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गुजरात और राजस्थान में भारी बारिश से कपास की फसल पर खतरा, खेतों में जलभराव

भारी बारिश से थानगढ़ (गुजरात) और सरूपसर (राजस्थान) में कपास की फसल पर संकट, खेतों में जलभरावलगातार हो रही भारी बारिश ने गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले के थानगढ़ और राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के सरूपसर (सूरतगढ़) क्षेत्र में किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में जलभराव होने से कपास और नरमा की फसलें पानी में डूब गई हैं, जिससे उनके सड़ने और खराब होने का खतरा बढ़ गया है।थानगढ़ तालुका के गुंगलियाना गांव में लगातार बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया है। जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने से कपास की फसल को भारी नुकसान होने की आशंका है। वहीं, थानगढ़ शहर के दलवाड़ी नगर इलाके में भी जलभराव के कारण रिहायशी क्षेत्रों और मुख्य सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया, जिससे लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।उधर, सरूपसर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में किसान फसल बचाने के लिए ट्रैक्टर संचालित बड़े पंपों की मदद से खेतों से पानी निकाल रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द जल निकासी नहीं हुई तो फसलें पूरी तरह नष्ट हो सकती हैं।किसानों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों का गिरदावरी सर्वे कराने, उचित मुआवजा देने और भविष्य में जल निकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।और पढ़ें :- FY26 में भारत का कपास उत्पादन घटकर 290.91 लाख गांठ रहने का अनुमान

FY26 में भारत का कपास उत्पादन घटकर 290.91 लाख गांठ रहने का अनुमान

खेती का रकबा घटने से FY26 में भारत का कपास उत्पादन घटकर 290.91 लाख गांठ रहने का अनुमाननई दिल्ली: सरकार ने शुक्रवार को संसद को बताया कि भारत का कपास उत्पादन वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर 290.91 लाख गांठ रहने का अनुमान है, जबकि 2020-21 में यह 352.48 लाख गांठ था। हालांकि, इस अवधि में कपास की उत्पादकता में बड़ा बदलाव नहीं आया और यह 428 से 451 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के दायरे में रही।राज्यसभा में कपड़ा राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा ने कहा कि उत्पादन में गिरावट का मुख्य कारण कपास की खेती के क्षेत्रफल में कमी है। कई किसानों ने अधिक लाभ देने वाली अन्य फसलों की ओर रुख किया है, जिसके चलते कपास के बुआई क्षेत्र में कमी आई है।सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कपास की खेती का क्षेत्रफल 2020-21 में 132.85 लाख हेक्टेयर था, जो घटकर 2025-26 में 114.82 लाख हेक्टेयर रह गया।मंत्रालय ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास की कीमतों में लगभग 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि घरेलू बाजार में S-6 किस्म के कपास की कीमतों में करीब 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। मंत्री ने कहा कि घरेलू उपलब्धता बनाए रखने के लिए आवश्यकता पड़ने पर कच्चे कपास और सूती धागे का आयात किया जाता है।सरकार के अनुसार, अनुमानित उत्पादन, कैरी-ओवर स्टॉक और आयात के माध्यम से देश की कपास जरूरतों को पूरा किया जा रहा है। कपास की उपलब्धता और बाजार की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।कपड़ा उद्योग को समर्थन देने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इनमें 1 जून 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक कच्चे कपास के आयात पर लगने वाले 11 प्रतिशत आयात शुल्क से छूट देना शामिल है। इसके अलावा, उच्च गुणवत्ता वाले कपास की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 20 फरवरी 2024 से प्रभावी एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल (ELS) कपास पर आयात शुल्क में दी गई छूट जारी रखी गई है।कपास की उत्पादकता बढ़ाने और गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से सरकार ने 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन (कपास क्रांति) को मंजूरी दी है। इस मिशन के तहत उत्पादन बढ़ाने, नई तकनीकों को बढ़ावा देने और बेहतर गुणवत्ता वाले फाइबर के विकास पर ध्यान दिया जाएगा।सरकार ने 2026-31 के लिए स्वीकृत कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन में ‘न्यू एज फाइबर्स’ के लिए विशेष प्रावधान भी किए हैं। इसके अलावा, 2026-27 के बजट में घोषित नेशनल फाइबर मिशन के तहत कपास और अन्य फाइबर के उत्पादन को बढ़ावा देने तथा भारतीय फाइबर ब्रांड को विकसित करने पर जोर दिया गया है।और पढ़ें :- कर्नाटक के यादगीर में हल्की बारिश से किसानों को राहत, बेहतर फसल की उम्मीद बढ़ी

