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अहमदपुर में कपास बुवाई तेज

दो दिन की बारिश से अहमदपुर में कपास की बुवाई ने पकड़ी रफ्तार, 10 हजार हेक्टेयर में होगी खेतीअहमदपुर: लंबे इंतजार के बाद पिछले दो दिनों में हुई अच्छी बारिश ने अहमदपुर तालुका के किसानों को राहत दी है। मानसून के मृग नक्षत्र का आधा समय बीत जाने के बावजूद बारिश नहीं होने से किसान चिंतित थे, लेकिन अब पर्याप्त नमी मिलने के बाद कपास की बुवाई का काम तेजी से शुरू हो गया है। सोयाबीन के बाद कपास तालुका की दूसरी सबसे प्रमुख खरीफ फसल है और इस वर्ष लगभग 10,000 हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती किए जाने का लक्ष्य है।मौसम विभाग की ओर से आगे भी बारिश की संभावना जताई गई है, जिससे किसानों ने बुवाई की गति बढ़ा दी है। शनिवार को तालुका के कई हिस्सों में मध्यम बारिश दर्ज की गई। इसके बाद शिरूर ताजबंद, अहमदपुर, नंदुरा, ढलेगांव, हाडोलती और थोडगा समेत कई गांवों में किसान खेतों में उतर गए हैं।इस खरीफ सीजन में अहमदपुर तालुका का कुल बोया जाने वाला क्षेत्र 66,587 हेक्टेयर है, जबकि कुल कृषि योग्य भूमि 71,482 हेक्टेयर है। इसमें सबसे अधिक 44,622 हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की खेती होगी। इसके बाद 10,000 हेक्टेयर में कपास और 9,797 हेक्टेयर में अरहर (तूर) की बुवाई प्रस्तावित है।बारिश के आंकड़ों के अनुसार, 27 जून 2026 तक अहमदपुर सर्कल में 23 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जिससे कुल बारिश 112 मिमी पहुंच गई। शिरूर ताजबंद सर्कल में भी 23 मिमी बारिश हुई और कुल वर्षा 94 मिमी रही। वहीं खंडली क्षेत्र में केवल 9 मिमी (कुल 49 मिमी) और अंधोरी क्षेत्र में 7 मिमी (कुल 23 मिमी) बारिश दर्ज की गई। किंगगांव और हाडोलती सर्कल में उस दिन बारिश नहीं हुई। किंगगांव में अब तक केवल 28 मिमी वर्षा हुई है, इसलिए वहां के किसान अभी भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।जिन क्षेत्रों में मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं है, वहां बुवाई अभी भी रुकी हुई है। हालांकि हाडोलती क्षेत्र में लगातार दो दिन हुई बारिश के बाद किसानों ने कपास के साथ-साथ सोयाबीन की बुवाई भी शुरू कर दी है। किसानों को उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में और अच्छी बारिश होगी, जिससे बुवाई का कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो सकेगा।हाडोलती के किसान विश्वनाथ हेंगने ने बताया, "पिछले साल जून में अच्छी बारिश हुई थी। इस बार भी अब बारिश का सिलसिला शुरू हुआ है। यदि अगले एक-दो दिनों में अच्छी वर्षा होती है तो कपास की बुवाई पूरी तरह सफल रहेगी।"तालुका कृषि अधिकारी सचिन बावगे ने किसानों को सलाह दी है कि जल्दबाजी में बुवाई न करें। उनके अनुसार, कम से कम 100 मिमी बारिश होने और मिट्टी में पर्याप्त नमी बनने के बाद ही बुवाई करना उचित है। उन्होंने कहा कि बुवाई से पहले बीजों की अंकुरण क्षमता की जांच अवश्य करें तथा बीजोपचार (सीड ट्रीटमेंट) करें। साथ ही ब्रॉड बेड फरो (BBF) या डिबलिंग पद्धति अपनाने से बीज और उर्वरक की बचत होती है तथा फसल अनियमित बारिश का बेहतर सामना कर सकती है। उन्होंने किसानों से मौसम पूर्वानुमान, कीट प्रबंधन और आधुनिक कृषि सलाह के लिए महाविस्तार AI ऐप का उपयोग करने की भी अपील की।और पढ़ें :-  चोटिला में कपास बुवाई पर संकट

