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कुक्षी मंडी में नई कपास की नीलामी शुरू

कुक्षी मंडी में नए कपास की नीलामी शुरू, 1269 क्विंटल आवकउच्चतम भाव 8465 रुपए प्रति क्विंटल, एसडीएम और मंडी सचिव ने पूजन कर किया शुभारंभकुक्षी, धार। कुक्षी कृषि उपज मंडी में मंगलवार को नए कपास की नीलामी शुरू हुई। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) आशीष अशोक पाटिल और मंडी सचिव हिम्मत सिंह जमरा ने भगवान गणेश एवं बलरामजी की पूजा-अर्चना कर नीलामी का शुभारंभ किया। इस दौरान बैलों की पूजा भी की गई और कपास लेकर पहुंचे किसानों का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया।नीलामी के पहले दिन मंडी में कुल 151 वाहनों से 1269 क्विंटल नए कपास की आवक दर्ज की गई। इनमें 6 बैलगाड़ियां और 145 अन्य वाहन शामिल थे। कपास का उच्चतम भाव 8465 रुपए, न्यूनतम भाव 7500 रुपए और मॉडल भाव 8000 रुपए प्रति क्विंटल रहा। नीलामी के दौरान कपास व्यापारी भी मौजूद रहे।अमलाल गांव के किसान शंकर मानाजी पहले किसान रहे, जिनका तिलक लगाकर स्वागत किया गया। उनके कपास की बोली 8305 रुपए प्रति क्विंटल लगी। नए कपास की नीलामी शुरू होने से मंडी परिसर में किसानों में उत्साह नजर आया। इस अवसर पर मंडी क्षेत्र के सैकड़ों किसान मौजूद रहे।नीलामी का आयोजन कुक्षी कृषि उपज मंडी समिति के हीरा पैलेस के सामने स्थित मंडी प्रांगण में किया गया। कार्यक्रम में जिनिंग संचालक महेंद्र गुप्ता, जितेंद्र सोनी, राजेंद्र पाटीदार, राजू डुगरवाल और आलोक गुप्ता सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।मंडी में ही उपज बेचने की अपीलमंडी सचिव हिम्मत सिंह जमरा ने किसानों से अपनी कृषि उपज मंडी प्रांगण में ही बेचने की अपील की। उन्होंने कहा कि मंडी में उपज बेचने पर किसानों को उचित दाम और सही तौल मिलती है। साथ ही बिक्री के बाद नकद अथवा आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान की सुविधा भी उपलब्ध रहती है।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 5 पैसे की कमजोरी के साथ 94.87 पर खुला।

उत्तर महाराष्ट्र में कपास पर लालिया संकट

उत्तरी महाराष्ट्र में कपास पर ‘लालिया’ का संकट, उत्पादन घटने की आशंका से किसान चिंतितजलगांव: उत्तरी महाराष्ट्र में इस वर्ष कपास किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। देरी से हुई बारिश और उसके बाद हुई भारी बारिश के कारण राज्य में कपास की खेती का रकबा औसत से करीब 4.5 लाख हेक्टेयर कम हुआ है। जलगांव जिले में भी कपास का रकबा लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर घटा है। जुलाई के अंत में हुई भारी बारिश से करीब 35 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की फसल प्रभावित हुई थी। अब बची हुई फसल पर बारिश की कमी और रोग-कीटों के बढ़ते प्रकोप ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।वर्तमान में कपास की फसल पत्ती निकलने से लेकर फली बनने की अवस्था में है। पानी की कमी और मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण पत्ती धब्बा, अचानक पौधों का सूखना, दहिया, करपा और रस चूसने वाले कीटों का प्रकोप बढ़ने की आशंका है। यदि मौसम की स्थिति प्रतिकूल बनी रही, तो इसका असर कपास उत्पादन पर पड़ सकता है।‘लालिया’ बीमारी नहीं, बल्कि विकारकृषि विशेषज्ञों के अनुसार, कपास में दिखाई देने वाला ‘लालिया’ कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक शारीरिक विकार है। इसमें पत्तियों के किनारे या पूरी पत्ती लाल, बैंगनी अथवा गहरे लाल रंग की हो जाती है। साथ ही पत्तियां सिकुड़ने लगती हैं और पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है।विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक पानी की कमी के बाद अचानक पानी मिलना, तापमान में बदलाव, रस चूसने वाले कीटों का प्रकोप तथा मिट्टी में नाइट्रोजन और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों की कमी इस समस्या को बढ़ा सकती है।जलगांव स्थित कपास अनुसंधान केंद्र ने किसानों को संतुलित पोषण और उचित जल प्रबंधन अपनाने की सलाह दी है। लालपन दिखाई देने पर तुरंत फफूंदनाशक का छिड़काव करने के बजाय पहले मिट्टी की नमी, जड़ों, पोषक तत्वों और कीटों की स्थिति की जांच करना जरूरी है। समय पर उचित प्रबंधन से फसल को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।और पढ़ें :- आसिफाबाद में कपास का रकबा बढ़ा