कर्नाटक के यादगीर में हल्की बारिश से किसानों को राहत, बेहतर फसल की उम्मीद बढ़ी

कर्नाटक के यादगीर में हल्की बारिश से किसानों को मिली राहत, बेहतर पैदावार की उम्मीद जगीकर्नाटक के यादगीर जिले में पिछले कुछ दिनों से हुई हल्की बारिश ने किसानों के चेहरों पर राहत की मुस्कान लौटा दी है। इस मानसून में अब तक सामान्य से कम बारिश होने के कारण जिले के कई हिस्सों में खरीफ फसलें नमी की कमी से प्रभावित होने लगी थीं। कपास, लाल चना और मूंग जैसी प्रमुख फसलों के मुरझाने से किसान चिंतित थे, लेकिन हालिया बारिश ने फसलों को संजीवनी देने का काम किया है। किसानों को अब उम्मीद है कि यदि आने वाले दिनों में बारिश का सिलसिला जारी रहता है, तो इस सीजन में अच्छी पैदावार मिल सकती है।कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार तक जिले में 2,41,682 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई पूरी हो चुकी है, जबकि इस सीजन के लिए कुल 4,01,869 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लाल चने की बुआई 84,999 हेक्टेयर के लक्ष्य में से 48,697 हेक्टेयर यानी लगभग 60.14 प्रतिशत क्षेत्र में हुई है। वहीं, मूंग की बुआई 13,770 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 9,153 हेक्टेयर में दर्ज की गई है। जिले की प्रमुख नकदी फसल कपास की बुआई 2,02,452 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 1,79,410 हेक्टेयर क्षेत्र में पूरी की गई है।कम बारिश के कारण खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन पा रही थी, जिससे फसलों की बढ़वार रुकने लगी थी। किसान विजय गुल्गी ने बताया कि हाल की हल्की बारिश से खेतों में नमी बढ़ी है और खड़ी फसलों को राहत मिली है। उनका मानना है कि यदि आगे भी समय-समय पर बारिश होती रही तो उत्पादन बेहतर हो सकता है।यादगीर जिले में धान के बाद कपास दूसरी सबसे अधिक उगाई जाने वाली फसल है। हालांकि अधिकांश किसान सिंचाई के लिए नहरों के पानी पर निर्भर हैं, लेकिन सूखे जैसी स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि बसवसागर जलाशय का पानी केवल लोगों और पशुओं के पीने के लिए सुरक्षित रखा जाएगा और सिंचाई के लिए उपलब्ध नहीं कराया जाएगा।कपास किसान चंद्रशेखर गौड़ा बिलवार, जो कृष्णा भाग्य जल निगम लिमिटेड (KBJNL) की नहरों के पानी पर निर्भर हैं, ने बताया कि बारिश की कमी के कारण खरपतवार हटाने के पहले चरण के बाद ही फसलें मुरझाने लगी थीं। उन्होंने कहा कि हाल की हल्की बारिश ने फसलों में नई जान फूंक दी है और अब उन्हें उम्मीद है कि इस सीजन में फसल को बड़े नुकसान के बजाय अच्छी पैदावार मिलेगी।आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 24 जुलाई के बीच यादगीर जिले में सामान्य से 24 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इसके बावजूद हालिया बारिश ने किसानों की चिंताओं को कुछ हद तक कम कर दिया है और बेहतर उत्पादन की उम्मीदों को फिर से मजबूत किया है।और पढ़ें :- भारत ने WTO व्यापार नीति समीक्षा पूरी की, टैरिफ सुधार और FTA रणनीति पर जोर

