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CCI ने कपास बिक्री भाव ₹300 बढ़ाया

CCI ने कपास की बिक्री कीमत ₹300/कैंडी बढ़ाई | मिलों और व्यापारियों की मांग बनी हुई है मज़बूतकॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (CCI) ने 4 सितंबर, 2026 को खत्म हुए हफ़्ते के दौरान अपनी कपास की बिक्री कीमत में ₹300 प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की। इससे घरेलू टेक्सटाइल मिलों और कपास व्यापारियों की ओर से मज़बूत खरीद की दिलचस्पी का संकेत मिलता है।CCI ने इस हफ़्ते 2025–26 की फसल से लगभग 57,000 गांठ कपास बेची, जिसमें नीलामी की ज़्यादातर गतिविधियां हफ़्ते की शुरुआत में ही हुईं।📊 साप्ताहिक बिक्री रिपोर्ट 31 अगस्त, 2026 (सोमवार)CCI ने हफ़्ते की सबसे ज़्यादा बिक्री दर्ज की, जिसमें 46,700 गांठें बिकीं। मिलों ने 19,000 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 27,700 गांठें खरीदीं।1 सितंबर, 2026 (मंगलवार)CCI ने 7,800 गांठें बेचीं, जिसमें मिलों को 5,900 गांठें और व्यापारियों को 1,900 गांठें बेची गईं।2 सितंबर, 2026 (बुधवार)कुल 2,000 गांठें बेची गईं, जिसमें मिलों ने 1,300 गांठें और व्यापारियों ने 700 गांठें खरीदीं।3 सितंबर, 2026 (गुरुवार)CCI ने 400 गांठें बेचीं, जो मिलों और व्यापारियों के बीच बराबर-बराबर यानी *200-200 गांठों* में बंटीं।4 सितंबर, 2026 (शुक्रवार)हफ़्ते का समापन 100 गांठों की बिक्री के साथ हुआ, जिन्हें पूरी तरह से व्यापारियों ने खरीदा।हालिया नीलामियों के बाद, 2025–26 सीज़न के लिए CCI की कुल कपास बिक्री लगभग 94.25 लाख गांठों तक पहुँच गई।

नई फसल के बीच कपास भाव मजबूत

नई फसल की शुरुआती आवक के बावजूद कच्चे कपास की कीमतें मजबूतग्लोबल बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद, देश के कई हिस्सों में खरीफ सीजन की नई कपास फसल की शुरुआती आवक के साथ कच्चे कपास की कीमतें मजबूत बनी हुई हैं। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और गुजरात के कुछ हिस्सों में नई फसल की आवक शुरू हो गई है।केंद्र सरकार ने 2026-27 मार्केटिंग सीजन के लिए मीडियम स्टेपल कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹8,267 प्रति क्विंटल और लॉन्ग स्टेपल कपास का MSP ₹8,667 प्रति क्विंटल तय किया है।रायचूर के सोर्सिंग एजेंट रामानुज दास बूब के अनुसार, रायचूर, बेल्लारी, अडोनी और येमिगनूर जैसे बाजारों में नमी की मात्रा के आधार पर कच्चे कपास की कीमतें ₹9,200-9,500 प्रति क्विंटल के बीच हैं। ये भाव MSP से ऊपर हैं।बूब ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों के मौजूदा रुझान को देखते हुए कच्चे कपास की कीमतें MSP से ऊपर बनी रह सकती हैं।ICE कॉटन फ्यूचर्स की कीमतें करीब 87 सेंट प्रति पाउंड पर हैं, जबकि मंगलवार को यह लगभग 93 सेंट थीं। ICE में गिरावट के बाद भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) को अपनी खरीद कीमतें करीब ₹2,000 प्रति कैंडी (356 किलोग्राम) घटानी पड़ी हैं। वहीं, भारतीय कपास निगम (CCI) ने अपनी कीमतें बरकरार रखी हैं।बूब के मुताबिक, MNCs की ओर से कम कीमतों की पेशकश के बावजूद खरीदार नहीं मिल रहे हैं। यार्न की कमजोर मांग के कारण मिलें भी खरीदारी को लेकर सतर्क हैं और बाजार की दिशा पर नजर रख रही हैं।राजकोट के आनंद पोपट ने बताया कि गुजरात के कुछ हिस्सों में भी सीमित आवक शुरू हो गई है। यहां कीमतें ₹1,900-2,000 प्रति मन (20 किलोग्राम) के आसपास हैं। बुवाई में देरी के कारण आवक एक महीने से अधिक पिछड़ी है और नवंबर की शुरुआत से इसमें तेजी आने की उम्मीद है।फिलहाल नई फसल की आवक करीब 50,000 गांठ प्रति सप्ताह है, जो अगले दो सप्ताह में बढ़कर लगभग 1 लाख गांठ प्रति सप्ताह हो सकती है।कृषि मंत्रालय के 4 सितंबर के आंकड़ों के अनुसार, देश में 109.17 लाख हेक्टेयर में कपास की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 109.87 लाख हेक्टेयर थी।और पढ़ें :- रुपया 02 पैसे गिरकर ₹94.49 प्रति डॉलर पर बंद हुआ

तेलंगाना में कपास बुवाई सामान्य रकबे से आगे.

