Recent News

धुले में खरीफ बुवाई लक्ष्य 3.76 लाख हेक्टेयर, कपास क्षेत्र में गिरावट

धुले: जिले में खरीफ बुवाई का लक्ष्य 3.75 लाख हेक्टेयर के करीब, कपास घटा; मक्का और सोयाबीन की ओर बढ़ा रुझानकृषि विभाग ने इस वर्ष जिले में खरीफ मौसम के लिए कुल 376,669 हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य तय किया है। यह लक्ष्य पिछले वर्ष के लगभग समान है। जिले का कुल कृषि योग्य क्षेत्र 378,432 हेक्टेयर है, जिसमें से अधिकांश हिस्से को खरीफ फसलों की बुवाई के लिए निर्धारित किया गया है।इस खरीफ मौसम में अनाज (चावल, ज्वार, बाजरा, रागी और मक्का), दालें (अरहर, मूंग, उड़द), तिलहन (मूंगफली, तिल, सूरजमुखी, सोयाबीन) के साथ कपास और गन्ना जैसी फसलों को शामिल किया गया है। मौसम विभाग द्वारा सामान्य से अच्छी वर्षा के अनुमान के चलते कृषि विभाग ने बीज और उर्वरकों की उपलब्धता की तैयारी भी शुरू कर दी है।कृषि अधिकारियों के अनुसार, यदि वर्षा समय पर होती है तो बुवाई कार्य तेजी से आगे बढ़ने की संभावना है।*कपास के क्षेत्र में कमी, वैकल्पिक फसलों की ओर झुकाव*पिछले कुछ वर्षों में जिले में कपास की खेती के क्षेत्र में लगातार गिरावट देखी जा रही है। पहले खरीफ क्षेत्र का बड़ा हिस्सा कपास के लिए उपयोग होता था, लेकिन अब इसमें कमी दर्ज की गई है।कपास की खेती में कमी के पीछे कीट प्रकोप, कीटनाशकों की बढ़ती लागत, मजदूरी खर्च और बाजार भाव में अनिश्चितता जैसे कारण प्रमुख बताए जा रहे हैं। इसी वजह से किसान अब वैकल्पिक फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।मक्का और सोयाबीन बन रहे पसंदीदा विकल्पजिले में किसानों का रुझान मक्का और सोयाबीन की खेती की ओर तेजी से बढ़ा है। किसान इन फसलों को अपेक्षाकृत कम खर्चीला और कम मेहनत वाला मान रहे हैं, क्योंकि इनमें कीटनाशक और छिड़काव की आवश्यकता कपास की तुलना में कम होती है।इसी कारण खरीफ सीजन में कपास की जगह मक्का और सोयाबीन की खेती का क्षेत्र बढ़ता जा रहा है।और पढ़ें:- कीमतों में नरमी के बावजूद ब्राजील के कपास निर्यात में तेज बढ़ोतरी

