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कल्याण कर्नाटक में सूखे का संकट, खरीफ फसलों की पैदावार 30% तक घटने की आशंका

कल्याण कर्नाटक में सूखे से खरीफ फसलों पर संकट, 30% तक उत्पादन घटने की आशंकाकलबुर्गी/यादगीर/बीदर: कल्याण कर्नाटक में लगातार बारिश नहीं होने से खरीफ फसलों पर सूखे का गंभीर असर पड़ रहा है। कृषि अधिकारियों के अनुसार, जिन क्षेत्रों में बुआई पूरी हो चुकी है, वहां मिट्टी में नमी की कमी और फसलों की धीमी वृद्धि के कारण उत्पादन में लगभग 30% तक गिरावट की आशंका है। तूर, मूंग, काला चना, मक्का, कपास, सोयाबीन और सूरजमुखी जैसी प्रमुख फसलें या तो अंकुरित नहीं हो पाई हैं या सूखने लगी हैं।राज्यभर में खरीफ बुआई लक्ष्य के मुकाबले अभी तक केवल 48% पूरी हुई है, जबकि कल्याण कर्नाटक में यह आंकड़ा 43% है। सबसे अधिक प्रभावित विजयनगर जिले में पिछले 35 दिनों से बारिश नहीं हुई है और यहां केवल 30% क्षेत्र में ही बुआई हो सकी है। जिले के संयुक्त कृषि निदेशक डी. टी. मंजूनाथ ने चेतावनी दी कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो पहले से बोई गई 80 से 90% फसलें भी नष्ट हो सकती हैं।कृषि विभाग के निदेशक डॉ. जी. टी. पुत्रा ने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों में वर्षा की स्थिति भिन्न होने से फसलों की हालत भी अलग है। उन्होंने आशंका जताई कि मौजूदा सूखा कपास और तूर उत्पादन बढ़ाने के लिए पिछले वर्षों में किए गए सरकारी प्रयासों को प्रभावित कर सकता है। रायचूर और यादगीर जैसे कपास उत्पादक जिलों में भी उत्पादन घटने का खतरा बना हुआ है।कलबुर्गी जिले के किसान हनुमंतप्पा बेलागुम्पी ने बताया कि हल्की बारिश के बाद उन्होंने तूर और कपास की बुआई की थी, लेकिन इसके बाद बारिश नहीं होने से फसलें अब तक अंकुरित नहीं हुई हैं। हालांकि कृषि विभाग का कहना है कि यदि जल्द बारिश होती है तो 15 अगस्त तक तूर और कपास की बुआई की जा सकती है।कोप्पल जिले में मूंग और सूरजमुखी की फसलें सूखने लगी हैं, जबकि बीदर जिले की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है। किसानों को राहत देने के लिए जिला प्रशासन और कृषि विभाग प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पंजीकरण अभियान तेज कर रहे हैं, ताकि नुकसान की स्थिति में अधिक से अधिक किसानों को आर्थिक सहायता मिल सके।और पढ़ें :- रुपया डॉलर के मुकाबले 38 पैसे गिरकर 95.70 पर खुला.

