Recent News

FY27 की शुरुआत में भारत के निर्यात में मजबूत बढ़त, FTA पर जोर

FY27 की शुरुआत में भारत के निर्यात में मजबूत वृद्धि, सरकार ने FTA विस्तार पर तेज की पहलवित्त वर्ष 2026-27 (FY27) की शुरुआत भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए सकारात्मक रही है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, अप्रैल और मई 2026 के दौरान देश के निर्यात में दो अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है। वाणिज्य मंत्रालय 15 जून को मई महीने के व्यापार आंकड़े जारी करेगा, जिससे इस रुझान की विस्तृत पुष्टि होने की उम्मीद है।अप्रैल 2026 में भारत का निर्यात 13.78 प्रतिशत बढ़कर 43.56 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले चार वर्षों में किसी भी महीने का सबसे ऊंचा स्तर है। इस वृद्धि में पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में सुधार और कच्चे तेल की ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। हालांकि, इसी अवधि में आयात में तेज वृद्धि देखी गई, जिसके कारण व्यापार घाटा बढ़कर 28.38 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले तीन महीनों का उच्चतम स्तर है।सरकार निर्यात बढ़ाने और वैश्विक बाजारों में भारत की हिस्सेदारी मजबूत करने के लिए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) को एक महत्वपूर्ण रणनीति के रूप में आगे बढ़ा रही है। इसी दिशा में वाणिज्य मंत्रालय देशभर में FTA के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए लगभग 1,000 लोगों की भर्ती की योजना पर काम कर रहा है। इन पदों के लिए विभिन्न भारतीय भाषाओं में दक्ष उम्मीदवारों की आवश्यकता होगी, और भर्ती प्रक्रिया की औपचारिकताएं जारी हैं।वर्तमान में भारत के कई देशों और समूहों के साथ FTA लागू हैं, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ओमान, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) और मॉरीशस शामिल हैं। इसके अलावा, यूनाइटेड किंगडम (UK), न्यूज़ीलैंड और यूरोपीय संघ (EU) के साथ भी समझौते अंतिम चरण में हैं।वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, पिछले साढ़े तीन वर्षों में भारत ने नौ मुक्त व्यापार समझौते पूरे किए हैं, जो लगभग 38 विकसित देशों को कवर करते हैं। उनका कहना है कि ये समझौते भारतीय वस्तुओं और सेवाओं को वैश्विक बाजारों में बेहतर पहुंच प्रदान कर रहे हैं और विश्व व्यापार के बड़े हिस्से को प्रभावित करते हैं।सरकार का लक्ष्य चालू वर्ष में 1 ट्रिलियन डॉलर और अगले पांच वर्षों में 2 ट्रिलियन डॉलर का निर्यात हासिल करना है। इसी उद्देश्य के तहत इज़रायल, कनाडा, खाड़ी सहयोग परिषद (GCC), दक्षिण अफ्रीकी संघ (SACU), रूस, मध्य एशियाई देशों और अन्य साझेदारों के साथ व्यापार वार्ताएं तेज की जा रही हैं।और पढ़ें :- महाराष्ट्र के 19 जिलों में लागू होगी ‘कपास क्रांति’ योजना

