ₹1,500-₹1,800 प्रति कैंडी बढ़ाईं; साप्ताहिक नीलामी बिक्री 1.84 लाख गांठों के पारकॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (CCI) ने 14 अगस्त, 2026 को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान अपनी कपास की बिक्री कीमतों में ₹1,500–₹1,800 प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की। यह टेक्सटाइल मिलों और कपास व्यापारियों की ओर से खरीदारी में मज़बूत दिलचस्पी को दर्शाता है।इस सप्ताह के दौरान, CCI ने 2025–26 की फसल से लगभग 1,84,600 गांठ कपास बेची। सप्ताह के अंत में मात्रा में धीरे-धीरे कमी आने के बावजूद, नीलामियों में ज़बरदस्त भागीदारी देखी गई।*साप्ताहिक बिक्री रिपोर्ट* 10 अगस्त, 2026 (सोमवार)CCI ने सप्ताह की मज़बूत शुरुआत की और 80,700 गांठों की बिक्री के साथ सप्ताह का सबसे अधिक नीलामी वॉल्यूम दर्ज किया। टेक्सटाइल मिलों ने 40,800 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 39,900 गांठें खरीदीं।11 अगस्त, 2026 (मंगलवार)नीलामी बिक्री घटकर 54,300 गांठें रह गई। मिलों ने 24,300 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 30,000 गांठें खरीदीं।12 अगस्त, 2026 (बुधवार)CCI ने 28,900 गांठें बेचीं, जिसमें मिलों ने 14,000 गांठें और व्यापारियों ने 14,900 गांठें खरीदीं।13 अगस्त, 2026 (गुरुवार)नीलामी बिक्री 28,900 गांठों पर बनी रही। मिलों ने 15,600 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 13,300 गांठें खरीदीं।14 अगस्त, 2026 (शुक्रवार)सप्ताह की नीलामियां 3,400 गांठों की बिक्री के साथ समाप्त हुईं, जिसमें मिलों द्वारा खरीदी गई 2,500 गांठें और व्यापारियों द्वारा खरीदी गई 900 गांठें शामिल थीं। नीलामी के बाद, 2025-26 सीज़न के लिए CCI की कुल कपास बिक्री लगभग 92,21,400 गांठ तक पहुँच गई है। इससे पता चलता है कि CCI की बिक्री कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बावजूद, घरेलू टेक्सटाइल इंडस्ट्री और कपास व्यापार की ओर से लगातार मांग बनी हुई है।

टेक्सटाइल निर्यात बढ़ाने पर MMF पर जोर

टेक्सटाइल एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए MMF पर फोकस जरूरी: नीति आयोगनीति आयोग और CRISIL Intelligence की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, भारत को FY30 तक US$100 बिलियन का टेक्सटाइल एक्सपोर्ट लक्ष्य हासिल करने के लिए मैन-मेड फाइबर (MMF) आधारित उत्पादों पर अधिक ध्यान देना होगा। इसके साथ बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग, वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच और टेक्नोलॉजी व इनोवेशन में निवेश बढ़ाने की जरूरत है।टेक्सटाइल सेक्टर भारत के प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में शामिल है। यह देश की GDP में करीब 2%, मैन्युफैक्चरिंग ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) में 11% और मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में लगभग 9% योगदान देता है। यह 4.5 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है। FY25 में भारत ने करीब US$37.7 बिलियन के टेक्सटाइल उत्पादों का एक्सपोर्ट किया और वैश्विक टेक्सटाइल एवं अपैरल एक्सपोर्ट में 4.1% हिस्सेदारी के साथ छठे स्थान पर रहा।रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक टेक्सटाइल बाजार 2027 तक US$1.78-1.83 ट्रिलियन तक पहुंच सकता है। फास्ट फैशन, ई-कॉमर्स, शहरीकरण और बढ़ती डिस्पोजेबल इनकम से बाजार को समर्थन मिलने की उम्मीद है। टिकाऊ, सिलवट-रोधी, जल्दी सूखने वाले और परफॉर्मेंस आधारित उत्पादों की बढ़ती मांग से MMF की खपत भी बढ़ सकती है।नीति आयोग के अनुसार, भारत की कॉटन-केंद्रित रणनीति एक चुनौती बन रही है, क्योंकि वैश्विक मांग तेजी से सिंथेटिक फाइबर की ओर बढ़ रही है। FY20 में कॉटन यार्न उत्पादन 3,962 मिलियन किलोग्राम था, जो FY23 में घटकर 3,438 मिलियन किलोग्राम रह गया। इसके विपरीत, मैन-मेड फिलामेंट यार्न और ब्लेंडेड/नॉन-कॉटन यार्न का उत्पादन बढ़कर 3,650 मिलियन किलोग्राम हो गया।MMF सेक्टर के सामने कच्चे माल की लागत और आयात निर्भरता बड़ी चुनौती है। भारत घरेलू उत्पादन से PTA की करीब 75% और MEG की लगभग 65% मांग पूरी करता है। रिपोर्ट में PTA और MEG पर GST कम करने तथा MEG पर 5% कस्टम ड्यूटी घटाने या हटाने का सुझाव दिया गया है।अगले 2-3 वर्षों में PTA क्षमता में हर साल लगभग 55 लाख टन की बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे घरेलू फीडस्टॉक उपलब्धता बढ़ सकती है और MMF सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार हो सकता है।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 07 पैसे कमजोर हुआ, 95.43 पर बंद हुआ

