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तमिलनाडु: नागपट्टिनम ज़िले में लगातार बारिश से किसान चिंतित

नागापट्टिनम ज़िला, तमिलनाडु में लगातार बारिश से कपास किसानों की बढ़ी चिंतानागापट्टिनम ज़िला, तमिलनाडु में पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही गर्मियों की बारिश ने थिरुमारुगल ब्लॉक के कई इलाकों में कपास की खेती को प्रभावित किया है। खेतों में बारिश का पानी भर जाने से किसानों को फ़सल खराब होने की आशंका सताने लगी है।रिपोर्ट के मुताबिक, आधी रात से थिरुमारुगल, अलाथुर, एरावंचेरी, मरुंगुर, नेइकुप्पई, थिरुकन्नपुरम, अंबल, पोलगम और आसपास के क्षेत्रों में लगातार बारिश हो रही है। ज़िले के कई हिस्सों में पिछले तीन दिनों से तेज़ गर्मियों की बारिश दर्ज की गई है।थिरुमारुगल ब्लॉक में किसानों ने बड़े पैमाने पर गर्मियों की फ़सल के रूप में कपास की बुवाई की थी। इस समय फसल में फूल आने और डोडे बनने का चरण चल रहा है। हालांकि, कई किसान अभी तक खेतों में मिट्टी चढ़ाने का काम पूरा नहीं कर पाए हैं। लगातार बारिश के चलते कई खेतों में पानी जमा हो गया है, जिससे कपास के पौधों की बढ़वार प्रभावित हो रही है।कपास किसान आर. शिवा ने बताया, “बारिश के कारण कपास के पौधों पर लगे फूल झड़ रहे हैं, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।”एक अन्य किसान पी. कथिर ने कहा कि यदि खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहा तो पौधों की जड़ें सड़ सकती हैं, जिससे किसानों को गंभीर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बारिश इसी तरह जारी रही तो नुकसान और बढ़ सकता है।और पढ़ें :- CCI ने कॉटन कैंडी कीमत ₹4,100 बढ़ाई, नीलामी 5.85 लाख गांठ पार

CCI ने कॉटन कैंडी कीमत ₹4,100 बढ़ाई, नीलामी 5.85 लाख गांठ पार

CCI ने कॉटन कैंडी की कीमतें ₹4,100 प्रति कैंडी बढ़ाईं; साप्ताहिक नीलामी बिक्री 5.85 लाख गांठों के पारकॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (CCI) ने 4 मई से 8 मई, 2026 के सप्ताह के दौरान कॉटन की कीमतों में ₹4,100 प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की। इन नीलामियों में मिलों और कॉटन व्यापारियों की ज़ोरदार भागीदारी देखने को मिली, जिसके परिणामस्वरूप 2025–26 सीज़न के स्टॉक से लगभग 5,85,500 गांठों की साप्ताहिक बिक्री हुई।साप्ताहिक बिक्री रिपोर्ट 4 मई, 2026 (सोमवार):सप्ताह की शुरुआत मज़बूत रही, जिसमें एक ही दिन में सबसे ज़्यादा 2,36,400 गांठों की बिक्री दर्ज की गई। मिलों ने 89,600 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 1,46,800 गांठें खरीदकर खरीदारी में बढ़त बनाई।5 मई, 2026 (मंगलवार):नीलामी की गतिविधियाँ थोड़ी धीमी पड़ गईं, और कुल बिक्री 159,900 गांठों तक पहुँची। मिलों ने 70,600 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 89,300 गांठें खरीदीं।6 मई, 2026 (बुधवार):CCI ने इस दिन कुल 121,900 गांठों की बिक्री की जानकारी दी। मिलों ने 55,300 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 66,600 गांठें खरीदीं।7 मई, 2026 (गुरुवार):बिक्री की मात्रा में और गिरावट आई, और इस सत्र के दौरान 40,300 गांठें बिकीं। मिलों ने 22,300 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 18,000 गांठें खरीदीं। 8 मई, 2026 (शुक्रवार):सप्ताह का समापन कुल 27,000 गांठों की बिक्री के साथ हुआ। मिलों ने 12,000 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारी सक्रिय रहे और उन्होंने कुल 15,000 गांठें खरीदीं।कुल बिक्री की जानकारीCCI की कुल बिक्री अब यहाँ तक पहुँच गई है:2025–26 सीज़न: 65,98,000 गांठें

Bt कपास बीज बिक्री पर सरकार सख्त, बुवाई से पहले इंतजार जरूरी..!

