ट्रेड डील्स से भारतीय टेक्सटाइल स्टॉक्स में तेज़ी, एक्सपोर्ट बढ़ने की उम्मीद
भारत के टेक्सटाइल सेक्टर में इस साल मजबूत तेजी देखने को मिल रही है। इसकी प्रमुख वजह ब्रिटेन (UK) के साथ इस महीने लागू होने जा रहा मुक्त व्यापार समझौता (FTA), यूरोपीय संघ (EU) के साथ अंतिम चरण में पहुंची बातचीत और अमेरिका (US) के साथ संभावित ट्रेड डील है। इन समझौतों से भारतीय टेक्सटाइल एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा मजबूत होने की उम्मीद है।
टी-शर्ट, बेड लिनन और टॉवल जैसे उत्पाद वॉलमार्ट, टेस्को और अन्य वैश्विक रिटेलर्स को सप्लाई करने वाली भारतीय कंपनियां शेयर बाजार की सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों में शामिल हैं। ब्लूमबर्ग के आठ प्रमुख टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स के इक्वल-वेट इंडेक्स में इस साल 30% से अधिक की बढ़त दर्ज की गई है, जबकि इसी अवधि में NSE निफ्टी 50 इंडेक्स में करीब 8% की गिरावट आई है।
इक्विट्री कैपिटल एडवाइजर्स के को-फाउंडर और मुख्य निवेश अधिकारी पवन भरडिया का मानना है कि भारतीय टेक्सटाइल कंपनियों के लिए वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने का बड़ा अवसर है। उनके अनुसार, बेहतर टैरिफ व्यवस्था और नए निर्यात अवसरों के कारण इस सेक्टर की वैल्यूएशन में सुधार होना चाहिए। उनके पोर्टफोलियो में शामिल SP Apparels के शेयर इस साल करीब 60% चढ़ चुके हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन और कुछ अन्य एशियाई देशों से सोर्सिंग कम करने की वैश्विक रणनीति का भी लाभ भारत को मिल सकता है। इसी उम्मीद के चलते SBI Funds Management और Quant Mutual Fund जैसे बड़े संस्थागत निवेशकों ने हाल के महीनों में कई टेक्सटाइल कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है।
अरविंद लिमिटेड के शेयर इस साल लगभग 74% और इंडो काउंट इंडस्ट्रीज के शेयर करीब 54% चढ़े हैं। मोतीलाल ओसवाल के विश्लेषकों का मानना है कि बड़े भारतीय टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स बेहतर ऑर्डर विजिबिलिटी और वैश्विक ब्रांड्स की बढ़ती मांग का लाभ उठाकर आने वाले वर्षों में अपना मार्केट शेयर बढ़ा सकते हैं।
हालांकि वैश्विक टेक्सटाइल व्यापार में भारत की हिस्सेदारी अभी लगभग 4% है, लेकिन सरकार 2030 तक इस उद्योग का आकार 350 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। विश्लेषकों का मानना है कि यह लक्ष्य उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नए निवेश आकर्षित करने और निर्यात ऑर्डर में लगातार वृद्धि पर निर्भर करेगा।