CCI ने कपास भाव ₹800 बढ़ाए

CCI ने कपास की कीमतें ₹800 बढ़ाईं; साप्ताहिक बिक्री बढ़कर 1.73 लाख गांठें हुईंकॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (CCI) ने 26 जून, 2026 को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान कपास की बिक्री कीमतों में ₹800 प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की। नीलामी में टेक्सटाइल मिलों और कपास व्यापारियों की ज़बरदस्त भागीदारी देखी गई, जिसके परिणामस्वरूप 2025–26 फसल सीज़न से कुल साप्ताहिक बिक्री लगभग 1,73,900 गांठों की हुई।साप्ताहिक बिक्री रिपोर्ट 06 जुलाई, 2026 (सोमवार):सप्ताह की शुरुआत 9,200 गांठों की बिक्री के साथ हुई। मिलों ने 3,400 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 5,800 गांठें उठाईं।07 जुलाई, 2026 (मंगलवार):इस दिन सप्ताह की सबसे ज़्यादा बिक्री दर्ज की गई, जिसमें कुल 70,200 गांठें बिकीं। मिलों ने 28,800 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 41,400 गांठें खरीदीं।08 जुलाई, 2026 (बुधवार):CCI की नीलामी बिक्री 61,000 गांठों की रही। मिलों ने 40,500 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 20,500 गांठें उठाईं।09 जुलाई, 2026 (गुरुवार):बिक्री और घटकर 13,500 गांठें रह गई। मिलों ने 7,800 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 5,700 गांठें खरीदीं।10 जुलाई, 2026 (शुक्रवार):सप्ताह का समापन 20,000 गांठों की बिक्री के साथ हुआ। मिलों ने 10,400 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 9,600 गांठें खरीदीं।कुल बिक्री का अपडेटनवीनतम नीलामियों के साथ, 2025–26 सीज़न के लिए CCI की कुल कपास बिक्री 81,86,800 गांठों तक पहुँच गई है।

गुजरात का ₹134.80 करोड़ कॉटन मिशन

गुजरात ने ₹134.80 करोड़ के कपास उत्पादकता मिशन को मंज़ूरी दी; किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹14,000 तक मिलेंगेगुजरात सरकार ने राज्य में 'कपास उत्पादकता मिशन' (कॉटन रेवोल्यूशन मिशन) लागू करके कपास का उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार करने के लिए एक बड़ी पहल की घोषणा की है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने भारत सरकार के उस महत्वाकांक्षी पांच-वर्षीय मिशन के तहत इस कार्यक्रम को मंज़ूरी दी है, जिसका उद्देश्य कपास की उत्पादकता बढ़ाना, आयात कम करना और खेती के आधुनिक तरीकों को बढ़ावा देना है।कृषि मंत्री जीतूभाई वघाणी ने कहा कि केंद्र ने 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए यह मिशन शुरू किया है। भारत के प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में से एक होने के नाते, गुजरात को चालू वर्ष के लिए ₹134.80 करोड़ आवंटित किए गए हैं। राज्य का लक्ष्य कपास उगाने वाले 21 ज़िलों में एक लाख हेक्टेयर से अधिक ज़मीन को इस कार्यक्रम के दायरे में लाना है।इस मिशन के तहत, उन किसानों को आर्थिक सहायता दी जाएगी जो कपास की खेती के वैज्ञानिक और आधुनिक तरीकों को अपनाएंगे।जो किसान 'क्लोज़र स्पेसिंग टेक्नोलॉजी' (पौधों के बीच कम दूरी रखने की तकनीक) अपनाएंगे, जिसमें कपास को 90 cm × 30 cm की दूरी पर लगाया जाता है, उन्हें इनपुट सहायता के तौर पर प्रति हेक्टेयर ₹14,000 मिलेंगे। जो किसान 90 cm × 60 cm के पैटर्न के साथ 'इंटीग्रेटेड क्रॉप मैनेजमेंट' (ICM) का पालन करेंगे, वे प्रति हेक्टेयर ₹7,500 पाने के हकदार होंगे।हालांकि, यह लाभ एक साल में प्रति किसान अधिकतम 2 हेक्टेयर ज़मीन के लिए ही मिलेगा।इस योजना का लाभ उठाने के लिए, किसानों को सरकार द्वारा मंज़ूर या प्रमाणित कपास की किस्मों या मंज़ूरशुदा Bt कॉटन बीजों की खेती करनी होगी। उन्हें 'किसान रजिस्ट्री' में भी पंजीकृत होना होगा, जो इस मिशन के तहत लाभ पाने के लिए ज़रूरी है।आर्थिक सहायता के अलावा, सरकार पूरे साल विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगी ताकि किसानों को खेती की बेहतर तकनीकें अपनाने, उत्पादकता बढ़ाने और फसल की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिल सके।कृषि मंत्री ने कहा कि इस पहल से भारत के प्रमुख कपास उत्पादक राज्य के तौर पर गुजरात की स्थिति मज़बूत होने की उम्मीद है, साथ ही खेती के बेहतर तरीकों से किसानों को बेहतर आमदनी भी सुनिश्चित होगी। योग्य किसान अब i-Khedut पोर्टल के ज़रिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, जो 10 जुलाई, 2026 से आवेदन के लिए खोल दिया गया है। सरकार ने इच्छुक किसानों से आग्रह किया है कि वे 'कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन' के तहत मिलने वाले लाभों का फ़ायदा उठाने के लिए तय समय-सीमा के भीतर अपना रजिस्ट्रेशन पूरा करें और आवेदन जमा करें।और पढ़ें :- सेंधवा में 64% खरीफ बुवाई पूरी, मक्का के साथ कपास की खेती में किसानों की बढ़ी रुचि