चीन की मांग से कपास खपत बढ़ी

चीन की मांग से भारत में कॉटन की खपत बढ़ीचीन में भारतीय कॉटन यार्न की बढ़ती मांग से भारत में कपास की खपत को मजबूती मिली है। खासतौर पर 16 और 21 जैसे मोटे यार्न काउंट की चीन में अच्छी मांग है। इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से भारी होम टेक्सटाइल्स और निटेड फैब्रिक में होता है।USDA की ताजा ग्लोबल कॉटन मार्केट एंड ट्रेड रिपोर्ट के अनुसार, चालू मार्केटिंग ईयर में अब तक भारत का कॉटन यार्न एक्सपोर्ट 8% बढ़ा है। पहले 10 महीनों में चीन को भारतीय कॉटन यार्न का निर्यात करीब तीन गुना हो गया और चीन के यार्न आयात में भारत की हिस्सेदारी 7% से बढ़कर 21% हो गई। रुपये में कमजोरी और भारतीय यार्न की प्रतिस्पर्धी कीमतों से भी निर्यात को फायदा मिला है।कोलकाता की S.P. Yarns के मैनेजिंग डायरेक्टर शरद खेमका के मुताबिक, चीन में स्थानीय यार्न की कीमतें अधिक होने के कारण भारतीय यार्न की खरीद बढ़ी है। चीन अभी भी भारतीय यार्न खरीद रहा है, हालांकि भारत में हाल में बढ़ी कपास की कीमतें निर्यातकों के लिए चुनौती बनी हुई हैं। चीन के बाजार में भारत को वियतनाम से प्रतिस्पर्धा मिल रही है, जबकि पाकिस्तान की हिस्सेदारी पहले की तुलना में कम हुई है।हैदराबाद के श्री सालासर बालाजी एग्रोटेक के धीरज खेतान ने कहा कि चीन और बांग्लादेश जैसे बाजारों में भारतीय कॉटन यार्न का निर्यात बढ़ा है। चीन में खरीदार कच्चे कॉटन की तुलना में यार्न को प्राथमिकता दे रहे हैं क्योंकि भारतीय कीमतें प्रतिस्पर्धी हैं।USDA के अनुसार, भारत में कपास की खपत 2026-27 में रिकॉर्ड 26.5 मिलियन बेल रहने का अनुमान है, जबकि 2025-26 में यह 26 मिलियन बेल थी। सरकार की आयात शुल्क में छूट और टेक्सटाइल उद्योग को समर्थन देने वाले उपायों से मांग को सहारा मिला है।वैश्विक स्तर पर भी कपास की खपत 1 मिलियन बेल बढ़कर 122.9 मिलियन बेल रहने का अनुमान है, जो छह साल का उच्चतम स्तर होगा। चीन, भारत, इंडोनेशिया और वियतनाम में बढ़ी मांग इसका प्रमुख कारण है।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 8 पैसे की बढ़त के साथ 95.36 पर खुला।