महाराष्ट्र के 19 जिलों में लागू होगी ‘कपास क्रांति’ योजना

महाराष्ट्र के 19 जिलों में ‘कपास क्रांति’ योजना लागू, ₹191 करोड़ का प्रावधानमुंबई: देश में कपास उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने महत्वाकांक्षी ‘कपास क्रांति’ (Cotton Revolution) योजना लागू करने का निर्णय लिया है। महाराष्ट्र के उत्तरी महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र के 19 प्रमुख कपास उत्पादक जिलों को इस योजना का लाभ मिलेगा। राज्य में इसके लिए ₹191 करोड़ का प्रावधान किया गया है।यह पहल केंद्र सरकार के ‘कपास उत्पादकता मिशन’ के अंतर्गत शुरू की जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य कपास खेती से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना और किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। योजना का क्रियान्वयन वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक किया जाएगा। इस दौरान देशभर में लगभग ₹5,659.22 करोड़ खर्च किए जाएंगे।योजना के तहत किसानों को अधिक उपज देने वाली, जलवायु-अनुकूल तथा कीट-प्रतिरोधी बीज किस्मों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अलावा हाई-डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम (HDPS), क्लोज़र स्पेसिंग (CS) और एकीकृत कपास प्रबंधन जैसी आधुनिक कृषि तकनीकों को व्यापक स्तर पर अपनाने पर जोर दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन उपायों से प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।‘कपास क्रांति’ योजना के अंतर्गत एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल (ELS) कपास के उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ जिनिंग और प्रसंस्करण इकाइयों के आधुनिकीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे कपास की गुणवत्ता में सुधार होगा और भारतीय कपास की वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी।भारतीय कपास को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च गुणवत्ता और टिकाऊ उत्पाद के रूप में स्थापित करने के लिए ‘कस्तूरी कॉटन भारत’ ब्रांड के तहत विशेष प्रचार अभियान भी चलाया जाएगा। यह अभियान देश के 14 राज्यों के 140 जिलों में संचालित होगा।राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरने ने कहा कि HDPS पद्धति में अधिक पानी की आवश्यकता को देखते हुए सरकार कपास किसानों को सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों पर अतिरिक्त सब्सिडी देने की संभावना पर विचार कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना से महाराष्ट्र के कपास उत्पादक क्षेत्रों में उत्पादन, उत्पादकता और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।और पढ़ें :- रुपया डॉलर के मुकाबले 22 पैसे गिरकर 95.27 पर बंद हुआ।

ICAC ने 2026/27 में वैश्विक कपास उत्पादन घटने का अनुमान जताया

ICAC का अनुमान: 2026/27 सीज़न में वैश्विक कपास उत्पादन और व्यापार में हल्की गिरावटअंतरराष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति (ICAC) की जून 2026 की रिपोर्ट ‘Cotton This Month’ के अनुसार, 2026/27 सीज़न में वैश्विक कपास क्षेत्र, उत्पादन और व्यापार में मामूली गिरावट आने की संभावना है। रिपोर्ट में इसका कारण कमजोर मांग, बढ़ती उत्पादन लागत और प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्रों में बदलती जलवायु परिस्थितियों को बताया गया है।ICAC के अनुमान के अनुसार, वैश्विक कपास क्षेत्र में 1 प्रतिशत की कमी आकर यह 30.1 मिलियन हेक्टेयर रह जाएगा। उत्पादन में 2 प्रतिशत की गिरावट के साथ यह 25.7 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जबकि वैश्विक व्यापार 1.4 प्रतिशत घटकर लगभग 9.5 मिलियन टन रह सकता है।रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की शुरुआत में उर्वरकों की कीमतों में लगभग 12 प्रतिशत वृद्धि हुई, जिसका मुख्य कारण मध्य-पूर्व में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति संबंधी बाधाएं हैं। इसके अलावा, कई देशों में मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां भी कपास उत्पादन को प्रभावित कर रही हैं। अमेरिका में अधिकांश कपास फसल सूखे की चपेट में है, ऑस्ट्रेलिया गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है और पाकिस्तान में कीट प्रकोप तथा अनिश्चित मौसम उत्पादन के लिए चुनौती बने हुए हैं। वहीं, मक्का जैसी प्रतिस्पर्धी फसलों और सिंथेटिक फाइबर से बढ़ती प्रतिस्पर्धा भी कपास क्षेत्र पर दबाव बना रही है।देशवार अनुमान में चीन दुनिया का सबसे बड़ा कपास उत्पादक बना रहेगा। हालांकि वहां कपास क्षेत्र में 0.5 प्रतिशत और उत्पादन में 4 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है, जिससे उत्पादन लगभग 7 मिलियन टन रह सकता है। अनुकूल मौसम और उच्च उत्पादकता चीन की स्थिति को मजबूत बनाए रखेंगे।अमेरिका में कपास क्षेत्र 6 प्रतिशत घटकर 2.9 मिलियन हेक्टेयर रहने का अनुमान है, जबकि उत्पादन 4 प्रतिशत घटकर 2.8 मिलियन टन रह सकता है। इसके बावजूद उत्पादकता और निर्यात में मामूली वृद्धि की संभावना जताई गई है।लगातार चार वर्षों की वृद्धि के बाद ब्राज़ील में कपास क्षेत्र और उत्पादन दोनों में कमी आने का अनुमान है। उत्पादन 10 प्रतिशत घटकर 3.8 मिलियन टन रह सकता है। दूसरी ओर, भारत कपास क्षेत्रफल के मामले में अग्रणी बना हुआ है। सामान्य मानसून के पूर्वानुमान के कारण देश में उत्पादन में 8 प्रतिशत वृद्धि की संभावना है, जिसका अधिकांश हिस्सा घरेलू खपत और धागा निर्यात में उपयोग हो सकता है।ऑस्ट्रेलिया में सूखे और सीमित सिंचाई संसाधनों के कारण उत्पादन लगभग 937,000 टन रहने का अनुमान है, जबकि पाकिस्तान में खराब बीज गुणवत्ता, कीटों के प्रकोप और प्रतिकूल मौसम के कारण उत्पादन 18 प्रतिशत घटकर करीब 900,000 टन रह सकता है।ICAC ने 2025/26 सीज़न के लिए Cotlook A Index का अनुमान 75 से 80 सेंट प्रति पाउंड के बीच रखा है, जिसका मध्य बिंदु 78 सेंट प्रति पाउंड है। रिपोर्ट का अगला अंक 1 जुलाई 2026 को जारी किया जाएगा।और पढ़ें :- टैरिफ वार्ता के बीच भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में

