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कपास बुवाई तेज, 30 जुलाई लक्ष्य संभव

कपास बुवाई ने पकड़ी रफ्तार, 30 जुलाई तक बुवाई लक्ष्य पूरा होने की संभावना– अतुल भाई गणात्राश्री अतुल भाई गणात्रा जी, CMD, Radha Laxmi Group एवं Former CAI President, ने दिनांक 09 जुलाई 2026 को CNBC आवाज़ को दिए गए अपने इंटरव्यू में "Impact of Monsoon on Cotton Sowing & Farmers' Mood for Crop Switch" विषय पर महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए।उन्होंने बताया कि अब तक खरीफ फसलों की बुवाई में लगभग 20–30% की कमी की चर्चा की जा रही थी, किंतु हाल के दिनों में देश के विभिन्न क्षेत्रों में हुई अच्छी एवं व्यापक वर्षा के परिणामस्वरूप स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है।09 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, गत वर्ष इसी अवधि तक लगभग 72 लाख हेक्टेयर में कपास की बुवाई हुई थी, जबकि चालू सीज़न में यह आंकड़ा लगभग 66 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुका है। अर्थात् अब बुवाई का क्षेत्रफल पिछले वर्ष की तुलना में केवल लगभग 9% ही पीछे रह गया है।उन्होंने आगे बताया कि पिछले कुछ दिनों में Central एवं South Zones में अच्छी वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार आगामी 8–10 दिनों तक वर्षा में विराम (Pause Period) रहने की संभावना है, जिससे किसानों को बुवाई कार्य तेज़ी से पूरा करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा। ऐसे में कपास की बुवाई का आंकड़ा अनुमान से कहीं अधिक बढ़ सकता है।उन्होंने विशेष रूप से कहा कि इस वर्ष कपास के बीजों की रिकॉर्ड बिक्री हुई है, जिससे यह स्पष्ट है कि किसानों के पास पर्याप्त मात्रा में कॉटन सीड उपलब्ध है। किसान केवल वर्षा रुकने और खेतों में अनुकूल परिस्थितियां बनने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, ताकि बुवाई का कार्य तेज़ी से पूरा किया जा सके। उनका अनुमान है कि 30 जुलाई तक देश में कपास बुवाई का निर्धारित लक्ष्य पूरा हो सकता है।भारत सरकार ने चालू वर्ष के लिए कपास बुवाई का लक्ष्य 125–130 लाख हेक्टेयर निर्धारित किया है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए उम्मीद है कि 20–25 जुलाई तक देश में लगभग 100 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई पूर्ण हो जाएगी।श्री गणात्रा ने कहा कि यह सर्वविदित है कि जब मानसून में विलंब होता है अथवा वर्षा कम होती है, तब किसान खरीफ की अन्य फसलों की अपेक्षा कपास को प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि सोयाबीन, गन्ना, मक्का एवं मूंगफली जैसी फसलों की तुलना में कपास की फसल अपेक्षाकृत कम पानी में भी सफलतापूर्वक उगाई जा सकती है।उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस वर्ष कपास के MSP में लगभग 7% की वृद्धि की गई है, जबकि मूंगफली जैसी अन्य फसलों के MSP में लगभग 3% की ही वृद्धि हुई है। इसके अतिरिक्त, पिछले सीज़न में किसानों को कपास का बाज़ार भाव ₹10,000 प्रति क्विंटल तक प्राप्त हुआ था। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस वर्ष किसानों द्वारा बुवाई के लिए रिकॉर्ड मात्रा में कॉटन सीड की खरीद की गई है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि इस सीज़न में कपास की ओर फसल परिवर्तन (Crop Diversion) स्वाभाविक रूप से बढ़ा है।उन्होंने यह भी बताया कि दक्षिण भारत (South Zone) में इस वर्ष अब तक कपास की बुवाई पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 20% अधिक हो चुकी है, जो किसानों के सकारात्मक रुझान और अनुकूल परिस्थितियों का संकेत है।उन्होंने विशेष रूप से बताया कि गुजरात में कपास की बुवाई की अवधि 15 अगस्त तक खुली रहती है। इसलिए वर्तमान परिस्थितियों, किसानों की रुचि तथा रिकॉर्ड बीज बिक्री को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा सकता है कि चालू सीज़न में कपास का कुल बुवाई क्षेत्र पिछले वर्ष की तुलना में 10–15% तक अधिक रह सकता है।और पढ़ें:- गिरिराज सिंह ने वस्त्र क्षेत्र की प्रमुख योजनाओं की समीक्षा की, ITADCs की भूमिका पर दिया जोर