आसिफाबाद में कपास का रकबा बढ़ा

कुमारम भीम आसिफाबाद में बढ़ रहा कपास का रकबाअनुकूल मिट्टी, मौसम और बाजार की सुविधा के कारण कुमारम भीम आसिफाबाद जिले में किसान लंबे समय से कपास की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं। कम सिंचाई की जरूरत और बेहतर बाजार मूल्य के कारण भी किसानों का रुझान कपास की ओर बढ़ रहा है।कपास की खेती के बढ़ते रकबे की एक प्रमुख वजह केंद्र सरकार की ओर से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में की जा रही बढ़ोतरी है। पिछले साल कपास का MSP 8,110 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि इस साल इसे बढ़ाकर 8,667 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। यानी पिछले साल की तुलना में MSP में 557 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। लगातार बढ़ रहे समर्थन मूल्य से किसानों में कपास की खेती को लेकर रुचि बढ़ी है।3.70 लाख एकड़ में कपास की खेती का अनुमानअधिकारियों के अनुसार, जिले में हर साल कपास की खेती का रकबा बढ़ रहा है। पिछले मानसून सीजन में करीब 3.40 लाख एकड़ में कपास की खेती हुई थी। इस बार यह क्षेत्र बढ़कर 3.70 लाख एकड़ होने का अनुमान है। जिले की काली मिट्टी कपास की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती है। इसके अलावा, फसल को बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद भी किसानों को कपास की ओर आकर्षित कर रही है।इस मानसून सीजन में जिले के 15 मंडलों में कुल 4,52,202 एकड़ में विभिन्न फसलों की खेती का अनुमान है। इनमें 3,70,919 एकड़ में कपास, 42,228 एकड़ में धान, 20,817 एकड़ में गन्ना, 1,326 एकड़ में सोयाबीन और 668 एकड़ में मक्का शामिल हैं। अन्य फसलें 11,254 एकड़ में उगाए जाने का अनुमान है।किसान गजेला संतोष ने बताया कि जिले की काली मिट्टी कपास की खेती के लिए उपयुक्त है। पिछले साल अच्छे भाव मिलने के कारण इस साल भी बेहतर कीमत की उम्मीद है। बारिश अनुकूल रही तो अच्छी पैदावार की संभावना है।और पढ़ें :- खरगोन में बारिश से कपास चुनाई प्रभावित

खरगोन में बारिश से कपास चुनाई प्रभावित

कसरावद-गोगांवा में बारिश, कपास की चुनाई प्रभावितखरगोन। जिले में सोमवार रात रुक-रुककर बारिश का दौर जारी रहा। कसरावद और गोगांवा में करीब डेढ़-डेढ़ इंच बारिश दर्ज की गई। कसरावद में 36 मिमी और गोगांवा में 37 मिमी पानी गिरा। इसके अलावा महेश्वर में 19 मिमी, खरगोन में 12 मिमी और भगवानपुरा में 10 मिमी बारिश दर्ज हुई। बारिश से खेतों में तैयार फसलों पर असर पड़ने की आशंका है।कपास की चुनाई प्रभावित होने का डरकिसान महेश यादव और बद्रीलाल यादव ने बताया कि खेतों में कपास की चुनाई की तैयारी चल रही है। बारिश होने से कपास में नमी आ जाएगी। इससे चुनाई का काम प्रभावित होने के साथ कपास की गुणवत्ता खराब होने की आशंका है। किसानों को बारिश थमने और खेतों के सूखने का इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं, सोयाबीन की फसल को भी नुकसान की आशंका बनी हुई है।जिले में 26.1 इंच बारिशभू-अभिलेख कार्यालय के अनुसार, जिले में अब तक कुल 26.1 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। यह औसत से करीब 5 प्रतिशत अधिक है। पिछले साल इसी अवधि में 25.7 इंच बारिश हुई थी। हालांकि, जिले की सालाना औसत बारिश 32.6 इंच है। इस लिहाज से सालाना औसत की तुलना में अभी करीब 6.5 इंच बारिश कम है।तापमान 30 डिग्री से नीचेपिछले एक सप्ताह से बादल और बारिश के कारण दिन के तापमान में करीब 1.5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है। अधिकतम तापमान 30 डिग्री से नीचे बना हुआ है। इससे लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली है।अगले चार दिन बारिश के आसारमौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अगले चार दिनों तक पश्चिमी मध्यप्रदेश सहित खरगोन में बादल छाए रहने और बारिश होने की संभावना है। ऐसे में खेतों में तैयार फसलों पर मौसम का असर आगे भी जारी रहने की आशंका है। कपास की चुनाई को लेकर किसानों की चिंता बढ़ सकती है।और पढ़ें :- रुपया US डॉलर के मुकाबले 31 पैसे गिरकर ₹94.82 पर बंद हुआ

