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भारत टेक्स 2026 में तमिलनाडु का दमदार प्रदर्शन, टेक्सटाइल निवेश और निर्यात पर जोर

भारत टेक्स 2026 में तमिलनाडु की दमदार उपस्थिति, टेक्सटाइल निवेश और नवाचार पर जोरनई दिल्ली में आयोजित भारत टेक्स 2026 में तमिलनाडु ने देश के प्रमुख कपड़ा केंद्र के रूप में अपनी मजबूत स्थिति को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। राज्य ने इस वैश्विक मंच पर अपने विशाल टेक्सटाइल उद्योग, निर्यात क्षमता, निवेश अवसरों और तकनीकी वस्त्रों (टेक्निकल टेक्सटाइल्स) के क्षेत्र में भविष्य की संभावनाओं को प्रमुखता से सामने रखा।इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में तमिलनाडु के 30 से अधिक टेक्सटाइल और परिधान निर्माताओं ने भाग लिया। मेले के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों, निवेशकों और विदेशी खरीदारों के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें हुईं। भारत टेक्स 2026 में लगभग 6,000 विदेशी खरीदारों सहित बड़ी संख्या में घरेलू आगंतुकों ने हिस्सा लिया, जिससे भारतीय कपड़ा उद्योग को वैश्विक बाजार में नए व्यापारिक अवसर मिले।तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के.एम. सुब्रमण्यन ने कहा कि भारत टेक्स आने वाले समय में एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंच के रूप में विकसित होगा। उन्होंने बताया कि तिरुपुर के कपड़ा निर्माताओं को विदेशी खरीदारों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है और इससे भविष्य में नए निर्यात ऑर्डर मिलने की उम्मीद बढ़ी है।आयोजन के दौरान सदर्न इंडिया टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशन (SITRA) और वूलमार्क कंपनी के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इसका उद्देश्य ऊन और कपास के मिश्रण से नए प्रकार के कपड़ों के विकास तथा अनुसंधान को बढ़ावा देना है। यह पहल तमिलनाडु के कपड़ा उद्योग को नए रेशों और आधुनिक उत्पाद क्षेत्रों में विस्तार करने में मदद करेगी।राज्य के उद्योग मंत्री पी. कीर्तना और कपड़ा एवं हथकरघा मंत्री एम. विजय बालाजी ने मेले में भाग लेकर निवेशकों से चर्चा की। सरकार के अनुसार, विरुधुनगर स्थित पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क में लगभग 300 एकड़ भूमि के लिए निवेशकों की पहचान हो चुकी है और कई बड़े प्रस्ताव जल्द अंतिम रूप ले सकते हैं।तमिलनाडु सरकार तकनीकी वस्त्र क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं चला रही है। इस क्षेत्र में निवेश करने वाले उद्योगों को लगभग 50 प्रतिशत तक पूंजी सब्सिडी देने की योजना है। वर्तमान में तकनीकी वस्त्रों में राज्य की हिस्सेदारी करीब 8 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।तमिलनाडु पवेलियन में 400 से अधिक आगंतुक पहुंचे। विभागीय अधिकारियों ने राज्य की टेक्सटाइल वैल्यू चेन और निवेश संभावनाओं पर प्रस्तुति दी। भारत टेक्स 2026 में तमिलनाडु की भागीदारी ने राज्य की वैश्विक पहचान को और मजबूत किया तथा कपड़ा, हथकरघा और तकनीकी वस्त्र क्षेत्रों में नई साझेदारियों के लिए रास्ते खोले। और पढ़ें :- महाराष्ट्र के खानदेश में अगेती कपास की फसल अच्छी, बारिश की कमी से किसान चिंतित

