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सूती वस्त्र निर्यात में बड़ी गिरावट, 29% तक घटा आंकड़ा

2024-12-18 18:33:06
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भारत के सूती वस्त्र निर्यात में गिरावट: 2021-22 के मुकाबले 29% कमी


भारत के सूती वस्त्र निर्यात में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। राज्यसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में देश ने 12,258 मिलियन डॉलर के सूती वस्त्र निर्यात किए, जो 2021-22 के 17,166 मिलियन डॉलर के मुकाबले लगभग 29% कम है।


विवरण के अनुसार, सूती कपड़े और मेड-अप्स के निर्यात में 19% की कमी आई, जबकि सूती धागे (यार्न) के निर्यात में 31% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, कच्चे कपास के निर्यात में भी करीब 60% की तेज गिरावट देखी गई। हालांकि, अन्य प्रकार के धागों और मेड-अप्स के निर्यात में 12% की बढ़ोतरी हुई है।


निर्यात का स्तर 2021-22 के उच्चतम स्तर से गिरकर 2022-23 में 11,085 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया था, जिसके बाद 2023-24 में इसमें लगभग 11% की आंशिक सुधार देखने को मिला।


भारत के प्रमुख निर्यात बाजारों में अमेरिका, बांग्लादेश, चीन, श्रीलंका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। वहीं, गुजरात, जो देश के कुल सूती वस्त्र निर्यात में लगभग 30% योगदान देता है, वहां भी निर्यात 2021-22 के 4,760 मिलियन डॉलर से घटकर 2023-24 में 3,615 मिलियन डॉलर रह गया।

उत्पादन के मोर्चे पर, गुजरात ने अक्टूबर-सितंबर 2023-24 के दौरान 170 किलोग्राम की 90 लाख गांठों का उत्पादन पार कर लिया और शीर्ष स्थान बनाए रखा। 2021-22 से 2023-24 के बीच राज्य के कपास उत्पादन में लगभग 20% की वृद्धि हुई। इसके विपरीत, महाराष्ट्र में उत्पादन 2% घटकर 80 लाख गांठ रह गया, जबकि तेलंगाना 51 लाख गांठ के साथ तीसरे स्थान पर रहा।

सरकार ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसमें परिधान और मेड-अप्स पर राज्य एवं केंद्रीय करों की वापसी (ROSCTL) योजना शामिल है। इसके अलावा, फरवरी 2025 में “भारत टेक्स 2025” जैसे मेगा टेक्सटाइल इवेंट के आयोजन को भी समर्थन दिया जा रहा है, ताकि भारत को वैश्विक स्तर पर सोर्सिंग और निवेश के लिए आकर्षक केंद्र बनाया जा सके।


भारत ने 14 मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और 6 अधिमान्य व्यापार समझौते (PTA) भी किए हैं, जिससे वैश्विक बाजारों तक पहुंच आसान हो रही है।


वहीं, कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में, ICAR के तहत नागपुर स्थित केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान (CICR) बेहतर किस्मों और उन्नत तकनीकों के विकास पर कार्य कर रहा है। पिछले एक दशक में 333 नई कपास किस्में विकसित की गई हैं, जिनमें 191 गैर-बीटी और 142 बीटी किस्में शामिल हैं।


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