तेलंगाना में कपास की बुआई सामान्य रकबे से आगे, सोयाबीन और तिलहन भी पिछले साल से अधिकतेलंगाना में खरीफ 2026 सीज़न के दौरान कपास की बुआई सामान्य रकबे से आगे निकल गई है। वहीं, सोयाबीन और कुल तिलहन का रकबा भी पिछले साल की समान अवधि की तुलना में बढ़ा है। तेलंगाना कृषि विभाग के 2 सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में प्रमुख खरीफ फसलों की बुआई की स्थिति में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है।कपास की बुआई सामान्य रकबे से अधिक2 सितंबर तक तेलंगाना में कपास की बुआई 4,822,219 एकड़ (48.22 लाख एकड़) में हो चुकी है। राज्य में कपास का सामान्य रकबा 4,741,541 एकड़ (47.42 लाख एकड़) है। इस तरह कपास की बुआई सामान्य रकबे के 101.70% तक पहुंच गई है।पिछले साल इसी अवधि में कपास की बुआई 4,541,547 एकड़ (45.42 लाख एकड़) में हुई थी। यानी इस साल कपास का रकबा पिछले साल के मुकाबले 280,672 एकड़ (करीब 2.81 लाख एकड़) अधिक है।सोयाबीन का रकबा भी बढ़ासोयाबीन की बुआई 2 सितंबर तक 372,400 एकड़ (3.72 लाख एकड़) में हुई है। हालांकि यह राज्य के सामान्य रकबे 416,656 एकड़ (4.17 लाख एकड़) से कम है, लेकिन सामान्य रकबे का 89.38% हिस्सा कवर हो चुका है।पिछले साल इसी अवधि में सोयाबीन की बुआई 360,385 एकड़ (3.60 लाख एकड़) में हुई थी। इस लिहाज से इस साल सोयाबीन का रकबा 12,015 एकड़ (करीब 0.12 लाख एकड़) बढ़ा है।कुल तिलहन में भी बढ़ोतरीराज्य में कुल तिलहन की बुआई 391,694 एकड़ (3.92 लाख एकड़) तक पहुंच गई है। इसके मुकाबले सामान्य रकबा 447,585 एकड़ (4.48 लाख एकड़) है। यानी अब तक सामान्य रकबे का 87.51% हिस्सा कवर हो चुका है।पिछले साल इसी अवधि में कुल तिलहन की बुआई 368,630 एकड़ (3.69 लाख एकड़) में हुई थी। इस तरह इस साल तिलहन का रकबा 23,064 एकड़ (करीब 0.23 लाख एकड़) अधिक है।मौसम पर रहेगी नजरआने वाले दिनों में मौसम की स्थिति फसलों के विकास के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। मौजूदा पूर्वानुमानों के अनुसार, तेलंगाना में मौसम सामान्यतः गर्म और बारिश अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना है। वहीं, आने वाले सप्ताह में प्रायद्वीपीय भारत में भी बारिश कम रहने का अनुमान है।ऐसे में राज्य में फसल उत्पादन और बाजार की स्थिति को समझने के लिए दो प्रमुख रुझानों पर नजर रहेगी—कपास का रकबा सामान्य स्तर से ऊपर जाना और सोयाबीन व कुल तिलहन का रकबा पिछले साल की समान अवधि से अधिक रहना। मौसम की स्थिति आगे इन फसलों की उत्पादकता और बाजार में उपलब्धता पर असर डाल सकती है।और पढ़ें :- उत्तर भारत में कपास खेती बढ़ाने पर जोर