सेंधवा में 64% खरीफ बुवाई पूरी, मक्का के साथ कपास की खेती में किसानों की बढ़ी रुचि

सेंधवा ब्लॉक में 64% खरीफ बोवनी पूरी, मक्का के बाद कपास की खेती की ओर बढ़ा किसानों का रुझानसेंधवा: मानसून के सक्रिय होने के साथ ही मध्य प्रदेश के सेंधवा ब्लॉक में खरीफ फसलों की बोवनी ने रफ्तार पकड़ ली है। कृषि विभाग के अनुसार, अब तक 38,426 हेक्टेयर क्षेत्र में बोवनी पूरी हो चुकी है, जो कुल 60,097 हेक्टेयर खरीफ रकबे का लगभग 64 प्रतिशत है। विभाग का अनुमान है कि मौसम अनुकूल रहने पर अगले एक सप्ताह में शत-प्रतिशत बोवनी पूरी हो जाएगी।कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष किसानों का रुझान मक्का के साथ-साथ कपास की खेती की ओर भी बढ़ा है। अब तक 14,170 हेक्टेयर क्षेत्र में मक्का की बोवनी की जा चुकी है। पिछले वर्ष इसी अवधि में मक्का का रकबा 21,800 हेक्टेयर था। वहीं, नकदी फसल कपास की बोवनी इस सीजन में 7,581 हेक्टेयर तक पहुंच चुकी है, जबकि पिछले वर्ष यह 10,830 हेक्टेयर रही थी।तिलहनी फसलों में सोयाबीन की बोवनी 5,246 हेक्टेयर क्षेत्र में दर्ज की गई है। दलहनी फसलों में अरहर 2,370 हेक्टेयर, उड़द 2,365 हेक्टेयर और मूंग 2,289 हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गई है। इसके अलावा ज्वार की बोवनी 2,744 हेक्टेयर में पूरी हो चुकी है। कृषि विभाग का कहना है कि आगामी दिनों में बारिश जारी रहने पर शेष क्षेत्र में भी तेजी से बोवनी पूरी होने की संभावना है।इस बार कपास की खेती में उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को हाई डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम (एचडीपीएस) तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिला प्रशासन और कृषि विभाग किसानों को इस आधुनिक पद्धति का प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन दे रहे हैं। इस तकनीक के तहत कम दूरी पर अधिक पौधे लगाए जाते हैं, जिससे प्रति हेक्टेयर पौधों की संख्या बढ़ती है। संतुलित उर्वरक प्रबंधन, समय पर सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और पौधों की टॉपिंग जैसी वैज्ञानिक विधियों से बेहतर गुणवत्ता और अधिक उत्पादन मिलने की संभावना रहती है।सेंधवा कृषि विभाग के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी (एसएडीओ) डी.एस. गणावा ने बताया कि ब्लॉक में अब तक 64 प्रतिशत से अधिक खरीफ बोवनी पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि यदि मौसम अनुकूल बना रहा और नियमित बारिश होती रही, तो अगले एक सप्ताह में पूरे ब्लॉक में खरीफ फसलों की बोवनी का कार्य पूर्ण होने की उम्मीद है।और पढ़ें :-मनावर में खरीफ बुवाई अंतिम चरण में, 28 हजार हेक्टेयर में कपास और सोयाबीन की खेती

