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कपास बुवाई में देरी, उत्पादन चिंता

कपास की बुवाई में देरी: MSP ₹8,600, बारिश नहीं हुई तो उत्पादन 20% तक घटने की आशंकाजलगांव: केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹8,600 प्रति क्विंटल तय किया है। हालांकि, कई क्षेत्रों में अब तक पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण वर्षा आधारित (रेनफेड) क्षेत्रों में कपास की बुवाई शुरू नहीं हो सकी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 5 जुलाई तक बुवाई पूरी हो जाती है, तो फसल अक्टूबर में कटाई के लिए तैयार हो जाएगी और किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ MSP का लाभ मिलने की संभावना रहेगी। लेकिन यदि बारिश में और देरी होती है, तो कपास उत्पादन में 10% से 20% तक गिरावट आ सकती है।सिंचित क्षेत्रों में किसानों ने मई के अंतिम सप्ताह में ही कपास की बुवाई कर दी थी और फसल का अंकुरण भी हो चुका है। इन क्षेत्रों की फसल विजयादशमी के आसपास तैयार होने की उम्मीद है। वहीं, वर्षा पर निर्भर किसान अभी भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। क्षेत्र में अब तक सामान्य से केवल करीब 12% बारिश दर्ज होने के कारण अधिकांश किसानों ने बुवाई टाल रखी है।पिछले सीजन में उत्पादन और कारोबार दोनों प्रभावितपिछले खरीफ सीजन (2025-26) में अत्यधिक बारिश के कारण कपास उत्पादन प्रभावित हुआ था। इसके साथ ही निजी व्यापारियों द्वारा कम कीमत की पेशकश के चलते बाजार में कपास की आवक भी अपेक्षा से कम रही। कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) और निजी व्यापारियों द्वारा खरीदी गई कपास से अनुमानित 20 लाख गांठों के मुकाबले केवल 8.5 लाख गांठें ही उपलब्ध हो सकीं।कपास की कमी का असर जिनिंग और प्रेसिंग उद्योग पर भी पड़ा। आमतौर पर ₹375 करोड़ का वार्षिक कारोबार करने वाला यह उद्योग पिछले सीजन में घटकर ₹200 से ₹225 करोड़ के बीच सिमट गया।सीजन के अंत में ₹9,000 के पार पहुंचे भावपिछले वर्ष केंद्र सरकार ने कपास का MSP ₹8,100 प्रति क्विंटल तय किया था। शुरुआती दौर में अधिक नमी के कारण निजी व्यापारियों ने गुणवत्ता के आधार पर ₹7,600 से ₹7,700 प्रति क्विंटल तक ही कीमत दी। लेकिन बाद में बाजार में कपास की कमी और आयात सीमित रहने से भारतीय कपास की मांग बढ़ गई, जिससे सीजन के अंत में कीमतें ₹9,000 से ₹9,500 प्रति क्विंटल तक पहुंच गईं।हालांकि, मई तक अधिकांश किसानों के पास बिक्री के लिए कपास बची ही नहीं थी। इसलिए ऊंचे बाजार भाव का लाभ किसानों को नहीं मिल सका।बारिश पर टिकी किसानों की उम्मीदेंकृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल कपास की पैदावार और किसानों की आय काफी हद तक आगामी दिनों की बारिश पर निर्भर करेगी। यदि अगले एक सप्ताह में अच्छी वर्षा होती है और समय पर बुवाई पूरी हो जाती है, तो उत्पादन और बाजार दोनों में संतुलन बना रह सकता है। वहीं, बारिश में अधिक देरी होने पर उत्पादन, गुणवत्ता और कृषि आधारित उद्योगों पर भी इसका सीधा असर पड़ने की आशंका है।और पढ़ें :- तेलंगाना खरीफ बुवाई 2026