उत्तर भारत में कपास खेती बढ़ाने पर जोर

सिरसा डायलॉग में उत्तर भारत में कपास की खेती फिर शुरू करने की अपीलबठिंडा: सिरसा में आयोजित दो दिवसीय फार्म-टू-फाइबर कॉटन डायलॉग 2026 में राजनेताओं, किसानों, जिनर्स, वैज्ञानिकों और कॉटन वैल्यू चेन से जुड़े हितधारकों ने पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में घटते कपास रकबे को बढ़ाने और कपास आधारित ग्रामीण तथा टेक्सटाइल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के रोडमैप पर चर्चा की।साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (SABC) की ओर से आयोजित इस डायलॉग में लगातार घटते कपास रकबे, स्थिर उत्पादकता और उत्तर भारत की कॉटन आधारित ग्रामीण एवं टेक्सटाइल अर्थव्यवस्था के सामने बढ़ती चुनौतियों पर चर्चा हुई। कपास की खेती में गिरावट रोकने के लिए बेहतर जेनेटिक्स, अगली पीढ़ी की कॉटन टेक्नोलॉजी और बेहतर उत्पादन प्रणालियों की जरूरत पर जोर दिया गया।कार्यक्रम में शामिल BJP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनप्रीत सिंह बादल ने उत्तर भारत में Bt कॉटन को तेजी से अपनाने और इससे क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था में आए बदलाव को याद किया। उन्होंने कहा, “अधिक पॉलिसी फोकस, किसानों पर ध्यान और आधुनिक तकनीक तक बेहतर पहुंच के साथ हम कपास में किसानों का भरोसा वापस ला सकते हैं और उत्तर भारत को एक बार फिर कपास उत्पादन का फलता-फूलता क्षेत्र बना सकते हैं।”SABC के फाउंडर डायरेक्टर भागीरथ चौधरी ने खरीफ सीजन 2026-27 को कॉटन इकोनॉमी के लिए “वेक-अप कॉल” बताया। उन्होंने ‘नॉर्थ इंडिया कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन’ के तहत पर्याप्त आवंटन की मांग की, जिसमें अगली पीढ़ी की पिंक बॉलवर्म (PBW) रेजिस्टेंट और हर्बिसाइड-टॉलरेंट Bt कॉटन टेक्नोलॉजी तथा HDPS और CSPS के लिए उपयुक्त बेहतर जेनेटिक्स तक किसानों की पहुंच शामिल हो।ICAL के पूर्व अध्यक्ष महेश शारदा ने बेहतर उत्पादकता और फाइबर रिकवरी के लिए सही कॉटन किस्म और हाइब्रिड के चयन को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने गांव स्तर पर समितियां बनाने का सुझाव दिया, जो स्थानीय परिस्थितियों में किस्मों के फील्ड प्रदर्शन का मूल्यांकन कर किसानों को बेहतर बीज चयन में मदद करें।डायलॉग का आयोजन SABC, ICAL, NITMA और हरियाणा कॉटन जिनर्स एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से किया।और पढ़ें :- सूरत टेक्सटाइल उद्योग को दुबई का बड़ा ऑफर

सूरत टेक्सटाइल उद्योग को दुबई का बड़ा ऑफर

सूरत टेक्सटाइल को दुबई का बड़ा ऑफरग्लोबल मंदी, कच्चे तेल और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के बीच सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को दुबई से बड़ा बिजनेस ऑफर मिला है। दुबई सरकार के एक हाई-लेवल डेलीगेशन ने सूरत पहुंचकर 450 से अधिक मिल मालिकों और इंडस्ट्रियलिस्ट्स के साथ बैठक की। इस दौरान दुबई में यूनिट, ऑफिस और ट्रेडिंग ऑपरेशन शुरू करने के लिए जमीन, इंफ्रास्ट्रक्चर और आसान बिजनेस सेटअप की सुविधाओं की जानकारी दी गई।दुबई सरकार की ओर से एयरपोर्ट से करीब 10 मिनट की दूरी पर ट्रेडिंग और नॉन-पॉल्युटिंग यूनिट्स के लिए जमीन और रेडीमेड ऑफिस उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया है। सिंगल-विंडो सिस्टम के जरिए जरूरी सरकारी अप्रूवल आसान तरीके से उपलब्ध कराने की बात भी कही गई है। सूरत एसोसिएशन के लिए बातचीत के आधार पर विशेष रेट या छूट की संभावना भी जताई गई है।साउथ गुजरात टेक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट जीतू वखारिया के मुताबिक, सूरत की प्रोसेसिंग मिलों को दुबई शिफ्ट करने की योजना नहीं है। हालांकि, टेक्सटाइल निर्माता और ट्रेडर्स दुबई में ऑफिस खोलकर इंटरनेशनल खरीदारों तक सीधे पहुंच बना सकते हैं।सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री में ओवरप्रोडक्शन भी बड़ी चुनौती है। एसोसिएशन के अनुसार, कुल उत्पादन का करीब 15 से 20 फीसदी हिस्सा घरेलू बाजार में खपाना मुश्किल होता है। ऐसे में दुबई को ट्रेडिंग हब बनाकर अतिरिक्त उत्पादन को नए विदेशी बाजारों में डायवर्ट करने की रणनीति पर विचार किया जा रहा है।दुबई के टैक्स और बिजनेस सिस्टम को भी भारतीय कारोबारियों के लिए आकर्षण के रूप में पेश किया गया है। हालांकि, ड्यूटी और टैक्स से जुड़े लाभ संबंधित ट्रेड एग्रीमेंट, उत्पाद और बिजनेस स्ट्रक्चर पर निर्भर करेंगे। एसोसिएशन फिलहाल दुबई सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई बुकलेट का अध्ययन कर रही है, जिसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 2 पैसे मजबूत होकर 94.47 पर खुला।