कीमतों में नरमी के बावजूद ब्राजील के कपास निर्यात में तेज बढ़ोतरी

मई 2026 में ब्राज़ील के कॉटन निर्यात में मजबूत वृद्धि, कीमतों में हल्की गिरावट के बावजूद रफ्तार कायममई 2026 के पहले 15 कार्यदिवसों में ब्राज़ील के कच्चे कॉटन निर्यात में तेज़ वृद्धि दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह डेटा मिनिस्ट्री ऑफ़ डेवलपमेंट, इंडस्ट्री, ट्रेड एंड सर्विसेज़ के अंतर्गत फॉरेन ट्रेड सेक्रेटेरिएट (SECEX) की रिपोर्ट में शामिल है।रिपोर्ट बताती है कि इस अवधि में रोज़ाना औसत निर्यात मई 2025 की तुलना में 67.8% अधिक रहा। मई 2025 में जहाँ दैनिक औसत 9,152.6 टन था और कुल 21 कार्यदिवसों में 192,204.3 टन का निर्यात हुआ था, वहीं मई 2026 के शुरुआती 15 कार्यदिवसों में यह औसत बढ़कर 15,356 टन प्रतिदिन तक पहुँच गया। अब तक इस महीने कुल 230,339.3 टन कच्चा कपास निर्यात किया जा चुका है।निर्यात में इस तेज़ बढ़ोतरी का असर राजस्व पर भी दिखा। औसत दैनिक निर्यात राजस्व बढ़कर लगभग US$23.681 मिलियन तक पहुँच गया, जो पिछले साल मई के US$14.738 मिलियन की तुलना में 60.7% अधिक है। हालांकि, प्रति टन औसत निर्यात मूल्य में गिरावट दर्ज की गई है। यह मई 2025 के US$1,610.2 प्रति टन से घटकर इस महीने US$1,542.1 प्रति टन रह गया, यानी 4.2% की कमी।कुल मिलाकर, मई 2026 के पहले 15 कार्यदिवसों में कच्चे कॉटन निर्यात से अर्जित राजस्व लगभग US$355.215 मिलियन रहा, जबकि मई 2025 में पूरे 21 कार्यदिवसों के दौरान यह आंकड़ा US$309.489 मिलियन था।वैश्विक कॉटन बाज़ार में भी दबाव देखने को मिला। न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में मेमोरियल डे की छुट्टी के कारण ट्रेडिंग बंद रही। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, प्रॉफिट बुकिंग, अमेरिका के उत्पादक क्षेत्रों में बारिश की संभावना और कच्चे तेल की कम कीमतों ने कॉटन कीमतों पर दबाव डाला है। तेल की कीमतों में गिरावट से पॉलिएस्टर अधिक प्रतिस्पर्धी हो गया, जिससे प्राकृतिक फाइबर की मांग प्रभावित हुई।ब्राज़ील के घरेलू बाज़ार में भी कॉटन लिंट की कीमतों में हालिया तेज़ी थमती दिख रही है। इसका कारण वैश्विक कीमतों में गिरावट और खरीदारों द्वारा नई खरीद से पहले अधिक स्पष्टता का इंतज़ार करना बताया जा रहा है।और पढ़ें:- भारत में कपास स्टॉक मजबूत, बुवाई क्षेत्र 7% बढ़ने की संभावना

भारत में कपास स्टॉक मजबूत, बुवाई क्षेत्र 7% बढ़ने की संभावना

वर्तमान कपास परिदृश्य पर एक संक्षिप्त रिपोर्ट (30/04/2026 तक की स्थिति) (प्रत्येक गांठ 170 किलोग्राम)▪️फसल वर्ष 2025-2026 के दौरान कुल प्रेसिंग का अनुमान 334.50 लाख गांठ है और 30-04-2026 तक कुल 310.50 लाख गांठों की प्रेसिंग हो चुकी है। उपरोक्त को ध्यान में रखते हुए, अप्रैल-2026 के अंत तक कपास की कुल उपलब्धता का आकलन 412.89 लाख गांठ किया जा सकता है, जिसमें 41.80 लाख गांठों का आयात और 60.59 लाख गांठों का शुरुआती स्टॉक शामिल है।▪️इस कपास सीज़न में कपास की खपत 338.00 लाख गांठों तक पहुँच सकती है और 30-04-2026 तक लगभग 197.16 लाख गांठों की खपत होने की सूचना मिली है। (SIS)▪️अप्रैल-2026 के अंत तक कुल 18.00 लाख गांठों का निर्यात हुआ है, जबकि इस सीज़न के लिए अनुमान 15.00 लाख गांठों का था।▪️यह पता चला है कि मौजूदा फसल वर्ष के अंत तक कुल 47.00 लाख गांठों का आयात किया जा सकता है। अप्रैल-2026 तक लगभग 41.80 लाख गांठें भारत के विभिन्न बंदरगाहों पर पहुँच चुकी हैं। (SIS)▪️उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए, 30.04.2026 तक उपलब्ध कुल स्टॉक की गणना 412.89 लाख गांठों के रूप में की गई है, जिसमें शुरुआती स्टॉक, कुल प्रेसिंग और आयात शामिल हैं। (SIS)▪️30 अप्रैल 2026 तक मिलों के पास स्टॉक 98.00 लाख गांठों के स्तर पर पाया गया, जबकि CCI/MFED, MNCs, जिनर्स, व्यापारियों और निर्यातकों के पास यह लगभग 108.73 लाख गांठें है। ▪️कपास की बेहतर कीमतें और किसानों की बढ़ी हुई आय, आने वाले सीज़न में भारत में कपास की बुवाई के क्षेत्र को लगभग 7% तक बढ़ा सकती है।और पढ़ें:- भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 7 पैसे गिरकर 95.75 पर खुला