महाराष्ट्र के खानदेश में अगेती कपास की फसल अच्छी, बारिश की कमी से किसान चिंतित

खानदेश में प्री-सीजन कपास की फसल में तेजी, बारिश की कमी बनी चिंतामहाराष्ट्र के खानदेश क्षेत्र में मई के अंतिम सप्ताह और जून की शुरुआत में बोई गई प्री-सीजन (बागवानी) कपास की फसल तेजी से बढ़ रही है। किसानों ने खरपतवार नियंत्रण, इंटरक्रॉपिंग और खाद प्रबंधन जैसे शुरुआती कृषि कार्य समय पर पूरे कर लिए हैं। हालांकि, बारिश की कमी के कारण सूखी जमीन वाले क्षेत्रों में कपास की फसल प्रभावित हो रही है।इस साल खानदेश में कपास का रकबा पिछले वर्षों की तुलना में कम हुआ है, लेकिन कई किसानों ने परंपरागत रूप से इस फसल की खेती जारी रखी है। किसानों का अनुभव है कि कम बारिश की स्थिति में तापी, गिरना, अनेर और पंजरा जैसी नदियों के किनारे स्थित काली और उपजाऊ मिट्टी में सिंचाई वाली कपास की फसल बेहतर रहती है।इस बार भारी बारिश नहीं होने और जून-जुलाई में लगातार हल्की बारिश नहीं मिलने से किसानों को फसल प्रबंधन के लिए पर्याप्त समय मिला। इंटरक्रॉपिंग, हर्बिसाइड स्प्रे और खाद डालने जैसे काम समय पर पूरे हो गए। इससे कई क्षेत्रों में कपास की फसल की बढ़वार अच्छी देखने को मिल रही है। कुछ जगहों पर पौधे करीब दो फीट तक बढ़ चुके हैं। हल्की और मध्यम मिट्टी वाले क्षेत्रों में भी सिंचाई वाली कपास की स्थिति संतोषजनक बनी हुई है। कीटों के प्रकोप को रोकने के लिए कई किसानों ने दो बार छिड़काव भी पूरा कर लिया है।इंटरक्रॉपिंग और खाद प्रबंधन पर जोरकई किसानों ने कपास की फसल में दो बार इंटरक्रॉपिंग का काम पूरा कर लिया है। बारिश की संभावना को देखते हुए इन कृषि कार्यों में तेजी लाई गई। साथ ही, रासायनिक खाद की पहली खुराक भी खेतों में डाल दी गई है। काली मिट्टी वाले कुछ क्षेत्रों में कपास में जल्द फूल आने की संभावना है, जबकि मिट्टी में अभी नमी बनी हुई है।खरपतवार नियंत्रण में हर्बिसाइड का बढ़ा इस्तेमालजलगांव जिले के कई गांवों में खरपतवार नियंत्रण के लिए मजदूरों की मांग बनी हुई है। कुछ क्षेत्रों में मजदूरी करीब 200 रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गई है। हालांकि, इस साल कपास का रकबा कम होने और हर्बिसाइड के बढ़ते इस्तेमाल से कई इलाकों में खरपतवार की समस्या कम हुई है। बारिश की कमी के कारण खेतों में नई घास-फूस का उगना भी सीमित रहा है। यूरिया की मांग बढ़ीफसल में खाद का उपयोग शुरू होते ही यूरिया की मांग बढ़ गई है। सिंचाई वाले क्षेत्रों में कपास की अच्छी बढ़वार के कारण यूरिया की जरूरत अधिक बनी हुई है, लेकिन कई जगहों पर इसकी उपलब्धता सीमित है। इसके चलते किसान दूसरी बेसल डोज करीब 60 दिन बाद देने की योजना बना रहे हैं। किसानों का मानना है कि यदि मौसम अनुकूल रहा तो कपास की फसल अच्छी स्थिति में बनी रह सकती है।और पढ़ें :- जुलाई मध्य में ब्राजील के कपास भाव में गिरावट, कमजोर घरेलू मांग से बाजार दबाव में

जुलाई मध्य में ब्राजील के कपास भाव में गिरावट, कमजोर घरेलू मांग से बाजार दबाव में

