नई मांग से अमेरिकी कपास उद्योग को बढ़ावा
अमेरिकी कपास उद्योग किसानों, प्रोसेसर्स और मैन्युफैक्चरर्स के लिए मांग बढ़ाने और नए अवसर पैदा करने की कोशिश कर रहा है। पिछले दो दशकों में अमेरिकी कपास की मांग में सीमित वृद्धि हुई है। इस दौरान पॉलिएस्टर और नायलॉन जैसे सिंथेटिक फाइबर ने कपड़ा बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है, क्योंकि वे अक्सर सस्ते होते हैं और उत्पादन में इस्तेमाल करना आसान होता है। साथ ही, ब्राज़ील जैसे देशों में बढ़ते कपास उत्पादन ने अमेरिकी किसानों के सामने प्रतिस्पर्धा बढ़ा दी है।
इस बदलाव का असर कॉटन जिन्स की संख्या पर भी पड़ा है। अमेरिका में जिनिंग सुविधाओं में कमी आई है, जो कमजोर मांग और बदलती बाजार परिस्थितियों को दर्शाती है।
इन चुनौतियों के बीच उद्योग जगत 'बाइंग अमेरिकन कॉटन एक्ट' का समर्थन कर रहा है। प्रस्तावित कानून के तहत प्रमाणित अमेरिकी कपास का इस्तेमाल करने वाले मैन्युफैक्चरर्स को टैक्स क्रेडिट देने की योजना है। अमेरिका में कपास से उत्पाद तैयार करने और उन्हें घरेलू बाजार में बेचने वाली कंपनियों को अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
नेशनल कॉटन काउंसिल के नेताओं का मानना है कि यह कदम अमेरिकी कपास के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के साथ-साथ घरेलू स्तर पर मूल्य संवर्धन और निवेश को भी प्रोत्साहित कर सकता है। इससे कपास उत्पादन और प्रोसेसिंग सुविधाओं में निवेश बढ़ने की संभावना है।
इसके साथ ही 'प्लांट नॉट प्लास्टिक' अभियान प्राकृतिक फाइबर के पर्यावरणीय फायदों को सामने ला रहा है। सिंथेटिक कपड़ों से जुड़े माइक्रोप्लास्टिक को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच कपास की बायोडिग्रेडेबल प्रकृति पर जोर दिया जा रहा है। उद्योग को उम्मीद है कि बढ़ती उपभोक्ता जागरूकता और घरेलू मांग अमेरिकी कपास क्षेत्र को नई मजबूती देगी।
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