कपास और सोयाबीन फसल बीमा पर संशय: भुगतान में देरी से किसान चिंतित, नए सीजन से पहले स्पष्टता की मांग
पिछले खरीफ सीजन में कपास की फसल को भारी नुकसान झेलने के बावजूद किसानों को अब तक बीमा राशि नहीं मिली है। इससे हजारों किसान यह सवाल उठा रहे हैं कि कपास फसल बीमा कब मिलेगा और उन्हें कितना मुआवजा प्राप्त होगा।
अकोला जिले में फसल बीमा कराने वाले किसानों को अब तक पूरी राहत नहीं मिल पाई है। खासकर सोयाबीन बीमा के मामले में केवल दो राजस्व मंडलों—कुरुम और लखपुरी—के किसानों को ही मुआवजा स्वीकृत किया गया है, जिससे बाकी किसान खुद को वंचित महसूस कर रहे हैं।
जिले के 1,31,415 किसानों ने सोयाबीन फसल का बीमा कराया था, लेकिन सीमित दायरे में लाभ मिलने के बाद अब किसानों की नजर कपास फसल बीमा पर टिकी है। हालांकि, कपास बीमा को लेकर अब तक कोई स्पष्ट घोषणा नहीं हुई है, जिससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
पिछले खरीफ सीजन में जिले के 30,030 किसानों ने लगभग 28,101 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास फसल का बीमा कराया था। तालुका स्तर पर देखें तो तेल्हारा में 3,372, अकोट में 7,558, बालापुर में 2,479, पातुर में 1,436, अकोला में 7,890, बार्शिटाकली (वर्षा क्षेत्र) में 3,426 और मुर्तिजापुर में 3,869 किसानों ने बीमा कराया था।
पिछले वर्ष मानसून के दौरान भारी बारिश और बाढ़ के कारण कपास की फसल को व्यापक नुकसान हुआ था। ऐसे में किसानों को उम्मीद है कि उन्हें बीमा के रूप में उचित मुआवजा मिलेगा।
अब जबकि नए खरीफ सीजन की शुरुआत में डेढ़ महीने से भी कम समय बचा है, बीमा राशि में देरी से किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। यदि समय पर भुगतान होता, तो किसान बीज, खाद और अन्य कृषि कार्यों के लिए तैयारी कर सकते थे।
किसानों की मांग है कि कपास फसल बीमा की घोषणा जल्द से जल्द की जाए और सभी पात्र किसानों को न्यायपूर्ण मुआवजा दिया जाए। सोयाबीन बीमा में सीमित लाभ के बाद कपास बीमा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। ऐसे में प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि वह शीघ्र निर्णय लेकर किसानों को राहत प्रदान करे।