तेलंगाना खरीफ बुवाई 2026

तेलंगाना में खरीफ बुवाई की सुस्त शुरुआत, कपास और सोयाबीन के रकबे में भारी गिरावटतेलंगाना में 2026 के खरीफ सीजन की बुवाई पिछले वर्ष के मुकाबले काफी धीमी गति से आगे बढ़ रही है। राज्य के कृषि विभाग द्वारा  जारी 24 जून 2026 तक के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल फसली रकबा (Total Cropped Area) मात्र 14.78 लाख एकड़ (1,478,120 एकड़) दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा पिछले साल इसी अवधि में बोए गए 28.38 लाख एकड़ (2,838,416 एकड़) की तुलना में लगभग आधा है। कुल मिलाकर, अब तक सामान्य सीजन के रकबे का केवल 11.16 प्रतिशत हिस्सा ही कवर हो पाया है।कपास का दबदबा कायम, लेकिन रकबे में बड़ी कमीराज्य में खरीफ बुवाई में हालांकि अभी भी कपास (Cotton) का ही दबदबा है, लेकिन इसकी रफ्तार पिछले साल से काफी पीछे है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक अब तक 12.60 लाख एकड़ (1,260,315 एकड़) में कपास की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल इसी समय तक यह आंकड़ा 22.14 लाख एकड़ था। यानी इसकी बुवाई में लगभग 9.5 लाख एकड़ की भारी गिरावट दर्ज की गई है।सोयाबीन और तिलहन की स्थिति चिंताजनकतिलहन फसलों, विशेषकर सोयाबीन की बुवाई में सबसे तेज और चिंताजनक गिरावट देखने को मिली है। इस साल अब तक सोयाबीन का रकबा सिमटकर मात्र 24,666 एकड़ रह गया है, जो पिछले साल इसी अवधि में 1.43 लाख एकड़ (143,253 एकड़) के पार था। इसके परिणामस्वरूप कुल तिलहन (Total Oilseeds) का रकबा भी पिछले साल के 1.43 लाख एकड़ के मुकाबले गिरकर महज 25,429 एकड़ पर आ गया है।आगे की बारिश से उम्मीदेंआंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि तेलंगाना में शुरुआती बुवाई बहुत धीमी रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इसका मुख्य कारण शुरुआती मॉनसून की बारिश में देरी या उसका असमान वितरण हो सकता है। हालांकि, कृषि विभाग को उम्मीद है कि आने वाले हफ्तों में मॉनसून के जोर पकड़ने के साथ ही राज्य के प्रमुख कृषि क्षेत्रों में बुवाई की गति में तेजी आएगी और स्थिति में सुधार होगा।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 9 पैसे गिरकर 94.39 पर बंद हुआ।

पहली बारिश में जल्दबाजी में न करें बुवाई

पहली बारिश के बाद बुवाई में न करें जल्दबाजी, कृषि मंत्री की किसानों को सलाहमहाराष्ट्र मानसून अपडेट: राज्य में मानसून की शुरुआत के साथ खरीफ सीजन की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बीच कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने किसानों से पहली बारिश के तुरंत बाद बुवाई न करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि खेतों में पर्याप्त नमी बनने और बारिश की निरंतरता सुनिश्चित होने के बाद ही बुवाई शुरू करनी चाहिए, ताकि फसल का बेहतर अंकुरण हो और नुकसान की आशंका कम रहे।विधानसभा में मंत्री ने बताया कि महाराष्ट्र के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय हो चुका है और अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश की संभावना है। उन्होंने कहा कि कई बार किसान शुरुआती बारिश के बाद जल्दबाजी में बुवाई कर देते हैं, लेकिन यदि बाद में बारिश रुक जाए तो बीज खराब हो सकते हैं और दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है। इसलिए किसानों को मिट्टी की नमी और मौसम की स्थिति का सही आकलन करने के बाद ही फसल बोनी चाहिए।संभावित अल नीनो प्रभाव को देखते हुए राज्य सरकार भी सतर्क है। कृषि विभाग भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों के सहयोग से किसानों को मौसम आधारित सलाह दे रहा है। साथ ही जल प्रबंधन और जलवायु-अनुकूल खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।कृषि मंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष अत्यधिक बारिश से प्रभावित किसानों के लिए लगभग 20 हजार करोड़ रुपये की राहत उपलब्ध कराई गई है। वहीं, फसल बीमा योजना के तहत 1,523 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया जा चुका है और शेष राशि की प्रक्रिया जारी है।कपास उत्पादक किसानों के लिए भी सरकार ने बड़ी घोषणा की है। वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन लागू किया जाएगा, जिसके तहत उन्नत बीज, आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देकर उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।मंत्री ने यह भी बताया कि खरीफ सीजन के लिए खाद और बीज का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है तथा नकली कृषि सामग्री के खिलाफ राज्यभर में सख्त कार्रवाई जारी है।और पढ़ें :- 9 दिन देरी से खरगोन पहुंचा मानसून