भारत ने WTO व्यापार नीति समीक्षा पूरी की, टैरिफ सुधार और FTA रणनीति पर जोर

भारत ने WTO की व्यापार नीति समीक्षा पूरी की, टैरिफ सुधार और FTA रणनीति पर दिया जोरभारत ने जिनेवा में विश्व व्यापार संगठन (WTO) में अपनी आठवीं व्यापार नीति समीक्षा (Trade Policy Review) का दूसरा और अंतिम सत्र पूरा कर लिया है। इसके साथ ही WTO के पारदर्शिता एवं निगरानी तंत्र के तहत भारत की व्यापार एवं संबंधित नीतियों की आवधिक (समय-समय पर होने वाली) समीक्षा भी पूरी हो गई है।यह समीक्षा टेक्सटाइल और परिधान क्षेत्र के एक्सपोर्टर्स, इम्पोर्टर्स और मैन्युफैक्चरर्स के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें बाजार तक पहुंच और सप्लाई-चेन प्लानिंग को प्रभावित करने वाले प्रमुख नीतिगत क्षेत्रों पर चर्चा हुई। इनमें टैरिफ सुधार, कस्टम्स प्रक्रियाओं को आसान बनाने के उपाय, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) रणनीति, तकनीकी नियम, क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO) और व्यापार उपाय (Trade Remedies) शामिल हैं।समीक्षा के दौरान भारत को 44 WTO सदस्यों से कुल 1,094 लिखित प्रश्न प्राप्त हुए। वहीं, 21 और 23 जुलाई, 2026 को आयोजित दो समीक्षा सत्रों में 68 WTO सदस्यों ने अपने विचार रखे।भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने किया। उन्होंने कहा कि व्यापार सुधार एक सतत प्रक्रिया है और भारत खुले, पारदर्शी तथा पूर्वानुमेय व्यापार एवं निवेश व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है।उन्होंने कहा कि भारत के टैरिफ सुधार, कस्टम्स प्रक्रियाओं को आसान बनाने के उपाय और FTA रणनीति ने देश के घरेलू विकास लक्ष्यों का समर्थन करने के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ उसके जुड़ाव को भी मजबूत किया है।WTO सदस्यों द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए अग्रवाल ने कहा कि भारत की व्यापार नीतियां WTO के अनुरूप सिद्धांतों से निर्देशित हैं, साथ ही वे एक बड़ी विकासशील अर्थव्यवस्था की विकासात्मक जरूरतों को भी ध्यान में रखती हैं।उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र की टैरिफ संरचना का उद्देश्य छोटे, कम आय वाले और कम संसाधनों वाले किसानों के हितों की रक्षा करना है, जबकि औद्योगिक टैरिफ सप्लाई-चेन की मजबूती, विविधीकरण और घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को समर्थन देते हैं।सैनिटरी एवं फाइटोसैनिटरी (SPS) उपायों, तकनीकी नियमों और व्यापार उपायों के संबंध में उन्होंने पारदर्शिता, हितधारकों के साथ परामर्श और WTO नियमों के पालन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।उन्होंने यह भी कहा कि भारत के क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO) का उद्देश्य उचित सार्वजनिक नीति लक्ष्यों को हासिल करना है, जबकि व्यापार उपायों की जांच पारदर्शी तरीके से, ठोस साक्ष्यों, उचित प्रक्रिया और न्यायिक निगरानी के आधार पर की जाती है।समीक्षा के दौरान WTO सदस्यों ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कस्टम्स और व्यापार सुविधा के आधुनिकीकरण, नवाचार एवं स्टार्टअप पहलों, क्षेत्रीय व्यापार समझौतों तथा माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains) से जोड़ने के भारत के प्रयासों की सराहना की। सदस्यों ने फिशरीज सब्सिडी पर WTO समझौते को भारत द्वारा स्वीकार किए जाने का भी स्वागत किया।WTO सुधारों के मुद्दे पर भारत ने एक खुले, समावेशी, पारदर्शी और नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार तंत्र के प्रति अपना समर्थन दोहराया। भारत ने यह भी कहा कि भविष्य के सुधार विकास-केंद्रित होने चाहिए, विकासशील देशों के लिए पर्याप्त नीतिगत गुंजाइश बनाए रखनी चाहिए और WTO के मौजूदा आदेशों (existing mandates) को पूरा करना चाहिए।और पढ़ें :- CCI ने कपास की कीमत ₹800 प्रति कैंडी बढ़ाई, साप्ताहिक बिक्री 2.26 लाख गांठ के पार