मनावर में खरीफ बुवाई अंतिम चरण में, 28 हजार हेक्टेयर में कपास और सोयाबीन की खेती

मनावर में खरीफ बोवनी लगभग पूरी, 28 हजार हेक्टेयर में कपास और सोयाबीन की खेती; बारिश से फसलों को मिला फायदामनावर: मध्य प्रदेश के मनावर क्षेत्र में खरीफ सीजन की बोवनी लगभग पूरी हो चुकी है। इस वर्ष किसानों ने करीब 28 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में प्रमुख खरीफ फसलों की बुआई की है। इनमें लगभग 21 हजार हेक्टेयर में कपास और 7 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सोयाबीन की खेती की गई है। पिछले 24 घंटों में हुई एक इंच से अधिक बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी बनी है, जिससे फसलों की शुरुआती बढ़वार को बड़ा लाभ मिला है।कृषि विभाग के अनुसार, समय पर सक्रिय हुए मानसून के कारण किसानों ने निर्धारित अवधि के भीतर बोवनी का कार्य पूरा कर लिया। हाल की बारिश से विशेष रूप से सोयाबीन की फसल का अंकुरण बेहतर हुआ है और खेतों में पौधों की वृद्धि संतोषजनक दिखाई दे रही है।कृषि विभाग के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी (एसएडीओ) महेश बर्मन ने बताया कि शुरुआती चरण में मिली नमी फसलों के विकास के लिए बेहद लाभदायक है। उन्होंने कहा कि अब अधिकांश किसान खरपतवार नियंत्रण, कीट एवं रोग प्रबंधन के लिए आवश्यक दवाइयों का छिड़काव शुरू कर चुके हैं। समय पर किए गए इन कृषि कार्यों से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन बेहतर होने की संभावना बढ़ जाती है।स्थानीय किसान राजू देवड़ा ने बताया कि मंगलवार शाम से शुरू हुई बारिश बुधवार तक लगातार जारी रही। दिनभर आसमान में बादल छाए रहने से किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में भी अच्छी बारिश होगी। उनका कहना है कि यदि जुलाई के शेष दिनों में भी पर्याप्त वर्षा होती रही तो कपास और सोयाबीन दोनों फसलों की बढ़वार अच्छी रहेगी और उत्पादन में बढ़ोतरी की संभावना बनेगी।कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि फसल की शुरुआती अवस्था में पर्याप्त नमी मिलना अच्छी पैदावार के लिए महत्वपूर्ण होता है। कृषि विभाग ने किसानों को खेतों का नियमित निरीक्षण करने, जलभराव से बचाव करने तथा खरपतवार, कीट और रोगों के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी है। अधिकारियों के अनुसार, वैज्ञानिक तरीके से फसल प्रबंधन और समय पर देखभाल से उत्पादन लागत कम करने के साथ बेहतर उपज प्राप्त की जा सकती है। किसान भी मौसम की अनुकूल स्थिति को देखते हुए आगामी दिनों में फसलों की नियमित निगरानी और आवश्यक कृषि कार्यों में जुटे हुए हैं।और पढ़ें :- बेहतर मानसून से जुलाई में तेज हुई कपास की बुवाई, फिर भी पिछले साल से पीछे

