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मार्च में कपास बाजार सुस्त, भाव में सिर्फ हल्की हलचल की उम्मीद

2025-03-05 18:28:01
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मार्च में कपास बाजार में हलचल: कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव की संभावना


कपास समाचार: मार्च की शुरुआत के साथ ही कपास बाजार में अस्थिरता देखने को मिल रही है। फिलहाल बाजार में कपास की आवक धीमी बनी हुई है, जबकि भारतीय कपास निगम (CCI) अब तक करीब 94 लाख गांठ कपास की खरीद कर चुका है। इसके बावजूद कीमतों पर इसका खास सकारात्मक असर नहीं दिखा है और भाव अभी भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे बने हुए हैं।


अंतर्राष्ट्रीय बाजार में जारी कमजोरी और घरेलू मांग में ठहराव के चलते कपास की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च के दौरान भी बाजार में किसी बड़ी तेजी की उम्मीद कम है। हालांकि देश में उत्पादन में गिरावट आई है, लेकिन वैश्विक स्तर पर सस्ते कपास और धागे के कारण भारतीय बाजार को समर्थन नहीं मिल पा रहा है।


वैश्विक बाजार में कपास की कीमतों में गिरावट जारी है, जो लगभग 3% टूटकर 63 सेंट प्रति पाउंड तक पहुंच गई है। इससे अमेरिकी किसानों पर भी आर्थिक दबाव बढ़ा है, जिसका असर अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय किसानों पर पड़ रहा है।

कम कीमतों के चलते कपास आयात को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे घरेलू बाजार में तेजी की संभावना और कमजोर हो गई है। अनुमान है कि मार्च में कपास के भाव 100 से 200 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में ही उतार-चढ़ाव कर सकते हैं, लेकिन बड़ी और स्थिर तेजी की संभावना नहीं है।

सीजन के पांच महीने पूरे हो चुके हैं और अब तक देश में करीब 21.6 मिलियन गांठ कपास की आवक हो चुकी है। कुल उत्पादन का अनुमान 30.1 मिलियन गांठ है, जिसमें से लगभग 72% कपास किसान बेच चुके हैं। अब केवल 28% आवक बाकी है।

हालांकि उत्पादन में कमी के बावजूद किसानों को अपेक्षित भाव नहीं मिल पा रहा है। बाजार में आवक धीरे-धीरे घट रही है, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय दबाव के चलते कीमतों में सुधार सीमित है।


मार्च में बाजार की स्थिति:
आमतौर पर मार्च में आवक घटने से कीमतों में सुधार होता है, लेकिन इस बार तस्वीर अलग है। वर्तमान में देशभर में कपास के भाव 7,000 से 7,300 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बने हुए हैं। रोजाना लगभग 90,000 से 1 लाख गांठ की आवक हो रही है। आगे आवक में गिरावट की संभावना है, लेकिन इसका कीमतों पर कितना असर पड़ेगा, यह स्पष्ट नहीं है।


CCI की खरीद का असर:
CCI अब तक 94 लाख गांठ कपास खरीद चुका है, जिसमें से 28 लाख गांठ महाराष्ट्र से खरीदी गई है। उद्योग से कमजोर मांग के कारण CCI को कुल बाजार हिस्सेदारी का बड़ा हिस्सा खरीदना पड़ा है। हालांकि हाल के हफ्तों में खरीद की रफ्तार कुछ धीमी हुई है, जिससे खुले बाजार को थोड़ी मजबूती मिली है।


इसी वजह से किसान अब खुले बाजार में बिक्री को प्राथमिकता दे रहे हैं। बावजूद इसके, कीमतों में बड़ी तेजी के संकेत फिलहाल नहीं हैं। ऐसे में किसानों को अपनी बिक्री रणनीति सोच-समझकर तय करने की सलाह दी जा रही है।


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