कपास की कीमतों में 4% उछाल, दो साल के उच्चतम स्तर के करीब
2026-05-05 11:40:36
भारत में कपास की कीमतों में 4% की तेज़ उछाल, दो साल के उच्चतम स्तर के करीब पहुँचीं
भारत में कपास की कीमतों में एक ही दिन में 4% से अधिक की तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो इस सीज़न की सबसे बड़ी दैनिक उछाल मानी जा रही है। वैश्विक बाज़ार में मजबूती और सप्लाई चेन में व्यवधान इसके प्रमुख कारण हैं।
सोमवार को कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने कपास के दाम में ₹2,900 प्रति कैंडी (356 किलोग्राम) की वृद्धि की। इसके साथ ही कीमतें दो साल के उच्चतम स्तर के करीब पहुँच गई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में ICE Futures U.S. पर जुलाई डिलीवरी के लिए कपास की कीमत 84.5 सेंट प्रति पाउंड से ऊपर चली गई।
मार्च की शुरुआत से अब तक अंतरराष्ट्रीय कपास वायदा में 28% से अधिक की बढ़ोतरी हो चुकी है। घरेलू स्तर पर भी कीमतें ₹54,600 प्रति कैंडी के न्यूनतम स्तर से बढ़कर लगभग ₹65,600 तक पहुँच गई हैं।
व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, CCI द्वारा की गई यह बढ़ोतरी अप्रत्याशित थी, लेकिन इसके बावजूद कंपनी ने 2 लाख से अधिक गांठों की बिक्री की है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि बढ़ती कीमतों ने कपड़ा निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है। धागे की महंगाई और श्रमिकों की कमी के कारण उत्पादन और डिलीवरी दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय मांग भी कीमतों को सहारा दे रही है। चीन, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से भारतीय कपास धागे की मांग में हाल के हफ्तों में तेज़ी आई है, जिसका कारण वैश्विक सप्लाई चेन में जारी बाधाएं हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, CCI के पास अभी भी करीब 40 लाख गांठों का स्टॉक बचा हुआ है और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के मजबूत रहने से इसकी बिक्री जारी रहने की संभावना है। वर्तमान में CCI की कीमतें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनी हुई हैं, जिससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों की रुचि बढ़ सकती है।
इस बीच, देश में कच्ची कपास की आवक प्रतिदिन 35,000 से 45,000 गांठों के बीच बनी हुई है और कुल आवक लगभग 305 लाख गांठों तक पहुँच चुकी है। अनुमान है कि आने वाले महीनों में आपूर्ति स्थिर बनी रह सकती है, जिससे बाज़ार की दिशा पर असर पड़ेगा।