कपास तेजी पर लग सकता है ब्रेक

कॉटन में तेजी पर लगेगा ब्रेक? अतुल गणात्रा ने बताया आगे का बाजार रुखहाल ही में CNBC Awaaz के इंटरव्यू में श्री अतुल गणात्रा जी (सीएमडी, राधा लक्ष्मी ग्रुप) ने कॉटन मार्केट की संभावित दिशा पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि करीब 10 दिन पहले ICE Cotton Futures 80–81 सेंट पर था, जो अब बढ़कर 84–85 सेंट हो गया है। इसी दौरान भारतीय कॉटन मार्केट भी ₹65,000 से बढ़कर करीब ₹68,000 प्रति कैंडी हो गया।मौजूदा भाव पर दक्षिण भारत की स्पिनिंग मिलों के लिए मिल डिलीवरी के बाद कॉटन की लागत करीब ₹71,000 प्रति कैंडी बैठती है। इस लागत पर 30s काउंट यार्न की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट लगभग ₹310–320 प्रति किलोग्राम आती है, जबकि गुजरात की मिलें समान यार्न करीब ₹295 प्रति किलोग्राम में बेच रही हैं। ऐसे में ऊंचे भाव पर कॉटन खरीदने वाली मिलों को ₹15–20 प्रति किलो तक का नुकसान हो सकता है।इसी वजह से कॉटन में जारी तेजी पर अब विराम लगने की संभावना बन रही है। साथ ही, इस वर्ष स्पिनिंग मिलों के पास कॉटन का स्टॉक रिकॉर्ड स्तर पर है और करीब 150 दिनों की इन्वेंट्री उपलब्ध है। मौजूदा ऊंचे भाव पर मिलों की नई खरीदारी भी सीमित रहने की संभावना है।31 जुलाई तक मिलों के पास करीब 85 लाख बेल्स का स्टॉक बताया गया है। इसके अलावा CCI के पास 25–26 लाख और ट्रेडर्स के पास लगभग 25 लाख बेल्स हैं। करीब 10 लाख बेल्स के इम्पोर्ट की संभावना भी है। पुराने और नए कपास की आवक को देखते हुए सीजन के अंत में स्टॉक पर्याप्त रहने की उम्मीद है।अंततः भारतीय कॉटन बाजार की दिशा मुख्य रूप से ICE Cotton Futures पर निर्भर करेगी और घरेलू बाजार ICE Cotton की चाल को फॉलो कर सकता है।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 08 पैसे कमजोर हुआ, 95.44 पर बंद हुआ

नवारो बोले, ट्रंप-मोदी वार्ता से सुलझेगा तेल विवाद

नवारो का बड़ा बयान: ट्रंप-मोदी बातचीत से सुलझा सकते हैं रूसी तेल टैरिफ विवाद*नई दिल्ली:* अमेरिका के व्यापार और मैन्युफैक्चरिंग मामलों के वरिष्ठ काउंसलर पीटर नवारो ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच “बहुत अच्छे कामकाजी संबंध” हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों नेता भारत के रूसी तेल आयात को लेकर अमेरिका के साथ चल रहे व्यापारिक मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझा सकते हैं।एएनआई के एक सवाल के जवाब में नवारो ने भारत-रूस तेल व्यापार पर अपने पहले लिखे लेख के बाद भारत में हुई तीखी प्रतिक्रिया का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान उन्होंने भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद बढ़ाए जाने पर एक लेख लिखा था।नवारो के अनुसार, युद्ध से पहले भारत और रूस के बीच तेल व्यापार मौजूदा स्तर पर नहीं था, लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि की। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि रूस से जुड़े रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के कारोबार से रूस की युद्ध क्षमता को मदद मिली।अपने लेख के बाद भारत में हुई प्रतिक्रिया को याद करते हुए नवारो ने कहा कि इंटरनेट पर भारतीय यूजर्स ने उनकी कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने इस तरह की प्रतिक्रिया से बचने की अपील भी की।नवारो ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच मौजूदा मतभेदों को ट्रंप और मोदी के स्तर पर ही सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने दोनों नेताओं के बीच अच्छे संबंधों का हवाला देते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में किसी तीसरे व्यक्ति का हस्तक्षेप उचित नहीं होगा।यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत द्वारा रूसी ऊर्जा की खरीद को लेकर अमेरिका की संभावित व्यापारिक कार्रवाई पर चिंता बनी हुई है।7 अगस्त 2026 को अमेरिकी सीनेट ने ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ को 86-11 वोट से पारित किया।प्रस्तावित कानून में अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल या गैस खरीदने वाले कुछ प्रमुख देशों से आयातित वस्तुओं पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है।हालांकि, **भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ तत्काल लागू नहीं हुआ है।** इस विधेयक को कानून बनने के लिए अमेरिकी विधायी प्रक्रिया के अगले चरणों से गुजरना होगा और इसके बाद राष्ट्रपति की कार्रवाई आवश्यक होगी।भारत और चीन रूसी कच्चे तेल के प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं। ऐसे में प्रस्तावित अमेरिकी प्रतिबंधों और टैरिफ प्रावधानों को लेकर दोनों देशों के साथ व्यापारिक संबंधों पर असर की आशंका बनी हुई है।नवारो का ताजा बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक बातचीत जारी है। उनके बयान से संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच मौजूदा मतभेदों का समाधान बातचीत और शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर कूटनीतिक प्रयासों के जरिए खोजने की कोशिश की जा सकती है।और पढ़ें :- कोयंबटूर में India ITME 2026 रोडशो शुरू

