महाजन ने यह भी बताया कि बेहतर भंडारण और प्रसंस्करण पद्धतियां अपनाना जरूरी है, क्योंकि पहले खराब प्रथाओं के कारण भारतीय कपास की गुणवत्ता प्रभावित हुई थी। उनका कहना है कि प्रोसेसिंग के दौरान गुणवत्ता बनाए रखने से किसानों को बेहतर कीमत मिल सकती है।
यह परियोजना पुश एंड पुल मैकेनिज्म पर आधारित है, जिसमें सरकार गुणवत्ता प्रमाणन के जरिए खरीदारों को आकर्षित करती है, जबकि ई-नीलामी प्रणाली पारदर्शी मूल्य निर्धारण सुनिश्चित करती है।
यह पहल न केवल कपास की गुणवत्ता सुधारने में मददगार है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
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