चोटिला में कपास बुवाई पर संकट

बारिश की कमी से गुजरात के चोटिला में कपास की बुआई पर संकट, दोबारा बुवाई की नौबतसुरेंद्रनगर (गुजरात): गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले के चोटिला पंथक में बारिश की लंबी कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मॉनसून की शुरुआती बारिश के बाद किसानों ने उम्मीद के साथ कपास समेत खरीफ फसलों की बुआई की थी, लेकिन इसके बाद पर्याप्त वर्षा नहीं होने से कई क्षेत्रों में कपास की फसल प्रभावित होने लगी है। किसानों को आशंका है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो उन्हें दोबारा बुआई करनी पड़ सकती है।किसानों का कहना है कि शुरुआती बारिश के कारण खेतों में पर्याप्त नमी बनने से उन्होंने महंगे बीज, खाद और मजदूरी पर हजारों रुपये खर्च कर कपास की बुआई की थी। लेकिन लंबे शुष्क दौर के कारण मिट्टी की नमी तेजी से खत्म हो गई। नतीजतन, कई खेतों में कपास के बीज अंकुरित होने से पहले ही खराब हो गए या सूख गए हैं।फसल खराब होने से किसानों की लागत बढ़ गई है। कई किसान पहले ही कर्ज लेकर खेती कर रहे हैं और अब उन्हें दोबारा बीज खरीदने तथा बुआई कराने की चिंता सता रही है। इससे उनकी आर्थिक मुश्किलें और बढ़ने लगी हैं।चोटिला तालुका के पूर्व तालुका पंचायत अध्यक्ष एवं किसान नेता अंबाभाई ओलकिया ने कहा कि क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बारिश का पानी लंबे समय तक मिट्टी में नहीं टिक पाता। जल संग्रहण के सीमित साधनों की वजह से बारिश में देरी होने पर सिंचाई की गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है।उन्होंने बताया कि जिन किसानों के पास बोरवेल या कुएं हैं, उन्हें भी भूजल स्तर में गिरावट और कृषि के लिए पर्याप्त बिजली आपूर्ति नहीं मिलने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यदि आने वाले दिनों में भी बारिश नहीं हुई तो इसका असर केवल फसलों पर ही नहीं, बल्कि पशुओं के चारे और पेयजल उपलब्धता पर भी पड़ सकता है।अंबाभाई ओलकिया ने सरकार से प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल फसल नुकसान का सर्वे कराने, किसानों को मुआवजा अथवा मुफ्त बीज और खाद उपलब्ध कराने, चेक डैम एवं जल संरक्षण परियोजनाओं में तेजी लाने और खेती के लिए नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।फिलहाल चोटिला पंथक के किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि समय पर पर्याप्त वर्षा होने पर ही सूखती फसलों को बचाया जा सकेगा और किसानों को संभावित भारी आर्थिक नुकसान से राहत मिलेगी।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 19 पैसे गिरकर 94.54 पर बंद हुआ।