एक्सपोर्ट पैरिटी में सुधार के बावजूद जुलाई के मध्य में ब्राज़ील में कपास की कीमतों में गिरावटजुलाई के मध्य में ब्राज़ील के कपास बाजार में कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि इस अवधि में एक्सपोर्ट पैरिटी में सुधार हुआ और घरेलू तथा निर्यात कीमतों के बीच का अंतर कम हुआ, लेकिन घरेलू टेक्सटाइल उद्योग की ओर से धीमी खरीदारी और उपलब्ध कपास स्टॉक की गुणवत्ता को लेकर चिंताओं ने स्पॉट बाजार पर दबाव बनाए रखा। इसके चलते बाजार में कीमतों में नरमी देखने को मिली।साओ पाउलो यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज़ ऑन एप्लाइड इकोनॉमिक्स (CEPEA) के अनुसार, खरीदारों को कपास के कुछ बैचों की गुणवत्ता को स्वीकार करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। वहीं, तैयार टेक्सटाइल उत्पादों की कमजोर बिक्री के कारण मिलों ने नई खरीदारी को लेकर सतर्क रुख अपनाया। मांग में कमी के चलते कुछ खरीदारों ने कम कीमतों की पेशकश की, जिससे स्पॉट बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना।इस बीच, कपास उत्पादक फसल की कटाई और पहले से किए गए फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे। कुछ उत्पादक 2024/25 सीजन की बची हुई कपास का स्टॉक बेचने के इच्छुक थे, जबकि अन्य उत्पादकों ने अपनी मांग वाली कीमतों को बनाए रखा। इस वजह से बाजार में उपलब्धता और खरीदारी के बीच संतुलन बना रहा तथा स्पॉट ट्रेडिंग सीमित रही।ब्राज़ील की नेशनल सप्लाई कंपनी (Conab) ने 2025/26 सीजन के लिए कपास उत्पादन का अनुमान बढ़ाकर 4.06 मिलियन टन कर दिया है। यह पिछले अनुमान की तुलना में 2.05 प्रतिशत अधिक है, हालांकि यह 2024/25 सीजन के उत्पादन अनुमान से 0.5 प्रतिशत कम है। औसत उपज 2,011 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रहने का अनुमान है, जबकि कपास का रकबा 2.02 मिलियन हेक्टेयर रहने की संभावना है, जो साल-दर-साल 3.2 प्रतिशत कम है।दूसरी ओर, अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की जुलाई रिपोर्ट के अनुसार, 2026/27 सीजन के लिए वैश्विक कपास उत्पादन का अनुमान 25.53 मिलियन टन लगाया गया है। यह पिछले अनुमान से 1 प्रतिशत अधिक है, लेकिन 2025/26 सीजन की तुलना में 3.8 प्रतिशत कम है। रिपोर्ट में ब्राज़ील और अमेरिका, दोनों के उत्पादन अनुमानों में लगभग 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। हालांकि, दोनों देशों में उत्पादन पिछले सीजन के स्तर से नीचे रहने का अनुमान है।और पढ़ें :- जून 2026 में चीन का कपास आयात करीब तीन गुना बढ़ा

जून 2026 में चीन का कपास आयात करीब तीन गुना बढ़ा

जून 2026 में चीन का कपास आयात लगभग तीन गुना बढ़ाजून 2026 में चीन के कपास आयात में ज़बरदस्त उछाल देखा गया; पिछले साल इसी महीने की तुलना में शिपमेंट लगभग तीन गुना बढ़ गए। जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ़ कस्टम्स के अनुसार, चीन ने जून में लगभग 110,000 टन कपास का आयात किया, जो साल-दर-साल 294.9% की वृद्धि है। 2026 की पहली छमाही में, कुल आयात 940,000 टन तक पहुँच गया, जो एक साल पहले की तुलना में 102.2% ज़्यादा है।आयात की कीमत में भी तेज़ी से बढ़ोतरी हुई। जून में आयात की कीमत RMB 1.36 बिलियन थी, जो 244.7% की वृद्धि है, जबकि जनवरी-जून में कुल आयात RMB 10.97 बिलियन का था, जो साल-दर-साल 75.8% ज़्यादा है। ब्राज़ील और अमेरिका का कपास आपूर्ति के मुख्य स्रोत बने रहे।इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि जून में यह मज़बूत प्रदर्शन काफी हद तक अपेक्षित था। इस बढ़ोतरी का एक कारण जून 2025 में बहुत कम आधार (बेस) का होना है, जब चीन ने केवल 27,400 टन कपास का आयात किया था, जो पिछले वर्ष की तुलना में 82.3% की गिरावट थी।हालाँकि, तीन अन्य कारकों ने भी इस उछाल को बढ़ावा दिया। पहला, जून में ICE कॉटन फ्यूचर्स में दो बार भारी गिरावट आई, जिससे आयातित कपास की कीमतें देश के अंदर के गोदामों में रखे शिनजियांग कपास की कीमतों से कम हो गईं और विदेशी आपूर्ति चीनी मिलों और व्यापारियों के लिए ज़्यादा आकर्षक हो गई।दूसरा, मध्य पूर्व संघर्ष से जुड़ी रुकावटों ने दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में टेक्सटाइल और गारमेंट उत्पादन को प्रभावित किया, जिससे यूरोप, अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया के लिए कुछ निर्यात ऑर्डर चीन के तटीय मैन्युफैक्चरिंग हब - जैसे ग्वांगडोंग, जिआंगसु, झेजियांग, फुजियान और शेडोंग - की ओर स्थानांतरित हो गए।तीसरा, अमेरिकी सेक्शन 301 टैरिफ में संभावित बदलाव और व्यापक चीन-यूरोपीय संघ व्यापार विवाद के जोखिम को लेकर चिंताओं ने चीनी निर्यातकों को मई और जून के दौरान शिपमेंट में तेज़ी लाने के लिए प्रोत्साहित किया। यह समय पश्चिमी देशों के बड़े रिटेलर्स द्वारा साल की दूसरी छमाही के लिए इन्वेंट्री बनाने के समय के साथ भी मेल खाता था, जिससे चीन के कपास और कॉटन यार्न के आयात में लगातार वृद्धि को समर्थन मिला।और पढ़ें :- बायर ने कपास किसानों के लिए 'Trance' कीटनाशक लॉन्च किया, रस चूसने वाले कीटों से मिलेगी सुरक्षा

