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महाराष्ट्र में कपास खेती संकट में, उत्पादन में गिरावट के संकेत

2025-08-12 23:31:18
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महाराष्ट्र में कपास खेती पर दोहरी मार, उत्पादन घटने की आशंका


महाराष्ट्र में इस वर्ष कपास की खेती गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, जिससे उत्पादन में बड़ी गिरावट की आशंका जताई जा रही है। पिछले सीज़न में भी कपास उत्पादन और कीमतों में कमी देखने को मिली थी, जिसके चलते किसानों को अपेक्षित आय नहीं मिल सकी। आमतौर पर कपास से किसानों को लगभग ₹10,000 प्रति हेक्टेयर आय होती है, लेकिन पिछले साल यह घटकर ₹6,000–₹7,000 तक रह गई, जिससे किसानों का रुझान इस फसल से कम हुआ है।


सीज़न की शुरुआत में मई महीने में अच्छी बारिश से कपास के रकबे में बढ़ोतरी की उम्मीद थी, लेकिन जून और जुलाई में लगभग 25 दिनों तक बारिश की कमी ने हालात बदल दिए। इससे राज्य के कई हिस्सों में बुवाई प्रभावित हुई।


अहिल्यानगर जिले में कपास का रकबा पिछले वर्ष के 4.29 लाख हेक्टेयर से घटकर इस बार 2.53 लाख हेक्टेयर रह गया है, जो लगभग 50% की गिरावट दर्शाता है।


राज्य के 21 जिलों में कपास की खेती होती है, लेकिन इस बार वाशिम, यवतमाल, नागपुर, चंद्रपुर और गढ़चिरौली जैसे कुछ जिलों को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में रकबा घटा है। कोल्हापुर और कोंकण क्षेत्र में कपास की खेती लगभग नगण्य रही, जबकि सांगली, सतारा, धाराशिव, भंडारा और गोंदिया में भी बुवाई में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

किसानों के अनुसार इस गिरावट के दो प्रमुख कारण हैं—लगातार दो वर्षों से कम दाम मिलना और बुवाई के समय पर्याप्त वर्षा का अभाव।

राज्य के कुल खरीफ क्षेत्र में भी इस वर्ष कमी देखी गई है। अब तक 137.59 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है, जबकि कपास का रकबा घटकर 38.17 लाख हेक्टेयर रह गया है, जो पिछले साल की तुलना में कम है।


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