बढ़ती लागत से गुजरात के मैन्युफैक्चरिंग उद्योग पर बढ़ा दबाव

गुजरात की मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में बढ़ती लागत से मार्जिन पर दबावगुजरात की मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री इन दिनों विस्तार या नए ऑर्डर की बजाय बढ़ती इनपुट लागत से जूझने में ज्यादा समय बिता रही है। टेक्सटाइल, केमिकल, फार्मा और रियल एस्टेट सेक्टर के कारोबारी बताते हैं कि कच्चे माल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और कमजोर मांग ने मार्जिन बनाए रखना मुश्किल कर दिया है।कई कंपनियां धीरे-धीरे कीमतें बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन MSME सेक्टर का बड़ा हिस्सा लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पा रहा है। इसका असर प्रोजेक्ट्स में देरी, उत्पादन में कमी और पूरी इंडस्ट्रियल वैल्यू चेन में महंगाई के दबाव के रूप में देखा जा रहा है।टेक्सटाइल उद्योग विशेष रूप से दबाव में है। कॉटन यार्न की बढ़ती कीमतें, क्रूड-लिंक्ड केमिकल्स और ऊंची फ्यूल लागत ने उत्पादन खर्च को तेजी से बढ़ा दिया है। पिछले कुछ हफ्तों में धागे की उपलब्धता घटने और प्रोसेसिंग चार्ज बढ़ने के कारण कपड़े की कीमतें भी लगभग 10 से 25 रुपये प्रति मीटर तक बढ़ गई हैं।उद्योग के अनुसार, चीन से मजबूत एक्सपोर्ट डिमांड ने कॉटन यार्न की कीमतों को चार साल के उच्च स्तर तक पहुंचा दिया है, जबकि वेस्ट एशिया में तनाव ने डाइंग और प्रोसेसिंग में इस्तेमाल होने वाले क्रूड-आधारित इनपुट्स को और महंगा कर दिया है। पावरलूम यूनिट्स में धागे की कमी के चलते उत्पादन भी घटा है, जिससे सप्लाई और सीमित हो गई है।हालांकि रुपये में गिरावट से एक्सपोर्टर्स को लाभ मिलने की उम्मीद थी, लेकिन ऊंची शिपिंग लागत और खरीदारों की डिस्काउंट मांग ने इस फायदा को कम कर दिया है। इंडस्ट्री प्रतिनिधियों का कहना है कि बढ़ती लागत और अनिश्चित मांग के कारण कई यूनिट्स को ऑर्डर होने के बावजूद उत्पादन रोकना पड़ रहा है।इसी बीच, 11% कॉटन इंपोर्ट ड्यूटी हटाने की मांग भी तेज हुई है, ताकि कच्चे माल की लागत कम होकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा बनी रहे।और पढ़ें:- महाराष्ट्र और गुजरात में डीजल संकट व पानी की कमी से खरीफ बुवाई पर खतरा