टैरिफ वार्ता के बीच भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में, टैरिफ रियायतों पर टिकी उम्मीदेंनई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता अंतिम चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। हालांकि, इसकी सफलता काफी हद तक अमेरिका की Section 301 जांच और उससे जुड़े संभावित टैरिफ उपायों में भारत को मिलने वाली राहत पर निर्भर करेगी। यह जानकारी भारत सरकार के एक सूत्र ने सोमवार को दी।दक्षिण एवं मध्य एशिया मामलों के लिए अमेरिकी सहायक व्यापार प्रतिनिधि ब्रेंडन लिंच के नेतृत्व में एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल मंगलवार से नई दिल्ली में भारतीय अधिकारियों के साथ तीन दिवसीय वार्ता करेगा। इस दौरान दोनों पक्ष व्यापार समझौते के लंबित मुद्दों पर चर्चा करेंगे।भारत और अमेरिका फरवरी में एक प्रारंभिक व्यापार समझौते पर सहमत हुए थे, लेकिन बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ उपायों और उनसे जुड़े कानूनी घटनाक्रमों के कारण बातचीत की गति धीमी पड़ गई। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने Trade Act, 1974 की Section 301 के तहत भारत सहित कई देशों की व्यापारिक नीतियों की जांच शुरू की और 10 प्रतिशत का समान टैरिफ लागू किया।भारतीय सूत्र के अनुसार, नई दिल्ली इस जांच से उत्पन्न संभावित टैरिफ प्रभावों पर चर्चा करेगी और राहत की मांग करेगी। भारत का उद्देश्य ऐसी प्रतिस्पर्धी टैरिफ दर हासिल करना है, जिससे उसे अन्य एशियाई विनिर्माण केंद्रों के मुकाबले बढ़त मिल सके।सूत्र ने कहा कि यदि प्रस्तावित शर्तें निष्पक्ष, संतुलित और दोनों पक्षों के हितों के अनुरूप होती हैं, तो समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। भारत को उम्मीद है कि उसे बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अधिक अनुकूल टैरिफ व्यवस्था मिलेगी।सूत्रों के मुताबिक, समझौते की रूपरेखा तय होने के बाद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर भारत का दौरा कर सकते हैं। इसे दोनों देशों के बीच बढ़ती प्रगति का संकेत माना जा रहा है।पिछले सप्ताह भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा था कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता आने वाले कुछ सप्ताहों या महीनों में संपन्न होने की संभावना है।और पढ़ें :- भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 6 पैसे गिरकर 95.05 पर खुला