बायर ने कपास किसानों के लिए 'Trance' कीटनाशक लॉन्च किया, रस चूसने वाले कीटों से मिलेगी सुरक्षा

बेयर ने कपास किसानों के लिए लॉन्च किया नया कीटनाशक 'Trance', रस चूसने वाले कीटों से मिलेगा प्रभावी बचावबेयर ने कपास किसानों के लिए नया कीटनाशक 'Trance' लॉन्च करने की घोषणा की है। कंपनी का दावा है कि यह उत्पाद एफिड्स, जैसिड्स और व्हाइटफ्लाई निम्फ जैसे रस चूसने वाले प्रमुख कीटों के प्रभावी नियंत्रण के लिए विकसित किया गया है। दो अलग-अलग और पूरक मोड ऑफ़ एक्शन पर आधारित यह कीटनाशक फसल को व्यापक सुरक्षा प्रदान करने के साथ उसकी सेहत, पैदावार और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद करेगा।कंपनी के अनुसार, भारत में कपास की खेती पर रस चूसने वाले कई कीटों का एक साथ हमला, कीटनाशकों के प्रति बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता (रेजिस्टेंस) और प्रभावी व किफायती विकल्पों की कमी किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। इसके कारण फसल की वृद्धि प्रभावित होती है, उत्पादन घटता है और खेती की लागत बढ़ जाती है। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए 'Trance' विकसित किया गया है।बेयर का कहना है कि यह उत्पाद दोहरी कार्यप्रणाली पर आधारित है। सिस्टमिक मूवमेंट के माध्यम से दवा पौधे के भीतर फैलती है, जबकि ट्रांसलामिनार एक्शन के जरिए पत्तियों के आर-पार प्रभाव डालती है। इससे न केवल मौजूदा पत्तियों, बल्कि पौधे की नई बढ़त को भी सुरक्षा मिलती है। कंपनी के मुताबिक, इसका फॉर्मूलेशन बारिश के बाद भी प्रभावी बना रहता है और छिड़काव के लगभग दो घंटे के भीतर असर दिखाना शुरू कर देता है। साथ ही, इसे इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट (IPM) कार्यक्रमों के साथ भी आसानी से अपनाया जा सकता है।'Trance' जुलाई 2026 से महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, राजस्थान, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पंजाब, हरियाणा और पश्चिम बंगाल सहित प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में उपलब्ध होगा। इसे 100 मि.ली., 220 मि.ली. और 500 मि.ली. के पैक में बाजार में उतारा जाएगा।बेयर क्रॉप साइंस (भारत) के मुख्य परिचालन अधिकारी (Chief Operating Officer) मोहन बाबू ने कहा कि किसानों के सामने रस चूसने वाले कीटों और बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता की चुनौती लगातार बढ़ रही है। ऐसे में 'Trance' एक ही समाधान में दो अलग-अलग मोड ऑफ़ एक्शन उपलब्ध कराता है, जिससे कीटों का प्रभावी और लंबे समय तक नियंत्रण संभव हो पाता है। उन्होंने कहा कि यह उत्पाद किसानों को फसल की गुणवत्ता सुधारने, उत्पादन बढ़ाने और लाभप्रदता में वृद्धि करने में मदद करेगा।कंपनी का कहना है कि 'Trance' के लॉन्च के साथ वह अपने फसल सुरक्षा पोर्टफोलियो को और मजबूत कर रही है। विज्ञान आधारित यह नवाचार किसानों को अधिक उत्पादन, संसाधनों के बेहतर उपयोग और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने में सहायक होगा।और पढ़ें :-हरियाणा में पिंक बॉलवर्म का शुरुआती प्रकोप, कपास किसानों को वैज्ञानिक निगरानी की सलाह

