महाराष्ट्र में सूखे और भीषण गर्मी से कपास की फसल को भारी नुकसान, उत्पादन में 50 प्रतिशत तक गिरावट की आशंका
यवतमाल, महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्रों में बारिश की कमी और भीषण गर्मी के कारण कपास की फसल को भारी नुकसान पहुँचा है। विदर्भ और मराठवाड़ा सहित कई इलाकों में पौधों का विकास प्रभावित हुआ है। इससे किसानों को उत्पादन में गिरावट और आर्थिक नुकसान की चिंता सता रही है।
इस खरीफ सीजन में राज्य में लगभग 38 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई की गई है। कई इलाकों में 30 से 45 दिनों तक पर्याप्त बारिश नहीं होने और अधिक तापमान के कारण मिट्टी में नमी की कमी हो गई। इसके चलते कपास के फूल और छोटे डोडे समय से पहले गिरने लगे। किसानों के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में एक पौधे पर 40 से 50 डोडे बन सकते हैं, लेकिन प्रभावित खेतों में इनकी संख्या घटकर 4 से 12 रह गई है।
कपास की पैदावार घटने से किसानों पर आर्थिक संकट
वाशिम जिले के मंगरुलपीर तालुका के किसान चंद्रशेखर उमाटे ने बताया कि सामान्य वर्षों में प्रति एकड़ लगभग सात क्विंटल कपास का उत्पादन होता है, लेकिन इस बार चार क्विंटल उत्पादन मिलना भी मुश्किल लग रहा है। उनके अनुसार, कपास की खेती पर प्रति एकड़ लगभग 35,000 रुपये खर्च होते हैं। ऐसे में लागत निकालना और कर्ज चुकाना किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
यवतमाल के कृषि अधीक्षक मनोज धागे के अनुसार, अनियमित बारिश और लंबे सूखे के कारण प्रमुख खरीफ फसलें प्रभावित हुई हैं। जिले में कपास उत्पादन लगभग 50 प्रतिशत तक घटने की आशंका है। यवतमाल में औसत मौसमी बारिश का लगभग 78 प्रतिशत ही दर्ज किया गया है। रालेगांव और बाबुलगांव में स्थिति अधिक चिंताजनक बताई जा रही है।
किसान संगठनों ने केंद्र सरकार से 31 अक्टूबर के बाद शुल्क-मुक्त कपास आयात की अवधि नहीं बढ़ाने की मांग की है। उनका मानना है कि सस्ते आयात से घरेलू कपास की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि सरकार प्रभावित किसानों की सहायता के लिए प्रयास कर रही है। अधिकारियों द्वारा फसल नुकसान का आकलन कर आवश्यक राहत उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
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