गिरिराज सिंह ने वस्त्र क्षेत्र की प्रमुख योजनाओं की समीक्षा की, ITADCs की भूमिका पर दिया जोर

गिरिराज सिंह ने टेक्सटाइल क्षेत्र की प्रमुख योजनाओं की समीक्षा की, ITADCs की भूमिका पर दिया जोरनई दिल्ली, 9 जुलाई (PTI): केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने गुरुवार को एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में टेक्नोलॉजी उन्नयन, संस्थागत सुधार और उद्योग को बेहतर सहयोग देने के उद्देश्य से चल रही प्रमुख पहलों की प्रगति का आकलन किया। बैठक का उद्देश्य भारत के टेक्सटाइल इकोसिस्टम को अधिक मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाना था।बैठक में पुराने पावरलूम सर्विस सेंटर्स को इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल एंड अपैरल डेवलपमेंट सेंटर्स (ITADCs) में बदलने की प्रगति की समीक्षा की गई। इन केंद्रों को टेक्सटाइल उद्योग के लिए वन-स्टॉप फैसिलिटेशन सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां उद्यमियों, एमएसएमई और अन्य हितधारकों को कौशल विकास, उत्पाद परीक्षण, डिजाइन सहायता, तकनीकी सहयोग, ऋण सुविधा, निर्यात प्रोत्साहन और बाजार से जुड़ाव जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के दौरान ITADCs ने 1,170 से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया और आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से लगभग 1,770 टेक्सटाइल इकाइयों तक पहुंच बनाई। इसके अलावा संस्थागत ऋण, ई-कॉमर्स लिंकेज, उत्पाद-आधारित उद्यमिता तथा बांस, हेम्प, फ्लैक्स, केला और अनानास जैसे नए फाइबर के व्यावसायीकरण को भी बढ़ावा दिया गया।गिरिराज सिंह ने कहा कि ITADCs अब केवल सेवा केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि नवाचार और उद्यम विकास केंद्रों के रूप में विकसित हो रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि ये केंद्र एमएसएमई को सशक्त बनाने, निर्यात बढ़ाने, टिकाऊ रोजगार सृजित करने और भारत के टेक्सटाइल क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।बैठक में अमेंडेड टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन फंड स्कीम (ATUFS) की भी समीक्षा की गई। मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के तहत 10,061 इकाइयों को 2,776 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई, जिससे 53,121 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित हुआ। योजना के माध्यम से लगभग 6.7 लाख आधुनिक टेक्सटाइल मशीनें स्थापित हुईं और करीब 3.6 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए। अध्ययन में यह भी पाया गया कि सब्सिडी के प्रत्येक एक करोड़ रुपये पर लगभग 19 करोड़ रुपये का निजी निवेश हुआ, जो योजना की प्रभावशीलता को दर्शाता है।और पढ़ें :- मानसून से कपास-सोयाबीन बुवाई तेज