बेहतर मानसून से जुलाई में तेज हुई कपास की बुवाई, फिर भी पिछले साल से पीछे

जुलाई में तेज हुई कपास की बुआई, फिर भी पिछले साल से पीछे; बेहतर मॉनसून से बढ़ी रफ्तारनई दिल्ली: दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दोबारा सक्रिय होने से देशभर में जुलाई के दौरान कपास (कॉटन) की बुआई में तेजी आई है। हालांकि, बुआई का कुल रकबा अभी भी पिछले वर्ष की तुलना में कम बना हुआ है। कृषि आयुक्त पी.के. सिंह ने बताया कि बेहतर बारिश के कारण प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में बुआई की गति बढ़ी है और आने वाले दिनों में यह अंतर और कम होने की उम्मीद है।कृषि आयुक्त के अनुसार, 5 जुलाई तक देश में 63.18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुआई हो चुकी थी, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 82 लाख हेक्टेयर था। यानी इस बार शुरुआत धीमी रही, लेकिन जुलाई में अच्छी बारिश के बाद किसानों ने तेजी से बुआई शुरू कर दी है।उन्होंने बताया कि भारत में कपास की बुआई अलग-अलग राज्यों में अलग समय पर होती है। इसकी शुरुआत पंजाब और हरियाणा से होती है और बाद में गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु तक फैलती है। सामान्य परिस्थितियों में कपास की बुआई 15 जुलाई तक पूरी हो जाती है, लेकिन इस वर्ष मॉनसून में देरी के कारण इसकी अंतिम तिथि बढ़ाकर 30 जुलाई कर दी गई है।अहमदाबाद के एक कृषि व्यापारी के अनुसार, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और कर्नाटक में हाल के दिनों में अच्छी बारिश होने से कपास की बुआई में उल्लेखनीय तेजी आई है। उन्होंने बताया कि बेहतर दाम मिलने की उम्मीद में कुछ किसान धान की जगह कपास और दलहनी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। वहीं महाराष्ट्र में कई किसानों ने सोयाबीन की कमजोर अंकुरण की शिकायत के बाद दोबारा कपास की बुआई शुरू की है।भारत के प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्रों में गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश का केंद्रीय क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण है। इसके अलावा पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु भी प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।कृषि मंत्रालय के नवीनतम अनुमान के अनुसार, वर्ष 2025-26 में देश का कपास उत्पादन 290.91 लाख गांठ (प्रति गांठ 170 किलोग्राम) रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 297.24 लाख गांठ से कम है।पी.के. सिंह ने बताया कि खरीफ सीजन में बुआई की सबसे अधिक रफ्तार जुलाई में रहती है। जून में जहां औसतन हर सप्ताह लगभग 50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई होती है, वहीं जुलाई में यह बढ़कर 200 से 250 लाख हेक्टेयर प्रति सप्ताह तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि उत्पादन और उत्पादकता का सटीक आकलन बुआई पूरी होने के बाद ही किया जा सकेगा। सरकार बुआई के आंकड़ों की पुष्टि प्रारंभिक अनुमान, रिमोट सेंसिंग और ब्लॉक स्तर के डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से करती है।और पढ़ें :- महाराष्ट्र के केज तालुका में खरीफ बुवाई लगभग पूरी, 64 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती

महाराष्ट्र के केज तालुका में खरीफ बुवाई लगभग पूरी, 64 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती

महाराष्ट्र के केज तालुका में खरीफ बुआई ने पकड़ी रफ्तार, 70 हजार हेक्टेयर में खेती; 64 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन की बुआईकेज (बीड): महाराष्ट्र के बीड जिले के केज तालुका में इस वर्ष अनुकूल मॉनसूनी बारिश के चलते खरीफ सीजन की बुआई लगभग पूरी हो चुकी है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अब तक 69,813 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई की जा चुकी है। इनमें सबसे अधिक 64,215 हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुआई हुई है, जबकि कपास की खेती केवल 1,943 हेक्टेयर में की गई है। इससे स्पष्ट है कि इस बार भी किसानों का सबसे अधिक भरोसा सोयाबीन पर बना हुआ है।किसानों ने मई के अंतिम सप्ताह से ही खेतों की जुताई, बीज और उर्वरकों की व्यवस्था सहित खरीफ सीजन की तैयारियां शुरू कर दी थीं। 6 जून से लगातार तीन दिन हुई अच्छी बारिश के बाद किसानों ने बड़े पैमाने पर सोयाबीन और अन्य खरीफ फसलों की बुआई शुरू कर दी। शुरुआती बारिश से अच्छी प्रगति हुई, लेकिन इसके बाद लगभग 15 दिनों तक बारिश नहीं होने से बुआई की रफ्तार धीमी पड़ गई। कई किसानों ने अगली बारिश का इंतजार करते हुए खेतों में बुआई रोक दी थी।20 जून के बाद दोबारा अच्छी बारिश होने पर किसानों ने तेजी से खेतों में काम शुरू किया और बुआई का दायरा तेजी से बढ़ा। इसके परिणामस्वरूप तालुका में कुल 69,813 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई पूरी हो गई। सोयाबीन के अलावा मूंग, उड़द, अरहर और मक्का की भी बुआई की गई है, हालांकि इनका रकबा सोयाबीन की तुलना में काफी कम है। कपास की खेती भी सीमित क्षेत्र तक ही सिमटी रही।जून के पहले सप्ताह में बोई गई सोयाबीन और अन्य फसलें अच्छी तरह अंकुरित हो चुकी हैं। हालांकि, बीच में बारिश रुकने से फसलों की बढ़वार प्रभावित होने की आशंका बनी थी। कई किसानों ने उपलब्ध जल स्रोतों से सिंचाई कर फसलों को बचाने का प्रयास किया। जून के अंतिम सप्ताह में बोई गई सोयाबीन की फसल भी अब निकल चुकी है और खेतों में हरियाली दिखाई देने लगी है।फिलहाल किसान अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए हुए हैं। पिछले एक सप्ताह से क्षेत्र में बादल तो छाए हुए हैं, लेकिन पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है। किसानों का कहना है कि यदि जुलाई के दूसरे पखवाड़े में अच्छी बारिश होती है तो सोयाबीन सहित सभी खरीफ फसलों की बढ़वार बेहतर होगी और उत्पादन में भी बढ़ोतरी की संभावना रहेगी। कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि समय पर वर्षा जारी रहने पर इस वर्ष केज तालुका में खरीफ उत्पादन संतोषजनक रहने की उम्मीद है।और पढ़ें :- मजबूत मानसून से महाराष्ट्र में खरीफ बुवाई तेज, एक सप्ताह में 20% से 45% पहुंचा रकबा

मजबूत मानसून से महाराष्ट्र में खरीफ बुवाई तेज, एक सप्ताह में 20% से 45% पहुंचा रकबा