महाराष्ट्र और गुजरात में डीजल संकट व पानी की कमी से खरीफ बुवाई पर खतरा

डीज़ल की कमी और पानी की किल्लत से महाराष्ट्र और गुजरात के किसानों पर खरीफ की बुवाई का संकटजैसे-जैसे खरीफ की बुवाई का मौसम करीब आ रहा है, महाराष्ट्र और गुजरात के किसान डीज़ल की सप्लाई में रुकावट और पानी की कमी से जूझ रहे हैं। इससे इस साल कृषि उत्पादन पर गंभीर असर पड़ने का डर बढ़ गया है। सरकारों और तेल कंपनियों के बार-बार यह भरोसा दिलाने के बावजूद कि ईंधन का स्टॉक काफी है, ग्रामीण इलाकों के किसानों को ट्रैक्टर, सिंचाई पंप और ट्रांसपोर्ट गाड़ियों के लिए ज़रूरी डीज़ल लेने के लिए लंबी कतारों, सप्लाई की सीमा और देरी का सामना करना पड़ रहा है।महाराष्ट्र में, खासकर मराठवाड़ा और पुणे ज़िले के कुछ हिस्सों में, किसानों के संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगले 10-15 दिनों तक डीज़ल की उपलब्धता में लगातार रुकावट से बुवाई के काम पर बुरा असर पड़ सकता है। स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के संस्थापक राजू शेट्टी ने कहा कि मॉनसून आने से पहले का समय ज़मीन तैयार करने और बुवाई के लिए बहुत ज़रूरी होता है, और ईंधन की सप्लाई में कोई भी रुकावट फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। किसानों के समूहों ने चेतावनी दी है कि अगर इस समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन करेंगे।पुणे की इंदापुर तहसील में पानी की कमी से यह संकट और गहरा गया है। यहां किसानों ने खड़कवासला नहर प्रणाली से पानी की अपर्याप्त सप्लाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरने ने सिंचाई विभाग की कुप्रबंधन की बात मानी और विरोध कर रहे किसानों से मुलाकात के बाद पानी की सप्लाई बढ़ाने का भरोसा दिया।इस बीच, गुजरात के पोरबंदर जैसे ग्रामीण ज़िलों में, घबराहट में ज़्यादा डीज़ल खरीदने की होड़ के कारण डीज़ल पंपों पर ट्रैक्टरों की लंबी कतारें लग गई हैं। जमाखोरी रोकने के लिए राज्य सरकार ने हर किसान के लिए 200 लीटर की सीमा तय कर दी है, और ईंधन खरीदने से पहले ज़मीन के मालिकाना हक का सबूत दिखाना ज़रूरी कर दिया है। पेट्रोलियम डीलरों का कहना है कि असल में कोई कमी नहीं है, लेकिन सप्लाई पर नियंत्रण और मौसम के हिसाब से बढ़ी मांग के कारण दूरदराज के आउटलेट्स पर कुछ समय के लिए डीज़ल खत्म होने की समस्या पैदा हो गई है।किसानों के नेताओं ने चेतावनी दी है कि ईंधन की बढ़ती किल्लत और बारिश के अनियमित होने की चिंताओं को मिलाकर देखें, तो इससे आने वाले खरीफ चक्र और पूरे पश्चिमी भारत में कृषि विकास को नुकसान पहुंच सकता है।और पढ़ें:- एल नीनो के प्रभाव से महाराष्ट्र में खरीफ सीजन के दौरान 12% कम बारिश का अनुमान

एल नीनो के प्रभाव से महाराष्ट्र में खरीफ सीजन के दौरान 12% कम बारिश का अनुमान

अल नीनो से महाराष्ट्र में कम बारिश का अनुमानमहाराष्ट्र में आगामी खरीफ सीजन के दौरान अल नीनो के प्रभाव से सामान्य से लगभग 12% कम बारिश होने की आशंका जताई गई है। गुरुवार (21 मई, 2026) को आयोजित राज्य स्तरीय प्री-खरीफ समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने कहा कि राज्य में इस वर्ष औसतन 88% वर्षा होने का अनुमान है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में अधिक बारिश हो सकती है, जबकि पश्चिमी विदर्भ और मराठवाड़ा जैसे इलाकों में कम वर्षा के कारण कठिन परिस्थितियां पैदा होने की संभावना है।मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार कम बारिश की चुनौती से निपटने के लिए तकनीक आधारित समाधान लागू कर रही है। किसानों को उनके क्षेत्रों के अनुसार वर्षा और मौसम की जानकारी मोबाइल एप्लिकेशन तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम के जरिए उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए महाराष्ट्र राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने Indian Institute of Tropical Meteorology के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।राज्य सरकार ने यह भी घोषणा की कि किसानों की कर्जमाफी 30 जून से पहले पूरी कर दी जाएगी। यह योजना “पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर शेतकरी कर्जमाफी योजना” के तहत लागू की जा रही है, जिसकी घोषणा मार्च 2026 के राज्य बजट में की गई थी। योजना के अंतर्गत किसानों के ₹2 लाख तक के फसल ऋण माफ किए जाएंगे, जबकि नियमित रूप से ऋण चुकाने वाले किसानों को ₹50,000 का प्रोत्साहन दिया जाएगा।बैठक में बैंकों को कृषि क्षेत्र में ऋण वितरण बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीयकृत बैंकों से किसानों को अधिक फसल ऋण देने और ऋण स्वीकृति के लिए CIBIL स्कोर की अनिवार्यता समाप्त करने को कहा। महाराष्ट्र भारत फोरकास्ट सिस्टम (BharatFS) को आपदा प्रबंधन ढांचे में शामिल करने वाला देश का पहला राज्य भी बन गया है।और पढ़ें:- कृषि विज्ञान: तेज लू और गर्मी से कपास की फसल की सुरक्षा के उपाय