कपास किसानों के लिए अहम अपडेट: Bt बीजों की बिक्री और बुवाई पर सरकार सख्त, अभी करना होगा इंतज़ार..!जलगांव: आगामी खरीफ सीजन 2026 को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने कपास फसल में गुलाबी इल्ली (Pink Bollworm) के बढ़ते खतरे को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। राज्य के कृषि, पशुपालन, डेयरी विकास एवं मत्स्य पालन विभाग ने Bt कपास बीजों की बिक्री, आपूर्ति और बुवाई को लेकर नई समय-सारिणी लागू करने के निर्देश जारी किए हैं।8 मई 2026 को जारी सरकारी परिपत्र के अनुसार, राज्य की सभी कृषि एजेंसियों और अधिकारियों को इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। मंत्रालय द्वारा पुणे स्थित कृषि आयुक्त कार्यालय को भेजे गए निर्देशों में साफ कहा गया है कि समय से पहले कपास की बुवाई गुलाबी इल्ली के प्रकोप को बढ़ावा देती है, जिससे उत्पादन पर गंभीर असर पड़ता है।सरकार का मानना है कि जल्द बुवाई से कीटों के जीवन चक्र को अनुकूल वातावरण मिलता है, जिसके कारण फसल को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। पिछले कुछ वर्षों में जलगांव समेत राज्य के कई प्रमुख कपास उत्पादक जिलों में गुलाबी इल्ली से किसानों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार सरकार ने पहले से ही सतर्कता बढ़ा दी है।सरकारी आदेश में किसानों से अपील की गई है कि वे केवल कृषि विभाग की अनुशंसित अवधि में ही कपास की बुवाई करें। साथ ही जिला और तालुका स्तर के कृषि अधिकारियों को जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसानों को प्रमाणित और अधिकृत Bt बीजों के उपयोग की जानकारी दी जा सके।इसके अलावा प्रशासन को अवैध और अनधिकृत बीजों की बिक्री पर नजर रखने तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।और पढ़ें :- रुपया 40 पैसे की गिरावट के साथ 94.88 पर खुला

कपास पर आयात शुल्क पूरी तरह समाप्त करने की मांग तेज

‘कपास पर आयात शुल्क पूरी तरह हटाने की मांग’कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (CITI) द्वारा जारी एक नए अध्ययन में कपास पर वर्तमान में लगने वाले 11% आयात शुल्क को पूरी तरह से खत्म करने की मांग की गई है।"भारत में कपास की आपूर्ति, मूल्य निर्धारण और व्यापार नीति का आर्थिक विश्लेषण" शीर्षक वाली यह रिपोर्ट बताती है कि यह आयात शुल्क देश के कपड़ा और परिधान क्षेत्रों की प्रतिस्पर्धात्मकता पर बुरा असर डाल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि जब घरेलू उत्पादन कम हो, तो उसे आयातित कपास तक आसान और भरोसेमंद पहुंच मिले।इंटरनेशनल कॉटन एडवाइजरी कमेटी (ICAC) और Gherzi द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किए गए इस अध्ययन में बताया गया है कि कपास पर आयात शुल्क अगस्त से दिसंबर 2025 तक अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया था, लेकिन बाद में 1 जनवरी 2026 से इसे फिर से लागू कर दिया गया।रिपोर्ट में बताया गया है कि जब से 2021 में यह शुल्क पहली बार लागू किया गया था, तब से दो बार अस्थायी राहत दी गई है; हालांकि, अब उद्योग इसे स्थायी रूप से हटाने की मांग कर रहा है। उद्योग का तर्क है कि भारत के मुख्य प्रतिस्पर्धी देश—श्रीलंका, बांग्लादेश, वियतनाम और पाकिस्तान—कपास के आयात पर इस तरह के प्रतिबंध नहीं लगाते हैं।यह अध्ययन कपास के लिए एक 'रणनीतिक भंडार' (Strategic Reserve) स्थापित करने का भी सुझाव देता है, जो चीन के मॉडल पर आधारित हो। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में कपड़ा और परिधान का निर्यात 2.2% घटकर 35.79 अरब डॉलर रह गया।गुरुवार को कोयंबटूर में आयोजित एक मीडिया ब्रीफिंग में बोलते हुए, CITI के अध्यक्ष अश्विन चंद्रन ने कहा कि Gherzi-ICAC की रिपोर्ट कपड़ा और परिधान उद्योग के लिए 2030 तक 350 अरब डॉलर का लक्ष्य हासिल करने के लिए एक व्यावहारिक और विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करती है।इस बीच, सदर्न इंडिया मिल्स एसोसिएशन (SIMA) के महासचिव के. सेल्वाराजू ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में कपास की खेती के तहत आने वाला क्षेत्र लगभग 20% कम हो गया है, और भारत में उत्पादकता का स्तर काफी कम बना हुआ है। उन्होंने कहा कि 2030 का लक्ष्य हासिल करने के लिए, उद्योग को लगभग 15% की वार्षिक दर से बढ़ने की आवश्यकता होगी। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में, यह एक चुनौतीपूर्ण कार्य प्रतीत होता है।उन्होंने यह भी बताया कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ गई है। इसके अलावा, गैस की कमी के साथ-साथ तेल-आधारित कच्चे माल, रंगों और रसायनों की बढ़ती कीमतों ने कपड़ा और परिधान उद्योग पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है।और पढ़ें:- खानदेश में कपास का रकबा 8 लाख हेक्टेयर से नीचे जाने की आशंका