मानसून से कपास-सोयाबीन बुवाई तेज

Kharif: मानसून के आगमन से कपास-सोयाबीन की बुवाई ने पकड़ी रफ्तार; पिछले साल के स्तर को पार कर सकता है कुल रकबादक्षिण पश्चिम मानसून पूरे देश में पहुंचने के साथ खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आ गई है। कपास और सोयाबीन की खेती ने रफ्तार पकड़ी है। कृषि मंत्रालय और सोपा के अनुसार, अच्छी बारिश से किसानों का रुझान बढ़ा है और उत्पादन संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।दक्षिण पश्चिम मानसून अब पूरे देश में पहुंच गया है। 9 जुलाई को यह राजस्थान, हरियाणा, पंजाब के शेष हिस्सों और उत्तरी अरब सागर में आगे बढ़ गया, जिससे इसका देशव्यापी प्रसार पूरा हो गया।  इसके साथ ही खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।अच्छी बारिश के चलते पिछले साल से 23 फीसदी पीछे चल रही कपास की बुवाई ने रफ्तार पकड़ ली है। पांच जुलाई तक कपास का कुल रकबा 63.18 लाख हेक्टेयर था, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 82 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो गई थी। बीते हफ्ते तक पिछड़ने के बाद अब गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में कपास की बुवाई में तेजी आई है। कुछ इलाकों में किसान धान छोड़कर कपास और दालों की तरफ रुख कर रहे हैं, क्योंकि इनमें बेहतर संभावनाएं दिख रही हैं। कृषि मंत्रालय के अनुसार, साल 2025-26 के लिए कपास का उत्पादन 290.91 लाख गांठ (प्रत्येक गांठ 170 किलोग्राम की) रहा, जो 2024-25 में हुए 297.24 लाख गांठ के उत्पादन से कम है।सोयाबीन का 90 फीसदी क्षेत्र कवरसोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के मुताबिक, मौजूदा खरीफ सीजन में सोयाबीन का रकबा 1.003 करोड़ हेक्टेयर होने का अनुमान है। इसने प्रमुख राज्यों में कुल लक्ष्य क्षेत्र के करीब 80 से 90 फीसदी हिस्से को कवर कर लिया है। सरकारी अनुमानों के अनुसार, अब तक 57 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुवाई पूरी की जा चुकी है।मध्य प्रदेश और राजस्थान में करीब 90 फीसदी हिस्से में सोयाबीन की बुवाई हो चुकी है। महाराष्ट्र में यह लक्षित क्षेत्र के लगभग 80-90 फीसदी तक पहुंच गई है। सोपा का मानना है कि 2026 खरीफ सीजन के दौरान सोयाबीन का कुल रकबा पिछले साल के स्तर को पार करने की संभावना है।और पढ़ें:- तेलंगाना में खरीफ 2026 के दौरान कपास बुवाई 4.85 लाख एकड़ बढ़ी

तेलंगाना में खरीफ 2026 के दौरान कपास बुवाई 4.85 लाख एकड़ बढ़ी

तेलंगाना में कपास की बुवाई में तेजी, पिछले वर्ष से 4.85 लाख एकड़ अधिक रकबाहैदराबाद, 8 जुलाई: तेलंगाना में खरीफ 2026 सीजन के दौरान कपास की बुवाई में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 8 जुलाई 2026 तक राज्य में 39,44,271 एकड़ क्षेत्र में कपास की बुवाई हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 34,58,849 एकड़ था। यानी इस वर्ष अब तक 4,85,422 एकड़ अधिक क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई है।जिलावार आंकड़ों के अनुसार, नलगोंडा में सबसे अधिक 1,97,352 एकड़ की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके बाद नागरकुरनूल (+49,481 एकड़), जंगांव (+44,904 एकड़), सूर्यापेट (+40,726 एकड़), संगारेड्डी (+40,020 एकड़) और खम्मम (+19,079 एकड़) में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।वहीं, कामारेड्डी, करीमनगर, रंगारेड्डी, जोगुलाम्बा गडवाल, महबूबाबाद, नारायणपेट और यादाद्री भुवनगिरि सहित कई अन्य जिलों में भी पिछले वर्ष की तुलना में कपास की बुवाई का रकबा बढ़ा है।दूसरी ओर, कुछ जिलों में कपास की बुवाई में कमी भी दर्ज की गई। इनमें हनमकोंडा (-15,793 एकड़), मंचेरियल (-13,795 एकड़), विकाराबाद (-12,655 एकड़), सिद्दीपेट (-12,382 एकड़), वारंगल (-9,610 एकड़) और भद्राद्री कोठागुडेम (-7,993 एकड़) प्रमुख हैं।राज्य में कपास का सामान्य (नॉर्मल) रकबा 47,41,541 एकड़ है, जबकि 8 जुलाई 2026 तक 39,44,271 एकड़ क्षेत्र में बुवाई पूरी हो चुकी है।और पढ़ें :- बेहतर बारिश से खरीफ बुवाई में आएगी तेजी: शिवराज सिंह चौहान