PLI में निवेश बढ़ाए तमिलनाडु उद्योग

तमिलनाडु के टेक्सटाइल उद्योग से PLI योजना में निवेश की अपील, निर्यात तीन गुना बढ़ाने का लक्ष्यतिरुपुर: केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने तमिलनाडु के टेक्सटाइल और परिधान उद्योग से टेक्निकल टेक्सटाइल तथा मैन-मेड फाइबर (MMF) क्षेत्र के लिए केंद्र सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना का लाभ उठाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत ₹11,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है और उद्योग को इसका उपयोग कर निवेश बढ़ाना चाहिए।तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (TEA) के एक कार्यक्रम में मंत्री ने कहा कि सरकार ने टेक्निकल टेक्सटाइल और MMF क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए PLI योजना के नियमों में ढील दी है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय की नई योजनाओं को उद्योग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इनमें मशीनरी, रोजगार सृजन और उत्पादन क्षमता बढ़ाने जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य और केंद्र सरकार मिलकर इस क्षेत्र के विकास को गति देंगी।गिरिराज सिंह ने उद्योग जगत से उन राज्यों में भी निवेश करने का आग्रह किया, जहां पर्याप्त श्रमबल उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में देश का वार्षिक रेशम उत्पादन 26,000 टन था, जो अब बढ़कर 43,000 टन हो गया है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक इसे 60,000 टन तक पहुंचाना है। उन्होंने रेशम और अन्य फाइबर के मिश्रण से बने वस्त्रों के निर्यात को बढ़ाने पर भी जोर दिया।कार्यक्रम में अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC) के चेयरमैन ए. शक्तिवेल ने कहा कि वस्त्र मंत्रालय लगातार नई योजनाएं लागू कर रहा है और सभी सात PM MITRA पार्क अब संचालित हो चुके हैं। वहीं, TEA के अध्यक्ष के.एम. सुब्रमण्यन ने टेक्सटाइल एक्सपेंशन एंड एम्प्लॉयमेंट मिशन (TEEM) को जल्द लागू करने तथा कर और लेवी से जुड़ी राहत को तीन वर्ष और बढ़ाने की मांग की।बाद में केंद्रीय मंत्री ने कोयंबटूर स्थित साउथ इंडिया टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशन (SITRA) में कपास और कपास आधारित उत्पादों के लिए स्थापित GM टेस्टिंग लैब का उद्घाटन किया। हाल ही में NABL से मान्यता प्राप्त इस लैब से वैश्विक कपास व्यापार में गुणवत्ता जांच, ट्रेसेबिलिटी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुपालन को मजबूती मिलेगी। उन्होंने तमिलनाडु के टेक्सटाइल उद्योग से राज्य के वस्त्र निर्यात को तीन गुना बढ़ाने और निटिंग, वीविंग तथा प्रोसेसिंग क्षेत्रों के लिए स्वदेशी मशीनरी निर्माण में निवेश बढ़ाने का भी आह्वान किया।और पढ़ें :- अहिल्यानगर में कपास बुवाई शुरू

अहिल्यानगर में कपास बुवाई शुरू

महाराष्ट्र: कम बारिश के बीच शुरू हुई कपास की बुवाई, अहिल्यानगर में रकबा घटने की आशंकामहाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले में मॉनसून की शुरुआत हुए लगभग एक महीना बीत चुका है, लेकिन अब तक सामान्य और व्यापक बारिश नहीं होने से खरीफ सीजन की बुवाई प्रभावित हो रही है। हालांकि पिछले दो दिनों में हुई हल्की बारिश के बाद कुछ किसानों ने सिंचाई सुविधाओं के भरोसे कपास की बुवाई शुरू कर दी है। कृषि विभाग का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो इस वर्ष जिले में कपास का कुल रकबा घट सकता है।जिले के शेवगांव, पाथर्डी, राहुरी और नेवासा जैसे तालुकों में सीमित स्तर पर कपास की बुवाई शुरू हो चुकी है। लेकिन अधिकांश किसान अभी भी पर्याप्त वर्षा का इंतजार कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि कम नमी वाली जमीन में बुवाई करने पर बीज खराब होने और दोबारा बुवाई की नौबत आने का खतरा रहता है। चूंकि कपास के बीज महंगे हैं, इसलिए दोबारा बुवाई किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल सकती है।पिछले कुछ वर्षों में अहिल्यानगर जिले में कपास की खेती का रकबा लगातार बढ़ा है। पहले जहां जिले में कपास सीमित क्षेत्र में बोई जाती थी, वहीं अब गन्ना उत्पादक क्षेत्रों के किसान भी कपास की खेती की ओर आकर्षित हुए हैं। वर्तमान में अहिल्यानगर, शेवगांव, पाथर्डी, नेवासा, जामखेड़, कर्जत और कोपरगांव सहित कई क्षेत्रों में कपास की खेती की जा रही है। पिछले तीन वर्षों में जिले में कपास का औसत रकबा 1,22,086 हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जबकि पिछले वर्ष लगभग 1.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती हुई थी।अब तक राहुरी तालुका में सबसे अधिक 5,045 हेक्टेयर में कपास की बुवाई दर्ज की गई है। इसके बाद नेवासा में 1,551 हेक्टेयर, श्रीगोंडा में 571 हेक्टेयर, कर्जत में 318 हेक्टेयर, शेवगांव में 300 हेक्टेयर तथा श्रीरामपुर में 238 हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई की गई है।कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्यतः मृग नक्षत्र के दौरान अच्छी बारिश होने पर कपास की बुवाई रफ्तार पकड़ती है, लेकिन इस वर्ष मानसून की धीमी प्रगति ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले दो वर्षों में अत्यधिक बारिश से फसल को नुकसान और बाजार में उचित दाम नहीं मिलने के कारण किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। ऐसे में इस वर्ष किसानों को समय पर अच्छी बारिश और कपास के बेहतर बाजार भाव, दोनों का इंतजार है। यदि जल्द पर्याप्त वर्षा नहीं होती, तो जिले में कपास की खेती का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में कम रह सकता है।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 5 पैसे मजबूत होकर 94.35 पर खुला