खरगोन में कपास नीलामी ₹8,411 पर शुरू

खरगोन कॉटन ऑक्शन शुरू; पहली बोली ₹8,411 प्रति क्विंटल तक पहुंचीमध्य प्रदेश के सबसे बड़े कॉटन प्रोड्यूसिंग जिले खरगोन में एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट (मंडी) में सोमवार को कॉटन का नया सीजन शुरू हुआ। पूर्व एग्रीकल्चर स्टेट मिनिस्टर और खरगोन MLA बालकृष्ण पाटीदार ने आनंद नगर में मौजूद मार्केट में पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ ऑक्शन की शुरुआत की। नए सीजन के लिए शुरुआती बोली ₹8,411 प्रति क्विंटल दर्ज की गई। SISसीजन के पहले ही दिन किसान बड़ी संख्या में अपने कॉटन प्रोड्यूस के साथ मार्केट पहुंचे। लगभग 10,000 क्विंटल कॉटन आया, जिसे 500 से ज़्यादा गाड़ियों और 100 बैलगाड़ियों में लाया गया। ऑक्शन के दौरान किसान, व्यापारी और पब्लिक रिप्रेजेंटेटिव मौजूद थे। पूजा-अर्चना के बाद, "जय बलराम" के नारों के बीच बोली लगाने का प्रोसेस शुरू हुआ। SISनीलाम होने वाला पहला लॉट किसान अश्विन डांगी का था। केके कॉटन के कल्याण अग्रवाल ने इसके लिए सबसे ज़्यादा ₹8,411 प्रति क्विंटल की बोली लगाई। वहीं, ज़्यादा नमी वाला कॉटन भी ₹7,000 से ₹8,000 प्रति क्विंटल के भाव पर बिका। पहले ही दिन मिले अच्छे दामों से किसान उत्साहित दिखे। SISखरगोन MLA बालकृष्ण पाटीदार ने कहा कि इस साल अच्छी बारिश की वजह से कॉटन की फ़सल बहुत अच्छी हालत में है। सितंबर में अब तक बारिश न होने से कॉटन की क्वालिटी बनाए रखने में मदद मिली है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जैसे-जैसे कॉटन में नमी कम होगी, किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे, जो शायद ₹10,000 प्रति क्विंटल तक पहुँच सकते हैं। SISकॉटन ट्रेडर कल्याण अग्रवाल ने बताया कि इस साल इंटरनेशनल मार्केट में कॉटन का प्रोडक्शन कम होने की उम्मीद है, इस ट्रेंड का असर घरेलू मार्केट पर भी पड़ सकता है। उन्होंने आगे कहा कि कॉटन में नमी कम होने से किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना है। SISकिसान कुणाल डांगी ने बताया कि पहली नीलामी में उनके कपास को अच्छी कीमत मिली। फसल की अच्छी हालत को देखते हुए, उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में कपास की कीमतें अच्छी रहेंगी। नए सीज़न की शुरुआत के मौके पर मार्केट सेक्रेटरी शर्मिला निनामा समेत बड़ी संख्या में किसान, व्यापारी और सरकारी प्रतिनिधि मौजूद थे। और पढ़ें :- मनावर मंडी में 11 सितंबर से कपास नीलामी