हरियाणा में पिंक बॉलवर्म का शुरुआती प्रकोप, कपास किसानों को वैज्ञानिक निगरानी की सलाह

हरियाणा में गुलाबी सुंडी की शुरुआती सक्रियता, कपास किसानों को वैज्ञानिक निगरानी अपनाने की सलाहहरियाणा के कपास उत्पादक क्षेत्रों में गुलाबी सुंडी (पिंक बॉलवर्म) की शुरुआती सक्रियता के संकेत मिलने के बाद कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क रहने और वैज्ञानिक निगरानी प्रणाली अपनाने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते एकीकृत कीट प्रबंधन (आईपीएम) तकनीकों को अपनाकर कपास की फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत फरीदाबाद स्थित रीजनल इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट सेंटर (आरआईपीएमसी) और सिरसा स्थित संयुक्त निदेशक कृषि (कपास) कार्यालय की संयुक्त सर्वे टीम ने सिरसा जिले के कपास खेतों का निरीक्षण किया। इस दौरान कुछ खेतों में गुलाबी सुंडी के शुरुआती प्रकोप के संकेत मिले। टीम ने किसानों को कीट नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक उपायों और आईपीएम तकनीकों की जानकारी दी।अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी कि वे प्रति एकड़ चार से पांच फेरोमोन ट्रैप कपास विशेष फेरोमोन ल्यूर के साथ लगाएं, ताकि गुलाबी सुंडी की गतिविधियों की लगातार निगरानी की जा सके और शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रण के उपाय किए जा सकें। इसके अलावा रस चूसक कीटों की निगरानी और नियंत्रण के लिए प्रति हेक्टेयर 20 पीले या नीले स्टिकी ट्रैप लगाने की भी सिफारिश की गई है।कपास उत्पादक जिलों सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, हांसी, भिवानी, चरखी दादरी और जींद में फेरोमोन ट्रैप आधारित डेमो प्लॉट तैयार किए गए हैं। कृषि विभाग के अनुसार, इन तकनीकों का उपयोग करने वाले किसानों को गुलाबी सुंडी की निगरानी और प्रबंधन में बेहतर परिणाम मिले हैं।कृषि अधिकारियों ने किसानों से केवल केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (सीआईबी एंड आरसी) द्वारा पंजीकृत एवं अनुमोदित कीटनाशकों का ही प्रयोग करने की अपील की है। साथ ही, कीटनाशकों का छिड़काव तभी करने की सलाह दी गई है, जब कीटों की संख्या आर्थिक क्षति स्तर (Economic Threshold Level) से अधिक हो जाए।सर्वे टीम ने किसानों को नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम (एनपीएसएस) मोबाइल ऐप के बारे में भी जानकारी दी। यह ऐप कीटों और रोगों की पहचान, फसल सुरक्षा संबंधी सलाह और रियल-टाइम निगरानी में मदद करता है, जिससे समय पर उचित निर्णय लिए जा सकते हैं और अनावश्यक कीटनाशक उपयोग को रोका जा सकता है।गौरतलब है कि वर्ष 2023, 2024 और 2025 में गुलाबी सुंडी के प्रकोप से सिरसा जिले में कपास की फसल को भारी नुकसान हुआ था। इस वर्ष किसानों के सामने गुलाबी सुंडी के साथ-साथ अत्यधिक बारिश भी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है, जिससे कई क्षेत्रों में कपास की फसल प्रभावित हुई है।और पढ़ें :- तेलंगाना के आदिलाबाद में बारिश से खरीफ फसलों को राहत, किसान अब अच्छी बारिश के इंतजार में