आदिलाबाद में कपास बुवाई तेज

आदिलाबाद में झमाझम बारिश से कपास और सोयाबीन की बुआई ने पकड़ी रफ्तारआदिलाबाद: पिछले दो दिनों में हुई अच्छी बारिश ने पुराने आदिलाबाद जिले के किसानों के चेहरों पर राहत लौटा दी है। लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों ने अब कपास और सोयाबीन की बुआई में तेजी ला दी है। किसानों का मानना है कि पर्याप्त नमी मिलने से बीजों का अंकुरण बेहतर होगा और फसलों की शुरुआती बढ़वार को भी फायदा मिलेगा।बारिश की कमी के कारण कई किसानों ने अब तक बुआई टाल रखी थी। लेकिन हाल की वर्षा से खेतों में पर्याप्त नमी आने के बाद कपास और सोयाबीन की बुआई तेज़ी से शुरू हो गई है। जून के पहले सप्ताह में बुआई करने वाले कई किसानों को कमजोर अंकुरण के कारण नुकसान उठाना पड़ा था। ऐसे किसान अब कपास की दोबारा बुआई कर रहे हैं, जबकि कुछ किसानों ने जोखिम कम करने के लिए लाल चना और सोयाबीन जैसी वैकल्पिक फसलों का रुख किया है।सथनाला मंडल के रमाई गांव के किसान चौधरी विनोद ने बताया कि अच्छी फसल के लिए अगले कुछ दिनों तक नियमित बारिश होना बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि यदि बारिश फिर से रुक गई, तो मिट्टी की नमी तेजी से कम हो जाएगी और नए अंकुर मुरझाने का खतरा बढ़ सकता है।कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि जिन खेतों में पहले कपास की बुआई की गई थी, वहां सूखी मिट्टी के कारण अंकुरण में देरी हुई है। पर्याप्त नमी मिलने पर ऐसे बीज भी अंकुरित हो सकते हैं, इसलिए किसान जल्दबाजी में खेतों को दोबारा न जोतें और फसल की स्थिति का आकलन करने के बाद ही निर्णय लें।हाल की बारिश से तालाबों, नालों और छोटी नदियों में भी पानी का प्रवाह शुरू हो गया है। इससे भूजल स्तर में सुधार की उम्मीद बढ़ी है, जिससे किसानों को आगे चलकर स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई प्रणाली के माध्यम से कपास और सोयाबीन की फसलों को जरूरत के अनुसार पानी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।हालांकि किसान अभी भी मानसून की आगे की प्रगति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन ताजा बारिश ने मौसम की देरी से पैदा हुई चिंताओं को काफी हद तक कम कर दिया है। किसानों को उम्मीद है कि यदि आने वाले दिनों में भी अच्छी बारिश जारी रही, तो इस खरीफ सीजन में फसल उत्पादन बेहतर रहने की संभावना है।और पढ़ें :- कॉटन ड्यूटी राहत, चुनौतियां बरकरार