कृषि विज्ञान: तेज लू और गर्मी से कपास की फसल की सुरक्षा के उपाय

कृषि विज्ञान: लू से कपास फसल बचाने की सलाहहनुमानगढ़ में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी और तेज लू के बीच कृषि विभाग ने किसानों को कपास की फसल को सुरक्षित रखने के लिए विशेष सलाह जारी की है। जिले में इस बार कपास की बुवाई तेज गति से हुई है और अब तक लगभग एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बिजाई पूरी की जा चुकी है। हालांकि, बढ़ते तापमान और गर्म हवाओं के कारण कई क्षेत्रों में अंकुरित पौधों के मुरझाने और कमजोर पड़ने की शिकायतें सामने आने लगी हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों ने विभिन्न गांवों का दौरा कर नई फसल पर हीटवेव के असर का निरीक्षण किया है।संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) डॉ. प्रमोद कुमार ने किसानों से मौसम के अनुसार खेती कार्य करने और वैज्ञानिक तरीके अपनाने की अपील की है। उन्होंने बताया कि तेज गर्मी के प्रभाव को कम करने के लिए खेतों में हल्की सिंचाई बेहद जरूरी है। जिन किसानों के पास फव्वारा संयंत्र उपलब्ध हैं, वे तीन दिन के अंतराल पर फव्वारा विधि से सिंचाई करें, ताकि खेत में नमी बनी रहे और पौधों को गर्मी से राहत मिल सके।कृषि विभाग ने फिलहाल किसी भी प्रकार के उर्वरक के उपयोग से बचने की सलाह दी है। अधिकारियों के अनुसार, खेत में गहरी जुताई कर नहर के पानी से पलेवा करने के बाद ही बुवाई करनी चाहिए। पिछेती बुवाई करने वाले किसान खेत के चारों ओर चारे की फसल की दो लाइनें लगाकर गर्म हवाओं का प्रभाव कम कर सकते हैं।इसके अलावा, दोपहर बाद ट्रैक्टर चालित स्प्रेयर से पानी का हल्का छिड़काव करने तथा शाम के समय जुताई और बुवाई करने की सलाह भी दी गई है। विभाग ने बीटी कपास की खेती के लिए नाली या बेड विधि अपनाने को अधिक लाभकारी बताया है।और पढ़ें:- TEXPROCIL पुरस्कार समारोह में 2030 तक भारत के 100 अरब डॉलर टेक्सटाइल निर्यात लक्ष्य पर जोर

TEXPROCIL पुरस्कार समारोह में 2030 तक भारत के 100 अरब डॉलर टेक्सटाइल निर्यात लक्ष्य पर जोर