तेलंगाना के आदिलाबाद में बारिश से खरीफ फसलों को राहत, किसान अब अच्छी बारिश के इंतजार में

तेलंगाना के आदिलाबाद में सामान्य बारिश से खरीफ फसलों को संजीवनी, किसानों को अब अच्छी वर्षा का इंतजारआदिलाबाद (तेलंगाना): पिछले दो दिनों में हुई सामान्य बारिश ने तेलंगाना के आदिलाबाद जिले के किसानों को बड़ी राहत दी है। लंबे समय से बारिश की कमी से जूझ रहे किसानों का कहना है कि इस वर्षा ने कपास, सोयाबीन और अरहर जैसी खरीफ फसलों को सूखने से बचा लिया है। हालांकि, उनका मानना है कि अच्छी पैदावार के लिए अगले 15 दिनों के भीतर पर्याप्त और लगातार बारिश होना बेहद जरूरी है।आदिलाबाद जिले में कपास प्रमुख नकदी फसल है, जिसकी खेती लगभग 4.30 लाख एकड़ क्षेत्र में की जाती है। इसके अलावा करीब 56,000 एकड़ में सोयाबीन और 42,000 एकड़ में अरहर की बुवाई हुई है। समय पर बुवाई करने वाले किसानों की फसलों को हालिया बारिश से राहत मिली है, लेकिन जिन किसानों ने देर से बुवाई की, उन्हें अभी भी पौधों की धीमी बढ़त और बीजों के कमजोर अंकुरण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।बारिश के आंकड़े बताते हैं कि पुराने आदिलाबाद जिले के अधिकांश हिस्सों में अब भी सामान्य से कम वर्षा हुई है। 1 जून से 22 जुलाई के बीच कोमाराम भीम आसिफाबाद जिले में 432 मिमी सामान्य वर्षा के मुकाबले 353 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो 18 प्रतिशत कम है। मंचरियल में 380.4 मिमी के मुकाबले 305.7 मिमी (-20%), आदिलाबाद में 432.2 मिमी के मुकाबले 279.2 मिमी (-36%) और निर्मल में 380.8 मिमी के मुकाबले 280.2 मिमी (-26%) वर्षा रिकॉर्ड की गई। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जिले के अधिकांश क्षेत्रों में वर्षा की कमी बनी हुई है।आदिलाबाद ग्रामीण मंडल के चिंतागुडा गांव के किसान सेडमाकी प्रभु ने बताया कि पिछले दो दिनों की बारिश फसलों के लिए जीवनदायिनी साबित हुई है। उन्होंने कहा कि इससे कपास और सोयाबीन के पौधे बच गए हैं, लेकिन उनकी बेहतर बढ़वार के लिए आने वाले दिनों में अच्छी बारिश जरूरी है। यदि जल्द पर्याप्त वर्षा नहीं हुई, तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है।कम बारिश का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है। सूखे जैसी स्थिति के कारण गांवों में हरी घास की कमी हो गई है, जिससे पशुपालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बकरियां, भेड़ें और गायों को चराने के लिए ग्रामीण जंगलों के किनारों तक ले जाने को मजबूर हैं। प्रभु के अनुसार, पड़ोसी गांव कोथुर में करीब 500 मवेशी हैं, जहां पीने के पानी और हरे चारे की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।किसानों का कहना है कि हालिया बारिश ने उम्मीद जरूर जगाई है, लेकिन खरीफ सीजन की सफलता अब आने वाले दिनों में होने वाली वर्षा पर निर्भर करेगी। यदि पर्याप्त बारिश होती है, तो फसलों की बढ़वार बेहतर होगी और किसानों के साथ-साथ पशुपालकों को भी राहत मिलेगी।और पढ़ें :- गुजरात के अरावली में 13,857 हेक्टेयर कपास की फसल सूखने से किसान चिंतित

