वैज्ञानिकों के अनुसार, यह नई किस्म न केवल पिंक बॉलवर्म से सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि कपास के पत्ते के कीड़े और फॉल आर्मीवर्म जैसे अन्य कीटों के खिलाफ भी प्रभावी है।
इस तकनीक की संभावनाओं को देखते हुए नागपुर स्थित कृषि-जैव प्रौद्योगिकी कंपनी अंकुर सीड्स प्राइवेट लिमिटेड ने एनबीआरआई के साथ साझेदारी का प्रस्ताव दिया है। कंपनी नियामकीय दिशानिर्देशों के तहत सुरक्षा परीक्षण और बहु-स्थान फील्ड ट्रायल में सहयोग करेगी।
सुरक्षा परीक्षण सफल होने के बाद इस तकनीक को बीज कंपनियों को लाइसेंस दिया जाएगा, जिससे इसका व्यावसायिक उपयोग संभव हो सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नवाचार पिंक बॉलवर्म से होने वाले नुकसान को कम कर किसानों की आय को सुरक्षित करने में मदद करेगा और वैश्विक स्तर पर कीट-प्रतिरोधी फसलों के विकास में एक नया मानक स्थापित करेगा।