कॉटन ड्यूटी राहत, चुनौतियां बरकरार

कॉटन ड्यूटी में राहत से मिलेगी राहत, लेकिन टेक्सटाइल इंडस्ट्री की असली चुनौती अभी बाकीभारत सरकार ने 1 जून से 31 अक्टूबर 2026 तक कपास (कॉटन) के आयात पर 11% कस्टम ड्यूटी में अस्थायी छूट देने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि इस कदम से टेक्सटाइल उद्योग को पर्याप्त कच्चा माल मिलेगा, इनपुट लागत घटेगी, MSME इकाइयों को राहत मिलेगी और भारतीय टेक्सटाइल उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह के अनुसार, यह निर्णय ऑफ-सीजन के दौरान कपास की उपलब्धता सुनिश्चित करने और निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है। उद्योग संगठनों का मानना है कि इस छूट से कपास की कीमतों में लगभग 6% तक कमी आ सकती है, जिससे यार्न, गारमेंट, टॉवल, बेडशीट और होम टेक्सटाइल बनाने वाली कंपनियों को राहत मिलेगी।हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक अस्थायी समाधान है। भारतीय टेक्सटाइल उद्योग की वास्तविक चुनौती कपास की कम उत्पादकता, गुणवत्ता संबंधी समस्याएं और वैश्विक प्रतिस्पर्धा है। कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (CITI) के अनुसार, भारत हर वर्ष औसतन करीब 20 लाख गांठ कपास आयात करता है, जो कुल घरेलू उत्पादन का लगभग 7% है। यह आयात मुख्य रूप से बेहतर गुणवत्ता वाले धागे और निर्यात ऑर्डर पूरे करने के लिए किया जाता है।उद्योग का कहना है कि बांग्लादेश, वियतनाम, इंडोनेशिया और पाकिस्तान जैसे देशों में कपास के आयात पर कोई शुल्क नहीं है। इसके मुकाबले भारतीय मिलों पर 11% आयात शुल्क उनकी लागत बढ़ाता है और निर्यात प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करता है। पिछले वर्षों में भारत की वैश्विक कॉटन यार्न निर्यात हिस्सेदारी में भी गिरावट दर्ज की गई है।विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की औसत कपास उत्पादकता 450–500 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है, जबकि वैश्विक औसत लगभग 800 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। साथ ही, फाइबर की गुणवत्ता और कंटैमिनेशन भी बड़ी समस्या बनी हुई है। उनका कहना है कि केवल ड्यूटी में राहत देने से दीर्घकालिक समाधान नहीं निकलेगा। भारतीय टेक्सटाइल उद्योग को मजबूत बनाने के लिए बेहतर बीज, आधुनिक खेती, उच्च गुणवत्ता वाली कपास, सप्लाई चेन सुधार और उत्पादकता बढ़ाने पर समान रूप से ध्यान देना होगा। तभी भारत वैश्विक टेक्सटाइल बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनाए रख सकेगा।और पढ़ें :- बारिश से अमरावती में खरीफ बुवाई तेज