गुजरात के अरावली में 13,857 हेक्टेयर कपास की फसल सूखने से किसान चिंतित

गुजरात के अरावली में 13,857 हेक्टेयर में बोई गई कपास की फसल सूखे की चपेट में, किसान चिंतितअरावली (गुजरात): अरावली जिले में इस वर्ष किसानों ने पिछले साल की तुलना में करीब 3,000 से 4,000 हेक्टेयर अधिक क्षेत्र में कपास की बुआई की है। जिले के सिंचित क्षेत्रों में किसानों ने मानसून से पहले ही महंगे बीज खरीदकर मई माह में कपास की बुआई कर दी थी। फसल की अच्छी बढ़वार के बावजूद अब पिछले एक सप्ताह से कपास के पौधों में अचानक सूखने और मुरझाने के लक्षण दिखाई देने लगे हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।इस वर्ष जिले में कुल 13,857 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती की गई है। सबसे अधिक बुआई सथांबा तालुका में 4,493 हेक्टेयर तथा बयाद तालुका में 4,335 हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है। वहीं, सबसे कम कपास की खेती मालपुर तालुका में मात्र 37 हेक्टेयर और भिलोडा तालुका में 179 हेक्टेयर क्षेत्र में दर्ज की गई है।किसानों ने गर्मी के दौरान खेतों की तैयारी कर समय से पहले बुआई की थी और फसल की नियमित देखभाल भी की। लेकिन पिछले एक सप्ताह में कई खेतों में कपास के पौधे अचानक मुरझाने लगे हैं। किसानों के अनुसार, फूल आने की अवस्था में पौधे तेजी से सूख रहे हैं, जिससे उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। किसान इस समस्या के समाधान और कृषि विभाग से तत्काल मार्गदर्शन की मांग कर रहे हैं।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 8 पैसे मजबूत, 96.49 पर खुला.

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 20 पैसे गिरकर 96.56 पर बंद हुआ

बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 20 पैसे कमजोर हुआ और 96.56 पर बंद हुआ।रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.36 पर खुला और कारोबार के अंत में 20 पैसे गिरकर 96.56 पर बंद हुआ।इस बीच, भारतीय इक्विटी बेंचमार्क गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 715.06 अंक या 0.92 प्रतिशत गिरकर 76,755.05 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 191.45 अंक या 0.79 प्रतिशत गिरकर 23,996.25 पर बंद हुआ।मार्केट का रुख नकारात्मक रहा; NSE पर 1,443 शेयरों में बढ़त हुई, 2,616 शेयरों में गिरावट आई और 170 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।और पढ़ें :- कपास कारोबारियों ने RCM और न्यूनतम बिजली शुल्क खत्म करने की मांग उठाई

