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MSP से नीचे कपास के भाव: नए सीजन की कमजोर शुरुआत, किसानों पर बढ़ा दबाव

2025-08-30 21:12:50
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कपास: ‘सफेद सोना’ फीका, मुहूर्त सौदों में MSP से नीचे गिरे भाव; किसानों की चिंता बढ़ी


कपास के नए सीजन की शुरुआत किसानों के लिए निराशाजनक रही। मध्य प्रदेश की अंजद और खरगोन मंडियों में शुक्रवार को हुए मुहूर्त सौदों में कपास के दाम 6,500 से 7,100 रुपये प्रति क्विंटल रहे, जो सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 8,110 रुपये प्रति क्विंटल से लगभग 1,000 से 1,500 रुपये कम हैं। इससे किसानों में चिंता और निराशा का माहौल है।


व्यापारियों के अनुसार, कीमतों में यह गिरावट पहले से अनुमानित थी। इसका मुख्य कारण सरकार द्वारा कपास पर आयात शुल्क को 30 सितंबर तक हटाना और बाद में इस छूट को 31 दिसंबर तक बढ़ाना है। मुहूर्त सौदे भले ही प्रतीकात्मक शुरुआत होते हैं, लेकिन ये आने वाले बाजार रुझानों का संकेत भी देते हैं—जो फिलहाल कमजोर दिखाई दे रहे हैं।


मौजूदा स्थिति को देखते हुए संभावना है कि खुले बाजार में कपास के दाम MSP से नीचे बने रह सकते हैं। ऐसे में यदि गिरावट जारी रहती है, तो भारतीय कपास निगम (CCI) को हस्तक्षेप कर किसानों से MSP पर खरीद करनी पड़ सकती है। निगम कच्चा कपास खरीदकर उसे प्रोसेस कर गांठों के रूप में व्यापारियों को बेचता है। हाल ही में CCI द्वारा बिक्री दरों में कमी किए जाने से बाजार पर दबाव और बढ़ा है।


किसानों के आर्थिक पक्ष पर नजर डालें तो स्थिति और चुनौतीपूर्ण नजर आती है। एक अनुमान के अनुसार, कपास की खेती पर प्रति एकड़ 24,000 से 30,000 रुपये तक का खर्च आता है। विशेषज्ञों का मानना है कि MSP पर लाभ कमाने के लिए कम से कम 6 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन आवश्यक है। इस हिसाब से 8,110 रुपये के MSP पर भी किसान को सीमित मुनाफा ही मिलता है, जो सालभर की आर्थिक जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं है। लगातार प्राकृतिक जोखिमों और घटती पैदावार ने किसानों की स्थिति और कठिन बना दी है।


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