9 दिन देरी से खरगोन पहुंचा मानसून

खरगोन में 9 दिन की देरी से पहुंचा मानसून, लगातार दूसरे दिन बारिश; कपास-मिर्च की फसलों को राहतखरगोन जिले में मानसून ने आखिरकार दस्तक दे दी है। बुधवार को लगातार दूसरे दिन हल्की से तेज बारिश का दौर जारी रहा। दोपहर के समय कसरावद और झिरन्या के पहाड़ी क्षेत्रों में अच्छी वर्षा दर्ज की गई। बारिश से कपास, मिर्च और मक्का जैसी खरीफ फसलों को बड़ी राहत मिली है, जिससे किसानों के चेहरे खिल उठे हैं।मंगलवार देर शाम पीपलझोपा क्षेत्र में करीब दो घंटे तक तेज बारिश हुई। भारी वर्षा के कारण सड़कों पर लगभग दो फीट तक पानी भर गया, जिससे लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई दुकानों में भी पानी घुस जाने से नुकसान की स्थिति बनी।इस वर्ष मानसून निर्धारित समय से 9 दिन देरी से जिले में पहुंचा है। पिछले साल प्रदेश में मानसून का प्रवेश 16 जून को हुआ था, जबकि इस बार यह 25 जून के आसपास सक्रिय हुआ। जिले में अब तक केवल 11.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 70 मिलीमीटर कम है।लगातार हो रही बारिश के चलते तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट आई है। बीते दो दिनों में अधिकतम तापमान लगभग 5 डिग्री सेल्सियस घटकर 34.5 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अरब सागर से आ रही नमी के कारण मानसून सक्रिय हुआ है। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक बारिश की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी वर्षा होने के आसार हैं।और पढ़ें :- नासिक संभाग में कपास बुवाई तेज

नासिक संभाग में कपास बुवाई तेज

नासिक डिवीजन में तेज हुई कपास की बुवाई, 1.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुआ रोपणनासिक: मानसून के दोबारा सक्रिय होने के साथ ही नासिक डिवीजन में खरीफ सीजन की गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ ली है। पिछले तीन-चार दिनों में हुई अच्छी बारिश के कारण किसानों ने कपास की बुवाई तेज कर दी है। इससे उन किसानों को बड़ी राहत मिली है जो पर्याप्त वर्षा का इंतजार कर रहे थे और खरीफ फसलों की बुवाई शुरू नहीं कर पा रहे थे।कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, नासिक डिवीजन में अब तक लगभग 1.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई पूरी हो चुकी है। यह इस वर्ष कपास के लिए निर्धारित 10.9 लाख हेक्टेयर लक्ष्य का करीब 14 प्रतिशत है। अधिकारियों का कहना है कि हालिया बारिश से मिट्टी में पर्याप्त नमी बनी है, जिससे खेतों में बुवाई का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।डिवीजन के जिलों में जलगांव कपास बुवाई के मामले में सबसे आगे है। यहां अब तक 83,753 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास बोई जा चुकी है। इसके बाद धुले में 45,227 हेक्टेयर और अहिल्यानगर में 8,830 हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई दर्ज की गई है। नासिक और नंदुरबार जिलों में भी बुवाई का काम जारी है और मौसम अनुकूल रहने पर इसमें और तेजी आने की उम्मीद है।नासिक डिवीजन में कपास प्रमुख खरीफ फसल मानी जाती है। यह कुल बुवाई क्षेत्र का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा कवर करती है और करीब 20 लाख किसान प्रत्यक्ष रूप से इसकी खेती से जुड़े हुए हैं। कपास के अलावा इस क्षेत्र में मक्का, सोयाबीन, मूंग, उड़द, बाजरा, अरहर (तूर) और धान जैसी फसलों की भी खेती की जाती है।कृषि विभाग के अनुमान के मुताबिक, इस सीजन में जलगांव में 5.5 लाख हेक्टेयर, धुले में 2.2 लाख हेक्टेयर, अहिल्यानगर में 1.6 लाख हेक्टेयर, नंदुरबार में 1.3 लाख हेक्टेयर और नासिक में लगभग 39 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती की जाएगी।हालांकि बुवाई की शुरुआत सकारात्मक रही है, लेकिन कृषि अधिकारियों ने किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि बुवाई तभी करें जब खेतों में लगातार नमी बनी रहने की संभावना हो, ताकि बीजों का अंकुरण बेहतर हो सके।इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने नासिक के लिए येलो अलर्ट जारी किया है और आने वाले दिनों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान जताया है। मौसम विभाग के अनुसार, जलगांव, धुले और नंदुरबार में भी रविवार तक वर्षा की संभावना बनी रहेगी। लगातार बारिश और तापमान में आई गिरावट ने खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा की हैं। किसानों को उम्मीद है कि मानसून की यह सक्रियता खरीफ सीजन को मजबूत आधार प्रदान करेगी।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 36 पैसे मजबूत होकर 94.30 पर खुला.

