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लुधियाना कपड़ा उद्योग पर दोहरा संकट

2026-04-01 11:54:22
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लुधियाना का कपड़ा उद्योग बढ़ती लागत और घटती मांग के दोहरे संकट में


लुधियाना: देश के प्रमुख कपड़ा उत्पादन केंद्र के रूप में पहचाना जाने वाला लुधियाना इन दिनों गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। कच्चे माल की बढ़ती कीमतें, बाधित आपूर्ति श्रृंखला, कमजोर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग, तथा बढ़ती लॉजिस्टिक लागत ने उद्योग पर दबाव बढ़ा दिया है।


उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल से बनने वाले सिंथेटिक फाइबर—जैसे पॉलिएस्टर, नायलॉन और स्पैन्डेक्स—की कीमतों में हाल के हफ्तों में 20% से 30% तक की तेज वृद्धि हुई है। बहादरके रोड के एक कपड़ा निर्माता सिमरनजीत सिंह ने बताया कि बढ़ती लागत के कारण उत्पादन जारी रखना कठिन होता जा रहा है। उनके अनुसार, पॉलिएस्टर की कीमत 115 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 165–170 रुपये तक पहुंच गई है, जबकि नायलॉन कपड़े की कीमत 175 रुपये प्रति मीटर से बढ़कर करीब 210 रुपये हो गई है। स्पैन्डेक्स की कीमतों में भी लगभग 20% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

समस्या केवल सिंथेटिक फाइबर तक सीमित नहीं है। प्राकृतिक फाइबर जैसे कपास भी महंगे हो गए हैं। सूती धागे की कीमत 260 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर लगभग 292 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। उद्योग संगठनों का कहना है कि लगभग सभी प्रकार के फाइबर की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

पैकेजिंग लागत में भी तेज उछाल देखा गया है। पॉलीबैग और अन्य प्लास्टिक आधारित पैकिंग सामग्री, जो लॉजिस्टिक्स और निर्यात के लिए जरूरी हैं, उनकी कीमतों में 40% तक वृद्धि हुई है। उदाहरण के तौर पर, एक पॉलीबैग की कीमत 2 रुपये से बढ़कर 3.15 से 3.5 रुपये तक पहुंच गई है।

उद्योग से जुड़े लोग इस बढ़ती लागत के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और बढ़ते मालभाड़ा खर्च को प्रमुख कारण मानते हैं। भू-राजनीतिक तनावों के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिवहन महंगा हो गया है, जिससे उत्पादन लागत और बढ़ गई है।

इन सभी चुनौतियों के बीच, उद्योग को घटते ऑर्डर और श्रमिकों की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ और आपूर्ति श्रृंखला स्थिर नहीं हुई, तो आने वाले महीनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट से उबरने के लिए समय रहते नीतिगत हस्तक्षेप, लागत नियंत्रण उपाय और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना बेहद आवश्यक है।

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