19 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

मानसून ने फिर बदली चाल: 19 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, विदिशा में 6 सितंबर तक तेज बारिश के आसारदेशभर में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में बारिश का दौर शुरू हो गया है। मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, राजस्थान, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र, त्रिपुरा, असम, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना समेत 19 राज्यों में भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना जताई है।विदिशा जिले में गुरुवार सुबह से रुक-रुककर रिमझिम और मध्यम बारिश हुई। मौसम विज्ञानी सतेन्द्र सिंह तोमर के अनुसार, जिले में फिलहाल 10 से 15 मिमी बारिश हो सकती है। इसके बाद 4, 5 और 6 सितंबर को तेज बारिश के आसार हैं। अगले चार से पांच दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।3 सितंबर तक विदिशा में औसतन 677.8 मिमी बारिश दर्ज हुई है, जबकि सामान्य औसत 1075.5 मिमी है। यानी जिले में सामान्य से करीब 37 प्रतिशत कम बारिश हुई है। लटेरी में सबसे ज्यादा 896.8 मिमी और गुलाबगंज में सबसे कम 417 मिमी बारिश दर्ज की गई है। बेतवा नदी का जलस्तर 1352.30 फीट है, जो खतरे के निशान से 21.34 फीट नीचे है। सम्राट अशोक सागर जलाशय 76.64 प्रतिशत भर चुका है।वहीं महाराष्ट्र में 1 जून से 31 अगस्त तक 824.5 मिमी के मुकाबले 703.4 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से 14.7 प्रतिशत कम है। राज्य के 15 जिलों में सामान्य बारिश का 75 प्रतिशत से भी कम पानी मिला है। छत्रपति संभाजीनगर मंडल में सामान्य का केवल 48.2 प्रतिशत, अमरावती में 72.6 प्रतिशत और नागपुर में 72.5 प्रतिशत बारिश हुई है।मध्य प्रदेश में आगामी बारिश से किसानों को राहत की उम्मीद है, जबकि महाराष्ट्र के कम बारिश वाले इलाकों में पर्याप्त बारिश नहीं होने पर खरीफ फसलों पर नुकसान का खतरा बढ़ सकता है।और पढ़ें :- रुपया 19 पैसे गिरकर 94.49 प्रति डॉलर पर बंद हुआ

NCDEX-CAI की कपास डेरिवेटिव्स पर साझेदारी

NCDEX ने कॉटन डेरिवेटिव्स को बढ़ावा देने के लिए CAI से किया समझौताभारत के प्रमुख कमोडिटी एक्सचेंज NCDEX ने कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) के साथ पांच साल की रणनीतिक साझेदारी की है। इसका उद्देश्य कॉटन डेरिवेटिव्स में भागीदारी बढ़ाना, पारदर्शी प्राइस डिस्कवरी को बेहतर करना और किसानों, गिनर्स, स्पिनर्स, एक्सपोर्टर्स तथा ट्रेडर्स के बीच हेजिंग को लेकर जागरूकता बढ़ाना है।यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब भारत दुनिया के कुल कॉटन उत्पादन में करीब 20-23% हिस्सेदारी रखता है और वैश्विक कॉटन खेती के कुल रकबे में लगभग 38% योगदान देता है। हालांकि, बिखरे हुए फिजिकल मार्केट और डेरिवेटिव्स के सीमित इस्तेमाल के कारण वैश्विक स्तर पर कॉटन की कीमत तय करने में भारत की भूमिका अभी भी सीमित है।एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मुंबई में NCDEX के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO विकास गोयल तथा CAI के प्रेसिडेंट विनय कोटक ने 'लेटर ऑफ एंगेजमेंट' पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) के चेयरमैन-सह-मैनेजिंग डायरेक्टर ललित कुमार गुप्ता भी मौजूद रहे।साझेदारी के तहत NCDEX के कॉटन डेरिवेटिव्स प्लेटफॉर्म को मजबूत किया जाएगा। फिलहाल इस प्लेटफॉर्म पर कपास, कॉटनसीड ऑयल केक और कॉटन वॉश ऑयल के कॉन्ट्रैक्ट उपलब्ध हैं।दोनों संस्थाएं किसानों, गिनर्स, स्पिनर्स, एक्सपोर्टर्स और ट्रेडर्स के बीच फ्यूचर्स ट्रेडिंग को प्रभावी जोखिम प्रबंधन साधन के रूप में बढ़ावा देंगी।महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे प्रमुख कॉटन उत्पादक राज्यों में जागरूकता और अपनाने से जुड़े कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।और पढ़ें :- ब्राजील में कपास के भाव बढ़े

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