महाराष्ट्र- चोपड़ा तालुका में सूखे से किसान परेशान

महाराष्ट्र (चोपड़ा तालुका) में सूखा संकट: बुवाई के बाद किसान परेशानहालांकि पिछले दो दिनों से चोपड़ा तालुका में आसमान में बादल छाए हुए हैं और बारिश की उम्मीद जगी है, लेकिन असल में बारिश न होने से किसान बहुत चिंतित हैं। जून का तीसरा हफ़्ता खत्म हो रहा है—आज 23 जून है—फिर भी बारिश का कोई नाम-ओ-निशान नहीं है।मानसून की शुरुआत में समय पर बारिश की उम्मीद में, किसानों ने महंगे खाद और बीज खरीदकर अपने खेत तैयार किए और बुवाई पूरी कर ली थी। लेकिन, लंबे समय से बारिश न होने के कारण उन्हें डर सता रहा है कि उनकी मेहनत और निवेश बेकार न चला जाए। चोपड़ा तालुका के किसान—चाहे वे बारिश पर निर्भर ज़मीन पर खेती कर रहे हों या सिंचाई वाली ज़मीन पर—अब बेचैनी से आसमान की ओर देख रहे हैं और 'चातक' पक्षी की तरह बारिश का इंतज़ार कर रहे हैं। बादल तो आते हैं, लेकिन बारिश नहीं होती, जिससे किसान हर दिन निराश हो रहे हैं। अगर आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो किसानों को लगभग निश्चित रूप से दोबारा फसल की बुवाई करने के संकट का सामना करना पड़ेगा। ऐसी स्थिति उन पर भारी आर्थिक बोझ डालेगी।सिर्फ़ बारिश पर निर्भर खेतों वाले किसान ही परेशान नहीं हैं; जिनके पास सिंचाई की सुविधा है, वे भी भारी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। पूरे तालुका में भीषण गर्मी के कारण कुओं, बोरवेल और पानी के अन्य स्रोतों का जलस्तर तेज़ी से गिर गया है। खेतों में पानी की कमी से बागवानी की खड़ी फ़सलों को भारी नुकसान होने का खतरा है। मौसम की इस अनिश्चितता ने किसानों की खेती की योजनाओं को बिगाड़ दिया है।और पढ़ें :- रुपया डॉलर के मुकाबले 23 पैसे मजबूत होकर 94.66 पर बंद हुआ।

