महाराष्ट्र के दिग्रस स्पिनिंग मिल से चीन को पहली कॉटन यार्न खेप रवाना, विदर्भ को वैश्विक पहचान
2026-07-18 12:29:23
महाराष्ट्र: डिग्रस स्पिनिंग मिल ने चीन को भेजा पहला कॉटन यार्न, विदर्भ की कपास उद्योग को मिली वैश्विक पहचान
महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र की 'रामदास अठावले बैकवर्ड क्लास कॉटन ग्रोअर्स कोऑपरेटिव स्पिनिंग मिल' ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रवेश करते हुए चीन को कॉटन यार्न का पहला निर्यात किया है। डिग्रस स्थित इस सहकारी स्पिनिंग मिल में तैयार उच्च गुणवत्ता वाले यार्न को चीनी बाजार में स्वीकृति मिलने के बाद पहला कंटेनर समुद्री मार्ग से रवाना किया गया। इसे विदर्भ की कपास प्रसंस्करण उद्योग और स्थानीय किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
वर्ष 2019 में पंजीकृत इस सहकारी स्पिनिंग मिल ने 2025 में व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया। कम समय में ही इसने उच्च गुणवत्ता वाले यार्न के उत्पादन के दम पर राज्य की प्रमुख सहकारी स्पिनिंग मिलों में अपनी पहचान बना ली है। संस्था का दावा है कि पिछले एक दशक में पंजीकृत सहकारी स्पिनिंग मिलों में यह ऐसी पहली इकाई है जिसने सफलतापूर्वक उत्पादन शुरू कर बाजार में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।
निर्यात से पहले चीन के विशेषज्ञों की एक टीम ने मिल में तैयार यार्न की गुणवत्ता का विस्तृत तकनीकी परीक्षण किया। सभी अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरने के बाद ही चीन के बाजार में इसके निर्यात को मंजूरी मिली। मिल के संस्थापक-अध्यक्ष मिलिंद मानकर ने बताया कि डिग्रस में तैयार यार्न को अब अन्य देशों से भी मांग मिलने लगी है, जिससे भविष्य में निर्यात बढ़ने की संभावना है।
मिल के अध्यक्ष महेंद्र मानकर के अनुसार, आधुनिक स्वचालित मशीनरी, अनुभवी तकनीकी टीम, कुशल प्रबंधन और कर्मचारियों की मेहनत के कारण अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता का यार्न तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कोविड-19 महामारी जैसी चुनौतियों के बावजूद परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा किया गया और उत्पादन शुरू किया गया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले और संरक्षक मंत्री संजय राठौड़ के सहयोग से यह परियोजना शुरू हो सकी। पहले निर्यात कंटेनर को रवाना करने से पहले मिल परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना की गई, जिसमें निदेशक मंडल, अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
मिल ने पिछले 18 महीनों में लगभग 5,500 टन कॉटन यार्न का उत्पादन किया है। इसकी स्वीकृत क्षमता 25,000 स्पिंडल की है, जिनमें से वर्तमान में 16,500 स्पिंडल संचालित हैं। मिल में प्रतिदिन 10 से 12 टन यार्न तैयार किया जा रहा है। प्रबंधन का मानना है कि चीन को पहला निर्यात भविष्य में नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए रास्ता खोलेगा और इससे विदर्भ के कपास उत्पादक किसानों के साथ-साथ क्षेत्र के वस्त्र उद्योग को भी दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।