CCI ने कपास की कीमत ₹800 प्रति कैंडी बढ़ाई, साप्ताहिक बिक्री 2.26 लाख गांठ के पार

CCI ने कॉटन कैंडी की कीमतें ₹800 बढ़ाईं, साप्ताहिक नीलामी 2.26 लाख गांठों तक पहुँचीकॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (CCI) ने 24 जुलाई, 2026 को समाप्त सप्ताह के दौरान टेक्सटाइल मिलों और कॉटन व्यापारियों की ज़बरदस्त भागीदारी के बीच अपनी कॉटन बिक्री की कीमतें ₹800 प्रति कैंडी बढ़ा दीं।CCI ने इस सप्ताह के दौरान 2025–26 की कॉटन फ़सल से कुल लगभग 2,26,100 गांठों की बिक्री दर्ज की, जिसमें सबसे ज़्यादा नीलामी गतिविधि गुरुवार को देखी गई।साप्ताहिक बिक्री रिपोर्ट 20 जुलाई, 2026 (सोमवार):सप्ताह की शुरुआत 21,900 गांठों की बिक्री के साथ हुई। मिलों ने 6,100 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 15,800 गांठें खरीदीं।21 जुलाई, 2026 (मंगलवार):CCI की नीलामी बिक्री 26,600 गांठें रही, जिसमें मिलों द्वारा खरीदी गई 9,200 गांठें और व्यापारियों द्वारा उठाई गई 17,400 गांठें शामिल थीं।22 जुलाई, 2026 (बुधवार):नीलामी गतिविधि में तेज़ी आई और कुल बिक्री बढ़कर 52,700 गांठें हो गई। मिलों ने 21,300 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 31,400 गांठें खरीदीं।23 जुलाई, 2026 (गुरुवार):CCI ने सप्ताह की सबसे ज़्यादा बिक्री दर्ज की, जिसमें 98,300 गांठें बिकीं। मिलों ने 24,000 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 74,300 गांठें उठाईं।24 जुलाई, 2026 (शुक्रवार):सप्ताह का समापन 26,600 गांठों की बिक्री के साथ हुआ। मिलों ने 12,900 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 13,700 गांठें खरीदीं।CCI की कॉटन बिक्री 87.30 लाख गांठों के पारनवीनतम नीलामियों के बाद, 2025–26 सीज़न के लिए CCI की कुल कॉटन बिक्री लगभग 87,30,900 गांठों तक पहुँच गई।और पढ़ें :- देशभर में कपास बाजार तेज