कपास कारोबारियों ने RCM और न्यूनतम बिजली शुल्क खत्म करने की मांग उठाई

उद्यमियों ने कपास पर आरसीएम और मिनिमम चार्ज खत्म करने का उठाया मुद्दालघु उद्योग भारती के प्रदेश अध्यक्ष और मालवा अंचल अध्यक्ष के शहर प्रवास के दौरान स्थानीय उद्यमियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में कपास पर लागू रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (आरसीएम) और एमपीईबी द्वारा वसूले जा रहे मिनिमम चार्ज से जुड़ी समस्याओं पर प्रमुखता से चर्चा हुई।लघु उद्योग भारती के प्रदेश अध्यक्ष राजेश मिश्रा और मालवा अंचल अध्यक्ष राजेंद्र दुबे के शहर पहुंचने पर लघु उद्योग भारती की शहर इकाई के पदाधिकारियों और सदस्यों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद आयोजित बैठक में उद्यमियों ने संगठन की कार्यप्रणाली और उद्योग हित में किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली तथा अपनी प्रमुख समस्याएं प्रदेश अध्यक्ष के समक्ष रखीं।बैठक में कपास उद्योग से जुड़ा मुद्दा सबसे प्रमुख रहा। उद्यमियों ने बताया कि कपास पर लागू आरसीएम व्यवस्था के कारण उनकी बड़ी मात्रा में कार्यशील पूंजी जीएसटी में अटक रही है, जिससे उद्योगों के संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।इस पर प्रदेश अध्यक्ष राजेश मिश्रा ने कहा कि इस विषय को जल्द ही जीएसटी काउंसिल के समक्ष रखा जाएगा और समाधान के लिए आवश्यक प्रयास किए जाएंगे। वहीं, बिजली कंपनी द्वारा लगाए जा रहे मिनिमम चार्ज के संबंध में उन्होंने बताया कि संगठन पहले से ही इस मुद्दे को लेकर प्रयासरत है। इसे संबंधित उच्च अधिकारियों के समक्ष दोबारा मजबूती से उठाया जाएगा।प्रदेश अध्यक्ष ने लघु उद्योग भारती की कार्यप्रणाली, संगठन के महत्व और उद्योग जगत के हित में किए गए कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।बैठक के दौरान लघु उद्योग भारती की सेंधवा इकाई का पुनर्गठन भी किया गया। सर्वसम्मति से अंकित अग्रवाल को सेंधवा इकाई का अध्यक्ष और नीलेश अग्रवाल को सचिव नियुक्त किया गया।बैठक के अंत में सेंधवा इकाई के सदस्यों ने कपास पर टैक्स संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए संगठन द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रदेश अध्यक्ष का आभार व्यक्त किया।इस अवसर पर मीडिया प्रभारी दुर्गेश शर्मा, पूर्व अध्यक्ष सुरेश बागरेचा, सहसचिव शरद गोयल, गिरधारीलाल गोयल, नरेंद्र मित्तल, मुकेश शेखावत, शिवम जोशी, राजकुमार मंगल, हरपालसिंह छाबड़ा, हेमंत शर्मा, नीलेश तायल, गोपाल गोयल सहित अन्य उद्यमी उपस्थित रहे।और पढ़ें :- वैश्विक कपास बाजार में भारत की स्थिति मजबूत, उत्पादन और खपत में दूसरे स्थान पर

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जानिए आज का कपास बाज़ार? 😱कपास, बीज, गठानें, यार्न भाव | Cotton Market Rate Today
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आज कपास में तेज़ी या मंदी? 😱 Cotton Market Rate Today | 22 Oct 2026
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जानिए आज का कपास बाज़ार? 😱 कपास, सीड, खल, यार्न ताज़ा भाव | Cotton Market Rate Today 21 Oct 2026
जानिए आज का कपास बाज़ार? 😱 कपास, सीड, खल, यार्न ताज़ा भाव |...

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भारत टेक्स 2026 में तमिलनाडु का दमदार प्रदर्शन, टेक्सटाइल निवेश और निर्यात पर जोर 23-07-2026 15:23:57 view
महाराष्ट्र के खानदेश में अगेती कपास की फसल अच्छी, बारिश की कमी से किसान चिंतित 23-07-2026 14:10:10 view
जुलाई मध्य में ब्राजील के कपास भाव में गिरावट, कमजोर घरेलू मांग से बाजार दबाव में 23-07-2026 13:49:40 view
जून 2026 में चीन का कपास आयात करीब तीन गुना बढ़ा 23-07-2026 13:37:06 view
बायर ने कपास किसानों के लिए 'Trance' कीटनाशक लॉन्च किया, रस चूसने वाले कीटों से मिलेगी सुरक्षा 23-07-2026 13:23:04 view
हरियाणा में पिंक बॉलवर्म का शुरुआती प्रकोप, कपास किसानों को वैज्ञानिक निगरानी की सलाह 23-07-2026 13:10:41 view
तेलंगाना के आदिलाबाद में बारिश से खरीफ फसलों को राहत, किसान अब अच्छी बारिश के इंतजार में 23-07-2026 12:55:05 view
गुजरात के अरावली में 13,857 हेक्टेयर कपास की फसल सूखने से किसान चिंतित 23-07-2026 12:18:20 view
डॉलर के मुकाबले रुपया 8 पैसे मजबूत, 96.49 पर खुला. 23-07-2026 11:19:43 view
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 20 पैसे गिरकर 96.56 पर बंद हुआ 22-07-2026 15:50:37 view
कपास कारोबारियों ने RCM और न्यूनतम बिजली शुल्क खत्म करने की मांग उठाई 22-07-2026 15:22:21 view
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