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एकरूप किस्मों से कपास की गुणवत्ता में बड़ा सुधार

2024-04-30 19:43:17
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स्मार्ट खेती से बढ़ी कपास की गुणवत्ता, एकरूप किस्मों का सकारात्मक असर


महाराष्ट्र के नागपुर जिले में राज्य सरकार के स्मार्ट कॉटन प्रोजेक्ट के तहत किसानों ने एक समान किस्म अपनाकर उच्च गुणवत्ता वाली कपास का उत्पादन किया है। इस पहल में राज्यभर के पांच समूहों के करीब 1,000 किसान शामिल रहे, जिन्होंने पारंपरिक मिश्रित किस्मों की बजाय एकरूपता अपनाकर बेहतर परिणाम हासिल किए।


कृषि उपायुक्त एवं जिला नोडल अधिकारी अरविंद उपरीकर के अनुसार, उत्पादित कपास की गांठें 30–31 मिमी स्टेपल लंबाई की सुपर ग्रेड श्रेणी में हैं। उच्च लिंट प्रतिशत और साफ-सुथरी कपास के कारण यह स्पिनर्स और खरीदारों के लिए अधिक आकर्षक बन गई है।


परियोजना अब दूसरे वर्ष में प्रवेश कर चुकी है और इसका दायरा बढ़ाते हुए कटोल, नरखेड़, नागपुर, सावनेर और हिंगना तालुकों के 95 नए किसानों को जोड़ा गया है। प्रारंभिक चरण में 60 गांवों के 1,800 किसानों को लंबे रेशे और उच्च लिंट प्रतिशत वाले बीज उपलब्ध कराए गए थे, साथ ही कपास तुड़ाई के लिए बैग भी वितरित किए गए।


सीआईआरसीओटी, नागपुर द्वारा किसानों को तीन दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें साफ तुड़ाई तकनीक और कचरा कम करने पर विशेष ध्यान दिया गया। बेहतर गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कपास की प्रोसेसिंग निर्धारित जिनिंग यूनिट्स में की गई।

परियोजना के पोस्ट-हार्वेस्ट नोडल अधिकारी जयेश महाजन ने बताया कि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है—गांठों की संख्या 2,900 से बढ़कर 5,500 तक पहुंच गई, जबकि किसानों की भागीदारी 500 से बढ़कर 900 हो गई है। उन्होंने कहा कि राज्यभर में 1 लाख से अधिक किसानों के साथ भी काम किया जा रहा है।

महाजन ने यह भी बताया कि बेहतर भंडारण और प्रसंस्करण पद्धतियां अपनाना जरूरी है, क्योंकि पहले खराब प्रथाओं के कारण भारतीय कपास की गुणवत्ता प्रभावित हुई थी। उनका कहना है कि प्रोसेसिंग के दौरान गुणवत्ता बनाए रखने से किसानों को बेहतर कीमत मिल सकती है।


यह परियोजना पुश एंड पुल मैकेनिज्म पर आधारित है, जिसमें सरकार गुणवत्ता प्रमाणन के जरिए खरीदारों को आकर्षित करती है, जबकि ई-नीलामी प्रणाली पारदर्शी मूल्य निर्धारण सुनिश्चित करती है।


यह पहल न केवल कपास की गुणवत्ता सुधारने में मददगार है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।


और पढ़ें :> कपास का रकबा: स्थिरता और चुनौतियों में समानता


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