कॉटन इम्पोर्ट ड्यूटी में छूट से गुजरात के टेक्सटाइल सेक्टर को मिलेगी राहत
अहमदाबाद: केंद्र सरकार द्वारा 30 अक्टूबर तक कॉटन पर लगने वाली 11 प्रतिशत आयात शुल्क (इम्पोर्ट ड्यूटी) को निलंबित किए जाने के फैसले का गुजरात के टेक्सटाइल उद्योग ने स्वागत किया है। उद्योग जगत का मानना है कि इस कदम से कच्चे माल की लागत में कमी आएगी और भारतीय टेक्सटाइल उत्पादों की वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
पिछले कुछ महीनों में घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतें बढ़कर 68,500 रुपये प्रति कैंडी तक पहुंच गई थीं, जिससे स्पिनिंग मिलों, फैब्रिक निर्माताओं और गारमेंट निर्यातकों की लागत बढ़ गई थी। उद्योग का कहना है कि ड्यूटी में छूट मिलने से कॉटन की उपलब्धता बेहतर होगी और कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी।
एसोचैम गुजरात स्टेट काउंसिल के चेयरमैन चिंतन ठाकर ने कहा कि आयात मुख्य रूप से एक्स्ट्रा-लॉन्ग स्टेपल (ELS) कॉटन तक सीमित है, जो भारतीय कॉटन का विकल्प नहीं है। उनके अनुसार, यह फैसला टेक्सटाइल निर्माताओं और निर्यातकों की उत्पादन लागत कम करने में मदद करेगा। साथ ही, बेहतर गुणवत्ता वाले फाइबर की उपलब्धता से उत्पादों की गुणवत्ता सुधरेगी और वैश्विक ब्रांड्स की जरूरतों को पूरा करना आसान होगा।
गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (GCCI) की टेक्सटाइल कमेटी के सह-अध्यक्ष राहुल शाह ने बताया कि ड्यूटी में छूट की घोषणा के बाद कच्चे कॉटन की कीमतों में करीब 4,000 रुपये प्रति कैंडी की गिरावट दर्ज की गई है। इससे मिलों की इनपुट लागत कम होगी और विशेष रूप से निर्यात-उन्मुख कंपनियों के परिचालन मार्जिन में सुधार होगा।
स्पिनर्स एसोसिएशन गुजरात (SAG) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जयेश पटेल ने कहा कि भारतीय स्पिनिंग मिलों को चीन और बांग्लादेश से अच्छे निर्यात ऑर्डर मिल रहे हैं, लेकिन घरेलू कॉटन की ऊंची कीमतें चुनौती बनी हुई थीं। उनका मानना है कि आयात शुल्क में छूट से कॉटन और यार्न की कीमतों पर दबाव कम होगा तथा भारतीय टेक्सटाइल उद्योग वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेगा।
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