खानदेश में कपास का रकबा 8 लाख हेक्टेयर से नीचे जाने की आशंका

खानदेश में घटेगी कपास की बुवाई, रकबा 8 लाख हेक्टेयर से नीचे जाने की आशंकाखानदेश क्षेत्र में लगातार दूसरे वर्ष कपास की खेती के रकबे में गिरावट आने की संभावना है। अनुमान है कि इस साल क्षेत्र में कुल कपास बुवाई 8 लाख हेक्टेयर से कम रह सकती है। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा जलगांव जिले का होगा, जहाँ लगभग 4.75 लाख हेक्टेयर में कपास की खेती होने का अनुमान है। राज्य में सर्वाधिक कपास क्षेत्र वाला जिला होने के कारण जलगांव इस वर्ष भी अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रखेगा।हालांकि, जलगांव के साथ-साथ धुले और नंदुरबार जिलों में भी कपास के रकबे में लगातार गिरावट देखी जा रही है।जलगांव जिले में कपास का क्षेत्रफल वर्ष 2022 में 5.67 लाख हेक्टेयर था, जो 2023 में घटकर 5.54 लाख हेक्टेयर और 2024 में 5.11 लाख हेक्टेयर रह गया। पिछले सीजन (2023-24) में यह आंकड़ा लगभग 4.80 लाख हेक्टेयर तक सीमित रहा।पूरे खानदेश क्षेत्र में कपास की खेती 2022 में 8.70 लाख हेक्टेयर थी। यह 2023 में घटकर 8.50 लाख हेक्टेयर और 2024 में 8.30 लाख हेक्टेयर रह गई। इस वर्ष धुले जिले में लगभग 1.60 लाख हेक्टेयर तथा नंदुरबार में करीब 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में कपास बुवाई होने का अनुमान है। सबसे अधिक गिरावट धुले जिले में दर्ज की जा रही है। घाटे का सौदा बनती कपास खेतीकपास की खेती किसानों के लिए लगातार अलाभकारी साबित हो रही है। गुलाबी इल्ली (पिंक बॉलवर्म) का बढ़ता प्रकोप, मजदूरों की कमी और बाजार में कपास को कम दाम मिलने जैसी समस्याओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है कि सूखा प्रभावित इलाकों के कई किसान अब कपास छोड़कर सोयाबीन की ओर रुख कर रहे हैं।वहीं, जिन किसानों के पास सिंचाई की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध है, वे पपीता और केला जैसी नकदी फसलों को प्राथमिकता दे रहे हैं। कुछ किसानों ने इस वर्ष कपास के लिए निर्धारित रकबा भी कम करने का निर्णय लिया है।जलगांव अब भी राज्य में नंबर वनपिछले कई वर्षों से जलगांव जिला महाराष्ट्र में कपास की खेती के मामले में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। इस वर्ष भले ही जिले में कपास का क्षेत्रफल घटने की संभावना हो, लेकिन राज्य में सर्वाधिक कपास बुवाई वाला जिला जलगांव ही रहेगा।जलगांव के बाद यवतमाल जिले का स्थान आता है, जहाँ हर वर्ष लगभग 4.5 लाख हेक्टेयर या उससे कुछ कम क्षेत्र में कपास की बुवाई की जाती है।और पढ़ें :-रुपया 33 पैसे की गिरावट के साथ 94.58 पर खुला.

