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ELS कपास क्या है और भारत में इसका उत्पादन क्यों कम है?

2025-02-04 18:56:10
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ELS कपास क्या है और भारत में इसका उत्पादन सीमित क्यों है?


नई दिल्ली: केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कपास की उत्पादकता बढ़ाने और अतिरिक्त-लंबे स्टेपल (ELS) कपास को प्रोत्साहित करने के लिए पाँच वर्षीय मिशन की घोषणा की है। इसका उद्देश्य देश में प्रीमियम गुणवत्ता वाले कपास उत्पादन को मजबूत करना है।


ELS कपास क्या है?

कपास को उसके रेशों (फाइबर) की लंबाई के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा जाता है—लंबा, मध्यम और अतिरिक्त-लंबा (ELS)। भारत में लगभग 96% कपास Gossypium hirsutum से प्राप्त होती है, जो मध्यम स्टेपल (25–28.6 मिमी) श्रेणी में आती है।


इसके विपरीत, ELS (Extra-Long Staple) कपास के रेशों की लंबाई 30 मिमी या उससे अधिक होती है। यह मुख्य रूप से Gossypium barbadense से प्राप्त होता है, जिसे पिमा या मिस्र कपास भी कहा जाता है। यह कपास मुलायम, मजबूत और उच्च गुणवत्ता वाले कपड़ों—जैसे प्रीमियम सूटिंग, शर्टिंग और लक्ज़री टेक्सटाइल—के निर्माण में उपयोग होती है।


भारत में इसका उत्पादन सीमित क्यों है?

हालांकि ELS कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) अधिक होता है, फिर भी किसान इसकी खेती अपनाने में हिचकिचाते हैं। इसका मुख्य कारण कम उत्पादकता है। जहां मध्यम स्टेपल कपास की उपज 10–12 क्विंटल प्रति एकड़ तक होती है, वहीं ELS कपास की उपज केवल 7–8 क्विंटल प्रति एकड़ रहती है।


इसके अलावा, किसानों को कई बार अपनी प्रीमियम गुणवत्ता वाली फसल का उचित बाजार मूल्य नहीं मिल पाता, क्योंकि इसके लिए मजबूत सप्लाई चेन और बाजार नेटवर्क की कमी है। मांग सीमित और अस्थिर होने के कारण भी किसान इसे बड़े पैमाने पर नहीं अपनाते।


आयात पर निर्भरता

भारत हर साल 20–25 लाख गांठ कपास का आयात करता है, जिसमें 90% से अधिक हिस्सा ELS कपास का होता है। यह दर्शाता है कि देश में प्रीमियम फाइबर की मांग तो अधिक है, लेकिन घरेलू उत्पादन पर्याप्त नहीं है।


कपास मिशन से उम्मीदें

सरकार के प्रस्तावित पाँच वर्षीय मिशन के तहत किसानों को उन्नत बीज, आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सहायता देने की योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर कृषि तकनीक, सिंचाई व्यवस्था और संभावित रूप से जैव-प्रौद्योगिकी (GM तकनीक) के उपयोग से उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है।


वर्तमान में भारत की औसत कपास उत्पादकता कई देशों की तुलना में कम है—ब्राजील में यह लगभग 20 क्विंटल प्रति एकड़ और चीन में लगभग 15 क्विंटल प्रति एकड़ है। ऐसे में तकनीकी सुधार और बेहतर प्रबंधन से भारत ELS कपास उत्पादन में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।


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