बेहतर बारिश से खरीफ बुवाई में आएगी तेजी: शिवराज सिंह चौहान

बारिश में सुधार से खरीफ बुवाई को मिलेगी रफ्तार: शिवराज सिंह चौहाननई दिल्ली, 8 जुलाई 2026: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि देश में मॉनसून की स्थिति में सुधार हो रहा है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आने की उम्मीद है। बुधवार को नई दिल्ली में अल-नीनो की स्थिति की समीक्षा के लिए आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद उन्होंने बताया कि जून में वर्षा की कमी 33 प्रतिशत थी, जो जुलाई में घटकर 24 प्रतिशत रह गई है। हाल के दिनों में देश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश होने से कम वर्षा वाले जिलों की संख्या भी 262 से घटकर 178 रह गई है।कृषि मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सरकार पूरी तैयारी, स्पष्ट रणनीति और ज़मीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई के साथ स्थिति का सामना कर रही है। मंत्रालय के अनुसार, चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं, लेकिन उनके प्रभाव को कम करने के लिए पूरा तंत्र पहले से सक्रिय है।मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में वर्षा और खरीफ बुवाई की स्थिति पर लगातार नज़र रखे हुए है। उन्होंने विश्वास जताया कि जुलाई में वर्षा में और सुधार होगा, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिलेगी।शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि अब तक देश में 350.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 91.95 लाख हेक्टेयर कम है। उन्होंने कहा कि मॉनसून के देर से आने का सबसे अधिक असर सोयाबीन और कपास की बुवाई पर पड़ा है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे देर से हुई बारिश की स्थिति को देखते हुए कम अवधि में तैयार होने वाली तथा कम पानी की आवश्यकता वाली फसलें, जैसे मक्का, बाजरा और मूंग की खेती करें, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके।मंत्री ने बताया कि सरकार ने इस चुनौती से निपटने की तैयारी अप्रैल से ही शुरू कर दी थी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के सहयोग से संभावित रूप से प्रभावित जिलों के लिए आपातकालीन कार्ययोजनाएं तैयार कर समय रहते राज्य सरकारों के साथ साझा की गईं। इसके अलावा, जून में चलाए गए 'खेत बचाओ अभियान' के तहत देशभर में 1.24 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनके माध्यम से 80 लाख से अधिक किसानों तक सीधे पहुंच बनाई गई।और पढ़ें :- रुपया डॉलर के मुकाबले 95.26 पर मजबूत खुला.