कोयंबटूर में India ITME 2026 रोडशो शुरू

कोयंबटूर से India ITME 2026 रोडशो की शुरुआतIndia ITME सोसाइटी ने India ITME 2026 के प्रमोशनल कैंपेन की शुरुआत कोयंबटूर में आयोजित एक विशेष प्रीव्यू इवेंट के साथ की। टेक्सटाइल मशीनरी और टेक्नोलॉजी की प्रमुख प्रदर्शनी का 12वां संस्करण 4 से 9 दिसंबर 2026 तक ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में टेक्सटाइल उद्योग से जुड़े प्रमुख हितधारकों ने हिस्सा लिया।India ITME सोसाइटी के चेयरमैन केतन संघवी ने कहा कि 2026 का संस्करण India ITME श्रृंखला का अब तक का सबसे बड़ा आयोजन होगा। इसमें 1,800 से अधिक एग्जिबिटर्स, 95 से ज्यादा देशों की भागीदारी और 1.5 लाख से अधिक विजिटर्स के आने की उम्मीद है। लगभग 2.4 लाख वर्ग मीटर क्षेत्रफल में 18 प्रदर्शनी हॉल में आयोजित होने वाला यह आयोजन टेक्सटाइल मशीनरी और इंजीनियरिंग उद्योग के लिए एक प्रमुख वैश्विक मंच बनेगा।‘ITME Next’ थीम के तहत प्रदर्शनी में एडवांस्ड टेक्सटाइल मशीनरी, सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग और नेक्स्ट-जेनरेशन टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी पर विशेष फोकस रहेगा। ‘मेक इन इंडिया’, PM MITRA पार्क्स और नेशनल टेक्निकल टेक्सटाइल्स मिशन जैसी पहलों के अनुरूप रिसोर्स एफिशिएंसी, सर्कुलर इकोनॉमी और पर्यावरणीय प्रभाव कम करने वाली तकनीकों को भी प्रमुखता दी जाएगी।इंडियन टेक्सप्रेन्योर्स फेडरेशन (ITF) के कन्वेनर प्रभु दामोदरन ने कहा कि कई वर्षों की चुनौतियों के बाद भारतीय टेक्सटाइल उद्योग के लिए मौजूदा माहौल अनुकूल है। उन्होंने FTA, GST सुधार, मजबूत सप्लाई चेन और नियरशोरिंग के बढ़ते महत्व को भारत के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया। साथ ही, उन्होंने टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और प्रोडक्ट डेवलपमेंट में लगातार निवेश की जरूरत पर जोर दिया।India ITME 2026 के दौरान 5-6 दिसंबर को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘टेक्सटाइल होराइजन्स’ आयोजित होगा। इसके अलावा CEO कॉन्क्लेव और ITME टेक्निकल अवॉर्ड्स भी प्रमुख आकर्षण होंगे।India ITME सोसाइटी की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. सीमा श्रीवास्तव ने उद्योग के निरंतर सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 3 पैसे की कमजोरी के साथ 95.36 पर खुला।

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