मजबूत मॉनसून से महाराष्ट्र में खरीफ बुआई को रफ्तार, एक हफ्ते में कवरेज 20% से बढ़कर 45%नासिक: महाराष्ट्र में सक्रिय मॉनसून और लगातार हो रही अच्छी बारिश ने खरीफ फसलों की बुआई को तेज़ गति दे दी है। राज्य कृषि विभाग के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, 1 जुलाई को जहां खरीफ बुआई कुल रकबे के 20% तक सीमित थी, वहीं 7 जुलाई तक यह बढ़कर 45% हो गई। अधिकारियों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में बारिश का मौजूदा क्रम बना रहा तो बुआई का कार्य और तेज़ी से आगे बढ़ेगा।राज्य के औसत 1.44 करोड़ हेक्टेयर खरीफ क्षेत्र (गन्ने को छोड़कर) में अब तक करीब 65 लाख हेक्टेयर में बुआई पूरी हो चुकी है। डिवीजनवार आंकड़ों में अमरावती सबसे आगे है, जहां 58% क्षेत्र में बुआई हो चुकी है। इसके बाद छत्रपति संभाजीनगर में 53% और नासिक डिवीजन में 50% बुआई दर्ज की गई है।नासिक डिवीजन, जिसमें नासिक, धुले, जलगांव और नंदुरबार जिले शामिल हैं, में हालिया बारिश के बाद बुआई में उल्लेखनीय तेजी देखी गई। यहां 20.33 लाख हेक्टेयर के औसत खरीफ क्षेत्र में से लगभग 10.24 लाख हेक्टेयर में बुआई पूरी हो चुकी है। दूसरी ओर, कोंकण क्षेत्र में बुआई की गति अभी धीमी बनी हुई है और 3.92 लाख हेक्टेयर के औसत क्षेत्र में केवल 4% बुआई हुई है। पुणे डिवीजन में 28% और कोल्हापुर डिवीजन में 22% क्षेत्र में बुआई पूरी हुई है।महाराष्ट्र में सोयाबीन, कपास, मक्का, धान, ज्वार, बाजरा, मूंग और उड़द प्रमुख खरीफ फसलें हैं। इनमें सोयाबीन और कपास का दबदबा बना हुआ है, जो मिलकर राज्य के कुल खरीफ रकबे का 62% से अधिक हिस्सा घेरते हैं। सोयाबीन की बुआई 47.21 लाख हेक्टेयर के अनुमानित क्षेत्र में से 23.58 लाख हेक्टेयर यानी लगभग 50% में पूरी हो चुकी है। वहीं, कपास की बुआई 42.47 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 25.38 लाख हेक्टेयर यानी करीब 60% क्षेत्र में पूरी हो चुकी है।मक्का की बुआई भी अच्छी प्रगति पर है और अब तक 9.33 लाख हेक्टेयर के अनुमानित क्षेत्र में से 5.71 लाख हेक्टेयर (61%) में बुआई हो चुकी है। हालांकि, धान की रोपाई अभी शुरुआती चरण में है और 15.02 लाख हेक्टेयर के अनुमानित क्षेत्र में से केवल 1.40 लाख हेक्टेयर (9%) में ही रोपाई पूरी हुई है।1 जून से 7 जुलाई के बीच महाराष्ट्र में 290.7 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य 282.3 मिमी का 103% है। कृषि विभाग का मानना है कि सामान्य से बेहतर बारिश का यही सिलसिला जारी रहा तो खरीफ सीजन में बुआई समय पर पूरी होने के साथ उत्पादन की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।और पढ़ें :- कपास बुवाई तेज, 30 जुलाई लक्ष्य संभव