देशभर में कपास बाजार तेज

सिर्फ 3,070 गांठ आवक के बीच देशभर में कपास बाजार में तेजी, CCI नीलामी रही चर्चा में ,जानिए पूरी रिपोर्टआज 24 जुलाई 2026 को भारतीय कपास बाजार में सभी प्रमुख क्षेत्रों में मजबूत तेजी दर्ज की गई। उत्तर भारत में कपास के भाव ₹50 प्रति मन, मध्य भारत में ₹200–500 प्रति कैंडी तथा दक्षिण भारत में ₹300–500 प्रति कैंडी तक बढ़े। वहीं, अखिल भारतीय कपास की कुल आवक लगभग 3,070 गांठ (Bales) रही, जो पुरानी फसल की सीमित उपलब्धता को दर्शाती है।बाजार को मजबूती मिलने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण रहे। अंतरराष्ट्रीय बाजार ICE Cotton में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी से भारतीय बाजार का सेंटीमेंट सकारात्मक बना। इसके साथ ही चीन की रिजर्व कॉटन नीलामी में लगातार 100% बिक्री ने वैश्विक मांग को मजबूत बनाए रखा।दूसरी ओर, देशभर में पुरानी फसल की आवक बेहद कम रहने से बाजार में उपलब्ध स्टॉक सीमित हो गया है। इसके साथ ही बेहतर गुणवत्ता (Good Quality) वाली कपास की उपलब्धता भी कम होती जा रही है, जिसके कारण स्पिनिंग मिलें और व्यापारी अच्छी क्वालिटी की कपास के लिए ऊंचे भाव देने को तैयार हैं। मिलों की सक्रिय खरीद, व्यापारियों की बढ़ती रुचि तथा चीन की रिजर्व कॉटन नीलामी में लगातार 100% बिक्री से बने सकारात्मक वैश्विक माहौल ने भी बाजार को मजबूती प्रदान की।इसी बीच Cotton Corporation of India (CCI) की आज की ई-नीलामी ने भी बाजार का ध्यान आकर्षित किया। CCI ने 7,06,800 गांठ कपास बिक्री के लिए पेश की। इसमें मिल सेशन में 12,900 गांठ तथा ट्रेडर सेशन में 13,700 गांठ की बिक्री हुई। इस प्रकार आज कुल 26,600 गांठ की बिक्री दर्ज की गई। इसके साथ ही 24 जुलाई 2026 तक CCI द्वारा कुल 87,30,900 गांठ कपास की बिक्री की जा चुकी है।सीजन के अंतिम चरण में सीमित आवक, मिलों की लगातार खरीद और वैश्विक बाजार से मिल रहे सकारात्मक संकेतों के कारण भारतीय कपास बाजार में तेजी का माहौल बना हुआ है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से ICE Cotton की चाल, घरेलू मांग और नई फसल की प्रगति पर निर्भर करेगी।और पढ़ें :- रुपया डॉलर के मुकाबले 7 पैसे मजबूत होकर 96.56 पर बंद हुआ।

अमेरिका ने जबरन मजदूरी से जुड़े भारतीय सामान पर प्रस्तावित टैरिफ घटाकर 10% किया

अमेरिका ने भारत के लिए बलपूर्वक श्रम से बने उत्पादों पर प्रस्तावित टैरिफ 12.5% से घटाकर 10% कियाअमेरिका ने भारत से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर प्रस्तावित टैरिफ को 12.5% से घटाकर 10% कर दिया है। यह फैसला भारत द्वारा बलपूर्वक श्रम से निर्मित उत्पादों के आयात को रोकने के लिए उठाए गए कदमों के बाद लिया गया है।वॉशिंगटन ने बलपूर्वक श्रम से पूरी तरह या आंशिक रूप से निर्मित उत्पादों के आयात को लेकर समीक्षा के बाद भारत के लिए अंतिम टैरिफ दर में कटौती की। अब प्रभावित उत्पादों पर 10% का अतिरिक्त आयात शुल्क लागू होगा।यह घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई व्यापार नीति का हिस्सा है, जिसके तहत कई व्यापारिक साझेदार देशों से आने वाले आयात पर नए टैरिफ लगाए गए हैं। ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि कुछ देशों ने बलपूर्वक श्रम से बने उत्पादों के आयात पर रोक लगाने वाले नियमों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया है।व्हाइट हाउस के अनुसार, इन देशों से आने वाले उत्पादों पर 10% से 12.5% तक का अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। चीन, ब्रिटेन और जापान पर 12.5% टैरिफ लागू होगा, जबकि भारत, कंबोडिया, ग्वाटेमाला, होंडुरास, श्रीलंका, त्रिनिदाद और टोबैगो तथा यूरोपीय संघ के लिए 10% की दर निर्धारित की गई है।अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, इन देशों और क्षेत्रों ने बलपूर्वक श्रम से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए कदम उठाए हैं या इस दिशा में प्रतिबद्धताएं जताई हैं।हालांकि, कुछ आयात श्रेणियां—जैसे अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा समझौते (USMCA) के तहत आने वाले उत्पाद और तेल व गैस—इन नए टैरिफ से मुक्त रहेंगी।नए टैरिफ उस समय लागू हुए हैं, जब ट्रंप प्रशासन द्वारा पहले लगाया गया अस्थायी 10% आयात शुल्क समाप्त हो गया। यह बदलाव अमेरिका की संशोधित व्यापार व्यवस्था के तहत लागू किया गया है।और पढ़ें :- महाराष्ट्र के कपास किसानों के लिए नई सब्सिडी योजना, मिलेंगे ₹75,000 तक