अकोट कॉटन मार्केट में बढ़ी तेजी, कपास के दाम ₹10 हजार के पार

अकोट कॉटन मार्केट में तेजी: कपास के दाम 10 हजार रुपये के पारअकोट की कृषि उपज मंडी समिति (APMC) में कपास के दामों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। बुधवार (6 मई) को कपास का अधिकतम भाव 10,005 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया, जिससे किसानों में उत्साह का माहौल है। मंडी में न्यूनतम भाव 8,550 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया, जबकि प्रतिदिन एक हजार क्विंटल से अधिक कपास की आवक हो रही है।पश्चिमी विदर्भ में उभरती प्रमुख कपास मंडी के रूप में पहचान बना चुके अकोट में इस सीजन की शुरुआत में कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने तीन खरीद केंद्रों के माध्यम से 7.39 लाख क्विंटल से अधिक कपास की खरीद की थी। इसके बाद अप्रैल महीने से निजी व्यापारियों ने भी खरीद शुरू कर दी। अप्रैल से अब तक अकोट मंडी में लगभग 33 हजार क्विंटल कपास की खरीदी-बिक्री हो चुकी है।पिछले कुछ दिनों से कपास के दामों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। सोमवार को जहां अधिकतम भाव 9,500 रुपये प्रति क्विंटल था, वहीं मंगलवार को यह बढ़कर 9,740 रुपये तक पहुंच गया। बुधवार को कपास ने 10 हजार रुपये का आंकड़ा पार कर लिया। बाजार में जारी इस तेजी ने किसानों की उस उम्मीद को मजबूत किया है कि आने वाले दिनों में कपास के दाम और बढ़ सकते हैं।भावों में आई तेजी के चलते किसान अब अपने गोदामों में रखा कपास बाजार में ला रहे हैं। नए सीजन की तैयारियों और नकदी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भी किसान बिक्री कर रहे हैं। विशेष रूप से अच्छी गुणवत्ता वाले कपास की व्यापारियों के बीच अधिक मांग बनी हुई है, जिसके कारण किसानों को बेहतर दाम मिल रहे हैं।अकोट क्षेत्र में बड़ी संख्या में कपास प्रसंस्करण इकाइयां संचालित हैं। इन उद्योगों को लगातार कच्चे माल की आवश्यकता रहती है, जिससे बाजार में कपास की मांग बनी हुई है। इसी वजह से कपास के दामों में सकारात्मक रुख देखने को मिल रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मांग इसी तरह बनी रही, तो आने वाले दिनों में कपास के भाव में और तेजी देखने को मिल सकती है।

कपास की कीमतों में भारी उछाल: 8 दिनों में ₹1,000 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी

कपास बाज़ार में जबरदस्त उछाल: सिर्फ़ 8 दिनों में ₹1,000 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरीराज्य के कपास बाज़ारों में इन दिनों जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। पिछले आठ दिनों के भीतर कपास के दामों में लगभग ₹1,000 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कई प्रमुख बाज़ार समितियों में कपास को ₹9,950 प्रति क्विंटल तक का उच्चतम भाव मिला, जिसे इस सीज़न का अब तक का रिकॉर्ड स्तर माना जा रहा है। बढ़ती कीमतों ने किसानों के चेहरे पर राहत और उम्मीद की नई चमक ला दी है।कुछ ही दिनों पहले तक कपास औसतन ₹8,000 प्रति क्विंटल बिक रहा था, लेकिन अब अधिकांश मंडियों में इसका भाव ₹9,000 के पार पहुँच चुका है। यवतमाल, रालेगांव और हिंगनघाट जैसे प्रमुख बाज़ारों में व्यापारियों और किसानों के बीच खरीद-बिक्री को लेकर उत्साह का माहौल है। बुधवार को यवतमाल मंडी में कपास का भाव करीब ₹9,100 प्रति क्विंटल रहा, जबकि रालेगांव और हिंगनघाट बाज़ार समितियों में ₹9,950 प्रति क्विंटल तक का सर्वोच्च भाव दर्ज किया गया।विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में आए बदलावों का सीधा असर घरेलू कपास व्यापार पर दिखाई दे रहा है। पॉलिएस्टर फ़ाइबर की बढ़ती कीमतों के कारण सूती धागे और कपास की मांग में तेजी आई है। इसके अलावा कच्चे तेल की ऊँची कीमतें और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव भी कपास बाज़ार को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर कपास की कीमत, जो पहले 72 से 74 सेंट प्रति पाउंड थी, अब बढ़कर 90 से 92 सेंट प्रति पाउंड तक पहुँच गई है। इसी कारण कपास की एक खांडी की कीमत लगभग ₹45,000 से बढ़कर ₹62,000 तक जा पहुँची है।हालाँकि बाजार में तेजी बनी हुई है, लेकिन कपास की आवक अभी भी सीमित है। अधिकांश किसान पहले ही अपना स्टॉक बेच चुके हैं। उदाहरण के तौर पर, बुधवार को रालेगांव मंडी में केवल 250 क्विंटल कपास की आवक दर्ज की गई। जानकारों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में बाजार में आवक बढ़ती है, तो कपास की कीमतों में और मजबूती देखने को मिल सकती है।और पढ़ें:-

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