FTA से भारतीय टेक्सटाइल और कपास की मांग बढ़ने की उम्मीद, CAI ने बताई प्राथमिकताएं
नई दिल्ली: कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) को उम्मीद है कि भारत के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से भारतीय टेक्सटाइल और कपास उत्पादों के लिए नए बाजार खुल सकते हैं। इससे घरेलू कपास और टेक्सटाइल उद्योग के लिए अतिरिक्त मांग के अवसर पैदा हो सकते हैं।
CAI की 104वीं वार्षिक आम बैठक को संबोधित करते हुए अध्यक्ष विनय एन. कोटक ने कहा कि मौजूदा कपास सीजन किसानों, जिनर्स, व्यापारियों और स्पिनर्स सहित वैल्यू चेन से जुड़े विभिन्न हितधारकों के लिए काफी हद तक सकारात्मक रहा है। उन्होंने कहा कि नए व्यापार समझौते भारतीय कपास और टेक्सटाइल उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहुंच बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
भारत वैश्विक कपास अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और दुनिया के प्रमुख कपास उत्पादक व उपभोक्ता देशों में शामिल है। कोटक के अनुसार, भारतीय कपास की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए उत्पादकता, गुणवत्ता, कंटैमिनेशन नियंत्रण, ट्रेसेबिलिटी और सस्टेनेबिलिटी में सुधार जरूरी है। इसके साथ ही प्राइस डिस्कवरी और रिस्क मैनेजमेंट को भी मजबूत करने की जरूरत है।
CAI ने सरकार और अन्य हितधारकों के साथ नीतिगत मुद्दों पर काम करने के लिए ‘CAI रोडमैप’ तैयार किया है। इसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), किसानों से कपास खरीद पर रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (RCM) और कपास वैल्यू चेन से जुड़े अन्य मुद्दे शामिल हैं। संगठन ने MSP के विकल्प या पूरक के रूप में ‘भावांतर’ जैसे तंत्र पर विचार करने की भी वकालत की है।
CAI ब्राजील की ABRAPA के साथ उत्पादकता, सस्टेनेबिलिटी, ट्रेसेबिलिटी और अंतरराष्ट्रीय कपास व्यापार के क्षेत्र में सहयोग तथा जानकारी साझा करने के लिए MOU पर काम कर रहा है। वहीं, प्रस्तावित ‘इंडिया कॉटन इंडेक्स’ को भारतीय कपास के लिए भरोसेमंद और प्रतिनिधि बेंचमार्क बनाने पर भी काम जारी है।
CAI की प्राथमिकताओं में कपास की उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाना, गुणवत्ता सुधारना, कंटैमिनेशन कम करना तथा वैज्ञानिक और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना शामिल है। संगठन मार्केट इंटेलिजेंस और रिस्क मैनेजमेंट को भी मजबूत करना चाहता है।
2026-27 के लिए विनय एन. कोटक को अध्यक्ष और भूपेंद्र सिंह राजपाल को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
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