महाराष्ट्र के कपास किसानों के लिए नई सब्सिडी योजना, मिलेंगे ₹75,000 तक

महाराष्ट्र में कपास किसानों के लिए नई सब्सिडी योजनाजलगाँव: कपास किसानों के लिए कृषि विभाग ने 'कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन 2026-27' के तहत एक महत्वपूर्ण योजना शुरू की है। इस पहल का उद्देश्य फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना, कपास के डंठलों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना और खेती में आधुनिक तकनीक व मशीनीकरण को बढ़ावा देना है। योजना के तहत पात्र किसानों को बायोचार यूनिट और कॉटन श्रेडर खरीदने पर आकर्षक सब्सिडी दी जाएगी। जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी कुर्बान तडवी ने किसानों से MahaDBT पोर्टल के माध्यम से जल्द ऑनलाइन आवेदन करने की अपील की है।योजना के अनुसार, कपास के अवशेषों से बायोचार तैयार कर मिट्टी में कार्बन की मात्रा बढ़ाने और उसकी उर्वरता सुधारने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके लिए बायोचार यूनिट की खरीद पर किसानों को कुल लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम ₹10,000 (जो भी कम हो) की सब्सिडी मिलेगी। इससे न केवल कृषि अपशिष्ट का बेहतर प्रबंधन होगा, बल्कि उत्पादन लागत कम करने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी।इसके अलावा, कपास के डंठलों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटने के लिए कॉटन श्रेडर मशीन खरीदने पर भी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के किसानों को मशीन की लागत का 50 प्रतिशत, अधिकतम ₹75,000 तक की सब्सिडी मिलेगी। वहीं, सामान्य वर्ग के किसानों को 40 प्रतिशत, अधिकतम ₹60,000 तक की सहायता दी जाएगी। यह योजना व्यक्तिगत किसानों के साथ-साथ किसान समूहों, किसान उत्पादक कंपनियों (FPO) और कृषि सहकारी समितियों के लिए भी लागू है।कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि दोनों योजनाओं के लाभार्थियों का चयन 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर किया जाएगा। इसलिए पात्र किसानों को आवेदन में देरी नहीं करनी चाहिए। हालांकि, योजना का लाभ उठाने के लिए बैंक से ऋण लेना अनिवार्य होगा, क्योंकि सब्सिडी ऋण आधारित है। साथ ही, यदि किसी किसान ने पहले किसी अन्य सरकारी योजना के तहत इसी उपकरण पर सब्सिडी प्राप्त की है, तो वह इस योजना का लाभ नहीं ले सकेगा। आवेदन प्रक्रिया या योजना से संबंधित अधिक जानकारी के लिए किसान अपने संबंधित तालुका कृषि अधिकारी के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 6 पैसे गिरकर 96.63 पर खुला.

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