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अत्यधिक गर्मी के कारण कपास की खेती संकट में; मॉनसून-पूर्व बुवाई में वृद्धि

2026-05-04 12:31:07
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भीषण गर्मी से कपास की खेती पर संकट, किसान प्री-मानसून बुवाई की ओर बढ़े

अकोला जिले में इस साल पड़ रही भीषण गर्मी ने कपास की खेती पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। अप्रैल महीने से ही तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, जबकि कई क्षेत्रों में यह 47 डिग्री तक पहुंच गया है। ऐसे हालातों में किसानों के लिए गर्मियों में कपास की बुवाई करना बेहद जोखिम भरा हो गया है।

तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण मिट्टी की सतह अत्यधिक गर्म हो रही है, जिससे बोए गए बीजों के जलने या अंकुरित होने से पहले ही खराब होने का खतरा बढ़ गया है। इस स्थिति ने किसानों की चिंता को और गहरा कर दिया है, जिसके चलते कई किसान अब गर्मी के मौसम में कपास की खेती से दूरी बना रहे हैं।

इसके साथ ही पानी की समस्या भी विकराल होती जा रही है। कुओं, तालाबों और बोरवेल का जलस्तर तेजी से गिर रहा है, जिससे सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इस वजह से बागवानी करने वाले किसान भी कपास की खेती से पीछे हटने लगे हैं।

इन चुनौतियों को देखते हुए अब किसानों का रुझान प्री-मानसून बुवाई की ओर बढ़ रहा है। उनका मानना है कि यदि खेती सही समय पर और अनुकूल मौसम में की जाए, तो उत्पादन बेहतर हो सकता है।

कृषि विभाग ने भी किसानों को सलाह दी है कि वे तापमान कम होने तक कपास की बुवाई न करें। जल्दबाजी में लिया गया फैसला आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है। साथ ही, अधिक गर्मी में कीटों का प्रकोप बढ़ने की संभावना भी जताई गई है।

यदि आने वाले हफ्तों में गर्मी का प्रकोप जारी रहता है, तो कपास उत्पादन पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। इसलिए किसानों को मौसम के पूर्वानुमान और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर ही खेती की योजना बनानी चाहिए।


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