मानसून से पहले कच्छ में कपास बुवाई शुरू

गुजरात  (भुज): मानसून से पहले खेती की तैयारियां तेज, सिंचित क्षेत्रों में कपास की बुवाई शुरूमानसून की आधिकारिक शुरुआत में अब कुछ ही दिन शेष हैं। ऐसे में कच्छ जिले के किसानों ने खरीफ सीजन की तैयारियां तेज कर दी हैं। सिंचित क्षेत्रों में किसानों ने कपास की बुवाई शुरू कर दी है, जबकि वर्षा आधारित खेती करने वाले किसान खेतों की जुताई और भूमि तैयार करने का काम पूरा कर चुके हैं। अब सभी की निगाहें समय पर होने वाली मानसूनी बारिश पर टिकी हैं।कच्छ अपनी भौगोलिक विषमताओं और अपेक्षाकृत कम वर्षा के लिए जाना जाता है। इसके बावजूद जिले में मानसून के दौरान बड़े पैमाने पर खेती की जाती है। यहां मुख्य रूप से ऐसी फसलों की बुवाई होती है जो स्थानीय मिट्टी और अनिश्चित जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल हों।जिले में मूंगफली और कपास जैसी नकदी फसलों के अलावा ग्वार, बाजरा, ज्वार और अरंडी की भी व्यापक खेती की जाती है। साथ ही, कम अवधि वाली दलहनी फसलें—मूंग, मोठ और उड़द—भी किसानों की पसंद हैं, क्योंकि ये मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में सहायक होती हैं।मानसून की प्रतीक्षा के बीच भुज, अंजार, भचाऊ, नखत्राणा और मांडवी के कृषि बाजारों में रौनक बढ़ गई है। किसान सरकारी डिपो और निजी विक्रेताओं से उच्च गुणवत्ता वाले बीज, उर्वरक और फसल सुरक्षा उत्पाद खरीद रहे हैं, जिससे आगामी बुवाई सीजन के प्रति उनका उत्साह साफ दिखाई दे रहा है।कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस वर्ष मानसून समय पर पहुंचता है और वर्षा का वितरण संतुलित रहता है, तो कच्छ में खरीफ फसलों की बुवाई तेजी से आगे बढ़ेगी और किसानों को बेहतर उत्पादन मिलने की संभावना रहेगी।और पढ़ें:- कपास आयात शुल्क छूट के बाद टेक्सटाइल शेयरों में तेजी

कपास आयात शुल्क छूट के बाद टेक्सटाइल शेयरों में तेजी

कपास आयात शुल्क में अस्थायी छूट से टेक्सटाइल शेयरों में जोरदार तेजीसोमवार के शुरुआती कारोबार में टेक्सटाइल और परिधान कंपनियों के शेयरों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। यह उछाल केंद्र सरकार द्वारा कपास के आयात पर कस्टम ड्यूटी में अस्थायी छूट देने की घोषणा के बाद देखने को मिला। इस कदम का उद्देश्य कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाना और घरेलू टेक्सटाइल उद्योग को राहत प्रदान करना है।वित्त मंत्रालय ने शनिवार को जारी अधिसूचना में बताया कि कपास के आयात पर लगने वाली सभी कस्टम ड्यूटी 1 जून 2026 से 30 अक्टूबर 2026 तक के लिए समाप्त कर दी गई हैं। इससे पहले आयातित कपास पर प्रभावी रूप से 11% शुल्क लागू था। नई व्यवस्था के तहत अगले पांच महीनों तक कपास का आयात पूरी तरह शुल्क-मुक्त रहेगा।सरकार के अनुसार, यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब घरेलू बाजार में कपास की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। आयात शुल्क हटने से कपास की उपलब्धता बढ़ेगी और उन टेक्सटाइल एवं परिधान निर्माताओं को राहत मिलेगी जो आयातित कपास पर निर्भर हैं। इससे उनकी उत्पादन लागत घटने और परिचालन मार्जिन में सुधार होने की संभावना है।सरकारी घोषणा का निवेशकों ने सकारात्मक स्वागत किया, जिसके चलते कई टेक्सटाइल कंपनियों के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में वर्धमान टेक्सटाइल्स के शेयर लगभग 6% चढ़े, जबकि अरविंद 6.44% की बढ़त के साथ नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर अपने 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।इसके अलावा, नितिन स्पिनर्स में 5.53% और हिमात्सिंगका सेइड में करीब 5% की तेजी दर्ज की गई। वेलस्पन लिविंग, ट्राइडेंट और गोकलदास एक्सपोर्ट्स के शेयर लगभग 4% तक मजबूत हुए। वहीं, KPR मिल में 2.2% तथा Kitex Garments और Pearl Global Industries में करीब 2% की बढ़त देखने को मिली। Kewal Kiran Clothing के शेयर अपेक्षाकृत स्थिर रहे।वित्त मंत्रालय का मानना है कि यह अस्थायी शुल्क छूट टेक्सटाइल और परिधान क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन में इनपुट लागत कम करने में मदद करेगी। इससे निर्माताओं और उपभोक्ताओं दोनों को राहत मिलने की उम्मीद है, जबकि घरेलू कपास उत्पादकों के हितों के साथ भी संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया गया है।मंत्रालय ने कहा कि बेहतर कपास उपलब्धता से घरेलू टेक्सटाइल उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) को इसका लाभ मिलने की संभावना है, क्योंकि उन्हें कच्चे माल की आपूर्ति और लागत दोनों मोर्चों पर राहत मिलेगी।और पढ़ें:- सरकार ने अक्टूबर 2026 तक कपास आयात शुल्क हटाया