कमजोर मानसून से खरीफ फसलों पर खतरा

कमज़ोर मॉनसून से खरीफ फसलों पर संकट, 315 जिलों के लिए केंद्र ने बनाई आपात योजनाइस साल कमजोर मॉनसून की आशंका ने खरीफ फसलों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को बताया कि कम बारिश से प्रभावित होने वाले जिलों के लिए कृषि मंत्रालय ने आपातकालीन योजनाएं तैयार कर ली हैं। सरकार ने ऐसे करीब 315 जिलों की पहचान की है, जहां सामान्य से कम बारिश होने पर खेती पर असर पड़ सकता है।राज्यों के कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और जिला कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई समीक्षा बैठक में चौहान ने कहा कि इन जिलों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। इनमें से 111 जिलों को उच्च प्राथमिकता श्रेणी में रखा गया है, क्योंकि यहां सिंचाई सुविधा 25 प्रतिशत या उससे कम है। इन क्षेत्रों में कम बारिश का सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ने की संभावना है।इसके अलावा 76 जिलों को मध्यम प्राथमिकता श्रेणी में रखा गया है, जहां 25 से 50 प्रतिशत तक सिंचाई सुविधा उपलब्ध है। वहीं 128 जिले कम प्राथमिकता वाले हैं, जहां बांधों और अन्य जल स्रोतों के कारण सिंचाई की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। प्रभावित जिलों में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु जैसे राज्यों के कई क्षेत्र शामिल हैं।कृषि मंत्री ने बताया कि कमजोर मॉनसून की स्थिति के पीछे अल नीनो प्रभाव को एक कारण माना जा रहा है। देश में अब तक सामान्य से करीब 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस मॉनसून सीजन में दीर्घकालिक औसत बारिश का लगभग 90 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। अगर यह अनुमान सही साबित होता है तो यह लंबे समय में कमजोर मॉनसून वर्षों में शामिल हो सकता है।मॉनसून की धीमी रफ्तार का असर खरीफ फसलों की बुआई पर भी पड़ सकता है। इसे देखते हुए दिल्ली में “अल नीनो मॉनिटरिंग सेल” और “क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप” बनाया गया है, जो बारिश, बुआई, फसल की स्थिति, बाजार संकेतों और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता की समीक्षा करेगा।सरकार ने राज्यों को कंट्रोल रूम स्थापित करने और केंद्र के साथ बेहतर तालमेल के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं। वहीं ICAR और ICAR-CRIDA ने जिलों के लिए कृषि आकस्मिक योजनाएं तैयार की हैं, जिनमें वैकल्पिक फसलें, फसल विविधीकरण, जल संरक्षण और किसानों के जोखिम को कम करने जैसे उपाय शामिल हैं।और पढ़ें :- खरीफ बुआई में तेजी, कपास का रकबा घटा

खरीफ बुआई में तेजी, कपास का रकबा घटा

अल नीनो की चिंता के बीच खरीफ बुवाई में तेजी, धान और ‘श्री अन्न’ ने दिखाई मजबूत बढ़तअल नीनो जैसी मौसम संबंधी चुनौतियों और मॉनसून को लेकर अनिश्चितताओं के बावजूद देश में खरीफ फसलों की बुवाई उत्साहजनक रफ्तार से आगे बढ़ रही है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 19 जून तक खरीफ फसलों का कुल रकबा 119.90 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि के 117.95 लाख हेक्टेयर की तुलना में 1.7 प्रतिशत अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि किसानों ने मौसम संबंधी आशंकाओं के बावजूद बुवाई गतिविधियों को जारी रखा है।कपास की बुवाई में बड़ी गिरावटदूसरी ओर, कपास की खेती इस बार कमजोर नजर आ रही है। 19 जून तक कपास का रकबा 17.13 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 22.82 लाख हेक्टेयर था। यानी करीब 5.69 लाख हेक्टेयर की गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी प्रमुख वजह मौसम नहीं बल्कि बाजार और नीति संबंधी कारक हैं। कॉटन पर आयात शुल्क शून्य किए जाने से किसानों को बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद कम हुई है, जिसका असर बुवाई पर पड़ा है।तिलहन फसलों में भी नरमीतिलहन फसलों का कुल रकबा घटकर 7.24 लाख हेक्टेयर रह गया है, जो पिछले साल 8.11 लाख हेक्टेयर था। सोयाबीन की खेती में 1.20 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है, जबकि तिल के रकबे में भी हल्की गिरावट देखी गई है।आगे की बारिश तय करेगी तस्वीरकुल मिलाकर खरीफ 2026 सीजन की शुरुआत सकारात्मक संकेत दे रही है। अल नीनो और कमजोर मॉनसून की आशंकाओं के बावजूद किसानों ने बुवाई की गति बनाए रखी है। हालांकि आने वाले हफ्तों में होने वाली बारिश ही यह तय करेगी कि यह शुरुआती बढ़त पूरे सीजन में कितनी टिकाऊ साबित होती है।और पढ़ें :- बीकेएस ने Bt कपास हटाने की मांग की, HT Bt पर आंदोलन की चेतावनी

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