देर से हुई बारिश से तेलंगाना में खरीफ बुआई बढ़ी, लेकिन कम जल भंडारण ने बढ़ाई चिंता
हैदराबाद: तेलंगाना में मानसून की सक्रियता बढ़ने के बाद खरीफ (वानकालम) सीजन की बुआई में उल्लेखनीय तेजी आई है। 5 अगस्त तक राज्य में 96.74 लाख एकड़ क्षेत्र में बुआई हो चुकी है, जो सामान्य खरीफ रकबे 132.38 लाख एकड़ का लगभग 73 प्रतिशत है। हालांकि, प्रमुख जलाशयों में पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम जल भंडारण सिंचाई की उपलब्धता और फसलों की उत्पादकता को लेकर चिंता का कारण बना हुआ है।
22 जुलाई तक राज्य में केवल 68.43 लाख एकड़ (51.69 प्रतिशत) क्षेत्र में बुआई हुई थी। जुलाई के दूसरे पखवाड़े में मानसून के सक्रिय होने तथा महाराष्ट्र, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ में हुई भारी बारिश से कृष्णा और गोदावरी नदी बेसिन में जल प्रवाह बढ़ा, जिससे किसानों को बुआई तेज करने का अवसर मिला।
सिंचाई को लेकर अनिश्चितता के कारण जिन किसानों ने बुआई टाल दी थी, उन्होंने हालिया बारिश के बाद तेजी से खेतों में काम शुरू किया। वर्षा आधारित फसलों, जिनमें कपास, मक्का, ज्वार, बाजरा, रागी, दालें, मूंगफली और सोयाबीन शामिल हैं, की बुआई में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, सिंचित क्षेत्रों में धान की नर्सरी तैयार की जा रही है।
इसके बावजूद जल उपलब्धता चिंता का विषय बनी हुई है। 5 अगस्त तक राज्य के प्रमुख जलाशयों में 438.90 टीएमसी फीट पानी दर्ज किया गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 725.36 टीएमसी फीट था। हालांकि, दो सप्ताह पहले के 321.24 टीएमसी फीट की तुलना में जल भंडारण में सुधार हुआ है, लेकिन पिछले वर्ष के मुकाबले बड़ी कमी भविष्य में सिंचाई की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ा रही है।
फसलवार आंकड़े भी मिश्रित तस्वीर पेश करते हैं। धान की बुआई 26.16 लाख एकड़ तक पहुंची है, जबकि इसका सामान्य रकबा 65.96 लाख एकड़ है। पिछले वर्ष इसी अवधि में धान की बुआई 28.74 लाख एकड़ में हुई थी। इसके विपरीत, कपास की बुआई 46.80 लाख एकड़ तक पहुंच गई, जो सामान्य रकबे 47.41 लाख एकड़ के लगभग बराबर है और पिछले वर्ष के 43.56 लाख एकड़ से अधिक है। वहीं, दालों की बुआई भी पिछले वर्ष की तुलना में बढ़कर 5.48 लाख एकड़ हो गई है।
प्रोफेसर के. जयशंकर तेलंगाना राज्य कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, इस वर्ष कई किसानों ने धान की बजाय वैकल्पिक फसलों को प्राथमिकता दी है। हालांकि, यदि आने वाले सप्ताहों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई और जलाशयों का जल स्तर अपेक्षित रूप से नहीं बढ़ा, तो खरीफ फसलों की उत्पादकता और पैदावार प्रभावित हो सकती है।
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