STAY UPDATED WITH COTTON UPDATES ON WHATSAPP AT AS LOW AS 6/- PER DAY

Start Your 7 Days Free Trial Today

News Details

कपास बुवाई से पहले बीज की किल्लत, 2.9 लाख हेक्टेयर लक्ष्य पर संकट

2026-04-18 13:10:19
First slide


कपास बुवाई से पहले बीज व्यवस्था पर संकट, 2.9 लाख हेक्टेयर लक्ष्य को लेकर चिंता बढ़ी


खरीफ सीजन की शुरुआत करीब है और अक्षय तृतीया के साथ ही कपास की बुवाई शुरू होने वाली है, लेकिन इस बार बीजों के भंडारण और बिक्री को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। शासन स्तर से अब तक अनुमति (परमिशन) जारी नहीं होने के कारण बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। समय पर दिशा-निर्देश न मिलने से अमानक और बिना प्रमाणित बीजों के खपने का खतरा भी बढ़ गया है।


कृषि विभाग के आंकड़े इस समस्या को और गंभीर बनाते हैं। पिछले दो वर्षों में लिए गए 783 बीज नमूनों में से 54 अमानक पाए गए हैं, यानी लगभग 7 प्रतिशत बीज गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। यह स्थिति बताती है कि बाजार में पहले से ही निम्न गुणवत्ता वाले बीज मौजूद हैं, जो किसानों के लिए बड़ा जोखिम बन सकते हैं।


इस वर्ष जिले में लगभग 2.9 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई का लक्ष्य तय किया गया है। इतनी बड़ी मांग को देखते हुए बीज की उपलब्धता महत्वपूर्ण है, लेकिन अनुमति न मिलने से अधिकृत बीजों का भंडारण और वितरण शुरू नहीं हो पाया है। इसके चलते किसान असमंजस में हैं और कई जगह बिना सही जानकारी के बीज खरीदने बाजार पहुंच रहे हैं।


खरीफ 2026 का प्रस्तावित फसल रकबा


जिले में खरीफ 2026 के लिए कुल 4.16 लाख हेक्टेयर में बुवाई प्रस्तावित है। इसमें प्रमुख फसलें इस प्रकार हैं—


मक्का: 77 हजार हेक्टेयर (सबसे प्रमुख अनाज फसल)
कुल अनाज फसलें: 78 हजार हेक्टेयर
दलहन: 8,228 हेक्टेयर (उड़द, मूंग, अरहर)
तिलहन: 80 हजार हेक्टेयर (सोयाबीन 78 हजार हेक्टेयर से अधिक)
कपास: 2.9 लाख हेक्टेयर (सबसे बड़ी नकदी फसल)
अन्य खरीफ व उद्यान फसलें: 42 हजार हेक्टेयर


अमानक बीज से उत्पादन पर खतरा


विशेषज्ञों का कहना है कि अमानक बीजों से अंकुरण दर घटती है, पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है और उत्पादन में गिरावट आती है, जिससे किसानों को सीधा आर्थिक नुकसान होता है। जिले में इस तरह की शिकायतें पहले भी सामने आ चुकी हैं। ऐसे में किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही बीज खरीदें और बिल जरूर लें।


यदि समय पर परमिशन और स्पष्ट गाइडलाइन जारी नहीं की गई, तो इसका असर न केवल उत्पादन पर पड़ेगा बल्कि किसानों की आय पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।


पहले भी सामने आ चुका है बीज घोटाला मामला


खरगोन जिले में अमानक करेले के बीज के कारण किसानों को भारी नुकसान हुआ था। सिरलाय गांव की हाईटेक ग्रीन हाउस नर्सरी से बीज लेकर 48 किसानों ने लगभग 100 एकड़ में खेती की थी, लेकिन उत्पादन खराब रहा। किसानों का आरोप है कि बीएएसएफ कंपनी के रोबस्टा किस्म के बीज दोषपूर्ण थे। फूल आने के बाद भी फल विकसित नहीं हुए और पूरी फसल प्रभावित हो गई।


इस मामले की शिकायत किसानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री तक पहुंचाई थी, जिसके बाद धार जिले के मनावर थाने में संबंधित कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।


और पढ़ें :- संकट के बीच टेक्सटाइल सेक्टर को सहारा



Regards
Team Sis
Any query plz call 9111677775

https://wa.me/919111677775

Videos