भांग के रेशे से कपड़ा और कृषि क्षेत्र में बदलाव की संभावना: डॉ. खजूरिया
नई दिल्ली, 10 जनवरी: भांग (हेम्प) के रेशे में भारत के कृषि परिदृश्य और कपड़ा उद्योग को बदलने की बड़ी क्षमता है। यह बात कपड़ा मंत्रालय के डब्ल्यूडब्ल्यूईपीसी (WWEPC) के अध्यक्ष डॉ. रोमेश खजूरिया ने 188वीं प्रशासनिक समिति (COA) की बैठक में अपने उद्घाटन संबोधन के दौरान कही।
डॉ. खजूरिया ने केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह से मुलाकात कर भांग के रेशे के क्षेत्र में हो रही प्रगति की जानकारी देने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। इस प्रतिनिधिमंडल में कपड़ा आयुक्त रूप राशि, एवेगा ग्रीन टेक्नोलॉजीज, कोर्स्ड इंडिया फाउंडेशन, इंडिया हेम्प नेटवर्किंग सहित भांग रेशा उद्योग और खेती से जुड़े विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे।
डॉ. खजूरिया, जो जम्मू-कश्मीर ऊन विकास एवं विपणन संघ (JKWDMA) के अध्यक्ष भी हैं, ने बताया कि भांग का रेशा विशेष गुणों से युक्त होता है। इसे ऊन जैसे अन्य प्राकृतिक रेशों के साथ मिलाकर उच्च गुणवत्ता और टिकाऊ कपड़ा तैयार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ रेशों की ओर बढ़ रही है, जो ग्लोबल वार्मिंग जैसी चुनौतियों से निपटने में सहायक हैं।
उन्होंने भांग के रेशे को जल्द ‘संबद्ध रेशा’ (Allied Fibre) का दर्जा देने, इसके लिए नीति ढांचा तैयार करने, अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने और विभिन्न उद्योगों में इसके उपयोग को विस्तार देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
डॉ. खजूरिया के अनुसार, “भांग के रेशे को आधिकारिक मान्यता देने से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देशभर के किसानों के लिए नए आर्थिक अवसर भी पैदा होंगे।”
उन्होंने यह भी बताया कि भारत में भांग आधारित वस्त्र और अन्य उत्पादों का घरेलू बाजार 2027 तक करीब 3,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
बैठक के दौरान एवेगा ग्रीन टेक्नोलॉजीज के संस्थापक और सीईओ करण आर. सरसर ने कपड़ा उद्योग में भांग के रेशे को शामिल करने के लिए एक विस्तृत योजना प्रस्तुत की, जिसे उपस्थित सदस्यों ने महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा।
इस बैठक में आर.सी. खन्ना (उपाध्यक्ष), डी.के. जैन, हरमीत सिंह भल्ला, कवलजीत सिंह, बिलाल भट्ट, राजेश खन्ना, हरीश दुआ, कार्यकारी निदेशक सुरेश ठाकुर सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।