US कॉटन में 40% तूफानी तेजी! विनय कोटक जी बोले- 11% ड्यूटी हटाओ वरना एक्सपोर्ट पर बड़ा खतरा
कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रेजिडेंट Vinay Kotak ने CNBC आवाज़ से खास बातचीत में कहा कि पिछले डेढ़ महीने में US ICE कॉटन फ्यूचर में लगभग 40% की तेजी देखने को मिली है। उनके अनुसार, इसकी सबसे बड़ी वजह बाजार में मौजूद करीब 1 करोड़ बेल्स की शॉर्ट पोजीशन रही। जैसे ही वैश्विक जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ा और क्रूड ऑयल की कीमतों में लगभग 40% उछाल आया, वैसे ही बड़े स्तर पर शॉर्ट कवरिंग शुरू हो गई, जिससे बाजार में भारी खरीदारी का दबाव बना और कॉटन फ्यूचर तेजी से ऊपर चले गए।
उन्होंने बताया कि मौजूदा स्तरों पर कीमतों में कुछ रेजिस्टेंस दिखाई दे रहा है। यार्न के दाम भी पहले 30 CCH से बढ़कर करीब 325 रुपये तक पहुंच गए थे, लेकिन अब यह करीब 310 रुपये पर आ गए हैं, यानी हाल के दिनों में लगभग 4-5% की गिरावट दर्ज हुई है। उनका मानना है कि ऊंचे दामों के कारण डिमांड डिस्ट्रक्शन देखने को मिल रहा है और बाजार के लिए इन कीमतों को लंबे समय तक absorb करना आसान नहीं है।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा स्तरों पर स्पिनिंग मिल्स अभी भी मुनाफे में हैं, भले ही उनके मार्जिन पहले के मुकाबले कम हुए हों। इसी वजह से उन्हें नहीं लगता कि रुई के दामों में बहुत बड़ी गिरावट आएगी।
इम्पोर्ट ड्यूटी के मुद्दे पर बात करते हुए विनय कोटक ने कहा कि भारत मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में कॉटन आयात करता है, जिसमें एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल कॉटन और contamination-free कॉटन की विशेष मांग शामिल है। उनका कहना है कि यदि 11% आयात शुल्क जारी रहता है, तो भारत के टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स के लिए Bangladesh, Indonesia, China और Vietnam जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाएगा, जिससे भारत का वैश्विक निर्यात शेयर प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि यह ड्यूटी हटाई जाती है, तो देश में वैल्यू-ऐडेड टेक्सटाइल एक्सपोर्ट को बड़ा समर्थन मिलेगा। इसी को ध्यान में रखते हुए Cotton Association of India ने सरकार से अप्रैल से अक्टूबर तक 11% आयात शुल्क हटाने की मांग की है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मार्च तक किसानों की लगभग 90% कपास बिक चुकी होती है और केवल 10% स्टॉक कुछ किसान अपने पास रखते हैं। ऐसे में ड्यूटी हटाने से किसानों को बड़ा नुकसान नहीं होगा। साथ ही किसानों को सरकार के MSP का संरक्षण भी प्राप्त है, जिसमें इस वर्ष करीब 7% की बढ़ोतरी की गई है।
विनय कोटक के अनुसार, वर्तमान समय में उपभोक्ताओं और टेक्सटाइल इंडस्ट्री को किसी प्रकार का संरक्षण नहीं मिल रहा है। ऐसे में अप्रैल से अक्टूबर के lean period के दौरान 11% ड्यूटी हटाना उद्योग और उपभोक्ताओं दोनों के हित में होगा। उन्होंने बताया कि टेक्सटाइल मंत्रालय और Cotton Corporation of India भी इस आवश्यकता को लेकर सहमत हैं।
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