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बेहतर मानसून से जुलाई में तेज हुई कपास की बुवाई, फिर भी पिछले साल से पीछे

2026-07-11 12:11:38
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जुलाई में तेज हुई कपास की बुआई, फिर भी पिछले साल से पीछे; बेहतर मॉनसून से बढ़ी रफ्तार

नई दिल्ली: दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दोबारा सक्रिय होने से देशभर में जुलाई के दौरान कपास (कॉटन) की बुआई में तेजी आई है। हालांकि, बुआई का कुल रकबा अभी भी पिछले वर्ष की तुलना में कम बना हुआ है। कृषि आयुक्त पी.के. सिंह ने बताया कि बेहतर बारिश के कारण प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में बुआई की गति बढ़ी है और आने वाले दिनों में यह अंतर और कम होने की उम्मीद है।

कृषि आयुक्त के अनुसार, 5 जुलाई तक देश में 63.18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुआई हो चुकी थी, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 82 लाख हेक्टेयर था। यानी इस बार शुरुआत धीमी रही, लेकिन जुलाई में अच्छी बारिश के बाद किसानों ने तेजी से बुआई शुरू कर दी है।

उन्होंने बताया कि भारत में कपास की बुआई अलग-अलग राज्यों में अलग समय पर होती है। इसकी शुरुआत पंजाब और हरियाणा से होती है और बाद में गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु तक फैलती है। सामान्य परिस्थितियों में कपास की बुआई 15 जुलाई तक पूरी हो जाती है, लेकिन इस वर्ष मॉनसून में देरी के कारण इसकी अंतिम तिथि बढ़ाकर 30 जुलाई कर दी गई है।

अहमदाबाद के एक कृषि व्यापारी के अनुसार, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और कर्नाटक में हाल के दिनों में अच्छी बारिश होने से कपास की बुआई में उल्लेखनीय तेजी आई है। उन्होंने बताया कि बेहतर दाम मिलने की उम्मीद में कुछ किसान धान की जगह कपास और दलहनी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। वहीं महाराष्ट्र में कई किसानों ने सोयाबीन की कमजोर अंकुरण की शिकायत के बाद दोबारा कपास की बुआई शुरू की है।

भारत के प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्रों में गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश का केंद्रीय क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण है। इसके अलावा पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु भी प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।

कृषि मंत्रालय के नवीनतम अनुमान के अनुसार, वर्ष 2025-26 में देश का कपास उत्पादन 290.91 लाख गांठ (प्रति गांठ 170 किलोग्राम) रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 297.24 लाख गांठ से कम है।

पी.के. सिंह ने बताया कि खरीफ सीजन में बुआई की सबसे अधिक रफ्तार जुलाई में रहती है। जून में जहां औसतन हर सप्ताह लगभग 50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई होती है, वहीं जुलाई में यह बढ़कर 200 से 250 लाख हेक्टेयर प्रति सप्ताह तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि उत्पादन और उत्पादकता का सटीक आकलन बुआई पूरी होने के बाद ही किया जा सकेगा। सरकार बुआई के आंकड़ों की पुष्टि प्रारंभिक अनुमान, रिमोट सेंसिंग और ब्लॉक स्तर के डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से करती है।


और पढ़ें :- महाराष्ट्र के केज तालुका में खरीफ बुवाई लगभग पूरी, 64 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती







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