TEXPROCIL पुरस्कार समारोह में भारत के 100 बिलियन डॉलर कपड़ा निर्यात लक्ष्य पर जोरTEXPROCIL द्वारा मुंबई में आयोजित TEXPROCIL निर्यात पुरस्कार 2023–24 समारोह में भारत के सूती कपड़ा निर्यात क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले निर्यातकों को सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री Nirmala Sitharaman ने की। समारोह में निर्यात प्रदर्शन, रोजगार सृजन, नवाचार, ESG पहलों और ई-कॉमर्स में उत्कृष्ट योगदान देने वाले निर्यातकों को TEXPROCIL पुरस्कार प्रदान किए गए।इस अवसर पर वित्त मंत्री ने “एडवांस्ड सर्टिफिकेट प्रोग्राम इन इंटरनेशनल ट्रेड” (ACPIT) का शुभारंभ भी किया। TEXPROCIL की यह पहल भारत के निर्यात तंत्र को मजबूत करने और वैश्विक व्यापार प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। यह कार्यक्रम विभिन्न सरकारी योजनाओं और नीतिगत पहलों के अनुरूप तैयार किया गया है।अपने संबोधन में श्रीमती सीतारमण ने “खेत से रेशे तक, कारखाने से फैशन तक और विदेशी बाजारों तक” पूरी कपड़ा मूल्य श्रृंखला को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने भारत की प्राचीन बुनाई और कपड़ा परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह विरासत आज भी देश की वैश्विक पहचान को मजबूत कर रही है। उन्होंने 2030 तक भारत के कपड़ा निर्यात को 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर और कुल कपड़ा उत्पादन को 250 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य को दोहराया।वित्त मंत्री ने बताया कि भारत वर्तमान में विश्व का छठा सबसे बड़ा कपड़ा निर्यातक है। यह क्षेत्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग छह करोड़ लोगों को रोजगार देता है, GDP में लगभग 2.3 प्रतिशत योगदान करता है और कुल निर्यात आय में लगभग 12 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है।Vijay Agarwal, अध्यक्ष, TEXPROCIL ने कहा कि परिषद से जुड़े 2,000 निर्यातक लगभग 11 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निर्यात में योगदान देते हैं और करीब 3.5 करोड़ लोगों की आजीविका का आधार हैं। उन्होंने “कस्तूरी कॉटन” ब्रांड के माध्यम से भारत की सतत कपड़ा पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।और पढ़ें:- CCI कपास बिक्री 70.33 लाख गांठ पार, 2025–26 सीजन में महाराष्ट्र और तेलंगाना सबसे आगे

Related News

Youtube Videos

कपास भाव में उतार-चढ़ाव 😱 जानिए इस हफ्ते का बाजार | CCI नीलामी रिपोर्ट 24 Oct 2026
कपास भाव में उतार-चढ़ाव 😱 जानिए इस हफ्ते का बाजार | CCI नील...
जानिए आज का कपास बाज़ार? 😱कपास, बीज, गठानें, यार्न भाव | Cotton Market Rate Today
जानिए आज का कपास बाज़ार? 😱कपास, बीज, गठानें, यार्न भाव | Co...
आज कपास में तेज़ी या मंदी? 😱 Cotton Market Rate Today | 22 Oct 2026
आज कपास में तेज़ी या मंदी? 😱 Cotton Market Rate Today | 22...

Circular

title Created At Action
रुपया 6 पैसे की बढ़त के साथ 95.69 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। 27-05-2026 16:09:17 view
धुले में खरीफ बुवाई लक्ष्य 3.76 लाख हेक्टेयर, कपास क्षेत्र में गिरावट 27-05-2026 15:25:42 view
कीमतों में नरमी के बावजूद ब्राजील के कपास निर्यात में तेज बढ़ोतरी 27-05-2026 15:18:06 view
भारत में कपास स्टॉक मजबूत, बुवाई क्षेत्र 7% बढ़ने की संभावना 27-05-2026 15:11:01 view
भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 7 पैसे गिरकर 95.75 पर खुला 27-05-2026 09:27:14 view
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 29 पैसे गिरकर 95.68 पर बंद हुआ। 26-05-2026 15:48:34 view
बढ़ती लागत से गुजरात के मैन्युफैक्चरिंग उद्योग पर बढ़ा दबाव 26-05-2026 15:33:50 view
महाराष्ट्र और गुजरात में डीजल संकट व पानी की कमी से खरीफ बुवाई पर खतरा 26-05-2026 15:21:29 view
एल नीनो के प्रभाव से महाराष्ट्र में खरीफ सीजन के दौरान 12% कम बारिश का अनुमान 26-05-2026 15:10:58 view
कृषि विज्ञान: तेज लू और गर्मी से कपास की फसल की सुरक्षा के उपाय 26-05-2026 13:25:38 view
TEXPROCIL पुरस्कार समारोह में 2030 तक भारत के 100 अरब डॉलर टेक्सटाइल निर्यात लक्ष्य पर जोर 26-05-2026 13:01:26 view
Application Download
Whatsapp Contact