विश्व कपास दिवस पर पहुंना में जिलास्तरीय कार्यशाला, किसानों को वैज्ञानिक खेती और कीट प्रबंधन की जानकारी दी
पहुंना। विश्व कपास दिवस के अवसर पर पहुंना में जिलास्तरीय कपास किसान कार्यशाला का आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत CITI-CDRA की ओर से आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य किसानों को कपास की वैज्ञानिक खेती, कीट प्रबंधन, स्वच्छ उत्पादन और फसल की गुणवत्ता सुधारने के तरीकों के प्रति जागरूक करना था।
कार्यशाला में किसानों को परियोजना के उद्देश्यों और उपलब्धियों की जानकारी दी गई। CITI-CDRA के परियोजना अधिकारी गोविंद पाराशर ने परियोजना का परिचय देते हुए इसकी प्रमुख गतिविधियों और उद्देश्यों के बारे में बताया।
कृषि विज्ञान केंद्र, चित्तौड़गढ़ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रतन लाल सोलंकी और अन्य कृषि वैज्ञानिकों ने कपास की वैज्ञानिक खेती, बेहतर उत्पादन तकनीकों और फसल को कीटों से बचाने के प्रभावी उपायों की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियां अपनाने और फसल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने के लिए प्रेरित किया।
कृषि विभाग के हीरा लाल सालवी, अमन विश्नावत और अभिषेक चौधरी ने किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। वहीं, भरत शर्मा ने कृषि कार्यों के दौरान व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। भारतीय कपास निगम (CCI) के प्रतिनिधियों ने स्वच्छ कपास उत्पादन, गुणवत्ता बनाए रखने और कपास की खरीद प्रक्रिया के बारे में किसानों को जागरूक किया।
कार्यशाला के दौरान किसानों को कपास की तुड़ाई और भंडारण में स्वच्छता बनाए रखने, कपास को बाहरी पदार्थों की मिलावट से बचाने तथा कीटनाशकों का सुरक्षित उपयोग करने की सलाह दी गई। इसके अलावा, क्षेत्र भ्रमण, सुझावों के आदान-प्रदान और प्रश्नोत्तरी जैसी गतिविधियां भी आयोजित की गईं। इन गतिविधियों के माध्यम से किसानों को अपनी समस्याएं साझा करने और कृषि संबंधी जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ना, कपास की गुणवत्ता में सुधार करना और स्वच्छ एवं सुरक्षित उत्पादन पद्धतियों को बढ़ावा देना था। वैज्ञानिक खेती और बेहतर फसल प्रबंधन अपनाने से किसानों को कपास की गुणवत्ता सुधारने तथा बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
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