गुजरात में कपास की बुवाई 9.32 लाख हेक्टेयर पार, सौराष्ट्र सबसे आगे

गुजरात में कपास की बुवाई 9.32 लाख हेक्टेयर के पार, सौराष्ट्र सबसे आगे; तिलहनों का रकबा 6.66 लाख हेक्टेयरअहमदाबाद, 6 जुलाई। गुजरात में खरीफ 2026 सीजन के दौरान कपास की बुवाई तेज़ी से आगे बढ़ रही है। राज्य में अब तक 9,31,926 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हो चुकी है, जो सामान्य क्षेत्र का 39.1 प्रतिशत है। हालांकि, पिछले वर्ष की समान अवधि में यह रकबा 17,10,610 हेक्टेयर था।क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, सौराष्ट्र कपास बुवाई में सबसे आगे है, जहां 6,27,100 हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई है। इसके बाद कच्छ में 48,200 हेक्टेयर, उत्तर गुजरात में 1,17,100 हेक्टेयर, मध्य गुजरात में 1,09,800 हेक्टेयर और दक्षिण गुजरात में 29,800 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई दर्ज की गई है।जिलों की बात करें तो सुरेंद्रनगर 1,92,000 हेक्टेयर के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद बोटाद (1,11,800 हेक्टेयर), मोरबी (1,06,400 हेक्टेयर), भावनगर (89,700 हेक्टेयर) और अमरेली (69,900 हेक्टेयर) प्रमुख कपास उत्पादक जिले रहे हैं।वहीं, राज्य में तिलहनी फसलों की कुल बुवाई 6,66,029 हेक्टेयर तक पहुंच गई है, जो सामान्य क्षेत्र का 22.72 प्रतिशत है। इसमें मूंगफली की बुवाई 6,28,888 हेक्टेयर (32.83%), सोयाबीन 35,200 हेक्टेयर (12.51%), तिल 901 हेक्टेयर (1.82%) और अरंडी 1,041 हेक्टेयर (0.15%) में हुई है।राज्य में 6 जुलाई 2026 तक कुल खरीफ बुवाई 18,54,564 हेक्टेयर हो चुकी है, जो सामान्य क्षेत्रफल का 21.74 प्रतिशत है। मानसून की अनुकूल प्रगति के साथ आने वाले दिनों में कपास और तिलहनी फसलों की बुवाई में और तेजी आने की उम्मीद है।और पढ़ें :- रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.55 पर स्थिर खुला.

नंदुरबार में कपास पर बारिश का संकट

नंदुरबार में बारिश की कमी से कपास की फसल पर संकट, किसानों की बढ़ी चिंतानंदुरबार जिले में इस वर्ष मानसून की कमजोर शुरुआत ने कपास उत्पादक किसानों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। खरीफ सीजन शुरू होने के बाद भी जिले में पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेतों में नमी की भारी कमी देखी जा रही है। इसका सीधा असर कपास की फसल पर पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में पौधों की वृद्धि रुक गई है, जबकि कुछ स्थानों पर फसल मुरझाने लगी है। ऐसे में किसानों को आशंका है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो इस वर्ष उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।किसानों ने कपास की बुवाई के लिए बीज, उर्वरक, कीटनाशक और अन्य कृषि कार्यों पर हजारों रुपये का निवेश किया है। लेकिन अपेक्षित वर्षा नहीं होने के कारण यह निवेश जोखिम में दिखाई दे रहा है। मिट्टी में लगातार घटती नमी से पौधों का विकास प्रभावित हो रहा है, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों पर नकारात्मक असर पड़ने की संभावना बढ़ गई है।बारिश की कमी के कारण किसानों को फसल बचाने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ रहे हैं। वे निराई-गुड़ाई, कीट नियंत्रण और अन्य कृषि प्रबंधन कार्यों पर अतिरिक्त खर्च कर रहे हैं। इससे उनकी आर्थिक परेशानियां और बढ़ गई हैं। वहीं, कम नमी के कारण कपास की फसल में रोगों और कीटों के प्रकोप का खतरा भी बढ़ रहा है, जिससे नुकसान की आशंका और गहरा गई है।नंदुरबार जिले में खरीफ मौसम के दौरान बड़े पैमाने पर कपास की खेती की जाती है और हजारों परिवारों की आजीविका इसी फसल पर निर्भर है। जिन किसानों ने पहले ही बुवाई कर दी है, वे फसल को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं, जबकि जिन किसानों ने अभी तक बुवाई नहीं की है, वे बारिश का इंतजार करते हुए आगे की रणनीति तय करने में जुटे हैं।फिलहाल जिले के किसानों की उम्मीदें आने वाले दिनों में अच्छी बारिश पर टिकी हैं। यदि समय रहते पर्याप्त वर्षा होती है, तो फसल को राहत मिल सकती है और उत्पादन में सुधार की संभावना बनेगी। लेकिन यदि बारिश में और देरी होती है, तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में इस वर्ष कपास की खेती का भविष्य पूरी तरह मानसून की स्थिति पर निर्भर नजर आ रहा है।और पढ़ें :- अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 39 पैसे गिरकर 95.55 पर बंद हुआ।

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