कपास बुवाई तेज, 30 जुलाई लक्ष्य संभव

कपास बुवाई ने पकड़ी रफ्तार, 30 जुलाई तक बुवाई लक्ष्य पूरा होने की संभावना– अतुल भाई गणात्राश्री अतुल भाई गणात्रा जी, CMD, Radha Laxmi Group एवं Former CAI President, ने दिनांक 09 जुलाई 2026 को CNBC आवाज़ को दिए गए अपने इंटरव्यू में "Impact of Monsoon on Cotton Sowing & Farmers' Mood for Crop Switch" विषय पर महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए।उन्होंने बताया कि अब तक खरीफ फसलों की बुवाई में लगभग 20–30% की कमी की चर्चा की जा रही थी, किंतु हाल के दिनों में देश के विभिन्न क्षेत्रों में हुई अच्छी एवं व्यापक वर्षा के परिणामस्वरूप स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है।09 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, गत वर्ष इसी अवधि तक लगभग 72 लाख हेक्टेयर में कपास की बुवाई हुई थी, जबकि चालू सीज़न में यह आंकड़ा लगभग 66 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुका है। अर्थात् अब बुवाई का क्षेत्रफल पिछले वर्ष की तुलना में केवल लगभग 9% ही पीछे रह गया है।उन्होंने आगे बताया कि पिछले कुछ दिनों में Central एवं South Zones में अच्छी वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार आगामी 8–10 दिनों तक वर्षा में विराम (Pause Period) रहने की संभावना है, जिससे किसानों को बुवाई कार्य तेज़ी से पूरा करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा। ऐसे में कपास की बुवाई का आंकड़ा अनुमान से कहीं अधिक बढ़ सकता है।उन्होंने विशेष रूप से कहा कि इस वर्ष कपास के बीजों की रिकॉर्ड बिक्री हुई है, जिससे यह स्पष्ट है कि किसानों के पास पर्याप्त मात्रा में कॉटन सीड उपलब्ध है। किसान केवल वर्षा रुकने और खेतों में अनुकूल परिस्थितियां बनने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, ताकि बुवाई का कार्य तेज़ी से पूरा किया जा सके। उनका अनुमान है कि 30 जुलाई तक देश में कपास बुवाई का निर्धारित लक्ष्य पूरा हो सकता है।भारत सरकार ने चालू वर्ष के लिए कपास बुवाई का लक्ष्य 125–130 लाख हेक्टेयर निर्धारित किया है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए उम्मीद है कि 20–25 जुलाई तक देश में लगभग 100 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई पूर्ण हो जाएगी।श्री गणात्रा ने कहा कि यह सर्वविदित है कि जब मानसून में विलंब होता है अथवा वर्षा कम होती है, तब किसान खरीफ की अन्य फसलों की अपेक्षा कपास को प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि सोयाबीन, गन्ना, मक्का एवं मूंगफली जैसी फसलों की तुलना में कपास की फसल अपेक्षाकृत कम पानी में भी सफलतापूर्वक उगाई जा सकती है।उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस वर्ष कपास के MSP में लगभग 7% की वृद्धि की गई है, जबकि मूंगफली जैसी अन्य फसलों के MSP में लगभग 3% की ही वृद्धि हुई है। इसके अतिरिक्त, पिछले सीज़न में किसानों को कपास का बाज़ार भाव ₹10,000 प्रति क्विंटल तक प्राप्त हुआ था। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस वर्ष किसानों द्वारा बुवाई के लिए रिकॉर्ड मात्रा में कॉटन सीड की खरीद की गई है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि इस सीज़न में कपास की ओर फसल परिवर्तन (Crop Diversion) स्वाभाविक रूप से बढ़ा है।उन्होंने यह भी बताया कि दक्षिण भारत (South Zone) में इस वर्ष अब तक कपास की बुवाई पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 20% अधिक हो चुकी है, जो किसानों के सकारात्मक रुझान और अनुकूल परिस्थितियों का संकेत है।उन्होंने विशेष रूप से बताया कि गुजरात में कपास की बुवाई की अवधि 15 अगस्त तक खुली रहती है। इसलिए वर्तमान परिस्थितियों, किसानों की रुचि तथा रिकॉर्ड बीज बिक्री को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा सकता है कि चालू सीज़न में कपास का कुल बुवाई क्षेत्र पिछले वर्ष की तुलना में 10–15% तक अधिक रह सकता है।और पढ़ें:- गिरिराज सिंह ने वस्त्र क्षेत्र की प्रमुख योजनाओं की समीक्षा की, ITADCs की भूमिका पर दिया जोर

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कल्याण कर्नाटक में सूखे का संकट, खरीफ फसलों की पैदावार 30% तक घटने की आशंका 13-07-2026 11:20:29 view
रुपया डॉलर के मुकाबले 38 पैसे गिरकर 95.70 पर खुला. 13-07-2026 09:19:45 view
CCI ने कपास भाव ₹800 बढ़ाए 11-07-2026 15:23:57 view
गुजरात का ₹134.80 करोड़ कॉटन मिशन 11-07-2026 12:46:03 view
सेंधवा में 64% खरीफ बुवाई पूरी, मक्का के साथ कपास की खेती में किसानों की बढ़ी रुचि 11-07-2026 12:40:53 view
मनावर में खरीफ बुवाई अंतिम चरण में, 28 हजार हेक्टेयर में कपास और सोयाबीन की खेती 11-07-2026 12:20:38 view
बेहतर मानसून से जुलाई में तेज हुई कपास की बुवाई, फिर भी पिछले साल से पीछे 11-07-2026 12:11:38 view
महाराष्ट्र के केज तालुका में खरीफ बुवाई लगभग पूरी, 64 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती 11-07-2026 11:54:20 view
मजबूत मानसून से महाराष्ट्र में खरीफ बुवाई तेज, एक सप्ताह में 20% से 45% पहुंचा रकबा 11-07-2026 11:22:45 view
कपास बुवाई तेज, 30 जुलाई लक्ष्य संभव 10-07-2026 17:29:38 view
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 06 पैसे गिरकर 95.32 पर बंद हुआ। 10-07-2026 17:25:23 view
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