सरकार ने अक्टूबर 2026 तक कपास आयात शुल्क हटाया

सरकार ने 30 अक्टूबर, 2026 तक कपास के आयात पर कस्टम ड्यूटी माफ कीभारत के टेक्सटाइल सेक्टर को एक बड़ी राहत देते हुए, भारत सरकार ने 1 जून, 2026 से 30 अक्टूबर, 2026 तक, पाँच महीने की अवधि के लिए कपास के आयात पर कस्टम ड्यूटी से पूरी तरह छूट देने की घोषणा की है।वित्त मंत्रालय द्वारा जारी एक नोटिफिकेशन के अनुसार, इस अस्थायी ड्यूटी छूट का मकसद घरेलू टेक्सटाइल निर्माताओं के लिए कपास की उपलब्धता को बेहतर बनाना और पूरे उद्योग में कच्चे माल की लागत को कम करना है। इस कदम से इनपुट खर्च कम करके, उत्पादन क्षमता बढ़ाकर और कारोबार के विकास में मदद करके, पूरे टेक्सटाइल और कपड़ों की वैल्यू चेन को फायदा होने की उम्मीद है। छोटे और मध्यम आकार के उद्यम (SMEs), जो भारत के टेक्सटाइल इकोसिस्टम का एक बड़ा हिस्सा हैं, उन्हें प्रतिस्पर्धी कीमतों पर कपास की बेहतर उपलब्धता से काफी फायदा होने की संभावना है।सरकार ने कहा कि यह कदम टेक्सटाइल उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने के साथ-साथ घरेलू कपास किसानों के हितों को भी संतुलित करने के लिए सावधानीपूर्वक तैयार किया गया है। बाजार में कपास की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करके, इस छूट से स्थिर उत्पादन को बढ़ावा मिलने और सेक्टर के समग्र प्रदर्शन में सकारात्मक योगदान देने की उम्मीद है। और पढ़ें:- 2025-26 में CCI कपासबिक्री70 लाख गांठ के पार

Related News

Youtube Videos

कपास भाव में उतार-चढ़ाव 😱 जानिए इस हफ्ते का बाजार | CCI नीलामी रिपोर्ट 24 Oct 2026
कपास भाव में उतार-चढ़ाव 😱 जानिए इस हफ्ते का बाजार | CCI नील...
जानिए आज का कपास बाज़ार? 😱कपास, बीज, गठानें, यार्न भाव | Cotton Market Rate Today
जानिए आज का कपास बाज़ार? 😱कपास, बीज, गठानें, यार्न भाव | Co...
आज कपास में तेज़ी या मंदी? 😱 Cotton Market Rate Today | 22 Oct 2026
आज कपास में तेज़ी या मंदी? 😱 Cotton Market Rate Today | 22...

Circular

title Created At Action
FY27 की शुरुआत में भारत के निर्यात में मजबूत बढ़त, FTA पर जोर 02-06-2026 17:15:57 view
महाराष्ट्र के 19 जिलों में लागू होगी ‘कपास क्रांति’ योजना 02-06-2026 16:12:30 view
रुपया डॉलर के मुकाबले 22 पैसे गिरकर 95.27 पर बंद हुआ। 02-06-2026 15:41:36 view
ICAC ने 2026/27 में वैश्विक कपास उत्पादन घटने का अनुमान जताया 02-06-2026 15:29:11 view
टैरिफ वार्ता के बीच भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में 02-06-2026 12:46:12 view
भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 6 पैसे गिरकर 95.05 पर खुला 02-06-2026 09:23:48 view
मानसून से पहले कच्छ में कपास बुवाई शुरू 01-06-2026 13:53:16 view
कपास आयात शुल्क छूट के बाद टेक्सटाइल शेयरों में तेजी 01-06-2026 12:54:42 view
सरकार ने अक्टूबर 2026 तक कपास आयात शुल्क हटाया 01-06-2026 12:32:06 view
2025-26 में CCI कपास बिक्री 70 लाख गांठ के पार 01-06-2026 12:19:38 view
भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 3 पैसे मजबूत होकर 94.97 पर खुला 01-06-2026 09:18:44 view
Application Download
Whatsapp Contact