टेक्सप्रोसिल कस्तूरी कॉटन की ब्रांडिंग बढ़ाने और FTA के लाभ उठाने पर देगा जोर
कॉटन टेक्सटाइल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (टेक्सप्रोसिल) अगले दो वर्षों में 'कस्तूरी कॉटन भारत' के तहत ब्रांडिंग के योग्य कपास की मात्रा बढ़ाने और मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से भारतीय टेक्सटाइल उद्योग को मिलने वाले लाभों का बेहतर उपयोग करने पर ध्यान देगी। परिषद के नवनिर्वाचित चेयरमैन रवि सैम ने इन दोनों क्षेत्रों को उद्योग के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया है।
रवि सैम के अनुसार, ब्रांडिंग के लिए प्रस्तुत की जाने वाली कपास में से 50% से भी कम निर्धारित मानकों और गुणवत्ता परीक्षणों पर खरी उतरती है। इसलिए कस्तूरी कॉटन के रूप में ब्रांडिंग के योग्य कपास की मात्रा बढ़ाने के लिए गुणवत्ता सुधार पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय रिटेल ब्रांडों को भी कस्तूरी कॉटन की गुणवत्ता पहचाननी चाहिए और इसके उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए। इस ब्रांड की प्रमुख विशेषताओं में ट्रेसेबिलिटी शामिल है, जिसके माध्यम से कपास के स्रोत और उसकी आपूर्ति श्रृंखला का पता लगाया जा सकता है। इससे उत्पाद की पहचान और गुणवत्ता के प्रति भरोसा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
किसानों को भी मिले कस्तूरी कॉटन का प्रीमियम
रवि सैम ने कहा कि कस्तूरी कॉटन की ब्रांडिंग की प्रक्रिया जिनिंग इकाइयों से शुरू होती है। हालांकि, इस पहल का लाभ किसानों तक पहुंचाना भी जरूरी है। कपास में कचरे की मात्रा कम करने और फाइबर की गुणवत्ता बेहतर बनाने में किसानों की अहम भूमिका होती है।
उन्होंने जोर दिया कि किसानों को भी कस्तूरी कॉटन से मिलने वाले प्रीमियम का उचित हिस्सा मिलना चाहिए। जिनर्स और टेक्सटाइल वैल्यू चेन के अन्य भागीदारों को मिलने वाले लाभ के साथ किसानों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। इससे किसानों को कपास की गुणवत्ता सुधारने और बेहतर उत्पादन पद्धतियां अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है।
उन्होंने सरकार से बाजार में नकली कपास बीजों की उपलब्धता पर नियंत्रण करने की अपील की। साथ ही, अनुमोदित बीज किस्मों की संख्या को तर्कसंगत बनाने पर जोर दिया, ताकि किसानों को सही बीज चुनने में आसानी हो।
FTA से निर्यात के अवसर बढ़ाने पर जोर
मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के संबंध में रवि सैम ने कहा कि भारतीय टेक्सटाइल निर्यातकों को लंबे समय तक ब्रिटेन और यूरोपीय बाजारों में आयात शुल्क के कारण प्रतिस्पर्धात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। भारत के व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसरों का उद्योग को बेहतर उपयोग करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के दक्षिणी क्षेत्र ने निर्यातकों को FTA की शर्तों, प्रक्रियाओं और संभावित लाभों की जानकारी देने के लिए विशेष सत्र शुरू किए हैं। इन सत्रों से निर्यातकों को संबंधित समझौतों के प्रावधानों को समझने और उनका लाभ उठाने में मदद मिल सकती है।
रवि सैम के अनुसार, कस्तूरी कॉटन की ब्रांडिंग को मजबूत करना, किसानों को उचित आर्थिक लाभ दिलाना और FTA के माध्यम से निर्यात के अवसर बढ़ाना टेक्सप्रोसिल के लिए अगले दो वर्षों की प्रमुख प्राथमिकताएं होंगी।
और पढ़ें :- आंध्र प्रदेश के 388 मंडल सूखा प्रभावित