बारिश से अमरावती में खरीफ बुवाई तेज

बारिश से खरीफ की बुवाई में तेज़ी; कपास की खेती ने पकड़ी रफ़्तारअमरावती: दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के लगभग 15 दिन की देरी से आने के बावजूद, अमरावती ज़िले में खरीफ की बुवाई के काम में नई तेज़ी आई है। पिछले दो दिनों में हुई अच्छी बारिश के बाद किसानों ने बड़े पैमाने पर बुवाई शुरू कर दी है। कृषि विभाग के अनुसार, सिर्फ़ दो दिनों में लगभग 25,000 हेक्टेयर ज़मीन पर बुवाई पूरी हो गई, जिससे ज़िले में अब तक कुल बुवाई का रकबा 28,000 हेक्टेयर तक पहुँच गया है।बुधवार को ज़िले के ज़्यादातर तालुका में 50 मिमी से ज़्यादा बारिश दर्ज की गई। इसके बाद, गुरुवार और शुक्रवार को खेतों में ट्रैक्टर और कृषि मशीनों की गतिविधियाँ बढ़ गईं। जिन किसानों ने मॉनसून से पहले कुछ सीमित इलाकों में फसल बोई थी, उन्होंने भी बारिश के बाद अपने बाकी खेतों में काम शुरू कर दिया। इस साल मॉनसून में देरी के कारण, ज़्यादातर किसान कपास की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं।हालाँकि, अच्छी बारिश के बावजूद, खेती की बढ़ती लागत किसानों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। बीज, ट्रैक्टर का किराया, रासायनिक खाद और खरपतवार नाशक दवाओं की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। डीज़ल की ज़्यादा कीमत के कारण, ट्रैक्टर का किराया पिछले साल के ₹800–900 प्रति एकड़ से बढ़कर इस साल ₹1,100–1,200 प्रति एकड़ हो गया है।खाद की कीमतें भी किसानों पर अतिरिक्त बोझ डाल रही हैं। 20:20:0:13 ग्रेड की खाद की कीमत पिछले साल ₹1,250 प्रति बोरी थी, जो इस साल बढ़कर ₹2,150 हो गई है। वहीं, 12:32:16 ग्रेड की खाद की कीमत ₹1,450 से बढ़कर ₹1,800 प्रति बोरी हो गई है।दुर्गापुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख प्रो. डॉ. के.पी. सिंह ने कहा कि दो दिनों में हुई रिकॉर्ड बुवाई एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन खेती की बढ़ती लागत किसानों की आय पर असर डालेगी। इस बीच, ज़िला कृषि इनपुट डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष मिलिंद इंगोले ने बताया कि खाद और कुछ कीटनाशकों की कीमतों में 15–20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। अच्छी बारिश से किसान उत्साहित तो हैं, लेकिन बढ़ती लागत इस खरीफ सीज़न की सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।और पढ़ें :- CCI ने कपास भाव ₹300 बढ़ाए

CCI ने कपास भाव ₹300 बढ़ाए

CCI ने कपास की कीमतें ₹300 प्रति कैंडी बढ़ाईं; साप्ताहिक नीलामी में बिक्री 93,700 गांठों के पारकॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (CCI) ने 26 जून, 2026 को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान कपास की बिक्री कीमतों में ₹300 प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की। नीलामी में टेक्सटाइल मिलों और कपास व्यापारियों की ज़बरदस्त भागीदारी देखी गई, जिसके परिणामस्वरूप 2025–26 फसल सीज़न के लिए कुल साप्ताहिक बिक्री लगभग 93,700 गांठें रही।साप्ताहिक बिक्री रिपोर्ट 22 जून, 2026 (सोमवार):सप्ताह की शुरुआत ज़बरदस्त रही, जिसमें नीलामी में सबसे ज़्यादा 71,400 गांठों की बिक्री हुई। मिलों ने 37,000 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 34,400 गांठें खरीदीं।23 जून, 2026 (मंगलवार):नीलामी की गतिविधि थोड़ी धीमी रही और कुल बिक्री 13,800 गांठें हुई। मिलों ने 7,200 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 6,600 गांठें खरीदीं।24 जून, 2026 (बुधवार):बिक्री और घटकर 3,900 गांठें रह गई। मिलों ने 1,700 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 2,200 गांठें खरीदीं।25 जून, 2026 (गुरुवार):CCI की नीलामी बिक्री 3,500 गांठें रही। मिलों ने 1,700 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 1,800 गांठें खरीदीं।26 जून, 2026 (शुक्रवार):सप्ताह का समापन सबसे कम नीलामी वॉल्यूम यानी 1,100 गांठों के साथ हुआ। मिलों ने 500 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 600 गांठें खरीदीं।कुल बिक्री का अपडेटताज़ा नीलामी के साथ, 2025–26 सीज़न के लिए CCI की कुल कपास बिक्री 79,57,500 गांठों तक पहुँच गई है।

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