मनावर मंडी में 11 सितंबर से कपास नीलामी

मनावर मंडी में 11 सितंबर से कपास बोलीमनावर। किसानों की मांग को देखते हुए मनावर कृषि उपज मंडी में 11 सितंबर से कपास की नीलामी शुरू की जाएगी। नगर के सेमल्दा मार्ग स्थित मिर्ची मंडी परिसर में कपास की बोली लगाई जाएगी। मंडी सचिव भगत सिंह डावर ने बताया कि नीलामी प्रक्रिया के दौरान व्यापारियों द्वारा किसानों की कपास उपज की बोली लगाई जाएगी। इससे किसानों को अपनी उपज का उचित बाजार मूल्य प्राप्त करने में सुविधा होगी।मंडी प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे कपास लेकर मंडी पहुंचने से पहले नीलामी के समय और आवश्यक जानकारी प्राप्त कर लें। किसानों से उपज की गुणवत्ता बनाए रखने तथा मंडी में बिक्री के लिए जरूरी दस्तावेज साथ लाने को कहा गया है। क्षेत्र में कपास की आवक शुरू होने के बाद अब स्थानीय स्तर पर नीलामी शुरू होने से किसानों को उपज बेचने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।150 से अधिक गांवों में कपास की बोवनीमनावर विकासखंड के 150 से अधिक गांवों में इस वर्ष किसानों ने करीब 20 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में कपास की बोवनी की है। फसल की आवक शुरू होने के साथ किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार की जरूरत है। स्थानीय मंडी में नीलामी शुरू होने से क्षेत्र के कपास उत्पादकों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।‘कपास किसान’ ऐप से पंजीयनभारतीय कपास निगम लिमिटेड (CCI) ने मध्य प्रदेश के कपास उत्पादक किसानों के लिए ‘कपास किसान’ मोबाइल ऐप शुरू किया है। इसके माध्यम से किसान कपास बेचने के लिए घर बैठे पंजीयन कर सकेंगे। साथ ही संबंधित कृषि उपज मंडी केंद्र पर कपास बिक्री के लिए स्लॉट बुक करने की सुविधा भी उपलब्ध होगी।कपास सीजन 2026-27 के लिए पंजीयन 1 सितंबर से 31 अक्टूबर तक किया जा सकेगा। मंडी सचिव भगत सिंह डावर के अनुसार, पंजीयन में सहायता के लिए किसान व्हाट्सऐप हेल्पलाइन 8269023626 पर संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने क्षेत्र के सभी कपास किसानों से समय पर पंजीयन कराने की अपील की है।और पढ़ें :- गुजरात-तेलंगाना में बारिश की कमी से किसान संकट में

गुजरात-तेलंगाना में बारिश की कमी से किसान संकट में

बारिश की कमी से गुजरात और तेलंगाना में किसानों पर संकटगुजरात के अमरेली से लेकर तेलंगाना के कई इलाकों तक बारिश की कमी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कमजोर मानसून के कारण खरीफ फसलों पर संकट गहरा गया है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।अमरेली जिले के सावरकुंडला पंथक में करीब डेढ़ महीने से बारिश नहीं हुई है। इससे किसानों की कपास की फसल सूखने लगी है। महंगे बीज, खाद और मेहनत से तैयार की गई फसल में उत्पादन की उम्मीद खत्म होने के बाद कई किसानों ने मजबूरी में अपने मवेशियों को खेतों में चरने के लिए छोड़ दिया है। एक किसान ने बताया कि 15 बीघा में कपास की खेती पर एक लाख रुपये से अधिक खर्च करने के बावजूद बारिश न होने से पूरी फसल खराब हो गई। सौराष्ट्र और कच्छ के अन्य हिस्सों में भी कम बारिश के कारण खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचा है।तेलंगाना में भी स्थिति चिंताजनक है। 1 जून से 1 सितंबर के बीच जोगुलम्बा गडवाल जिले के वड्डेपल्ले मंडल में सामान्य से 73%, जबकि नलगोंडा जिले के केथेपल्ले मंडल में 71% बारिश की कमी दर्ज की गई। कई अन्य मंडलों में भी 60% या उससे अधिक बारिश कम हुई है। केथेपल्ले में सामान्य 431.5 मिमी के मुकाबले केवल 124.9 मिमी बारिश हुई।वड्डेपल्ले में बारिश न होने के कारण बीज सूख गए हैं और किसानों को कपास और मिर्च की दोबारा बुआई करनी पड़ रही है। बार-बार बुआई, बीज और ड्रिप इरिगेशन पर उनका खर्च ₹30,000 से ₹50,000 प्रति एकड़ तक बढ़ गया है। किराए पर खेती करने वाले किसानों पर आर्थिक बोझ और भी अधिक है।अब किसानों की उम्मीद सितंबर की बारिश पर टिकी है। विशेषज्ञों के मुताबिक एल नीनो, स्थानीय मौसम प्रणालियां और बारिश के असमान वितरण ने हालात बिगाड़े हैं। यदि जल्द पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो किसानों की फसल और आय पर संकट और गहरा सकता है।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 2 पैसे की कमजोरी के साथ 94.51 पर खुला।

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