डॉ. खजूरिया के अनुसार, “भांग के रेशे को आधिकारिक मान्यता देने से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देशभर के किसानों के लिए नए आर्थिक अवसर भी पैदा होंगे।”
उन्होंने यह भी बताया कि भारत में भांग आधारित वस्त्र और अन्य उत्पादों का घरेलू बाजार 2027 तक करीब 3,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
बैठक के दौरान एवेगा ग्रीन टेक्नोलॉजीज के संस्थापक और सीईओ करण आर. सरसर ने कपड़ा उद्योग में भांग के रेशे को शामिल करने के लिए एक विस्तृत योजना प्रस्तुत की, जिसे उपस्थित सदस्यों ने महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा।
इस बैठक में आर.सी. खन्ना (उपाध्यक्ष), डी.के. जैन, हरमीत सिंह भल्ला, कवलजीत सिंह, बिलाल भट्ट, राजेश खन्ना, हरीश दुआ, कार्यकारी निदेशक सुरेश ठाकुर सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
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