हरियाणा में घटती कपास खेती को बचाने के लिए सरकार का खास अभियान शुरू
हरियाणा में पिछले छह वर्षों के दौरान कपास की खेती में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. राज्य में 2019-20 में करीब 8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई होती थी, लेकिन 2024-25 तक यह रकबा घटकर लगभग 3.9 लाख हेक्टेयर रह गया है. लगातार कम होते रकबे और किसानों के कपास से दूरी बनाने के बाद अब राज्य सरकार ने इस फसल को दोबारा बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है.
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने “प्रमोशन फॉर कॉटन कल्टीवेशन इन हरियाणा (PCCH)” नाम से नई पहल शुरू की है. इस योजना का उद्देश्य किसानों का कपास खेती पर भरोसा वापस लाना और उत्पादन को फिर से मजबूत करना है. अभियान के तहत सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, चरखी दादरी, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जैसे प्रमुख कपास उत्पादक जिलों पर विशेष फोकस किया जाएगा.
विशेषज्ञों के अनुसार कपास क्षेत्र में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पिछले वर्षों में बढ़े कीट हमले और फसल नुकसान रहे हैं. लगातार नुकसान झेलने के बाद कई किसानों ने धान जैसी दूसरी फसलों की ओर रुख कर लिया, जिससे पारंपरिक कपास बेल्ट प्रभावित हुआ है.
नई योजना के तहत हर जिले में दो एकड़ के डेमो प्लॉट तैयार किए जाएंगे. इन प्लॉट्स की निगरानी कृषि विभाग और चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक मिलकर करेंगे. यहां किसानों को जमीन की तैयारी, बुवाई, सिंचाई, कीटनाशक प्रबंधन और कटाई तक की पूरी प्रक्रिया का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा.
राज्य समन्वयक डॉ. अरुण कुमार यादव के मुताबिक किसानों को रोग और हानिकारक कीटों की पहचान के साथ खाद और दवाइयों के संतुलित उपयोग की जानकारी भी दी जाएगी. आसपास के किसान इन डेमो फार्मों का दौरा कर विशेषज्ञों से सीधे सीख सकेंगे. सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से किसानों का भरोसा बढ़ेगा और आने वाले वर्षों में हरियाणा में कपास का रकबा फिर से बढ़ सकता है.
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